Indian GPS NavIC । IRNSS । क्या NavIC अमेरीकन GPS की जगह ले पाएगा?

आखिरकार indian gps navic ने काम करना शुरू कर दिया है। तो आइये जानते है इसके बारे में विस्तार से ।

Indian GPS NavIC क्या है?

IRNSS- Indian Regional Navigation Satellite System यानी कि भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली भारत का एक स्वायत नौवहन उपग्रह प्रणाली है जो सटीक रियल टाइम स्थिति (Position) बताने में सक्षम है।

इसका ऑपरेशनल नाम यानी कि उपयोग में लाया जाने वाला नाम NavIC – NAVigation with Indian Constellation है। 

NavIC चर्चा में क्यूँ है?

अमेरीकन जीपीएस से भी ज्यादा सटीक कही जाने वाली, ISRO द्वारा निर्मित NavIC को पिछले साल मोबाइल चिप बनाने वाली कंपनी Qualcomm ने NavIC को पूरा सपोर्ट देने की बात कही थी

एक लंबे अरसे का इंतज़ार अब खत्म हुआ Qualcomm ने अब NavIC को सपोर्ट देना शुरू कर दिया है। मतलब की अब हम मैप के लिए और इसी प्रकार के अन्य सर्विसेज के लिए गूगल के मैप की जगह स्वदेशी NavIC का इस्तेमाल कर पाएंगे।

अभी ये सर्विस हाल ही में xiaomi द्वारा लॉंच किया गया फोन Redmi Note 9 pro में दिया गया है। उम्मीद है, धीरे-धीरे ये अन्य दूसरे ब्रांड के फोन में भी आ जाएगा।  

GPS काम कैसे करता है?

indian gps navic photo how to work

NavIC पर कैसे काम शुरू हुआ? 

मई 1999 की बात है। घुसपैठियों का भेष धरके पाकिस्तानी सैनिक जम्मू-कश्मीर घुस आये और कारगिल में कई जगहों पर कब्जा जमकर बैठ गये। भारतीय सेना को घुसपैठियों की सही लोकेशन का पता लगाने में मुश्किल आ रही थी।

ऐसे में भारत ने अमेरिका से मदद मांगी । अमेरिका के पास उस समय GPS प्रणाली था जो सही लोकेशन भारत को मुहैया करा सकता था। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

इस घटना को 20 वर्ष से अधिक हो चुके है । इसरो ने उसकी अहमियत को समझा और न केवल स्वदेशी GPS तकनीक पर काम किया बल्कि मैपिंग और जियो लोकेशन से संबन्धित पूरे एक सिस्टम का निर्माण कर लिया।

Indian GPS NavIC किस मामले में दूसरों से अलग है?

ये अमेरिका के जीपीएस और रूस के ग्लोनास से भी अपेक्षाकृत ज्यादा सटीक है। ISRO की माने तो इसका position accuracy 20 मीटर से भी ज्यादा है।

जहां अमेरीकन जीपीएस में केवल L बैंड का उपयोग किया गया है NavIC में L और S दो बैंडों का इस्तेमाल किया गया है। जिससे कि इसकी क्षमता इसके समकक्षों से अपेक्षाकृत और बढ़ जाती है।

हालांकि जीपीएस पूरे पृथ्वी को कवर करता है लेकिन चूंकि NavIC एक क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली है यह भारत के बाहर केवल 1500 किलोमीटर तक के दायरे में काम करता है।

No. of Satellites in Indian GPS NavIC

इस पूरे प्रणाली में कुल 7 उपग्रह है। तीन पृथ्वी के Geo Stationary Orbit में और चार Geo Synchronous Orbit में । हालांकि दो और उपग्रह होंगे जो स्टैंड बाय मोड में रखे जाएँगे।

जीपीएस और कुछ अन्य देशों के प्रणाली में कितने उपग्रह है आप इसे यहाँ इस तस्वीर में देख सकते हैं।

difference between navic and gps

indian gps navic

ये दो प्रकार का सर्विस प्रोवाइड करता है। 

1. Standard Positioning System यानी की APS 

इसका इस्तेमाल पब्लिक डोमेन में किया जाएगा । यानी कि हम और आप इसका इस्तेमाल दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए करेंगे।

2. Restricted Service

इसका इस्तेमाल रक्षा क्षेत्र में या सामरिक महत्व के क्षेत्रों में किया जाएगा। 

NavIC के फायदे

key features of navic

– दूर-दराज इलाकों पर नजर 

– ट्रेफिक जाम में इस्तेमाल 

– ट्रेनों की रियल टाइम मैपिंग 

– वैकल्पिक मार्गों की जानकारी 

– आपदा प्रबंधन में मदद 

– पूर्वानुमान में मदद 

-कूटनीतिक लाभ के लिए

– नक्शे तैयार करने में आसानी 

– भूगर्भीय आंकड़े जुटाने में सहायक 

– भटक गये विमानों की खोज 

– सेना को सामरिक जानकारी

– जीपीएस तकनीक इस्तेमाल 

NavIC में इस्तेमाल किए गए उपग्रह

indian gps navic
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