Cause of unemployment । बेरोजगारी के कारण । Free PDF

बेरोजगारी के कारण
(Cause of unemployment in hindi)

In this article we are going to discuss about Cause of unemployment article in hindi

Cause of unemployment

रोजगार क्या है?
(What is employment?)

रोजगारी का अभिप्राय किसी व्यवसाय में काम करने से है, जिसके बदले धन या फिर धन के बदले धन के मूल्य की कोई वस्तु अर्जित की जाए।

हमारे गाँव में बहुत से श्रमिकों को धन के बदले में मजदूरी में अनाज मिलता है। इस प्रकार वे स्त्रियाँ जिनकी सेवाएँ देश और परिवार के लिए अमूल्य है, रोजगार नहीं कहीं जा सकती क्योंकि वे आर्थिक उत्पादक नहीं है।

अगर वे घर के अन्दर या बाहर ऐसा काम करती है जिससे वे धन अर्जित कर सकें तो उन्हें रोजगार कहाँ जाता है।

बेरोजगारी आधुनिक युग की सर्वाधिक गंभीर सामाजिक समस्याओं में से एक है। यह सामाजिक विघटन की सहगामी है, इसीलिए वर्तमान युग की कठिन समस्या बेरोजगारी है।

बेरोजगारी के कारण
(Cause of Unemployment)

बेरोजगारी एक जटिल समस्या है जिसमें अनेक आर्थिक,सामाजिक संस्थाओं और व्यक्तियों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष योगदान है। भारत में बेरोजगारी के निम्नांकित कारण महत्वपूर्ण है।

✅ जनसँख्या में वृद्धि
Increase in population

जनसंख्या वृद्धि और बेरोजगारी अंतर्संबंधित है।  जनसंख्या में तीव्र वृद्धि वह कारक है जो काम की उपलब्धता को बहुत अधिक प्रभावित करता है।

भारत में जिस अनुपात में जनसंख्या में वृद्धि हो रही है उस अनुपात में आर्थिक विकास नहीं हो पा रहा है, उद्योग धंधे नहीं चल पा रहे हैं, काम व रोजगार के अवसर नहीं बढ़ पा रहे है, फलस्वरूप बेरोजगारी का बढ़ना स्वाभाविक है।

         ✅ झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा
False social prestige

झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा कुछ इस रूप में पैदा हो रही है कि कुछ व्यक्ति कुछ विशेष कार्यों को करना अपनी मान-मर्यादा के प्रतिकूल समझते है।

उदाहरणस्वरुप – विक्रयकला व टाइप करने जैसे कार्यों को नीचे दर्जे का मानते है। कभी-कभी युवा व्यक्ति किसी कार्य को करने से इस लिए कतराते है,

की जो कार्य उसे दिया जा रहा है, उनसे उसके परिवार का स्तर ऊँचा है। वे ऐसे कार्यों के करने के बजाय बेरोजगार रहना पसंद करते है ।  

✅ दोषपूर्ण शिक्षा व्यवस्था
Captious Education system

भारत में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजी सरकार की देन है। यह शिक्षा सफेदपोश, नौकरी को महत्व प्रदान करती है और शरीर श्रम के प्रति घृणा की भावना बढ़ाती है।

फलस्वरूप आई.ए.एस., आई.पी.एस. , डॉक्टर, इंजिनियर, कॉलेज शिक्षक आदि सेवा में जाने की लोगों का झुकाव विशेष रूप से है।

वे सेवाएँ कम उपलब्ध है। फलस्वरूप विश्वविद्यालय शिक्षा प्राप्त व्यक्तियों में बेरोजगारी भरपूर है।  

 ✅ गतिशीलता की कमी
Lack of mobility

गतिशीलता की कमी बेरोजगारी को उत्पन्न करती है। जब व्यक्ति एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने से हिचकते है, तो एक स्थान पर श्रमिकों की जमघट सी लगी रहती है।  

वे अपने ही जातीय समूह, गाँव, नगर व राज्यों में सिमटकर रह जाते है। इससे उस क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न होती है।

भारत में जातिवाद, प्रांतवाद, भाषावाद, पारिवारिक दायित्व, धार्मिक, रुढियों, साम्प्रदायिकता आदि विशेष बाधाएँ प्रस्तुत करती है। जिससे व्यक्तियों में गतिशीलता नहीं हो पाती।  

✅ भौतिक आपदाएं
Physical disasters

भारतीय कृषक को समय-समय पर अतिवृष्टि, अनावृष्टि, सूखा, अकाल, महामारी आदि जैसी विपदाओं का सामना करना पड़ता है।

सिंचाई आदि के साधन भी बहुत कम है . फलतः जितनी उपज होनी चाहिए उतनी भी नहीं हो पाती है।

अधिक उपज हो तो अधिक लोगों को काम दिया जा सकता है। अतः भौतिक विपतियों से भी बेरोजगारी उत्पन्न होती है ।

✅ भूमि के भार में वृद्धि
Increase in land load

भूमि तो ठहरी सीमित उसकी उर्वरा शक्ति की भी एक सीमा है। उस सीमा के बाद उत्पादन में विशेष वृद्धि नहीं होती है।

उत्पादन ह्रास का नियम लागू हो जाता है। जनसंख्या बढ़ने से भूमि का भार बढ़ता चला जाता है, उधर उपज में वृद्धि होती नहीं है,

परिणाम यह होता है कि भूमि से अपना निर्वाह करने वालों की स्थिति दिन-प्रतिदिन विषम होती जाती है। भूमि में छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजन कोढ़ खाज की स्थिति उत्पन्न करती है ।

✅ औद्योगिकरण
Industrialization

नगरों में जहाँ बड़े उद्योग है, वहाँ पर हजारों लोगों को काम मिलता है पर यन्त्र तो ऐसा दानव है जो दानवीय गति से उत्पादन करता है ।  

जिस काम को 100 आदमी पूरे दिन में नहीं कर पाते, उसे एकाध घंटे में ही कर डालता है फलस्वरूप उतने लोगों की रोजी स्वतः छीन जाती है।

स्वचालित यंत्रीकरण और विवेकीकरण की चपेट में हजारों व्यक्ति आते रहते है और रोजी-रोटी से वंचित होते रहते है।

✅ तेजी-मंदी का चक्र
Cycle of recession

व्यापार में जो तेजी-मंदी का जो चक्र चलता रहता है, उसकी चपेट में भी हजारों व्यक्ति आते रहते है उसके कारण भी समय-समय पर लोगों की छंटनी होती रहती है और बेकारी बढ़ती रहती है ।  

बेरोजगारी के अन्य कारण
(Other cause of unemployment)

बेरोजगारी के उपर्युक्त कारणों के अतिरिक्त अन्य कारणों की चर्चा की जाती है। ‘Adamsmith’ ने पूंजी की कमी को बेरोजगारी का कारण माना है

कीन्स’ बचत की इच्छा को बेरोजगारी का कारण बताया है कुछ अर्थशास्त्री मांग और आपूर्ति में असंतुलन को बेरोजगारी बताया है

‘एलियट एवं मेरिल’ ने बेरोजगारी का कारण औद्योगिकरण समृद्धि के बाद व्यापार चक्र में आई मंदी को माना है।

इस प्रकार उपर्युक्त वर्णन से यह स्पष्ट होता है कि बेरोजगारी विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और व्यैक्तिक कारणों का परिणाम है।  यह सामाजिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है कि कौन कारण कहाँ विशेष कारगर है ।

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एक महत्वपूर्ण बेरोजगारी के कारण (Cause of Unemployment); जनसंख्या के बारे में जरूर पढ़ें –

आज जब जनसंख्या समस्या की बात कर रहे है तो वो समय याद आता है। हाँ ! वही समय – जब भूत प्रेत हुआ करता था, लोगों को अंधेरे से डर लगता था, जंगलों से डर लगता था।

पर अब ऐसा समय आ गया है कि अगर भुतिया जंगलों में भी जाओगे तो भूत मिले न मिले लोग जरूर मिलेंगे वो भी अगर फोन से चिपके मिले तो उसमें कोई बड़ी बात नहीं! जिधर देखो लोग ही लोग नजर आते है।

और शायद इसीलिए भारत में जनसंख्या आज एक बहुत बड़ी समस्या का रूप ले चुका है। पता नहीं लोगों को हो क्या गया था। इसे पूरा पढ़ें

बेरोजगारी के प्रकार

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