यह लेख Article 332 (अनुच्छेद 332) का यथारूप संकलन है। आप इस मूल अनुच्छेद का हिन्दी और इंग्लिश दोनों संस्करण पढ़ सकते हैं। आप इसे अच्छी तरह से समझ सके इसीलिए इसकी व्याख्या भी नीचे दी गई है आप उसे जरूर पढ़ें, और MCQs भी सॉल्व करें।

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📜 अनुच्छेद 332 (Article 332) – Original

भाग 16 [कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध]
332. राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण— (1) 1*** प्रत्येक राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जातियों के लिए और 2[असम के स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर] अन्य अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे।

(2) असम राज्य की विधान सभा में स्वशासी जिलों के लिए भी स्थान आरक्षित रहेंगे।

(3) खंड (1) के अधीन किसी राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात, उस विधान सभा में स्थानों की कुल संख्या से यथाशक्य वही होगा जो, यथास्थिति, उस राज्य की अनुसूचित जातियों की अथवा उस राज्य की या उस राज्य के भाग की अनुसूचित जनजातियों की, जिनके संबंध में स्थान इस प्रकार आरक्षित हैं, जनसंख्या का अनुपात उस राज्य की कुल जनसंख्या से है।

1[(3क) खंड (3) में किसी बात के होते हुए भी, सन्‌ 3[2026] के पश्चात्‌ की गई पहली जनगणना के आधार पर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड राज्यों की विधान सभाओं में स्थानों की संख्या के, अनुच्छेद 170 के अधीन, पुनःसमायोजन के प्रभावी होने तक, जो स्थान ऐसे किसी राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किए जाएंगे, वे

(क) यदि संविधान (सत्तावनवां संशोधन) अधिनियम, 1987 के प्रवृत्त होने की तारीख को ऐसे राज्य की विद्यमान विधान सभा में (जिसे इस खंड में इसके पश्चात्‌ विद्यमान विधान सभा कहा गया है) सभी स्थान अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों द्वारा धारित हैं तो, एक स्थान को छोड़कर सभी स्थान होंगे ; और

(ख) किसी अन्य दशा में, उतने स्थान होंगे, जिनकी संख्या का अनुपात, स्थानों की कुल संख्या के उस अनुपात से कम नहीं होगा जो विद्यमान विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों की (उक्त तारीख को यथाविद्यमान) संख्या का अनुपात विद्यमान विधान सभा में स्थानों की कुल संख्या से हैं।]

4[(3ख) खंड (3) में किसी बात के होते हुए भी, सन्‌ 5[2026] के पश्चात्‌ की गई पहली जनगणना के आधार पर, त्रिपुरा राज्य की विधान सभा में स्थानों की संख्या के, अनुच्छेद 170 के अधीन, पुनःसमायोजन के प्रभावी होने तक, जो स्थान उस विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किए जाएंगे वे उतने स्थान होंगे जिनकी संख्या का अनुपात, स्थानों की कुल संख्या के उस अनुपात से कम नहीं होगा जो विद्यमान विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों की, संविधान (बहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992 के प्रवृत्त होने की तारीख को यथाविद्यमान संख्या का अनुपात उक्त तारीख को उस विधान सभा में स्थानों की कुल संख्या से है।]

(4) असम राज्य की विधान सभा में किसी स्वशासी जिले के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात, उस विधान सभा में स्थानों की कुल संख्या के उस अनुपात से कम नहीं होगा जो उस जिले की जनसंख्या का अनुपात उस राज्य की कुल जनसंख्या से है।

(5) 6**असम के किसी स्वशासी जिले के लिए आरक्षित स्थानों के निर्वाचन-क्षेत्रों में उस जिले के बाहर का कोई क्षेत्र समाविष्ट नहीं होगा।

(6) कोई व्यक्ति जो असम राज्य के किसी स्वशासी जिले की अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, उस राज्य की विधान सभा के लिए उस जिले ***7 के किसी निर्वाचन-क्षेत्र से निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा;

8[परंतु असम राज्य की विधान सभा के निर्वाचनों के लिए, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद्‌ क्षेत्र जिला में सम्मिलित निर्वाचन-क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों और गैर- अनुसूचित जनजातियों का प्रतिनिधित्व, जो उस प्रकार अधिसूचित किया गया था और बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र जिला के गठन से पूर्व विद्यमान था, बनाए रखा जाएगा।]
=====================================
1. संविधान (इक्यावनवाँ संशोधन) अधिनियम, 1984 की धारा 3 द्वारा (16-6-1986 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
2. संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 29 और अनुसूची द्वारा (1-11-1956 से) “पहली अनुसूची के भाग क एवं ख में विनिर्दिष्ट” शब्दों और अक्षरों का लोप किया गया।
3. संविधान (सत्तावनवां संशोधन) अधिनियम, 1987 की धारा 2 द्वारा (21-9-1987 से) अंतःस्थापित ।
4. संविधान (चौरासीवां संशोधन) अधिनियम, 2001 की धारा 6 द्वारा “2000″ के स्थान पर (21-2-2002 से) प्रतिस्थापित।
5. संविधान (बहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992 की धारा 2 द्वारा (5-12-1992 से) अंतःस्थापित।
6. संविधान (चौरासीवां संशोधन) अधिनियम, 2001 की धारा 7 द्वारा (21-2-2002 से) “2000″ के स्थान पर प्रतिस्थापित।
7. पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 (1971 का 81) की धारा 71 द्वारा (21-1-1972 से) कतिपय शब्दों का लोप किया गया।
8. संविधान (नब्बेवां संशोधन) अधिनियम, 2003 की धारा 2 द्वारा (28-9-2003 से) अंतःस्थापित।
अनुच्छेद 332 हिन्दी संस्करण

Part XVI [SPECIAL PROVISIONS RELATING TO CERTAIN CLASSES]
332. Reservation of seats for Scheduled Castes and Scheduled Tribes in the Legislative Assemblies of the States (1) Seats shall be reserved for the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes, 1[except the Scheduled Tribes in the autonomous districts of Assam], in the Legislative Assembly of every State 2***.

(2) Seats shall be reserved also for the autonomous districts in the Legislative Assembly of the State of Assam.

(3) The number of seats reserved for the Scheduled Castes or the Scheduled Tribes in the Legislative Assembly of any State under clause (1) shall bear, as nearly as may be, the same proportion to the total number of seats
in the Assembly as the population of the Scheduled Castes in the State or of the Scheduled Tribes in the State or part of the State, as the case may be, in respect of which seats are so reserved, bears to the total population of the State.

3[(3A) Notwithstanding anything contained in clause (3), until the taking effect, under article 170, of the re-adjustment, on the basis of the first census after the year 4[2026], of the number of seats in the Legislative Assemblies of the States of Arunachal Pradesh, Meghalaya, Mizoram and Nagaland, the seats which shall be reserved for the Scheduled Tribes in the Legislative Assembly of any such State shall be,—
(a) if all the seats in the Legislative Assembly of such State in existence on the date of coming into force of the Constitution (Fifty seventh Amendment) Act, 1987 (hereafter in this clause referred to as the existing Assembly) are held by members of the Scheduled Tribes, all the seats except one;
(b) in any other case, such number of seats as bears to the total number of seats, a proportion not less than the number (as on the said date) of members belonging to the Scheduled Tribes in the existing Assembly bears to the total number of seats in the existing Assembly.]

5[(3B) Notwithstanding anything contained in clause (3), until the re-adjustment, under article 170, takes effect on the basis of the first census after the year 6[2026], of the number of seats in the Legislative Assembly of the
State of Tripura, the seats which shall be reserved for the Scheduled Tribes in the Legislative Assembly shall be, such number of seats as bears to the total number of seats, a proportion not less than the number, as on the date of coming into force of the Constitution (Seventy-second Amendment) Act, 1992, of members belonging to the Scheduled Tribes in the Legislative Assembly in existence on the said date bears to the total number of seats in that Assembly.]

(4) The number of seats reserved for an autonomous district in the Legislative Assembly of the State of Assam shall bear to the total number of seats in that Assembly a proportion not less than the population of the district
bears to the total population of the State.

(5) The constituencies for the seats reserved for any autonomous district of Assam shall not comprise any area outside that district ***7.

(6) No person who is not a member of a Scheduled Tribe of any autonomous district of the State of Assam shall be eligible for election to the Legislative Assembly of the State from any constituency of that district ***7:

8[Provided that for elections to the Legislative Assembly of the State of Assam, the representation of the Scheduled Tribes and non-Scheduled Tribes in the constituencies included in the Bodoland Territorial Areas District, so notified, and existing prior to the constitution of Bodoland Territorial Areas District, shall be maintained.]
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1. Subs. by the Constitution (Fifty-first Amendment) Act, 1984, s. 3, for certain words (w.e.f. 16-6-1986).
2. The words and letters “specified in Part A or Part B of the First Schedule” omitted by the Constitution (Seventh Amendment) Act, 1956, s. 29 and Sch. (w.e.f. 1-11-1956).
3. Ins. by the Constitution (Fifty-seventh Amendment) Act, 1987, s. 2 (w.e.f. 21-9-1987).
4. Subs. by the Constitution (Eighty-fourth Amendment) Act, 2001, s. 7, for “2000” (w.e.f. 21-2-2002).
5. Ins. by the Constitition (Seventy-second Amendment) Act, 1992, s. 2 (w.e.f. 5-12-1992).
6. Subs. by the Constitution (Eighty-fourth Amendment) Act, 2001, s. 7, for “2000” (w.e.f. 21-2-2002).
7. Certain words omitted by the North-Eastern Areas (Reorganisation) Act, 1971 (81 of 1971), s. 71 (w.e.f. 21-1-1972).
8. Ins. by the Constitution (Ninetieth Amendment) Act, 2003, s. 2 (w.e.f. 28-9-2003).
Article 332 English Version

🔍 Article 332 Explanation in Hindi

भारतीय संविधान का भाग 16, अनुच्छेद 330 से लेकर अनुच्छेद 342 तक में विस्तारित है जैसा कि आप देख सकते हैं यह पूरा भाग कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध (Special provision in respect of certain classes) के बारे में है। इस भाग के अंतर्गत मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों को सम्मिलित किया गया है;

  1. लोक सभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण (Reservation of seats for Scheduled Castes and Scheduled Tribes in the Lok Sabha)
  2. राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण (Reservation of seats for Scheduled Castes and Scheduled Tribes in the Legislative Assemblies of the States)
  3. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (National Commission for Scheduled Castes)
  4. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (National Commission for Scheduled Tribes)
  5. पिछड़े वर्गों के लिए राष्ट्रीय आयोग (National Commission for Backward Classes), इत्यादि।

इस लेख में हम अनुच्छेद 332 को समझने वाले हैं;

⚫ ◾ भारत में आरक्षण (Reservation in India) [1/4]
Closely Related to Article 332

| Article 332 – राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण (Reservation of seats for Scheduled Castes and Scheduled Tribes in the Legislative Assemblies of the States)

अनुच्छेद 332 के तहत राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण के बारे में बात की गई है।

अनुच्छेद 330 के तहत जिस तरह से लोकसभा में SC एवं ST के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है उसी तरह से अनुच्छेद 332 के तहत राज्यों की विधान सभाओं में SC एवं ST वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। इस अनुच्छेद के तहत कुल छह खंड आते हैं;

अनुच्छेद 332 के खंड (1) एवं खंड (2) के तहत कहा गया है कि प्रत्येक राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जातियों के लिए और असम के स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर अन्य अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे। असम राज्य की विधान सभा में स्वशासी जिलों के लिए भी स्थान आरक्षित रहेंगे।

इन दोनों खंडों के तहत राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों के लिए, अनुसूचित जनजातियों के लिए एवं असम के स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों को आरक्षित किया गया है; कितने स्थान आरक्षित किए गए हैं उसके बारे में अगले खंड में बताया गया है।

असम में तीन स्वायत्त जिले शामिल हैं:

दीमा हसाओ
कार्बी आंगलोंग
पश्चिम कार्बी आंगलोंग

निर्वाचन क्षेत्र की सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।

अनुच्छेद 332 के खंड (3) के तहत कहा गया है कि खंड (1) के अधीन किसी राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात, उस विधान सभा में स्थानों की कुल संख्या से यथाशक्य वही होगा जो, यथास्थिति, उस राज्य की अनुसूचित जातियों की अथवा उस राज्य की या उस राज्य के भाग की अनुसूचित जनजातियों की, जिनके संबंध में स्थान इस प्रकार आरक्षित हैं, जनसंख्या का अनुपात उस राज्य की कुल जनसंख्या से है।

उदाहरण के लिए, बिहार को देखें तो वहाँ विधानसभा में 243 सीटें है और एससी वर्ग की जनसंख्या बिहार की कुल जनसंख्या में लगभग 15% है और 1 प्रतिशत से कुछ अधिक एसटी कि जनसंख्या है। इसीलिए बिहार विधानसभा में SC के लिए 243 सीटों में से 38 सीटें आरक्षित है जबकि 2 सीटें ST के लिए आरक्षित है। 

◾ संविधान (सत्तावनवां संशोधन) अधिनियम 1987 की मदद से इस खंड में एक उपखंड (3क) जोड़ा गया है;

अनुच्छेद 332 के खंड (3) के उपखंड (3क) के तहत कहा गया है कि खंड (3) में किसी बात के होते हुए भी, सन्‌ 2026 के पश्चात्‌ की गई पहली जनगणना के आधार पर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड राज्यों की विधान सभाओं में स्थानों की संख्या के, अनुच्छेद 170 के अधीन, पुनःसमायोजन के प्रभावी होने तक, जो स्थान ऐसे किसी राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किए जाएंगे, वे

(क) यदि संविधान (सत्तावनवां संशोधन) अधिनियम, 1987 के प्रवृत्त होने की तारीख को ऐसे राज्य की विद्यमान विधान सभा में (जिसे इस खंड में इसके पश्चात्‌ विद्यमान विधान सभा कहा गया है) सभी स्थान अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों द्वारा धारित हैं तो, एक स्थान को छोड़कर सभी स्थान होंगे ; और

(ख) किसी अन्य दशा में, उतने स्थान होंगे, जिनकी संख्या का अनुपात, स्थानों की कुल संख्या के उस अनुपात से कम नहीं होगा जो विद्यमान विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों की (उक्त तारीख को यथाविद्यमान) संख्या का अनुपात विद्यमान विधान सभा में स्थानों की कुल संख्या से हैं।

💡 जैसा कि हम जानते हैं कि प्रत्येक जनगणना के पश्चात लोक सभा एवं विधानसभाओं की सीटों का पुनःसमायोजन किया जाना होता है जैसा कि अनुच्छेद 82 (लोकसभा) और अनुच्छेद 170 (विधानसभा) में व्यवस्था किया गया है।

लेकिन किन्ही वजहों से साल 2026 तक इस प्रक्रिया को विराम दे दिया गया है और पुनः समायोजन या पुनःसीमांकन का काम अब साल साल 2026 की जनगणना के बाद ही होगा, इसी को ध्यान में रखकर लोकसभा एवं विधानसभा में सीटों से जुड़े कुछ प्रावधानों में संशोधन किया गया है और (3क एवं 3ख) संशोधन भी इसी परिपेक्ष्य में है;

इस उपखंड (3क) में यही कहा गया है कि साल 2026 के बाद की गई पहली जनगणना के आधार पर एवं अनुच्छेद 170 के अधीन पुनःसमायोजन के प्रभावी होने तक अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का जो आरक्षण होगा उसके लिए दो बातें फॉलो की जाएगी;

पहली बात) यदि सत्तावनवां संशोधन अधिनियम 1987 के लागू होने की तारीख को ऐसे राज्य की विद्यमान विधान सभा में सभी स्थान अनुसूचित जनजातियों (ST) के सदस्यों द्वारा भरा (occupied) हैं तो, एक स्थान को छोड़कर सभी स्थान आरक्षित होंगे ;

अभी की बात करें तो नागालैंड एवं अरुणाचल प्रदेश की 60 सीटों में से 59 सीटें ST के लिए आरक्षित है और सिर्फ 1 सीटें सामान्य वर्ग के लिए है।

दूसरी बात) उपरोक्त के अलावा किसी अन्य दशा में भी स्थान ST के लिए आरक्षित होंगे, जिनकी संख्या का अनुपात, स्थानों की कुल संख्या के उस अनुपात से कम नहीं होगा जो विद्यमान विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों की संख्या का अनुपात विद्यमान विधान सभा में स्थानों की कुल संख्या से हैं।

अभी की बात करें तो मेघालय की 60 सीटों में से 55 सीटें ST के लिए आरक्षित है और मिज़ोरम की 40 सीटों में से 95% सीटें ST वर्ग के लिए आरक्षित है। मेघालय में 86% जनसंख्या ST है वहीं मिज़ोरम की 95% जनसंख्या ST है (और इसी के अनुपात में सीटें आरक्षित की गई है)

◾ संविधान (बहत्तरवां संशोधन) अधिनियम 1992 की मदद से इस खंड में एक उपखंड (3ख) जोड़ा गया है;

अनुच्छेद 332 के खंड (3) के उपखंड (3ख) के तहत कहा गया है कि खंड (3) में किसी बात के होते हुए भी, सन्‌ 2026 के पश्चात्‌ की गई पहली जनगणना के आधार पर, त्रिपुरा राज्य की विधान सभा में स्थानों की संख्या के, अनुच्छेद 170 के अधीन, पुनःसमायोजन के प्रभावी होने तक, जो स्थान उस विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किए जाएंगे वे उतने स्थान होंगे जिनकी संख्या का अनुपात, स्थानों की कुल संख्या के उस अनुपात से कम नहीं होगा जो विद्यमान विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों की, संविधान (बहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992 के प्रवृत्त होने की तारीख को यथाविद्यमान संख्या का अनुपात उक्त तारीख को उस विधान सभा में स्थानों की कुल संख्या से है।

त्रिपुरा में अभी 60 सीटों में से 30 सीटें आरक्षित है जिसमें से 10 सीटें SC के लिए आरक्षित है और 20 सीटें ST के लिए आरक्षित है। जनसंख्या की बात करें तो त्रिपुरा में लगभग 18% SC है और 31% ST है।

अनुच्छेद 332 के खंड (4), (5) एवं (6) के तहत कहा गया है कि असम राज्य की विधान सभा में किसी स्वशासी जिले के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात, उस विधान सभा में स्थानों की कुल संख्या के उस अनुपात से कम नहीं होगा जो उस जिले की जनसंख्या का अनुपात उस राज्य की कुल जनसंख्या से है।

असम में 7% जनसंख्या SC है एवं 12% जनसंख्या ST है। इसी आधार पर 8 निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए और 16 निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।

याद रखें;

◾ असम के किसी स्वशासी जिले (autonomous districts) के लिए आरक्षित स्थानों के निर्वाचन-क्षेत्रों में उस जिले के बाहर का कोई क्षेत्र समाविष्ट नहीं होगा।

◾ कोई व्यक्ति जो असम राज्य के किसी स्वशासी जिले की अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, उस राज्य की विधान सभा के लिए उस जिले के किसी निर्वाचन-क्षेत्र से निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा;

लेकिन याद रखिए कि असम राज्य की विधान सभा के निर्वाचनों के लिए, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद्‌ क्षेत्र जिला में सम्मिलित निर्वाचन-क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों और गैर- अनुसूचित जनजातियों का प्रतिनिधित्व, वही होगा जो उस प्रकार अधिसूचित किया गया था और बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र जिला के गठन से पूर्व विद्यमान था।

तो यही है Article 332, उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। दूसरे अनुच्छेदों को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

https://wonderhindi.com/article-82/
https://wonderhindi.com/article-170/
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Question 1: Article 332 of the Indian Constitution deals with:

(a) The power of the Union Government to levy surcharges on the taxes levied by the State Governments
(b) The power of the State Governments to levy taxes on goods and services
(c) The power of the Union Government to collect and distribute the Compensation Cess
(d) The reservation of seats for Scheduled Castes (SCs) and Scheduled Tribes (STs) in the Legislative Assemblies of States

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Answer: (d) Explanation: Article 332 of the Indian Constitution deals with the reservation of seats for Scheduled Castes (SCs) and Scheduled Tribes (STs) in the Legislative Assemblies of States.

Question 2: The reservation of seats for SCs and STs in the Legislative Assemblies of States is a form of affirmative action that is intended to ensure that these groups are represented in the State Legislatures.

True
False

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Answer: True Explanation: The reservation of seats for SCs and STs in the Legislative Assemblies of States is a form of affirmative action that is intended to ensure that these groups are represented in the State Legislatures. SCs and STs have been historically marginalized and disadvantaged in India, and the reservation of seats is intended to help them overcome these disadvantages and participate fully in the political process.

Question 3: The reservation of seats for SCs and STs in the Legislative Assemblies of the States is a form of affirmative action that is intended to:

(a) Increase the representation of SCs and STs in the political process
(b) Address the historical marginalization and disadvantage of SCs and STs
(c) Promote social justice and equality
(d) All of the above

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Answer: (d) Explanation: The reservation of seats for SCs and STs in the Legislative Assemblies of the States is a form of affirmative action that is intended to increase the representation of SCs and STs in the political process, address the historical marginalization and disadvantage of SCs and STs, and promote social justice and equality.

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अस्वीकरण – यहाँ प्रस्तुत अनुच्छेद और उसकी व्याख्या, मूल संविधान (उपलब्ध संस्करण), संविधान पर डी डी बसु की व्याख्या (मुख्य रूप से), प्रमुख पुस्तकें (एम. लक्ष्मीकान्त, सुभाष कश्यप, विद्युत चक्रवर्ती, प्रमोद अग्रवाल इत्यादि) एनसाइक्लोपीडिया, संबंधित मूल अधिनियम और संविधान के विभिन्न ज्ञाताओं (जिनके लेख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर ऑडियो-विजुअल्स के रूप में उपलब्ध है) पर आधारित है। हमने बस इसे रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया है।