संसदीय कार्यवाही के साधन : प्रश्नकाल एवं शून्यकाल

संसदीय कार्यवाही के साधन के रूप में विभिन्न प्रकार के प्रस्ताव (Motion), संकल्प, प्रश्नकाल (Question Hour) एवं शून्यकाल (Zero hour) आदि आते हैं।

इस लेख में हम मुख्य रूप से प्रश्नकाल एवं शून्यकाल पर चर्चा करेंगे साथ ही इससे संबंधित कुछ अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी गौर करेंगे, तो लेख को अंत तक जरूर पढ़ें;

संसदीय कार्यवाही के साधन

संसदीय कार्यवाही के साधन का अर्थ

संसदीय लोकतंत्र में सरकार अपने कार्यों के लिए संसद के प्रति सामूहिक रूप से जवाबदेह होती हैं। ऐसे में सरकार के कार्यों एवं निर्णयों की समीक्षा सही तरह से हो सके इसके लिए सांसदों को अनेक प्रकार के साधन हासिल होते हैं। इन्ही साधनों की मदद से वे सरकार को अनियंत्रित होने से रोकते हैं। प्रश्नकाल एवं शून्यकाल उसी संसदीय कार्यवाही के साधन का एक हिस्सा हैं। जिनके जरिए सांसद सरकार की जवाबदेही तय करने में अपनी भूमिका निभाते हैं।

एक सांसद अपनी पार्टी की ओर से सदन में मुद्दे उठा सकता है या स्वतंत्र रूप से भी ऐसा कर सकता है। सदन में किन सदस्यों को अपनी बात रखनी है, उनका नाम अध्यक्ष द्वारा चुना जाता है। कुछ प्रक्रियाओं में संसद अपने नामों को स्वतंत्र रूप से सौंप सकते हैं। कुछ दूसरी प्रक्रियाओं में पार्टी नेतृत्व तय करता है कि किन सांसदों को किस मुद्दे पर बोलना है और उन सांसदों का नाम अध्यक्ष को प्रेषित किया जाता है।

समान्यतः संसद 3 सत्रों में काम करता है :- 1. बजट सत्र (फरवरी से मई) 2. मानसून सत्र (जुलाई से सितंबर) 3. शीतकालीन सत्र (नवम्बर से दिसम्बर)

राष्ट्रपति की अधिसूचना से सदनों का सत्रारंभ होता है। यहाँ एक बात याद रखने वाली है कि सदन तभी चलता है, जब लोकसभा में कम से कम 55 सदस्य उपस्थित हो और राज्यसभा में कम से कम 25 सदस्य उपस्थित हो, इसे कोरम कहा जाता है अगर कोरम पूरा नहीं है तो सदन को स्थगित कर दिया जाता है। 

◼️ संसद में एक दिन में दो पालियों में काम होता है। सुबह की पहली बैठक 11 बजे से 1 बजे तक और दूसरी बैठक 2 बजे से 6 बजे तक । हालाँकि अगर पीठासीन अधिकारी अगर चाहे तो वे इस समय को कम या ज्यादा कर सकते है। 

प्रश्नकाल (Question Hour) :- 

लोकसभा की बैठक का पहला घंटा प्रश्नकाल के लिए होता है, यानी कि 11बजे से लेकर 12 बजे तक। इसका प्रयोग संसद सदस्य सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए करते हैं। इस दौरान सांसद किसी मंत्री से उसके मंत्रालय के दायरे में आने वाले क़ानूनों और नीतियों के कार्यान्वयन के बारे में प्रश्न पूछ सकते हैं।

किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं?

प्रश्नकाल के तहत तीन प्रकार के प्रश्न पुछे जाते हैं; तारांकित प्रश्न (Starred question), अतारांकित प्रश्न (Unstarred question) एवं अल्प सूचना का प्रश्न (Short notice question)

तारांकित प्रश्न (Starred question) कुछ ऐसे प्रश्न होते है जिसका जवाब मौखिक रूप से दिया जा सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो किसी भी सांसद द्वारा तारांकित प्रश्न पूछा जा सकता है और संबंधित मंत्री मौखिक रूप में उत्तर देने के लिए प्राधिकृत होता है। ध्यातव्य है कि सांसद द्वारा एक दिन में एक तारांकित प्रश्न ही पूछा जा सकता है। इसके लिए अग्रिम आवेदन 15 दिन पहले करना होता है और एक दिन में मौखिक उत्तर देने हेतु केवल 20 प्रश्न ही चुने जाते हैं। इन 20 प्रश्नों का चुनाव बैलेट द्वार होता है। )

इसके अलावा प्रश्न करने वाला संसद सदस्य अधिक से अधिक दो अनुपूरक प्रश्न (Supplementary question) पूछ सकता है। अध्यक्ष चाहे तो तीन अन्य संसद सदस्यों को अनुपूरक प्रश्न पूछने की अनुमति दे सकता है।

विभिन्न मुद्दों और नीतिगत दृष्टिकोण पर सरकार के विचारों को जानने के लिए तारांकित प्रश्न एकदम उपयुक्त होते हैं। इसके बाद सांसद अनुपूरक प्रश्न पूछ सकते हैं और दूसरे सांसद भी उनसे जुड़े प्रश्न कर सकते हैं।

अनुपूरक प्रश्नों का प्रयोग सरकार से उन मुद्दों पर जवाब मांगने के लिए किया जाता है जिसका जवाब मुख्य प्रश्न में नहीं दी गई थी या नहीं दिया जा सकता था। तारांकित प्रश्नों की सूची पाँच दिन पहले से ही उपलब्ध होती है। इससे संसद सदस्यों को अनुपूरक प्रश्नों की तैयारी करने के लिए समय मिल जाता है। आम तौर पर प्रश्न काल के लिए आबंटित एक घंटे में 5-6 प्रश्नों के उत्तर दिये जाते हैं।

अतारांकित प्रश्न (Unstarred question) ऐसे प्रश्न, जिसका जवाब लिखित रूप से दिया जाता है। इसका उत्तर मंत्रालय द्वारा लिखित में दिया जाता है। इन प्रश्नों को 15 दिन पूर्व पेश किया जाता है। एक दिन में अधिकतम 230 अतारांकित प्रश्नों को चुना जाता है।

एक संसद सदस्य एक दिन में अधिकतम 10 प्रश्न प्रस्तुत कर सकता है जिसमें से पाँच प्रश्न उसके नाम से सूचीबद्ध हो सकते हैं। और एक प्रश्न तारांकित हो सकता है। अतारांकित प्रश्न के बाद अनुपूरक प्रश्न पुछने की अनुमति नहीं होती है।

अल्प सूचना का प्रश्न (Short notice question) ऐसे प्रश्न अति आवश्यक एवं लोक हित के मामलों से संबंधित होते हैं। कम से कम 10 दिन का नोटिस देकर पूछा जाता है। तारांकित प्रश्नों कि तरह अल्प सूचना प्रश्नों के उत्तर भी मौखिक होते हैं जिनके बाद अनुपूरक प्रश्न भी पुछे जा सकते हैं। ऐसे प्रश्नों को अध्यक्ष के विवेकाधिकार पर, संबंधित मंत्री की सहमति से स्वीकार किया जाता है। इस प्रक्रिया का प्रयोग बहुत कम किया जाता है। पिछले 10 वर्षों में ऐसे कोई प्रश्न नहीं स्वीकार किया गया है।

शून्यकाल (Zero hour) :- 

प्रश्नकाल के तुरंत बाद शून्यकाल शुरू होता है। इसकी अवधि भी 1 घंटे की होती है। इस काल में कोई भी सदस्य बिना किसी पूर्व सूचना के कोई भी मामला संसद के पटल पर विमर्श के लिए रख सकता है। इस काल का प्रयोग आमतौर पर ऐसे मुद्दों को उठाने के लिए किया जाता है, जो कि अत्यावश्यक है और जिसके लिए प्रश्नकाल की तरह प्रतीक्षा नहीं की जा सकती। इस काल के दौरान मुद्दे उठाने के लिए संसद सदस्यों को बैठक के दिन ही लोकसभा अध्यक्ष को प्रातः 10 बजे से पहले नोटिस देना होता है। हालांकि अध्यक्ष यह निर्णय लेता है कि किस मुद्दे को उठाने की अनुमति दी जानी चाहिए और किसको नहीं। इसके अलावा शून्य काल के दौरान अल्प सूचना प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं।

संसदीय कार्यवाही के अन्य साधन

संसद सदस्य सदन में विभिन्न मुद्दों को उठा सकते हैं और उस पर वाद-विवाद कर सकते हैं। इनमें से कई को प्रस्ताव के रूप में पूछा जाता है और फिर उन पर मतदान कराया जाता है। कुछ पर बिना मतदान के केवल चर्चा ही कराया जाता है। ऐसे अनेक मौके होते हैं जब संसद सदस्य खुद पहल करके विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को उठा सकते हैं। इन प्रक्रियाओं को नीचे देखा जा सकता है-

गैर-सरकारी सदस्यों के प्रस्ताव

ऐसे सांसद, जो कि सरकार में शामिल नहीं है, अपने सुझाव, विचार, सरकार के किसी कानून या नीति को मंजूर या नामंज़ूर करने या फिर सरकार का किसी खास मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रस्ताव पेश कर सकते हैं। इसे गैर-सरकारी सदस्यों का प्रस्ताव कहा जाता है। इन सांसदों से इस प्रस्ताव के लिए दो दिन पहले नोटिस देने की अपेक्षा की जाती है। शुक्रवार की बैठक के अंतिम ढाई घंटे गैर सरकारी सदस्यों के विधायकों और प्रस्तावों के लिए होते हैं।

ध्यानाकर्षण

यह प्रस्ताव तब लाया जाता है, जब सदन का कोई सदस्य, सदन के पीठासीन अधिकारी की अग्रिम अनुमति से, किसी मंत्री का ध्यान अविलंबनीय लोक महत्व के किसी मामले पर आकृष्ट करना चाहता हो। जैसे कि – कोई दुर्घटना, उपद्रव आदि। इस प्रस्ताव के तहत किसी अविलंबनीय स्वरूप के मामले पर मंत्री से प्राधिकृत वक्तव्य की अपेक्षा की जाती है। मंत्री के वक्तव्य के बाद स्पष्टीकरण संबंधी प्रश्न पूछे जा सकते हैं और मंत्री द्वारा ऐसे प्रत्येक प्रश्न के उत्तर दिये जाते हैं

ये बस ध्यान दिलाने के लिए ही होता है इस पे न तो नियमित रूप से चर्चा होती है और न ही मतदान। एक दिन की बैठक में ऐसे दो मुद्दों को उठाने की अनुमति दी जाती है।

आधे घंटे की चर्चा

जब किसी तारांकित या अतारांकित प्रश्न को अतिरिक्त स्पष्टीकरण की जरूरत होती है, तो कोई संसद सदस्य आधे घंटे की चर्चा शुरु कर सकता है। इसके लिए उससे तीन दिन के अग्रिम नोटिस की अपेक्षा की जाती है जिसमें उसे इस चर्चा का कारण बताना होता है। इस दौरान अधिकतम चार अन्य सांसद प्रश्न पूछ सकते है। कार्य मंत्रणा समिति (Business Advisory Committee) विस्तृत चर्चा के लिए इसमें से कुछ मुद्दों को चिन्हित कर सकती है और वह पार्टी को बताती है ताकि पार्टी उस व्यक्ति को नामित कर सके जो कि उनकी ओर से बोलेंगे।

अल्पकालिक चर्चा

इस प्रावधान के तहत, एक सांसद सदस्य अत्यावश्यक जनहित के मामले पर चर्चा प्रारम्भ कर सकता है। संसद सदस्य को इस संबंध में अध्यक्ष को नोटिस देना होता है जिसमें उस विषय से संबंधित विवरण और उसे उठाने के कारण स्पष्ट किए जाते हैं। चर्चा के अंत में संबंधित मंत्री द्वारा उत्तर दिया जाता है। इसे दो घंटे का चर्चा भी कहते है क्योंकि इस तरह की चर्चा के लिए दो घंटे से अधिक का समय नहीं लगता। अध्यक्ष एक सप्ताह में इस पर बहस के लिए तीन दिन उपलब्ध करा सकता है। [इसी अल्पकालिक चर्चा को अगर एक प्रस्ताव की तरह सदन के समक्ष रखना हो तो नियम 184 का इस्तेमाल किया जाता है।]

स्थगन प्रस्ताव

यह प्रस्ताव जनहित के किसी अत्यावश्यक मुद्दे पर सरकार का ध्यान दिलाने और उसके फैसले की आलोचना करके लिए लाया जाता है। इसके तहत सदन की कार्यवाही को स्थगित करने का प्रस्ताव रखा जाता है। प्रस्ताव रखने वाले दिन प्रातः 10 बजे से पहले स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देना होता है। अगर स्थगन प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो मतदान के बाद सदन स्थगित हो जाता है। इसका मतलब ये होता है कि सरकार की नीतियों से जबर्दस्त असहमति जताई जा रही है, हालांकि इसमें सरकार को त्यागपत्र देने की जरूरत नहीं होती है।

अविश्वास प्रस्ताव

अविश्वास प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के खिलाफ रखा जाता है। इस प्रस्ताव नोटिस बैठक वाले दिन के प्रातः 10 बजे से पहले दिया जाता है। इस प्रस्ताव को पेश करने का मतलब होता है कि संसद सदस्य सरकार के काम से संतुष्ट नहीं है और इनके हिसाब से सरकार को त्यागपत्र दे देना चाहिए। इस प्रस्ताव को लाने के लिए कम से कम 50 सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। जब प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तब इस पर वाद-विवाद होता है। इसके पश्चात इस प्रस्ताव पर मतदान किया जाता है। अगर प्रस्ताव पारित हो जाता है तो सरकार को त्यागपत्र देना होता है।

राष्ट्रपति का अभिभाषण और धन्यवाद प्रस्ताव

प्रत्येक आम चुना के बाद अधिवेशन की शुरुआत में और हर साल एक पहले अधिवेशन के प्रारम्भ में राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों को एक साथ संबोधित किया जाता है। इसे ही राष्ट्रपति का अभिभाषण कहा जाता है। प्रत्येक अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर संसद सदस्यों द्वारा चर्चा की जाती है और प्रधानमंत्री द्वारा जवाब दिया जाता है। इस प्रस्ताव का सदन में पारित होना आवश्यक होता है। अगर ये पारित नहीं होता है तो इसे सरकार की पराजय मानी जाती है। [धन्यवाद प्रस्ताव में सांसद संशोधन भी प्रस्तावित कर सकते हैं। लोकसभा में अभिभाषण में संशोधन का अर्थ यह होता है कि सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा है।]

आश्वासन

प्रश्न या चर्चा पर उत्तर देने के दौरान मंत्री सदन को आश्वासन दे सकता है कि सरकार द्वारा कार्रवाही की जाएगी और सदन को उसकी जानकारी दी जाएगी। ऐसे आश्वासन के प्रति मंत्री जवाबदेह होता है और इसे तीन महीने के अंदर पूरा करना होता है। इसके लिए बकायदे एक आश्वासन समिति बनायी गई है जो सरकार के इस तरह के आश्वासनों की निगरानी करती है।

नियम 377 के तहत विषय

जिन विषयों को प्रश्न, अल्प सूचना प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव इत्यादि से संबंधित नियमों के अंतर्गत नहीं उठाया जा सकता, उन विषयों को नियम 377 के अंतर्गत उठाया जा सकता है। संसद सदस्य अपनी व्यक्तिगत क्षमता में लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति से इस नियम के तहत विषय उठा सकते हैं। इसके लिए बैठक के दिन प्रातः 10 बजे से पहले नोटिस देना होता है।

कुल मिलाकर यही है प्रश्नकाल, शून्यकाल और इसी से संबंधित संसदीय कार्यवाही के अन्य साधन। इसके अलावा कार्यवाही के साधन के रूप में विभिन्न प्रकार के प्रस्ताव (motion) एवं संकल्प (Resolution) भी आते हैं। बेहतर समझ के लिए उसे भी अवश्य पढ़ें।

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संसदीय प्रस्ताव : प्रकार, विशेषताएँ
संसदीय संकल्प
भारतीय संसद में मतदान की प्रक्रिया
बजट – प्रक्रिया, क्रियान्वयन
संसदीय समूह
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संचित निधि, लोक लेखा एवं आकस्मिक निधि ; संक्षिप्त चर्चा

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हमारी संसद – सुभाष कश्यप
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