यह लेख अनुच्छेद 20 का यथारूप संकलन है। आप इसका हिन्दी और इंग्लिश दोनों अनुवाद पढ़ सकते हैं। आप इसे अच्छी तरह से समझ सके इसीलिए इसकी व्याख्या भी नीचे दी गई है आप उसे जरूर पढ़ें। इसकी व्याख्या इंग्लिश में भी उपलब्ध है, इसके लिए आप नीचे दिए गए लिंक का प्रयोग करें;

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अनुच्छेद 20
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📜 अनुच्छेद 20 (Article 20)

20. अपराधों के ल्रिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण – (।) कोई व्यक्ति किसी अपराध के लिए तब तक सिद्धदोष नहीं ठहराया जाएगा, जब तक कि उसने ऐसा कोई कार्य करने के समय, जो अपराध के रूप में आरोपित है, किसी प्रवृत्त विधि का अतिक्रमण नहीं किया है या उससे अधिक शास्ति का भागी नहीं होगा जो उस अपराध के किए जाने के समय प्रवृत्त विधि के अधीन अधिरोपित की जा सकती थी ।

(2) किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से अधिक अभियोजित और दंडित नहीं किया जाएगा।

(3) किसी अपराध के लिए अभियुक्त किसी व्यक्ति को स्वयं अपने विरुद्ध साक्षी होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
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20. Protection in respect of conviction for offences.— (1) No person shall be convicted of any offence except for violation of a law in force at the time of the commission of the Act charged as an offence, nor be subjected to a penalty greater than that which might have been inflicted under the law in force at the time of the commission of the offence.

(2) No person shall be prosecuted and punished for the same offence more than once.

(3) No person accused of any offence shall be compelled to be a witness against himself.
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🔍 व्याख्या (Explanation)

स्वतंत्रता यानी कि किसी व्यक्ति पर बाहरी प्रतिबंधों का अभाव। दूसरे शब्दों में कहें तो अपने जीवन और नियति का नियंत्रण स्वयं करना तथा अपनी इच्छाओं और गतिविधियों को आजादी से व्यक्त करने का अवसर बने रहना, स्वतंत्रता है।

भारत की बात करें तो स्वतंत्रता यहाँ एक मौलिक अधिकार है। दरअसल भारतीय संविधान का भाग 3 मौलिक अधिकारों के बारे में है। इसी के अनुच्छेद 19 से लेकर अनुच्छेद 22 तक “स्वतंत्रता का अधिकार” की चर्चा की गई है। (जैसा कि आप चार्ट में देख सकते हैं) हम यहाँ अनुच्छेद 20 को समझने वाले हैं;

स्वतंत्रता का अधिकार
⚫ अनुच्छेद 19 – छह अधिकारों की सुरक्षा; (1) अभिव्यक्ति (2) सम्मेलन (3) संघ (4) संचरण (5) निवास (6) व्यापार
अनुच्छेद 20 – अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण
⚫ अनुच्छेद 21 – प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता
⚫ अनुच्छेद 21क – प्रारम्भिक शिक्षा का अधिकार
⚫ अनुच्छेद 22 – गिरफ़्तारी एवं निरोध से संरक्षण

| अनुच्छेद 20 – अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण

अगर आप जिंदा हैं तो मुमकिन है कि आप से कोई अपराध हो जाए या फिर आप जानबूझकर ही कर दें पर फिर भी आपको अनुच्छेद 20 के तहत, अपराध से ये निम्नलिखित तीन संरक्षण मिलेगा।

(1) यदि आपने कोई ऐसा काम किया है जो कानून के नजर में अपराध नहीं है तो आपने भले ही कितना ही बुरा काम क्यों न किया हो लेकिन वह अपराध (crime) नहीं कहलाएगा।

और अगर आप अपराधी सिद्ध हो चुके है तो आपको उससे ज्यादा सजा नहीं मिल सकता जो उस अपराध के लिए पहले से निर्धारित सजा है। 

जैसे कि – अगर चोरी के लिए 1 वर्ष की जेल की सजा है तो आपको इससे ज्यादा सजा नहीं मिल सकता।

इसका मतलब ये है की कार्योत्तर दांडिक विधि नहीं बनाई जा सकती, अर्थात यह नहीं हो सकता की किसी कार्य को पहली बार अपराध बनाया जाए और उस विधि को भूतलक्षी (retrospective) प्रभाव दिया जाए।

(2) एक अपराध के लिए एक से अधिक बार सजा नहीं दी जा सकती। जैसे कि आपने चोरी की और एक साल की सजा भुगत कर आ गए है तो उसी चोरी के लिए आपको फिर से सजा नहीं दी जा सकती है।

(3) आपको आपके ही विरुद्ध गवाह के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। यानी कि आपने चोरी की है पर गवाह के रूप में आपको खुद के ही विरुद्ध गवाही के लिए पेश नहीं किया जा सकता।

तो कुल मिलाकर यही है अनुच्छेद 20, उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। दूसरे अनुच्छेदों को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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Constitution
Basics of Parliament
Fundamental Rights
Judiciary in India
Executive in India
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अस्वीकरण - यहाँ प्रस्तुत अनुच्छेद और उसकी व्याख्या, मूल संविधान (नवीनतम संस्करण), संविधान पर डी डी बसु की व्याख्या (मुख्य रूप से) और संविधान के विभिन्न ज्ञाताओं (जिनके लेख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर ऑडियो-विजुअल्स के रूप में उपलब्ध है) पर आधारित है। हमने बस इसे रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया है।