लॉकडाउन और कर्फ़्यू में अंतर क्या है? समझिए

कोरोना के कारण आजकल लॉकडाउन और कर्फ़्यू काफी चर्चा में है बहुत से लोग इन दोनों को एक ही मान लेते है पर इन दोनों में कुछ अंतर है,

इस लेख में हम लॉकडाउन और कर्फ़्यू पर सरल एवं सहज चर्चा करेंगे एवं इसके मध्य अंतर जानने का प्रयास करेंगे, तो लेख को अंत तक जरूर पढ़ें;

लॉकडाउन और कर्फ़्यू

| लॉकडाउन क्या है?

लॉक डाउन एक प्रशासनिक आदेश है जिसे Epidemic Diseases Act 1897 के तहत लागू किया जाता है। इस अधिनियम का इस्तेमाल आमतौर पर गंभीर देशव्यापी संकट के दौरान किया जाता है। जैसे कि अब कोरोना वायरस के मामले में किया जा रहा है।

जैसा कि हम जानते है कि अभी भारत द्वितीय अवस्था जिसे लोकल ट्रांसमिशन के नाम से भी जाना जाता है, से गुजर रहा है।

इस अवस्था में होता ये है कि वायरस के उद्गम स्थल से संक्रमित कोई व्यक्ति जब अपने परिजनों के संपर्क में आता है तो वायरस का संक्रमण उन लोगों में भी हो जाता है। 

तृतीय अवस्था को कम्यूनिटी ट्रांसमिशन कहा जाता है, यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें इसके संक्रमण का प्रसार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानीय स्तर पर बहुत ही तेजी से होने लगता है। इसीलिए इसे बहुत ही खतरनाक अवस्था माना जाता है।

जिस प्रकार से ये महामारी फैल रही थी ऐसा लग रहा था कि भारत अभी इसी अवस्था के प्रवेश द्वार पर खड़ा था। उससे निपटने का एक मात्र विश्वसनीय तरीका यही था कि सामाजिक स्तर पर एक दूसरे से दूरी बना कर रखी जाये यानी कि सोशल डिसटेंसिंग ।

इसी सोशल डिसटेंसिंग को सुनिश्चित करने के लिए और मानवीय गतिविधियों पर पूर्णरुपेन  प्रतिबंध लगाने के लिये लॉक डाउन किया गया है। 

लॉकडाउन और कर्फ्यू में अंतर  

जैसा कि हम जानते है लॉकडाउन एक प्रशासनिक आदेश जिसे कि एपिडमिक डिज़ीज़ एक्ट, 1897 के तहत लागू किया जाता है। 
वहीँ कर्फ़्यू भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत स्थापित एक प्रक्रिया है।

हालांकि कर्फ़्यू भी एक प्रकार का आदेश ही होता है लेकिन जहां लॉकडाउन सीधे केंद्र या राज्य सरकार द्वारा किया जाता है,
वहीं कर्फ़्यू को लागू करने के लिए ज़िला मजिस्ट्रेट एक विज्ञप्ति ज़ारी करता है। और जिस स्थान पर यह धारा लगाई जाती है, वहाँ चार या उससे ज़्यादा लोग एकत्र नहीं हो सकते हैं।   

सामान्यतः लॉकडाउन में किसी प्रकार के दंड की व्यवस्था नहीं होती है उल्टे सरकार और प्रशासन की तरफ से आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाती है यानी कि आप ठीक से है कि नहीं इसका ख्याल सरकार रखती है,

परंतु यदि कोई कर्फ्यू के दौरान धारा-144 का उल्लंघन करता है तो उसे आईपीसी की धारा-188 के तहत उसे चार महीने की क़ैद या जुर्माना या फिर दोनों की सज़ा हो सकती है। 

संभवतः ये पहली बार है जब लॉकडाउन का प्रयोग किया जा रहा है। जबकि जहां तक कर्फ़्यू की बात है उसे आवश्यकतानुसार समय-समय पर लगाया जाता रहा है। 

लॉकडाउन का प्रयोग बहुत ही गंभीरतम स्थितियों में किया जाता है,

जबकि कर्फ्यू की बात करें तो उसका प्रयोग उस स्थिति में किया जाता है जब किसी स्थान पर कानून -व्यवस्था बिगड़ जाती है या फिर बिगड़ने की आशंका होती है।    

कर्फ़्यू के दौरान लोगों से घर में रहने की अपील की जाती है। तथा इसमें कुछ ज़रूरी सेवाओं के छोडकर बाद बांकी की सारी सेवाएँ बंद कर दी जाती हैं।  जैसे कि – कार्यालय, दुकानें, फ़ैक्टरियाँ और परिवहन इंटरनेट सुविधा सब बंद कर दी जाती है।

जबकि लॉकडाउन के दौरान आवश्यक सेवाएँ निर्बाध रूप से चलती रहती हैं। जहाँ संभव हो वहाँ कर्मचारियों को घर से काम करने के लिये कहा जाता है,

तथा जरूरी सेवाओं से संबन्धित कामगारों, स्टाफों या लोगों को काम करने की छुट दी जाती है। यानी कि आवश्यक सेवाओं से संबंधित आपूर्ति श्रृंखला को बहाल रखा जाता है।

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