न्यायपालिका की समझ बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर उनके लिए, जो लोकतंत्र में रहते हैं और मौलिक अधिकार के रूप में न्याय का आनंद लेते हैं। न्यायपालिका लोकतंत्र के स्तंभों में से एक है, यानी लोकतंत्र मौजूद है क्योंकि न्याय मौजूद है।

इस लेख में हम न्यायपालिका (Judiciary) या यूं कहें कि भारत की न्यायिक व्यवस्था की बेसिक्स को समझेंगे और एक ग्राउंड तैयार करने की कोशिश करेंगे, जिसके आधार पर आगे हम पूरी न्यायिक व्यवस्था को सरल और सहज भाषा में समझने का प्रयास करेंगे।

आप कार्यपालिका वाले लेख को जरूर पढ़ें ताकि आपको पता चल सकें की किस तरह से कार्यपालिका और न्यायपालिका को पढ़ा जाना चाहिए।

आपको इस पृष्ठ में न्यायपालिका से संबंधित कई लेख मिलेंगे, बस पृष्ठ के नीचे पहुंचें और पढ़ने के लिए लेख चुनें, और न्यायपालिका को पूरी तरह से समझने के लिए संबंधित या सहायक लेख पढ़ना न भूलें।

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न्यायपालिका
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न्यायपालिका (Judiciary)

लोकतंत्र को इसीलिए एक सफल संस्था माना जाता है क्योंकि इसमें समुचित न्याय की व्यवस्था होती है। प्रस्तावना में भी सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय का जिक्र किया गया है। न्यायपालिका सरकार से अलग सरकार का ही एक हिस्सा है, जो कानून के सर्वोच्चता को सुनिश्चित करता है।

दूसरे शब्दों में कहें तो ये न्याय व्यवस्था को तो सुनिश्चित करता ही है साथ ही साथ जरूरत पड़ने पर सरकार को भी दिशा निर्देशित करता है। ये दिशा निर्देशित इसलिए कर पाता है क्योंकि ये एक स्वतंत्र निकाय है।

और ये स्वतंत्र निकाय इसीलिए है क्योंकि विधायिका और कार्यपालिका अनावश्यक रूप से न्यायपालिका की प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकते हैं। सरकार और सरकार के अन्य अंग भी न्यायालय की प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकते हैं। इससे होता ये है कि न्यायपालिका बिना किसी भय और पक्षपात के अपना काम करते हैं।

न्यायपालिका की एकीकृत संरचना (Integrated Structure of Judiciary)

अगर वैसे देखें तो देश में संघीय व्यवस्था है। यानी कि केंद्र और राज्य की शक्तियाँ और अधिकार क्षेत्र अलग-अलग है। न्यायपालिका के मामले में व्यवस्था एकीकृत है। यानी कि उच्चतम न्यायालय सबसे ऊपर है, उसके नीचे उच्च न्यायालय और उसके नीचे अधीनस्थ न्यायालय है।

दूसरे शब्दों में कहें तो न्यायालय की शक्तियाँ उस तरह से बंटी हुई नहीं है जैसा कि केंद्र और राज्य के मध्य बंटी हुई है। बल्कि एक क्रम में निचली अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक शक्तियाँ बढ़ती जाती है। आप इसे इस चार्ट में देख सकते हैं कि किस प्रकार ये एक एकीकृत व्यवस्था (Integrated system) को प्रदर्शित करता है।

न्यायपालिका संरचना चार्ट

भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
⚫ इसके फैसले सभी अदालतों को मानने होते हैं।
⚫ यह उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का तबादला कर सकता है।
⚫ यह किसी अदालत का मुकदमा अपने पास मँगवा सकता है।
⚫ यह किसी एक उच्च न्यायालय में चल रहे मुकदमे को दूसरे उच्च न्यायालय में भिजवा सकता है।
उच्च न्यायालय (High Courts of India)
⚫ निचली अदालतों के फैसले पर की गई अपील की सुनवाई कर सकता है।
⚫ मौलिक अधिकारों को बहाल करने के लिए रिट जारी कर सकता है।
⚫ राज्य के क्षेत्राधिकार में आने वाले मुकदमों को निपटारा कर सकता है।
⚫ अपने अधीनस्थ अदालतों का पर्यवेक्षण और नियंत्रण करता है।
जिला अदालत (District Courts of India)
⚫ जिले में दायर मुकदमों की सुनवाई करती है।
⚫ निचली अदालतों के फैसले पर की गई अपील की सुनवाई करती है।
⚫ गंभीर किस्म के आपराधिक मामलों पर फैसला देती है।
अधीनस्थ अदालत (Subordinate courts of India)
⚫ फ़ौजदारी एवं दीवानी किस्म के मुकदमों पर विचार करती है।
⚫ छोटे-मोटे एवं कम गंभीर किस्म के स्थानीय विवादों को सुलझाती है।

इस चार्ट में बताए गए अधीनस्थ न्यायालय, जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय; सबके बारे में विस्तार से अलग-अलग लेखों में समझेंगे। सबका लिंक नीचे दिया हुआ है,

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