यह लेख Article 208 (अनुच्छेद 208) का यथारूप संकलन है। आप इस मूल अनुच्छेद का हिन्दी और इंग्लिश दोनों संस्करण पढ़ सकते हैं। आप इसे अच्छी तरह से समझ सके इसीलिए इसकी व्याख्या भी नीचे दी गई है आप उसे जरूर पढ़ें, और MCQs भी सॉल्व करें।

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📜 अनुच्छेद 208 (Article 208) – Original

भाग 6 “राज्य” [अध्याय 3 — राज्य का विधान मंडल] [साधारण प्रक्रिया]
208. प्रक्रिया के नियम— (1) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्य के विधान-मंडल का कोई सदन अपनी प्रक्रिया* और अपने कार्य संचालन के विनियमन के लिए नियम बना सकेगा।

(2) जब तक खंड (1) के अधीन नियम नहीं बनाए जाते हैं तब तक इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले तत्स्थानी प्रांत के विधान-मंडल के संबंध में जो प्रक्रिया के नियम और स्थायी आदेश प्रवृत्त थे वे ऐसे उपांतरणों और अनुकूलनों के अधीन रहते हुए उस राज्य के विधान-मंडल के संबंध में प्रभावी होंगे जिन्हें, यथास्थिति, विधान सभा की अध्यक्ष या विधान परिषद्‌ का सभापति उनमें करे।

(3) राज्यपाल, विधान परिषद्‌ वाले राज्य में विधान सभा के अध्यक्ष और विधान परिषद्‌ के सभापति से परामर्श करने के पश्चात्‌, दोनों सदनों में परस्पर संचार से संबंधित प्रक्रिया के नियम बना सकेगा।
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* संविधान (बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 का धारा 22 द्वारा “जिसके अन्तर्गत सदन की बैठक का गठन करने के लिए गणपूर्ति सम्मिलित है)” शब्द और कोष्ठक (तारीख अधिसूचित नहीं का गई) से अंतस्थापित। इस संशोधन का संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 का धारा 45 द्वारा (20-6-1979 से) लोप कर दिया गया।
अनुच्छेद 208 हिन्दी संस्करण

Part VI “State” [CHAPTER III — The State Legislature] [Procedure Generally]
208. Rules of procedure—(1) A House of the Legislature of a State may make rules for regulating, subject to the provisions of this Constitution, its procedure* and the conduct of its business.

(2) Until rules are made under clause (1), the rules of procedure and standing orders in force immediately before the commencement of this Constitution with respect to the Legislature for the corresponding Province shall have effect in relation to the Legislature of the State subject to such modifications and adaptations as may be made therein by the Speaker of the Legislative Assembly, or the Chairman of the Legislative Council, as the case may be.

(3) In a State having a Legislative Council the Governor, after consultation with the Speaker of the Legislative Assembly and the Chairman of the Legislative Council, may make rules as to the procedure with respect to communications between the two Houses.
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* The brackets and words “(including the quorum to constitute a meeting of the House)” ins. by the Constitution (Forty-second Amendment) Act, 1976, s. 35 (date not notified). This amendment was omitted by the Constitution (Forty-fourth Amendment) Act, 1978, s. 45 (w.e.f. 20-6-1979).
Article 208 English Version

🔍 Article 208 Explanation in Hindi

भारतीय संविधान का भाग 6, अनुच्छेद 152 से लेकर अनुच्छेद 237 तक कुल 6 अध्यायों (Chapters) में विस्तारित है (जिसे कि आप नीचे टेबल में देख सकते हैं)।

ChaptersTitleArticles
Iसाधारण (General)Article 152
IIकार्यपालिका (The Executive)Article 153 – 167
IIIराज्य का विधान मंडल (The State Legislature)Article 168 – 212
IVराज्यपाल की विधायी शक्ति (Legislative Power of the Governor)Article 213
Vराज्यों के उच्च न्यायालय (The High Courts in the States)Article 214 – 232
VIअधीनस्थ न्यायालय (Subordinate Courts)Article 233 – 237
[Part 6 of the Constitution]

जैसा कि आप ऊपर देख सकते हैं, इस भाग के अध्याय 3 का नाम है “राज्य का विधान मंडल (The State Legislature)” और इसका विस्तार अनुच्छेद 158 से लेकर अनुच्छेद 212 तक है।

इस अध्याय को आठ उप-अध्यायों (sub-chapters) में बांटा गया है, जिसे कि आप नीचे चार्ट में देख सकते हैं;

Chapter 3 [Sub-Chapters]Articles
साधारण (General)Article 168 – 177
राज्य के विधान मण्डल के अधिकारी (Officers of the State Legislature)Article 178 – 187
कार्य संचालन (Conduct of Business)Article 188 – 189
सदस्यों की निरर्हताएं (Disqualifications of Members)Article 190 – 193
राज्यों के विधान-मंडलों और उनके सदस्यों की शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां (Powers, privileges and immunities of State Legislatures and their members)Article 194 – 195
विधायी प्रक्रिया (Legislative Procedure)Article 196 – 201
वित्तीय विषयों के संबंध में प्रक्रिया (Procedure in respect of financial matters)Article 202 – 207
साधारण प्रक्रिया (Procedure Generally) Article 208 – 212
[Part 6 of the Constitution]

इस लेख में हम साधारण प्रक्रिया (Procedure Generally) के तहत आने वाले अनुच्छेद 208 को समझने वाले हैं।

अनुच्छेद 118 – भारतीय संविधान
Closely Related to Article 208

| अनुच्छेद 208 – प्रक्रिया के नियम (Rules of procedure)

भारत एक संघीय व्यवस्था वाला देश है यानी कि यहाँ केंद्र सरकार की तरह राज्य सरकार भी होता है और जिस तरह से केंद्र में विधायिका (Legislature) होता है उसी तरह से राज्य का भी अपना एक विधायिका होता है।

केन्द्रीय विधायिका (Central Legislature) को भारत की संसद (Parliament of India) कहा जाता है। यह एक द्विसदनीय विधायिका है, जिसका अर्थ है कि इसमें दो सदन हैं: लोकसभा (लोगों का सदन) और राज्यसभा (राज्यों की परिषद)। इसी तरह से राज्यों के लिए भी व्यवस्था की गई है।

अनुच्छेद 168(1) के तहत प्रत्येक राज्य के लिए एक विधानमंडल (Legislature) की व्यवस्था की गई है और यह विधानमंडल एकसदनीय (unicameral) या द्विसदनीय (bicameral) हो सकती है।

जिस तरह से अनुच्छेद 118 के तहत केंद्र के लिए प्रक्रिया के नियम (Rules of procedure) की व्यवस्था की गई है उसी तरह से अनुच्छेद 208 के तहत राज्यों के लिए प्रक्रिया के नियम (Rules of procedure) की व्यवस्था की गई है।

अनुच्छेद 208 के तहत कुल 3 खंड है;

अनुच्छेद 208 के खंड (1) के तहत यह व्यवस्था किया गया है कि इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्य के विधान-मंडल का कोई सदन अपनी प्रक्रिया और अपने कार्य संचालन के विनियमन के लिए नियम बना सकेगा।

यानि कि विधानमण्डल का सदन किस किस तरह से चलेगा उसका नियम संविधान में नहीं दिया गया है बल्कि यह विधानमंडल पर छोड़ दिया गया है ताकि सभी विधानमंडल अपनी जरूरत के हिसाब से प्रक्रिया और कार्य संचालन का नियम बना सके।

अनुच्छेद 208 के खंड (2) के तहत यह व्यवस्था किया गया कि जब तक खंड (1) के अधीन नियम नहीं बनाए जाते हैं तब तक इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले तत्स्थानी प्रांत के विधान-मंडल के संबंध में जो प्रक्रिया के नियम और स्थायी आदेश प्रवृत्त थे वे ऐसे उपांतरणों और अनुकूलनों के अधीन रहते हुए उस राज्य के विधान-मंडल के संबंध में प्रभावी होंगे जिन्हें, यथास्थिति, विधान सभा की अध्यक्ष या विधान परिषद्‌ का सभापति उनमें करे।

कहने का अर्थ है कि राज्य विधानमंडल प्रक्रिया नियम बना सकता है और सभी राज्यों ने बनाए भी भी हैं, लेकिन जब तक खंड (1) के अधीन नियम नहीं बनाए जाते हैं तब तक इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले जो उसके स्थान पर प्रांत (Provinces) हुआ करते थे उसके जो प्रक्रिया नियम थे उसी को अनुकूलित करके या जरूरी बदलावों के साथ अपनाया जा सकता है। और इनमें जरूरी बदलाव और अनुकूलन लाने का काम विधान सभा की अध्यक्ष या विधान परिषद्‌ का सभापति करेंगे।

समितियों के बारे में विस्तार से समझें; संसदीय समितियां : तदर्थ व स्थायी समितियां

अनुच्छेद 208 के खंड (3) के तहत यह व्यवस्था किया गया है कि राज्यपाल, विधान परिषद्‌ वाले राज्य में विधान सभा के अध्यक्ष और विधान परिषद्‌ के सभापति से परामर्श करने के पश्चात्‌, दोनों सदनों में परस्पर संचार से संबंधित प्रक्रिया के नियम बना सकेगा।

अगर किसी राज्य में विधान परिषद नहीं है तो वहां यह लागू नहीं होता है लेकिन जहां पर विधान परिषद भी वहां विधान सभा और विधान परिषद एक दूसरे के साथ औपचारिक संवाद कैसे करेगा, इसी की व्यवस्था इस खंड में की गई है।

इस खंड में कहा गया है कि राज्यपाल, विधान सभा के अध्यक्ष और विधान परिषद्‌ के सभापति से परामर्श करने के पश्चात्‌, दोनों सदनों में परस्पर संचार से संबंधित प्रक्रिया के नियम बना सकेगा।

◾ दोनों सदनों की संयुक्त बैठक

तो यही है अनुच्छेद 208 , उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। दूसरे अनुच्छेदों को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

राज्य विधानमंडल (State Legislature): गठन, कार्य, आदि
भारतीय संसद (Indian Parliament): Overview
Must Read

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Chapter Wise Polity Quiz

विधानमंडल में विधायी प्रक्रिया अभ्यास प्रश्न

  1. Number of Questions – 5 
  2. Passing Marks – 80 %
  3. Time – 4 Minutes
  4. एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।

1 / 5

जब कोई विधेयक विधानसभा से पारित होने के बाद विधान परिषद में भेजा जाता है तो परिषद इनमें से क्या नहीं कर सकता है?

  1. कुछ संशोधनों के बाद पारित कर परिषद विचारार्थ इसे विधानसभा को भेज सकता है।
  2. परिषद इस पर बिना किसी कारवाई के लंबित रख सकता है।
  3. परिषद तीन बार तक विधेयक को अस्वीकृत कर सकता है।
  4. परिषद विधेयक को ज्यादा से ज्यादा 6 महीने तक रोक के रख सकता है।

2 / 5

विधनमंडलीय प्रक्रिया के संबंध में दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

  1. दो सत्रों के बीच 8 माह से अधिक का समय नहीं होना चाहिए।
  2. विधानसभा अध्यक्ष बैठक को किसी समय विशेष के लिए स्थगित कर सकता है।
  3. संसद की तरह राज्य विधानमंडल को भी वर्ष में कम से कम दो बार मिलना होता है।
  4. सत्र के बीच में सत्रावसान की घोषणा नहीं की जा सकती है।

3 / 5

दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

  1. धन विधेयक विधानपरिषद में पेश नहीं किया जा सकता।
  2. राज्यपाल धन विधेयक को सिर्फ एक बार पुनर्विचार के लिए सदन को वापस भेज सकता है।
  3. ऐसा विधेयक जो विधान परिषद में लंबित हो लेकिन विधानसभा द्वारा पारित हो, को खारिज नहीं किया जा सकता।
  4. ऐसा विधेयक जो विधानसभा द्वारा पारित हो लेकिन राष्ट्रपति द्वारा सदन के पास पुनर्विचार हेतु लौटाया गया हो को समाप्त नहीं किया जा सकता।

4 / 5

दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

  1. विधानमंडल के मामले में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की व्यवस्था नहीं है।
  2. यदि कोई विधेयक विधानपरिषद में निर्मित हो और उसे विधानसभा उसे अस्वीकृत कर दे तो विधेयक समाप्त हो जाता है।
  3. ज्यादा से ज्यादा परिषद एक विधेयक को चार माह के लिए रोक सकती है।
  4. विधानपरिषद को केंद्र में राज्यसभा को तुलना में कम अधिकार या महत्व दिया गया है।

5 / 5

विधानसभा में साधारण कानून बनाने की प्रक्रिया के संबंध में दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

  1. विधेयक प्रारम्भिक सदन में संसद के विपरीत सिर्फ दो स्तरों से गुजरता है;. प्रथम पाठन एवं द्वितीय पाठन।
  2. दोनों स्तरों से गुजरने के बाद उस विधेयक को दूसरे सदन में भेज दिया जाता है।
  3. दूसरे सदन में उस विधेयक को तीन स्तरों से गुजरना होता है।
  4. एक सदनीय व्यवस्था वाले विधानमंडल में विधेयक पारित कर सीधे राज्यपाल के पास भेज दिया जाता है।

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मौलिक अधिकार बेसिक्स
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भारत की कार्यपालिका
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अस्वीकरण – यहाँ प्रस्तुत अनुच्छेद और उसकी व्याख्या, मूल संविधान (उपलब्ध संस्करण), संविधान पर डी डी बसु की व्याख्या (मुख्य रूप से), प्रमुख पुस्तकें (एम. लक्ष्मीकान्त, सुभाष कश्यप, विद्युत चक्रवर्ती, प्रमोद अग्रवाल इत्यादि) एनसाइक्लोपीडिया, संबंधित मूल अधिनियम और संविधान के विभिन्न ज्ञाताओं (जिनके लेख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर ऑडियो-विजुअल्स के रूप में उपलब्ध है) पर आधारित है। हमने बस इसे रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया है।