एंग्लो इंडियन कौन है? इन एंग्लो इंडियन के बारे में संविधान क्या कहता है?

साल 2020 से पहले तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एंग्लो इंडियन के लिए सीटें आरक्षित होती थी जिसे कि लोकसभा में राष्ट्रपति द्वारा और विधानसभा में राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया जाता था। इस लेख में हम एंग्लो इंडियन पर सरल और सहज चर्चा करेंगे एवं इससे संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण तथ्यों को समझेंगे, तो लेख को अंत तक जरूर पढ़ें-

नोट – 104वें संविधान संशोधन 2020 द्वारा एंग्लो इंडियन के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में आरक्षित सीटों को खत्म कर दिया गया है। यानी कि जिस कारण से एंग्लो इंडियन अक्सर चर्चा में रहता था उसे ही समाप्त कर दिया गया है।

एंग्लो इंडियन कौन है? इन एंग्लो इंडियन के बारे में संविधान क्या कहता है?

एंग्लो इंडियन कौन है?

अक्सर एंग्लो इंडियन तब चर्चा में आता था जब राष्ट्रपति के द्वारा उन्हे लोकसभा में मनोनीत किया जाता है या फिर राज्यपाल के द्वारा राज्य विधानसभा में। लेकिन 104वें संविधान संशोधन अधिनियम 2020 द्वारा इसे समाप्त कर दिया गया है। यानी कि अब राष्ट्रपति द्वारा इन्हे लोकसभा में और राज्यपाल द्वारा राज्य विधानसभा में मनोनीत नहीं किया जाएगा।

फिर भी ये जानना काफी दिलचस्प है कि आखिर ये कौन लोग होते हैं जिन्हे एक समय में बिना चुनाव प्रक्रिया में भाग लिए ही चुन लिया जाता था, वो भी एक चुने हुए लोगों के सभा में।

कौन है ये लोग, कहाँ से आते हैं?

1911 की जनगणना में इसे पहली बार परिभाषित किया गया था, इसके अनुसार
1. ये मिश्रित रक्त का होना चाहिए अर्थात भारतीय रक्त और यूरोपीय रक्त का मिश्रण
2. पिता पक्ष हमेशा यूरोपीय होना चाहिए और माता पक्ष भारतीय
3. इन लोगों के जो बच्चे होंगे वे सब एंग्लो इंडियन (Anglo Indian) होंगे।  

15 अगस्त 1947 को भारत से अंग्रेज़ विदा हो गए, पर लगभग 30000 लोग ऐसे थे जो नहीं गए, जो या तो यूरोपीय समुदाय से थे या यूरोपीय और भारतीय मूल के माता-पिताओं के संतान थे। ये कहना मुश्किल है कि भारत में अभी इस समुदाय के कितने लोग है, क्योंकि 1941 की जनगणना के बाद से भारत में जातीय और सामुदायिक आधार पर जनगणना को बंद कर दिया गया है। पर एक अनुमान है की इनकी संख्या लगभग सवा लाख है, जिनमे से ज़्यादातर कोलकाता और चेन्नई में रहते है।

संविधान के अनुसार एंग्लो इंडियन

भारत के आजाद होने के बाद इनके पुराने मान्यताओं में कुछ संसोधन करके इसे संवैधानिक रूप दे दिया गया। भारतीय संविधान में अनुच्छेद  366(2) के तहत एंग्लो इंडियन की परिभाषा इस प्रकार की गयी है- 

1. पिता, दादा या परदादा यूरोपीय मूल के होने चाहिए।

2. माता और पिता अस्थायी रूप से भारत में नहीं रहना चाहिए। मतलब ये कि अगर पिता यूरोपीय मूल के है और माता भारतीय मूल के है लेकिन वो भारत में स्थायी रूप से नहीं रह रहे है तो उसे एंग्लो_इंडियन नहीं माना जाएगा। 

3. वंश परंपरा पुरुष आधारित होना चाहिए। अर्थात पुरुष पक्ष हमेशा यूरोपीय होना चाहिए।

एंग्लो_इंडियन का लोक सभा और विधानसभा में आरक्षण का प्रावधान

संविधान के अनुच्छेद 331 के तहत एंग्लो इंडियन समुदाय को लोकसभा में और अनुच्छेद 333 के तहत राज्य विधानसभा में विशेष प्रतिनिधित्व दिया जाता था। हालांकि अब इसे समाप्त कर दिया गया है।

मसूरी में रहने वाले लेखक रस्किन बॉन्ड, फिल्म अभिनेत्री लारा दत्ता, क्रिकेटर स्टुअर्ट बिन्नी, तृणमूल कॉंग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन और क्रिकेटर नासिर हुसैन एंग्लो इंडियन है। 

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https://wonderhindi.com/law-making-process-in-parliament-of-india-in-hindi/

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