ईर्ष्या और द्वेष में अंतर क्या है? । Difference in jealousy and malice

🧛🏼‍♂️ ईर्ष्या और द्वेष में अंतर
Difference between jealousy and malice

इस लेख में हम ईर्ष्या और द्वेष (jealousy and malice) के मध्य के सूक्ष्म अंतर को जानेंगे
ईर्ष्या और द्वेष

👦🏼 ईर्ष्या
jealousy

👦🏼 ईर्ष्या का अर्थ होता है – किसी की सफलता को देखकर अधीर होना, दूसरे की उन्नति देख कर बेचैन होना या डाह करना। 

👦🏼 यदि किसी में, किसी को सुखी-सम्पन्न देख कर या किसी के पास कोई कीमती या आकर्षक वस्तु देख कर उसे उस सुख-चैन या उक्त वस्तु से वंचित कर उसका स्वयं हकदार बन जाने की इच्छा हो तो वह भी ईर्ष्या कहलाती है।

👱🏼‍♂️ वैसे ईर्ष्या का प्रयोग कभी-कभी अच्छे भाव का प्रदर्शन करने में भी होता है; जैसे- आपकी नृत्य कला पर किसे ईर्ष्या नहीं होगी। 

👦🏼 किसी के वैभव और खुशहाली से जलने वाला या डाह करने वाला ईर्ष्यालु कहलाता है। 

🧛🏼‍♂️ द्वेष
malice

🧛🏼‍♂️ द्वेष का अर्थ किसी को अपना प्रतिद्वंदी समझ कर उससे घृणा या नफ़रत करना, नापसंद करना, पराया समझना आदि है।

इसमें किसी को हानि पहुंचाने का भाव होता है। इसमें शत्रुता या वैर के भाव की प्रधानता होती है।

🧛🏼‍♂️ विरोध, वैमनस्य, शत्रुता आदि के कारण किसी का बनता हुआ काम बिगाड़ देना भी द्वेष है।  द्वेष करने वाला द्वेषी कहलाता है। द्वेषी व्यक्ति के मन में घृणा, चिढ़, वैर, आदि का भाव जागृत हो जाता है। 

🧛🏼‍♂️ द्वेष में ‘वी’ उपसर्ग लगने से विद्वेष बना है, जो इसके और भी उग्र और तीव्र रूप को दर्शाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह दुश्मनी की सीमा तक किया जानेवाला द्वेष है।

🧛🏼‍♂️ ईर्ष्या और द्वेष में कुल मिलाकर अंतर

तो कुल मिलाकर देखें तो ये दोनों शब्द एक दूसरे का पर्याय प्रतीत होता है। ऐसा माना भी जाता है पर ऐसा है नहीं । इनमें सूक्ष्म अंतर बस यही है कि। ईर्ष्या करनेवाला व्यक्ति जिससे ईर्ष्या करता है, 

किसी प्रकार उसे उसके सुख से वंचित कर स्वयं उसका उपयोग करने की लालसा रखता है, जबकि द्वेष करनेवाला व्यक्ति शत्रुतावश उसे नुकसान पहुंचाने के प्रयास भर से संतुष्ट हो जाता है। 

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