राजनीति से इतना दूर क्यूँ भागते हैं हम?

इस लेख में हम राजनीति पर चर्चा करेंगे कि आखिर हम क्यों राजनीति को समझे बिना इससे दूर भागते रहते हैं? क्या राजनीति इतनी खराब चीज़ है? इस लेख को पूरा पढ़ें और विचार करें।
राजनीति

राजनीति और हमारा नजरिया

राजनीति नाम तो सुना ही होगा! हाँ क्यों नहीं सुनते ही रहते हैं, सुबह-शाम, रात-दिन, सर्दी, गर्मी, बरसात हर मौसम में सुनते ही रहते हैं। और सुनते ही इससे पीछा छुड़ाकर जितना दूर भाग सकते हैं, भागने की कोशिश भी करते हैं।

क्योंकि आमतौर पर राजनीति का नाम सुनते ही दिमाग में एक ही चीज़ आती है ये बिक गयी है गोवरमेंट, अब इस गोवरमेंट में कुछ नहीं रखा। ये इतने……………।

गज़ब-गज़ब के लोग हैं यहाँ पर, उसमें से कुछ राजनीति को एक दावपेंच मानते है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी इच्छाओं और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

वहीं कुछ लोगों के लिए राजनीति झूठे वायदे करने वाले नेताओं का एक अड्डा है, घोटालेबाज़ों का अड्डा है, धर्म और जाति के नाम पर वोट लेकर अपना उल्लू सीधा करने वालों का एक अड्डा है। राजनीति एक कीचड़ है – जहां करेंगे कोई और पर छीटें तुम पर भी पड़ेंगे, ”राजनीति एक कालिख की कोठरी है” किसी भी तरह से बच कर निकलने की कोशिश करो तब भी कहीं न कहीं कालिख लग ही जाएगी। अधिकतर लोगों का राजनीति के प्रति धारणा कुछ इसी तरह का तो होता है न।

जैसे ही हम हर संभव तरीके से अपने स्वार्थ को साधने में लगे लोगों को देखते हैं तो हम उसे कहते है कि ‘ये तो राजनीति कर रहा है।’

और अगर उन लोगों से पुछो कि आप अच्छे इंसान है तो फिर आप राजनीति में क्यों नहीं आते, आप यहाँ आकार सबकुछ दुरुस्त क्यूँ नहीं कर देते, आप एक अच्छी परंपरा शुरू क्यूँ नहीं करते, तो ऐसे लोगों का सिर्फ एक ही जवाब होता है – मुझे न राजनीति में कोई दिलचस्पी ही नहीं है।

बेशक वे ऐसा कहते हुए एक प्रकार की राजनीति ही कर रहे होते हैं, घटिया दर्जे की राजनीति_। इन्ही लोगों के निकम्मेपन की वजह से राजनीति_इतनी विकृत होते चली गयी है। और फिर वे लोग कोसते रहते हैं कि राजनीति_ कितनी बुरी चीज़ है।

अगर यहीं राजनीति है तो फिर क्या ही कहने। पर जाहिर है ऐसा है नहीं। राजनीति_बहुत ही व्यापक है। वैसे तो एक छोटा सा शब्द मालूम पड़ता है, पर जन्म से लेकर मृत्यु तक ये हमें किसी न किसी रूप में प्रभावित करता ही रहता है। तो सवाल यही है कि आखिर राजनीति_है क्या?

🔲 राजनीति_क्या है?

राजनीति एक जनसेवा है और अगर ये जनसेवा है तो हम ज़िंदगी में कभी न कभी, किसी न किसी प्रकार की जनसेवा तो करते ही हैं अगर करते हैं तो फिर हम राजनीति से अपने आप को अलग कैसे मान सकते हैं।

हमारे और हमारे समाज के लिए क्या उचित और वांछनीय है‘ ये राजनीति है। अगर ये राजनीति है तो क्या हम कभी इस पर नहीं सोचते हैं कि हमारे लिए या हमारे समझ के लिए क्या बेहतर है। बेशक सोचते है और कमोबेश इसके लिए प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः काम भी करते हैं। अगर करते हैं तो फिर हम राजनीति से अपने आप को अलग कैसे मान सकते हैं।

राजनीति खुद एक समाधान है और साथ ही साथ समाधान सुझाने वाली एक व्यवस्था भी है। हमारे और हमारे समाज की न जाने कितनी ही समस्याएँ होती है पर देर-सवेर उसका समाधान तलाश ही लिया जाता है। भले ही उसके पीछे का मकसद कुछ भी हो पर ये सच है कि उसके केंद्र में हम ही होते हैं। अगर ऐसा है तो फिर हम राजनीति से अपने आप को अलग कैसे मान सकते हैं।

राजनीति का मतलब है एक विशेष नीति के तहत एक विशेष उद्देश्य को प्राप्त करना। किसी भी परिवार की बात करें वहाँ भी किसी न किसी का शासन होता है, किसी न किसी प्रकार के नीति बनाए जाते हैं किसी न किसी प्रकार के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए। और सभी सदस्य इस विशेष नीति का एक हिस्सा होता है। यही बात तो देश के स्तर पर भी होता है और उस विशेष नीति का हम भी एक हिस्सा होते हैं। अगर ऐसा है तो हम अपने आप को राजनीति से अलग कैसे मान सकते हैं।

आप खुद ही देखिये कि हम हमेशा राजनीति_का एक हिस्सा होते हैं, पर सवाल यही है कि फिर हम इससे अपने आप दूर क्यूँ रखने की कोशिश करते हैं।

इसका एक कारण ये है कि हमारी चेतना में ये घर कर चुका है कि राजनीति अलग से कोई एक चीज़ होती है जो हमें अलग से करनी पड़ती है।

पर सच तो ये है कि हम हमेशा इसी का एक हिस्सा होते हैं। अब आप खुद ही देखिये कि मैं अभी ये लिख रहा हूँ इसका मतलब मैं एक राजनैतिक अधिकार अभिव्यक्ति के अधिकार इस्तेमाल कर रहा हूँ।

ये मानने के अच्छे-भले कारण है कि राजनीति_में काफी विकृति है, राजनीति काफी गंदी चीज़ है। पर ये सब हमारा ही किया-धरा है इसके लिए हम किसी और को दोष नहीं दे सकते हैं।

पर अच्छी बात ये है कि हम इसे ठीक भी कर सकते है। बहुत सारी चीज़ें तो अपने आप ही ठीक हो जाएंगी जब हम इसके प्रति अपना नजरिया बदल लेंगे और कुछ चीजों के लिए हमें थोड़ी सक्रियता दिखाने की जरूरत पड़ेगी।

जो भी हो पर एक बात तो स्पष्ट है कि इससे भागने के बजाय हमें इसे अपनाने की तरफ ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।

🔷🔷◼◼◼🔷🔷

Download

कुछ अन्य बेहतरीन लेखों को यहाँ से पढ़ें।

इंसानियत की ख़ातिर………………!
इंसानियत की ख़ातिर

Attitude and Aptitude differences
अभिवृति और अभिक्षमता में अंतर

Attitude and Aptitude

एथिक्स और नैतिकता में अंतर को समझिए
दिलचस्प उदाहरणों के जरिये॥
एथिक्स और नैतिकता

पकड़ना और थामना में अंतर क्या है
पकड़ना और थामना में अंतर

Follow me on….⬇️

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *