जीएसटी कैसे काम करता है (How to work GST) एवं क्या ये VAT सिद्धांत पर ही काम करता है? इसका जवाब इस लेख में सरल एवं सहज उदाहरण के साथ मिल जाएगा।

How to work GST

इस लेख को पढ़ने से पहले जीएसटी क्या है एवं इसे लाने की जरूरत क्यों पड़ी? को पढ़ लें, इससे इस लेख को समझने में आसानी हो जाएगी।

जीएसटी के प्रकार (Types of GST)

जीएसटी चार प्रकार के होते हैं।

CGST यानी कि सेंट्रल जीएसटी
SGST यानी कि स्टेट जीएसटी
IGST यानी कि इंटिग्रेटेड जीएसटी या एकीकृत जीएसटी
UTGST यानी कि यूनियन टेरिटोरी जीएसटी या केंद्र शासित जीएसटी

? विनिर्माण अथवा आयात से शुरू होकर खुदरा स्तर पर पहुँचने तक आपूर्ति शृंखला के प्रत्येक चरण पर वस्तुओं एवं सेवाओं अथवा दोनों की आपूर्ति पर जीएसटी लगता है। भारत चूंकि संघीय ढांचे पर आधारित है इसीलिए यहाँ राज्य के पास भी स्वतंत्र रूप से कर लगाने की शक्ति होती है। SGST राज्यों द्वारा लगाया जाता है और वसूली का पूरा धन राज्य का होता है। इसी तरह से UTGST पूरा केंद्र का होता है।

? IGST पहले चल रहे सेंट्रल सेल्स टैक्स की जगह लिया जो कि इंटरस्टेट ट्रानजैक्सन यानी कि अंतर्राज्यीय लेनदेन पर लागू होता है।

IGST में राज्य का हिस्सा तो राज्य को ही मिलता है, अगर केंद्र का हिस्सा कुछ बनता है तो वो वित्त आयोग के अनुसार मिलता है।

उसी प्रकार देखें तो CGST जो कि केंद्र सरकार के अधीन है; का भी कुछ हिस्सा राज्य को मिलता है लेकिन वो कितना मिलेगा वो भी वित्त आयोग ही डिसाइड करता है।

यहाँ ये याद रखिए कि जीएसटी परिषद (GST Council) के तहत केंद्र और राज्यों द्वारा आपसी रूप से सहमत दरों पर सीजीएसटी, एसजीएसटी, यूजीएसटी और आईजीएसटी की वसूली की जाती है।

How to work GST? (जीएसटी कैसे काम करता है?)

2005 में VAT यानी कि मूल्य वर्धित कर व्यवस्था लाया गया था इससे बहुत हद तक व्यवस्था में सुधार तो आया लेकिन सभी समस्याओं को ये खत्म न कर सका। इसकी वजह ये है कि (1) एक तो कैस्केडिंग इफैक्ट (यानी कि कर पर कर)

खत्म नहीं हुआ (2) सर्विस टैक्स के लागू होने से टैक्स व्यवस्था की एकरूपता और भंग हुई (3) एक ही वस्तु के लिए अलग-अलग राज्यों का अलग-अलग टैक्स इनपुट क्रेडिट को और जटिल बना दिया (4) इतने रिटर्न फ़ाइल करना लोगों के लिए एक परेशानी का सबब बनता गया (5) टैक्स कलेक्शन अपेक्षानुरूप नहीं हो पा रहा था। आदि कारणों के चलते नीति नियंताओं को समझ में आ गया कि मौजूदा टैक्स व्यवस्था में सुधार बहुत ही जरूरी है। (इस पर विस्तार से चर्चा जीएसटी क्या है? में की गई है)

अंततः 2017 में इसे लागू कर दिया गया और मुख्यतः इसे तीन भागों में बाँट दिया गया, जहां एक राज्य के भीतर जीएसटी अलग तरीके से काम करता है क्योंकि वहाँ सिर्फ CGST और SGST लगता है। वहीं, जब राज्य-राज्य के मध्य लेनदेन होता है वहाँ CGST, SGST और साथ में IGST भी लगता है।

इसीलिए इसे समझने के लिए दो भागों में बांटा जा सकता है पहला एक राज्य के भीतर जीएसटी कैसे काम करता है और दूसरा अंतरराज्यीय लेन-देन में जीएसटी कैसे काम करता है, आइये एक-एक करके दोनों को देखते है और समझने की कोशिश करते हैं कि ये कैसे काम करता है।

एक राज्य के भीतर जीएसटी (How to work GST Within a state)

पहले की ही तरह इसे भी एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लेते हैं कि कोई व्यक्ति A ने 100 रुपया का रॉ मटिरियल खरीदा। समझने के लिए मान लेते हैं कि जीएसटी की दर अभी 20 प्रतिशत है।

यानी कि 10 प्रतिशत CGST और 10 प्रतिशत SGST। ऐसा इसलिए क्योंकि वास्तविक तौर पर दोनों की दरें बराबर होती हैं। लेकिन सम्मिलित रूप से इसे 20 प्रतिशत जीएसटी कहा जाएगा।

तो 20 प्रतिशत जीएसटी चुकाने के बाद उस व्यक्ति को टोटल 120 रुपया खर्च करना पड़ेगा। यानी कि 120 रुपया उसने रॉ मटिरियल वाले को पे कर दिया। अब मान लीजिये कि 50 रुपया उसने इस रॉ मटिरियल में लगाकर एक नयी वस्तु का उत्पादन किया।

अब वो जो 50 रुपया है उसे वैल्यू एडिशन यानी कि मूल्यवर्धन कहा जाता है। क्योंकि उसी के जुडने के उस वस्तु की कीमत 170 रुपया हुआ है।

वस्तु की कीमत 170 रुपया हो गया है, लेकिन जब व्यक्ति A उस वस्तु को किसी व्यक्ति B को बेचेगा तो 170 रुपया में न बेचकर वो सिर्फ 150 रुपया में बेचेगा। ऐसा क्यूँ?

ऐसा इसीलिए क्योंकि जीएसटी सिर्फ वैल्यू एडिशन पर लगता है न कि टैक्स पर। अगर आपने VAT वाला लेख पढ़ा है तो आप समझ रहे होंगे।

अब B को भी उस पर 20 प्रतिशत जीएसटी चुकाना पड़ेगा। यानी कि 150 का 20 प्रतिशत जो कि 30 रुपया होता है। इस हिसाब से देखें तो 15 रुपए CGST का हुआ और 15 रुपए SGST का हुआ। दोनों मिलाकर 30 रुपए ।

B को उस हिसाब से 180 रुपए देने होंगे। इस प्रकार B, A को 180 रुपया चुकाएगा। पर A सिर्फ 10 रुपया टैक्स के रूप में चुकाएगा। क्योंकि 20 रुपया तो उसने पहले ही चुका दिया है। अब वो 20 रुपया उसे इनपुट क्रेडिट के तौर पर मिल जाएगा। कैसे मिलेगा?

क्यूंकी A ने पहले ही 20 रुपया चुका दिया है, जिसमें से 10 रुपया CGST का था और 10 रुपया SGST का था।

ये क्रमशः CGST और SGST से घट जाएगा। B का CGST 15 रुपया है उसमें से A का 10 रुपया CGST घटने के बाद 5 रुपया बच जाएगा। इसी प्रकार B का SGST भी 15 रुपया है। उसमें से A का 10 रुपया SGST घट जाने के बाद भी 5 रुपया बचेगा।

मतलब की कुल 10 रुपए A को टैक्स के रूप में पे करना पड़ेगा। अब अगर आपको याद हो तो समझ रहे होंगे कि ये भी वैट की तरह ही है।

यहाँ भी जो टैक्स के 30 रुपए है वो आउटपुट टैक्स लायबिलिटी है। वहीं जो पहले ही चुका दिया गया है यानी कि 20 रुपए वो इनपुट टैक्स क्रेडिट है। कुल VAT के निकालने के लिए हम आउटपुट – इनपुट कर देते थे तो VAT निकल आता था। यहाँ भी वहीं हो रहा है।

? अब फिर से जब व्यक्ति B उस वस्तु को किसी और को बेचेगा तो जाहिर है उस पर कुछ मुनाफा तो लेगा। मान लेते हैं कि वो उस वस्तु पर मुनाफा 50 रुपए लेता है।

तो अब उस वस्तु की कीमत हो गयी 200 रुपए। आप सोच रहे होंगे कि अभी तो 180 रुपए हुआ था। तो वो जो 30 रुपया था वो तो उसका जीएसटी था। इसीलिए अब सिर्फ 150 में 50 रुपया वैल्यू एडिशन का जुड़ेगा। इस प्रकार उस वस्तु का मूल्य 200 रुपया हो जाएगा।

तो अगर 20 प्रतिशत फिर से इसपर जीएसटी लगेगा। याद रखिए कि ये तब तक लगेगा जब तक की वो वस्तु उपभोक्ता तक न पहुँच जाये।

अब अगर मान लेते हैं कि ये वस्तु उपभोक्ता को मिल रहा है तो 20 प्रतिशत जीएसटी लगने के बाद ये हो गया कुल 240 रुपए। कैसे हुआ उम्मीद है समझ रहे होंगे।

उपभोक्ता को तो 240 ही पे करना पड़ेगा। पर व्यक्ति B ने चूंकि 30 रुपया जीएसटी पहले ही चुका दिया है। तो जब ये 40 रुपया उसके पास आएगा तो वो सिर्फ 10 रुपए चुकाएगा क्योंकि उसमें से 30 रुपया तो उसने पहले ही चुका दिया है, जब उसने ये वस्तु खरीदी थी।

कुल मिलाकर देखें तो उस एक वस्तु पर टोटल टैक्स 40 रुपया पे करना पड़ा है। वो कैसे? 20 रुपया तो A ने रॉ मटिरियल खरीदते समय चुका दिया था।

फिर उसने वैल्यू एडिशन के बाद 10 रुपए चुकाया और अंत में व्यक्ति B ने 10 रुपया चुकाया। और चूंकि कुल वैल्यू एडिशन 200 रुपए है जिसका 20 प्रतिशत 40 ही तो होता है। यानी कि हिसाब ठीक है।

इस तरह से आप समझ गए होंगे कि जीएसटी VAT की तरह सिर्फ वैल्यू एडिशन पर लगता है। पहले A ने 50 रूपये का वैल्यू एडिशन किया तो उसका 20 प्रतिशत देखें तो 10 रुपया हुआ। उसी प्रकार B ने उसमें 50 रुपया वैल्यू एडिशन किया तो उसका भी 20 प्रतिशत 10 ही होता है।

यहाँ याद रखिए कि जहां से रॉ मटिरियल खरीदा गया है उसे इनपुट क्रेडिट के तौर पर कुछ भी नहीं मिलता है। मिलता उसे ही है जो वैल्यू एडिशन करता है।

अंतर्राज्यीय लेनदेन में IGST

जैसा कि हम जानते हैं कि IGST अंतरराज्यीय लेनदेन पर लगता है और ये पहले के सेंट्रल सेल्स टैक्स का ही जीएसटी वर्जन है। जो कि अनुच्छेद 269 A का हिस्सा है।

इतना समझ लीजिये कि इस व्यवस्था में भी जो राज्य और राज्य के बीच लेनदेन होता है उसका पूरा टैक्स राज्य को ही मिलता है, पर जब IGST काम करता है तो वो धन राज्य और केंद्र दोनों में बंटता है पर किस अनुपात में बंटेगा वो वित्त आयोग तय करता है।

? मान लेते हैं चार लोग है A B C D और जीएसटी की दर 20 परसेंट है। A किसी से 100 रुपए का रॉ मटिरियल खरीदता है। 20 परसेंट जीएसटी लगने के कारण A उस व्यक्ति को 120 रुपया पे करेगा। क्यूंकी 10 रुपया CGST और 10 रुपया SGST ।

अब A उसमें 50 रुपए का वैल्यू एडिशन करता है और B को बेच देता है। अब जैसा कि हम पहले भी देख चुके है कि टैक्स पर तो टैक्स लगता नहीं है इसीलिए अब उस वस्तु की कीमत होगी 150 रुपए। मान लेते हैं अभी तक ये एक ही राज्य में लेनदेन हो रहा है इसीलिए फिर से CGST और SGST ही लगेगा।

चूंकि ये दोनों 10 – 10 परसेंट यानी कि 20 परसेंट है तो व्यक्ति B जो A को पे करेगा, उसमें 30 रुपया और जुड़ जाएगा। 15 रूपये CGST का और 15 रूपये SGST का।

तो अब हो जाएगा 150+30=180 रुपया। यहाँ जो 15 रूपये का SGST लगा है, उसे आप याद रखिए। आगे चलकर यहीं 15 रूपया C को मिलेगा।

याद रखिए कि हमने ऊपर भी चर्चा किया है कि ये जो 30 रुपया टैक्स जो कि A को दिया जा रहा है उसमें से सिर्फ 10 ही वो टैक्स के रूप में भरेगा। क्योंकि 20 रुपया वो पहले ही भर चुका है।

अब तक A और B के बीच में जो लेनदेन हुआ है वो एक ही राज्य के भीतर हुआ है इसिलिए अब तक IGST की एंट्री नहीं हुई है।

? पर अब जब मान लेते हैं कि व्यक्ति B किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति C को वस्तु बेच रहा है। अभी उस वस्तु की कीमत 150 रुपए है। ऐसा क्यों है?

क्योंकि व्यक्ति A ने 50 रुपया का ही तो वैल्यू एड किया था। बाद बाँकी तो टैक्स था। अब जब B उस वस्तु को बेचेगा तो वो भी तो कुछ प्रॉफ़िट लेगा।

मान लेते हैं कि 50 रुपया वो प्रॉफ़िट लेता है तो उस वस्तु की कीमत अब 200 हो गयी। चूंकि ये दूसरे राज्य को बेच रहा है इसीलिए यहाँ IGST लगेगा।

20 प्रतिशत IGST लगने के बाद उस वस्तु कि कीमत 240 हो गया। मतलब कि व्यक्ति B व्यक्ति C से 240 रुपया लेगा। और ये 40 रूपये IGST है।

अब सवाल ये है कि व्यक्ति B को इनपुट क्रेडिट कितना मिलेगा? क्योंकि जैसा कि हम जानते हैं, CGST का इनपुट क्रेडिट CGST में से मिलता है और SGST का इनपुट क्रेडिट बेनीफिट SGST में से मिलता है।

लेकिन यहाँ तो व्यक्ति B ने IGST के थ्रू व्यापार किया है। तो इसके लिए व्यवस्था ये है कि पहले IGST का इनपुट देखा जाएगा। फिर CGST और SGST का।

जब B ने वो वस्तु A से खरीदा था तो वहाँ IGST तो लगा नहीं था इसीलिए IGST में कोई क्रेडिट नहीं मिलेगा।

लेकिन CGST और SGST तो लगा था। वो भी 10 परसेंट CGST था और 10 परसेंट SGST था। यानी कि 15 – 15 रुपए था।

इसीलिए ये 30 रुपए B को इनपुट क्रेडिट के तौर पर मिल जाएगा। यानी कि व्यक्ति B ने केवल 10 रुपए चुकाए। ये जो 10 रुपए है ये IGST है। इसे याद रखें।

अब वो वस्तु व्यक्ति C के पास है। उसपर पहले से ही 15 रूपये CGST, 15 रूपये SGST और 10 रूपये IGST लग कर उसके पास पहुंचा है।

मान लीजिये कि व्यक्ति C भी 50 रुपए प्रॉफ़िट लेकर वो सीधे उपभोक्ता को बेच देते हैं। टैक्स हटाकर उस वस्तु की कीमत 200 रुपए थी अब 50 रुपए उसमें जोड़ने के बाद उस वस्तु की कीमत 250 रुपए हो गयी।

अब अगर यहाँ देखें तो व्यक्ति C अपने ही राज्य के उपभोक्ता को समान बेच रहा है। इसीलिए यहाँ IGST तो लगेगा नहीं। क्योंकि जब एक ही स्टेट के अंदर लेनदेन होता है तब IGST नहीं लगता है लेकिन CGST और SGST पहले की तरह ही लगेगा।

अब अगर इस पर 20 परसेंट जीएसटी यानी कि 10 परसेंट CGST और 10 परसेंट SGST लगेगा तो उस वस्तु का मूल्य हो जाएगा 300 रुपए।

वो उपभोक्ता से 300 रुपए ले लेगा। अब फिर से यहाँ एक समस्या है कि लगा तो उस वस्तु पर IGST था लेकिन जब वो बेचा तो उसपे CGST और SGST लगा।

इसको इनपुट क्रेडिट का लाभ कैसे मिलेगा? अब आपको याद हो तो C के पास 15 रुपए CGST का है 15 रुपए SGST का है। और 10 रुपए IGST का है। वो क्यों?

क्योंकि जब व्यक्ति B ने C को बेचा था, तब C ने 10 रुपया IGST चुकाया था। क्योंकि लेनदेन अंतर्राज्यीय था।

अब जो व्यक्ति C को, व्यक्ति D से 300 रूपये मिला है, उसमें से 50 रूपये तो टैक्स का है। व्यक्ति C ने 40 रुपया एकमुश्त IGST के रूप में चुकाया था।

इसीलिए उस 50 में से केवल 10 रूपये ही वो टैक्स के रूप में चुकाएगा। 15 रूपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट उसे CGST से मिल जाएगा, 10 रूपये का क्रेडिट उसे IGST से मिल जाएगा।

और 15 रूपये का SGST भी मिलेगा लेकिन वो क्रेडिट पहले केंद्र के पास जाएगा फिर केंद्र C को वो क्रेडिट ट्रांसफर कर देगा। क्योंकि मामला IGST का है।

इस प्रकार C को उस 50 रूपये में से पे करना होगा सिर्फ 10 रूपये। बाद बांकी के 40 रूपये का इनपुट क्रेडिट टैक्स उसे मिल जाएगा।

और यहाँ पर ये चेन खत्म हो जाएगा क्योंकि अब वो वस्तु उपभोक्ता को मिल चुका है।

?? अब आपके मन में एक सवाल आ सकता है कि चूंकि एसजीएसटी तो पूरा राज्य का होता है। फिर वो क्रेडिट व्यक्ति C को क्यूँ मिलेगा। क्योंकि वो तो दूसरे राज्य का है।

वो मिलेगा क्योंकि जीएसटी एक डेस्टिनेशन बेस्ड टैक्स है। इसीलिए B के पास जो 15 रुपए का SGST था वो केंद्र को भेज देगा और केंद्र वो 15 रुपए उस राज्य को भेज देगा जहां पर ये सारा चेन खत्म हुआ।

अब अगर आपको चेक करना है तो चेक कर लीजिये। A ने 150 रूपये का वैल्यू एडिशन किया था (100 रूपये का रॉ मटिरियल था और 50 रूपये उसे खुद उसमें जोड़े थे)। तो उसका 20 परसेंट होता है। 30 रूपये। और 30 रुपया उसने पे भी किया है।

B ने 50 रुपए प्रॉफ़िट जोड़ा था। उसका 20 परसेंट होता है – 10 रूपये और B ने 10 रुपया ही पे किया है।

इसी प्रकार C ने भी 50 रूपये प्रॉफ़िट जोड़ा था। और उसने भी 20 परसेंट टैक्स भरा था, यानी कि 10 रूपये। तीनों को जोड़ लें तो 50 रूपये होता है।

यानी कि कुल 250 रूपये का वैल्यू एडिशन हुआ है। और उसका 20 प्रतिशत निकाल लें तो 50 रुपया ही होता है। यानी कि हिसाब बिलकुल सही है।

? ये था जीएसटी का काम करने का तरीका। अगर एक बार में समझ में न आए तो उसे फिर से पढ़िये, पर समझिए क्योंकि, ये समझने के बाद ↗️केंद्र और राज्य के मध्य जो वित्तीय संबंध है। उसे समझना फिर आसान हो जाएगा। अब आप नीचे क्लिक करके केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध पढ़ सकते हैं।

केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध
Center-State Financial Relations

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