यह लेख अनुच्छेद 21क का यथारूप संकलन है। आप इसका हिन्दी और इंग्लिश दोनों अनुवाद पढ़ सकते हैं। आप इसे अच्छी तरह से समझ सके इसीलिए इसकी व्याख्या भी नीचे दी गई है आप उसे जरूर पढ़ें। इसकी व्याख्या इंग्लिश में भी उपलब्ध है, इसके लिए आप नीचे दिए गए लिंक का प्रयोग करें;

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अनुच्छेद 21क
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📜 अनुच्छेद 21क (Article 21A)

1[21क. शिक्षा का अधिकार – राज्य, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले सभी बालकों के लिए नःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का ऐसी रीति मैं, जो राज्य विधि द्वारा, अवधारित करे, उपबंध करेगा।]
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1. संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनयम, 2002 की धारा 2 द्वारा (1-4-2002 से) अंतःस्थापित ।
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1[21A. Right to education.—The State shall provide free and compulsory education to all children of the age of six to fourteen years in such manner as the State may, by law, determine.]
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1. Inserted by the Constitution (Eighty-sixth Amendment) Act, 2002, s. 2 (w.e.f. 1-4-2002).
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🔍 व्याख्या (Explanation)

स्वतंत्रता यानी कि किसी व्यक्ति पर बाहरी प्रतिबंधों का अभाव। दूसरे शब्दों में कहें तो अपने जीवन और नियति का नियंत्रण स्वयं करना तथा अपनी इच्छाओं और गतिविधियों को आजादी से व्यक्त करने का अवसर बने रहना, स्वतंत्रता है।

भारत की बात करें तो स्वतंत्रता यहाँ एक मौलिक अधिकार है। दरअसल भारतीय संविधान का भाग 3 मौलिक अधिकारों के बारे में है। इसी के अनुच्छेद 19 से लेकर अनुच्छेद 22 तक “स्वतंत्रता का अधिकार” की चर्चा की गई है। (जैसा कि आप चार्ट में देख सकते हैं) हम यहाँ अनुच्छेद 21क को समझने वाले हैं;

स्वतंत्रता का अधिकार
⚫ अनुच्छेद 19 – छह अधिकारों की सुरक्षा; (1) अभिव्यक्ति (2) सम्मेलन (3) संघ (4) संचरण (5) निवास (6) व्यापार
⚫ अनुच्छेद 20 – अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण
⚫ अनुच्छेद 21 – प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता
अनुच्छेद 21क – प्रारम्भिक शिक्षा का अधिकार
⚫ अनुच्छेद 22 – गिरफ़्तारी एवं निरोध से संरक्षण

| अनुच्छेद 21क – प्रारंभिक शिक्षा का अधिकार

राज्य, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चे को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करेगा। ये हमेशा से संविधान का भाग नहीं था बल्कि इसे 2002 में 86 वां संविधान संसोधन द्वारा जोड़ा गया था।

हालांकि संविधान के भाग 4 के नीति निदेशक तत्व के तहत अनुच्छेद 45 में बच्चों के लिए नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था थी लेकिन निदेशक सिद्धांत होने के कारण वो प्रवर्तनीय नहीं था। इसीलिए मूल अधिकार में जोड़कर इसे प्रवर्तनीय बनाया गया।

अनुच्छेद 21क को सही से क्रियान्वित करने के लिए 2009 में, बकायदे केंद्र सरकार ने एक अधिनियम भी पारित किया ”बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम”। जिसके तहत इसे एक उचित कानूनी रूप दिया गया।

बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009, जो अनुच्छेद 21-ए के तहत परिकल्पित परिणामी कानून का प्रतिनिधित्व करता है, का अर्थ है कि प्रत्येक बच्चे को एक औपचारिक स्कूल में संतोषजनक और समान गुणवत्ता वाली पूर्णकालिक प्रारंभिक शिक्षा का अधिकार है जो कुछ आवश्यक मानदंडों और मानकों को पूरा करता है।

अनुच्छेद 21-ए और आरटीई अधिनियम 1 अप्रैल 2010 को प्रभावी हुआ। आरटीई अधिनियम के शीर्षक में ‘मुफ्त और अनिवार्य‘ शब्द शामिल हैं।

‘मुफ्त शिक्षा’ का मतलब है कि कोई भी बच्चा किसी भी प्रकार के शुल्क या खर्च का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

हालांकि अगर किसी बच्चे के माता-पिता ने उसे ऐसे स्कूल में भर्ती कराया है, जो उपयुक्त सरकार द्वारा समर्थित नहीं है, यानी कि प्राइवेट स्कूल है तो वहाँ यह व्यवस्था लागू नहीं होगा।

‘अनिवार्य शिक्षा’ उपयुक्त सरकार और स्थानीय अधिकारियों पर 6-14 आयु वर्ग के सभी बच्चों द्वारा प्रवेश, उपस्थिति और प्राथमिक शिक्षा को पूरा करने का दायित्व प्रदान करती है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (right to education act) निम्नलिखित प्रावधान करता है:

  • पड़ोस के स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार।
  • यह एक गैर-भर्ती वाले बच्चे को आयु उपयुक्त कक्षा में भर्ती करने का प्रावधान करता है।
  • यह मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने और केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय और अन्य जिम्मेदारियों को साझा करने में उपयुक्त सरकारों, स्थानीय प्राधिकरण और माता-पिता के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निर्दिष्ट करता है।
  • यह अन्य बातों के साथ-साथ छात्र शिक्षक अनुपात , भवनों और बुनियादी ढांचे, स्कूल-कार्य दिवसों, शिक्षक-कार्य घंटों से संबंधित मानदंडों और मानकों को निर्धारित करता है।
  • यह गैर-शैक्षिक कार्यों के लिए शिक्षकों की तैनाती पर रोक लगाने का भी प्रावधान करता है, जो दस वर्षीय जनगणना, स्थानीय प्राधिकरण, राज्य विधानसभाओं और संसद के चुनाव और आपदा राहत के अलावा है।
  • यह उचित रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों, यानी अपेक्षित प्रवेश और शैक्षणिक योग्यता वाले शिक्षकों की नियुक्ति का प्रावधान करता है।
  • यह (क) शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पर; (ख) बच्चों के प्रवेश के लिए स्क्रीनिंग प्रक्रियाएं; (ग) प्रति व्यक्ति शुल्क; (घ) शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन और (ङ) मान्यता के बिना स्कूलों का संचालन, पर रोक लगाता है
  • यह संविधान में निहित मूल्यों के अनुरूप पाठ्यक्रम के विकास के लिए प्रदान करता है, और जो बच्चे के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करेगा, बच्चे के ज्ञान, क्षमता और प्रतिभा का निर्माण करेगा और बच्चे को भय, आघात और चिंता से मुक्त करेगा।

तो कुल मिलाकर यही है अनुच्छेद 21क, उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। दूसरे अनुच्छेदों को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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Constitution
Basics of Parliament
Fundamental Rights
Judiciary in India
Executive in India
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अस्वीकरण - यहाँ प्रस्तुत अनुच्छेद और उसकी व्याख्या, मूल संविधान (नवीनतम संस्करण), संविधान पर डी डी बसु की व्याख्या (मुख्य रूप से) और संविधान के विभिन्न ज्ञाताओं (जिनके लेख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर ऑडियो-विजुअल्स के रूप में उपलब्ध है) पर आधारित है। हमने बस इसे रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया है।