एथिक्स और नैतिकता में अंतर को समझिए दिलचस्प उदाहरणों के जरिये

एथिक्स और नैतिकता महज ये एक शब्द नहीं है बल्कि एक मार्गदर्शक बल (Guiding force) है, जो हर पल हमारे साथ होता है और हमे, हमारे लिए जो सही है उस दिशा में अग्रेषित करता है।

नैतिकता के आधार पर हम बड़े-बड़े नेताओं को अपना पद त्यागते देखते हैं, अनएथिकल व्यवहार (unethical behavior) के आधार पर कई लोगों को नौकरियों से निकाला जाना देखते हैं। तो सवाल यही आता है कि आखिर क्या है एथिक्स और नैतिकता।

इस लेख में हम एथिक्स और नैतिकता (Ethics and Morality) में अंतर पर सरल एवं सहज चर्चा करेंगे और कुछ दिलचस्प उदाहरणों के मदद से इसे समझने का प्रयास करेंगे। तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

एथिक्स और नैतिकता

एथिक्स और नैतिकता में अंतर्द्विंद

🔲 Ethics और Morality का जब इस्तेमाल इंग्लिश में होता है तो ये कहना आसान हो जाता है कि दोनों में कुछ तो फर्क होगा, पर वहीं जब इसका इस्तेमाल हिन्दी में होता है तो अंतर जैसे मिट सा जाता है। वो कैसे?

क्योंकि एथिक्स और मोरालिटी दोनों का प्रयोग हिन्दी में नैतिकता के लिए कर दिया जाता है। अब जब दोनों का प्रयोग नैतिकता के लिए होगा तो स्वाभाविक है कि अंतर को पृथक करना काफी मुश्किल होगा।

हालांकि हिन्दी में भी जब एथिक्स के लिए नीतिशास्त्र या आचार-विचार या फिर आचारशास्त्र का प्रयोग किया जाता है, तो थोड़ी सी पृथकता नजर आने लगती है। फिर भी पूरी तरह से इसके बीच अंतर का पता नहीं चल पाता है।

चूंकि ये नैतिकता की बात करता है। इसलिए पहले तो ये समझना जरूरी है कि नैतिकता होता क्या है?

नैतिकता क्या है?

नैतिकता एक वैल्यू है, जो हमें हमेशा, हर क्षण, हर मोड़ पर, हर स्थिति में हमें बताता है कि हमारे लिए क्या सही है और क्या नहीं।

ज़िंदगी में ऐसे क्षण आते रहते हैं जब हमें कोई एक ही निर्णय लेना होता है, पर हमारे पास विकल्प कई होता है, सभी सही होता है। पर न चाहते हुए भी हमें एक का ही चुनाव करना पड़ता है।

अक्सर हम इसे कुछ इस तरह से कह देते हैं कि दिल कुछ और कह रहा है दिमाग कुछ और कह रहा है। दोनों ही सही है। पर करें तो करे क्या?

इस तरह देखें तो हर एक निर्णय में जहां द्वंद्व या कहें की मानसिक संघर्ष होता है वहाँ हम हर बार कुछ न कुछ का त्याग करते हैं, या छोड़ देते हैं। क्योंकि हमें कोई एक ही निर्णय लेना होता है और उसपर आगे बढ़ना होता है, पर आप गलत नहीं होते है क्योंकि नैतिकता है ही ऐसी चीज़। आइये इसे एक उदाहरण से समझते हैं-

एथिक्स और नैतिकता के उदाहरण

मान लीजिये कि आप एक लड़की हैं और आप एक गाँव में रह रहें है जहां समाज बहुत शक्तिशाली है…..,

समाज शक्तिशाली इसलिए है क्योंकि उसके नियम-क़ानूनों, रीति-रिवाजों, परंपराओं आदि से आप बंधे हुए है। हालांकि वो बाध्यकारी नहीं है, आप इस सब को नकार भी सकते हैं झुठला भी सकते हैं, आप अपना अलग रास्ता चुन सकते हैं लेकिन आपके लिए ये करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है क्योंकि ढेरों ऐसे फैक्टर काम करता है जो आपको समाज के दायरे में रहने को बाध्य करता है। जैसे कि – इज्जत और प्रतिष्ठा।

तो मान लीजिये आप इसी तरह के एक समाज की लड़की है। आप कि हाल ही में शादी हुई है। आप हमेशा एक लड़के को पसंद करते थे और चाहते थे कि उसी से शादी हो पर इसी समाज की वजह से आप उस समय ये निर्णय नहीं ले पाये थे। इसी समाज की वजह से आप ने ये स्वीकारा और मान लिया कि सब कुछ ठीक हो जाएगा और अब यही मेरी ज़िंदगी है।

पर एक-डेढ़ साल बाद ही आपको एहसास होने लगा कि आप के लाइफ पार्टनर के रूप में वो लड़का अच्छा नहीं है, आप इस लड़के के साथ रहकर वो कभी नहीं बन सकते हैं जो आप अन्यथा बन सकते थे और जो आप डिजर्व भी करते थे।

अब वो लड़का जो आपको हमेशा से पसंद था वो आपको कहता है कि आप मेरे साथ चलिये। अब आप क्या कीजिएगा? अब आपका मन, आपकी अंतरात्मा कह रही है कि आपको उस लड़के के साथ जाना चाहिए क्योंकि आप जानते है कि वो भी आपको बहुत ज्यादा पसंद करता है। पर दूसरी तरफ समाज है उसके द्वारा स्थापित नियम-कानून, इज्जत-प्रतिष्ठा आदि है।

अब आप अंतर्द्वंद में फंस गए है। एक तरफ आपके अपने मूल्य है और दूसरी तरफ सामाजिक मूल्य। एक तरफ आप जानते है कि आपके लिए यही अच्छा है लेकिन दूसरी तरफ आप ये भी जानते है कि इससे तथाकथित इज्जत-प्रतिष्ठा का ह्रास होगा, एक दाग लग जाएगा क्योंकि ये समाज और उसके द्वारा स्थापित नियम, कायदे-कानून अपनी मर्जी से अलग होने की इजाजत नहीं देता है।

आप यहाँ जो भी निर्णय लें, गलत नहीं होगा लेकिन आपको किसी न किसी एक पक्ष का त्याग करना ही पड़ेगा।

अगर आप समाज को चुनते हैं तो आप को उसका त्याग करना पड़ेगा और अगर आप उस लड़के को चुनते हैं तो समाज का त्याग करना पड़ सकता है भले ही वो कुछ ही समय के लिए क्यों न हो।

अगर इस उदाहरण को आप समझ गए हैं तो आप एथिक्स (Ethics) और Morality (नैतिकता) में अंतर समझ गए हैं।

एथिक्स और नैतिकता में अंतर

एथिक्स बाह्य एजेंसी या संस्था द्वारा निर्धारित होता है। उपरोक्त केस में देखें तो यहाँ वो बाह्य एजेंसी समाज है। जबकि नैतिकता हमारे मन, हमारे अंतरात्मा (Conscience) द्वारा निर्धारित होता है। यानी कि नैतिकता हमारा आंतरिक गुण है।

इसे दूसरे शब्दों में कहें तो किसी संगठित समूह, व्यवसाय आदि के आचार संहिंता (Code of conduct) के मानकों के अनुरूप आचरण को एथिक्स कहा जाता है। जबकि एक व्यक्ति के रूप में हमारे जीवन मूल्य और सिद्धांतरूपी मानकों के अनुरूप आचरण को Morality या नैतिकता कहा जाता है।

🔲 अगर हम किसी कंपनी में उसके कोड ऑफ कंडक्ट के अनुसार ही काम करते हैं, तो हमारा ये काम एथिकल हुआ। वहीं अगर किसी कंपनी के कोड ऑफ कंडक्ट में लिखा है कि ग्राहक के साथ हमेशा अच्छे से पेश आए लेकिन हम बेहूदगी से पेश आते हैं तो हमारा ये काम अनएथिकल (Unethical) हुआ।

यहाँ पर एथिकल के लिए नैतिक शब्द का इस्तेमाल और अनएथिकल के लिए अनैतिक शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन आप देख रहें है कि दोनों किसी बाह्य कोड ऑफ कंडक्ट द्वारा संचालित हो रहा है।

कभी-कभी ऐसा समय आता है जब हम Ethically Correct होते हैं लेकिन Morally Wrong और कभी-कभी ऐसा भी समय भी आता है जब हम Morally Correct होते हैं लेकिन Ethically Wrong। इसका क्या मतलब है? आइये इसे उदाहरण से समझते हैं।

Ethically Correct 🔀 Morally Wrong

मान लीजिये कि आप एक दुकान में काम करते हैं और आपके पास एक परेशान सा आदमी आता है और आपसे जहर की पुड़िया मांगता है। आप उस आदमी को जानते भी है क्योंकि वो आपके बगल वाले फ्लैट में ही रहता है और आपने रात में सुना भी था कि वो अपने बीबी को कह रहा था कि वो कल आत्महत्या कर लेगा।

अब आपका तो काम ही सामान बेचना इसीलिए आप उसे जहर बेच देते हैं – आप Ethically Correct है आपने कोई गलती नहीं की। लेकिन आपको पता चला कि वो आपके दुकान से सामने ही जहर खाकर मर गया।

अब आप चूंकि पहले से ही जानते थे वो ऐसा करने वाला है तो आप उसे ये जहर नहीं भी दे सकते थे। अब आपको इसका पश्चाताप हो रहा है तो यहाँ आप Morally Wrong हुए।

इसी का उल्टा आप सोच लीजिये कि आप उसे वो जहर नहीं देते, क्योंकि आपकी अंतरात्मा भी यही कह रही है। तो आप Morally तो Correct हो जाते। लेकिन Ethically Wrong हो जाते क्योंकि दुकान का कोड ऑफ कंडक्ट था कि अगर कोई सामान है तो आप उसे जरूर बेचेंगे।

आप देख रहे हैं न एक पक्ष को अक्सर हमें छोड़ना ही पड़ता है। Ethically और Morally दोनों Correct होना रियल लाइफ में बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता है। लेकिन नामुमकिन नहीं। क्योंकि ज़िंदगी में कुछ क्षण ऐसे भी आ ही जाते है जहां हम Ethically भी Correct होते हैं और Morally भी। वो कैसे? उदाहरण से समझते हैं।

Ethically Correct Morally Correct

मान लीजिये आप एक वकील हैं। और वकील की तो फितरत ही होती है अपने क्लाइंट को किसी भी तरीके से केस जितवाना भले ही Morally Wrong ही क्यों न होना पड़े।

पर मान लीजिये कि आपको एक दिन एक ऐसा क्लाइंट मिलता है जिसके पास उतने पैसे नहीं है जितनी आपकी फीस है और कोई दूसरा इसका केस लड़ने को तैयार नहीं है। जबकि आप जानते है कि वो निर्दोष है और अगर इसका केस कोई नहीं लड़ेगा तो वो हार जाएगा और बकायदे सजा भी हो सकती है।

अब आपके अंतरात्मा से आवाज आती है कि नहीं इसे तो किसी भी हालत में बचाया ही जाना चाहिए। और आपका कोड ऑफ कंडक्ट भी यही कहता है कि निर्दोष को हरसंभव प्रयास से बचाया जाना चाहिए।

यानी कि आपका एथिक्स भी आपसे वही कह रहा है जो आपकी Morality आपसे यही कह रही है। इस स्थिति में आप Ethically भी Correct हैं और Morally भी।

उम्मीद है आप एथिक्स और नैतिकता (Ethics and Morality) को अच्छे से समझ गए होंगे। नीचे कुछ अन्य लेखों का लिंक दिया जा रहा है उसे भी जरूर विजिट करें।

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