Insurance in hindi : Meaning, Types, Benefits

इस लेख में हम सरल और सहज हिन्दी में बीमा (Insurance in hindi) पर चर्चा करेंगे तथा इसके विभिन्न पक्षों को समझने का प्रयास करेंगे। शेयर मार्केट ज़ीरो लेवल से समझने के लिए ↗️यहाँ क्लिक करें।
Insurance in hindi

Insurance Meaning

बीमा पूंजी बाज़ार का एक घटक है जिसमें कोई कंपनी या सरकार एक निश्चित प्रीमियम के भुगतान के बदले कुछ निश्चित नुकसान जैसे- क्षति, बीमारी या मृत्यु के लिए मुआवजे की गारंटी प्रदान करता है। आसान भाषा में कहें तो कोई भी ऐसी चीज़ जो जोखिम को कम करे उसे बीमा कहते है।

◾ ये दो पक्षों के बीच के कानूनी समझौता होता है। जिसमें से एक पक्ष बीमाकर्ता (Insurer) यानी कि बीमा कंपनी होता है और दूसरा पक्ष बीमाधारक (Insured) यानी कि कोई व्यक्ति होता है।

◾ बीमाकृत आकस्मिकता (Insured contingency) के होने पर बीमा कंपनी बीमाधारक के घाटे को कम करने का वादा करती है और बीमाधारक, बीमाकर्ता द्वारा किए गए इस वादे के बदले में एक खास प्रीमियम का भुगतान करता है।

बीमा पॉलिसी (Insurance policy)

बीमाकर्ता और बीमाधारक के बीच एक समझौते के फलस्वरूप जो एक कानूनी अनुबंध (contract) तैयार होता है उसे बीमा पॉलिसी (Insurance policy) कहा जाता है। इस बीमा पॉलिसी में उन सारे शर्तों और परिस्थितियों का विवरण होता है जिसके तहत बीमा कंपनी बीमा राशि का भुगतान बीमाधारक को करेगी।

बीमा के प्रकार
(Type of insurance in hindi)

भारत के संदर्भ में देखें तो बीमा को मुख्यतः दो कैटेगरी में बांटा जाता है। 1. जीवन बीमा (Life insurance) 2. साधारण बीमा (General insurance)

जहां जीवन बीमा में किसी इंसानी ज़िंदगी का बीमा किया जाता है वहीं साधारण बीमा में परिसंपत्तियों (Assets) का बीमा किया जाता है। तो आइये इन दोनों को और विस्तार से समझते हैं।

1. जीवन बीमा (Life insurance)

जीवन बीमा ( Life Insurance) में दुर्घटना से लेकर मृत्यु तक जोखिम का वहन किया जाता है। इसका मतलब ये है कि बीमाधारक की दुर्घटना या मृत्यु होने पर बीमाधारक को या फिर उसके द्वारा नामांकित व्यक्ति (Nominee) को बीमा कंपनी की तरफ से मुआवजा मिलता है।

भारत सरकार ने 1956 में बीमा क्षेत्र को राष्ट्रीयकृत कर दिया था तथा निजी क्षेत्र में बीमा कंपनियों के खुलने पर भी रोक लगा दी गई थी। उसी समय काम कर रहे 245 देसी और विदेशी जीवन बीमा कंपनियों को अधिगृहीत करके भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India) यानी कि LIC की स्थापना की गई थी।

आज की बात करें तो यही एक सरकारी कंपनी है जो जीवन बीमा करती है बाद बांकी जितनी भी जीवन बीमा करने वाली कंपनी मिलेंगी सब निजी कंपनियाँ है। आप चाहे तो उस सब की लिस्ट ↗️विकिपीडिया पर देख सकते हैं।

जीवन बीमा के प्रकार
(Types of life insurance in hindi
)

🔘 जीवन बीमा आमतौर पर 7 प्रकार के होते हैं। जिसकी चर्चा नीचे की गई है।

1. टर्म लाइफ इंश्योरेंस (Term life insurance) – जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ये एक निश्चित समय अवधि के लिए होता है। ये समय अवधि 10 साल, 20 साल या फिर 30 साल हो सकता है। इस समय अंतराल के अंदर में अगर बीमाधारक की मृत्यु हो जाती है तो उसके द्वारा नामांकित व्यक्ति (Nominee) को एक तय रकम दी जाती है। इस लाइफ इंश्योरेंस की खासियत ये है कि इसका प्रीमियम बहुत कम होता है।

2. यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (Unit linked insurance plan) – ULIP निवेश और इंश्योरेंस का मिश्रण है जिसमें इंश्योरेंस, वेल्थ क्रिएशन और टैक्स-सेविंग इनवेस्टमेंट तीनों का फायदा मिलता हैं। यूलिप में जो पैसा प्रीमियम के रूप दिया जाता हैं, वह आंशिक रूप से फंड में (यानी कि बॉन्ड और शेयर में) और आंशिक रूप से रिस्क कवर पर लगाया जाता है। हालांकि बीमाधारक को ये तय करने की छूट होती है कि वो अपना कितना पैसा शेयर में लगाना चाहता है और कितना पैसा बॉन्ड में। इसमें फ़िक्स्ड रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती है क्योंकि रिटर्न मार्केट के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है।

3. अक्षय-निधि पॉलिसी (Endowment Policy) – ULIP की तरह ये भी निवेश और बीमा का मिश्रण है। लेकिन इसमें अंतर ये है कि ये एक निश्चित अवधि का रिस्क कवर करता है उस अवधि के खत्म होने पर बोनस के साथ तय रकम बीमाधारक को वापस कर दिया जाता है। और अगर बीमाधारक को उस अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है तो फिर उसे द्वारा नामांकित व्यक्ति को तय रकम वापस कर दिया जाता है लेकिन बिना बोनस के।

4. मनीबैक इंश्योरेंस पॉलिसी (Moneyback insurance policy) – ये वाला लाइफ इंश्योरेंस भी निवेश और इंश्योरेंस का मिश्रण है ऊपर वाले दोनों बीमा पॉलिसीयों की तरह। पर इसमें अंतर ये है बीमित राशि (Assured Sum) पॉलिसी अवधि के दौरान ही किस्तों में मिलना शुरू हो जाता है। आखरी किस्त पॉलिसी अवधि खत्म होने पर मिलती है। अगर पॉलिसी अवधि के दौरान ही बीमाधारक की मृत्यु हो जाये तो बीमित राशि उसके द्वारा नामांकित व्यक्ति को मिलता है।

5. आजीवन लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी (Whole Life insurance policy) – इस इंश्योरेंस का कोई फ़िक्स्ड अवधि नहीं होता है। यानी कि जैसे ही आपकी मृत्यु हुई (भले ही आपकी उम्र कितनी ही क्यों न हो) बीमित राशि (Assured Sum) आपके द्वारा नामांकित व्यक्ति को मिल जाएगा। इसका प्रीमियम बहुत ज्यादा होता है।

6. रिटायरमेंट प्लान (Retirement Plan) – इस प्रकार की बीमा योजना चिंता मुक्त सेवानिवृत्ति जीवन जीने के लिए पर्याप्त मात्रा में पूंजी बनाने में मदद करती है। तय की गई एक अवधि के बाद बीमाधारक को या उसकी मृत्यु के बाद उसके द्वारा नामांकित व्यक्ति को पेंशन के तौर पर एक निश्चित रकम का भुगतान किया जाता है। यह भुगतान मासिक, छमाही या सालाना आधार पर हो सकता है. आप चाहे तो 60 वर्ष की आयु के बाद वार्षिक भुगतान या एकल भुगतान (single payment) का विकल्प चुन सकते हैं।

7. चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी (Child insurance policy) – ये प्लान बच्चों की शिक्षा के खर्च, विदेशी अध्ययन, विवाह आदि जैसे जरूरतों को देखते हुए डिजाइन किए गए हैं। अधिकांश चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी 18 वर्ष की आयु के बाद बच्चे को एकल भुगतान या वार्षिक भुगतान प्रदान करती हैं। यदि पॉलिसी अवधि के दौरान माता-पिता का निधन हो जाता है, तो बच्चे या परिवार को भुगतान किया जाता है। कुछ बीमा कंपनियां पॉलिसीधारक की मृत्यु के मामले में प्रीमियम को माफ कर देती हैं और परिपक्वता अवधि के बाद एकमुश्त भुगतान करती हैं।

2. साधारण बीमा (General insurance)

जैसा कि हमने ऊपर भी पढ़ा साधारण बीमा में परिसंपत्तियों (Assets) का बीमा किया जाता है जिसमें में वाहन, घर, पशु, फसल, आदि शामिल होते हैं।

भारत सरकार ने 1971 में साधारण बीमा क्षेत्र में काम कर रहे 107 देसी एवं विदेशी कंपनियों को अधिगृहीत कर एक सरकारी बीमा कंपनी साधारण बीमा निगम (General insurance corporation) का गठन किया। आज चार कंपनियाँ इसके अंडर काम करती है – (1) The Oriental Insurance Company (2) United India Insurance Company (3) National Insurance Company (4) New India Assurance। इसके अलावा जितनी भी कंपनियाँ

आपको साधारण बीमा करने वाली दिखती है सब निजी कंपनियाँ है। आप उस सब की लिस्ट ↗️विकिपीडिया पर देख सकते हैं।

साधारण बीमा के प्रकार
(Types of general insurance in hindi
)

🔘 इसकी कोई एक निश्चित संख्या तो नहीं है फिर भी आइये उनमें से कुछ को देख लेते हैं।

मोटर बीमा (motor insurance) – इसके तहत मोटर वाहन, दोपहिया, तिपहिया या चौपहिया वाहन की क्षति या चोरी के लिए बीमा कराया जाता है। मोटर्स व्हीकल एक्ट (Motors Vehicle Act) के तहत भारत में मोटर बीमा अनिवार्य है।

गृह बीमा (Home insurance) – घर का बीमा घर और उसके अंदर की वस्तुओं की सुरक्षा करता है। बीमा पॉलिसी खरीदने के बाद अगर घर को किसी भी तरह का नुकसान होता है तो उसकी भरपाई बीमा कंपनी द्वारा किया जाता है।

यात्रा बीमा (travel insurance) – यात्रा बीमा आपकी यात्रा को कवर करता है, ये घरेलू यात्रा भी हो सकती है और विदेशी यात्रा भी। कुछ यात्रा बीमा कीमती सामान के नुकसान या चोरी को कवर करता है वहीं कुछ यात्रा बीमा दुर्घटना और मेडिकल इमरजेंसी को कवर करती हैं।

इसी तरह से सामान्य बीमा के कई अन्य प्रकार भी होते है जो समय-समय पर आते रहते हैं। जैसे कि – समुद्री बीमा (Marine Insurance), वाणिज्यिक बीमा (commercial insurance), ग्रामीण बीमा (Rural insurance), फसल बीमा (Crop insurance) इत्यादि।

⬛ भारत सरकार द्वारा 2002 में कृषि बीमा को बढ़ावा देने के लिए एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AICIL) की स्थापना की गई। 2016 में जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लॉंच की गई थी वो इसी सरकारी कंपनी AICIL के द्वारा संचालित की जा रही है।

तो कुल मिलाकर आज 6 सरकारी कंपनियाँ बीमा क्षेत्र में काम कर रही है जिसमें से एक जीवन बीमा के क्षेत्र में, 4 साधारण बीमा क्षेत्र में तथा 1 कृषि बीमा के क्षेत्र में काम कर रही है (हालांकि कृषि बीमा को साधारण बीमा ही माना जाता है)। इसके अलावा सभी निजी कंपनियाँ बीमा क्षेत्र में काम कर रही है। इन सभी का नियमन, बीमा नियमन एवं विकास प्राधिकरण (Insurance Regulation and Development Authority) यानी IRDA द्वारा किया जाता है। इसकी स्थापना सन 2000 ई. में की गई थी।

बीमा के फायदे
(Benefits of insurance
in hindi)

🟢 बीमा एक जोखिम प्रबंधन उपकरण है जो न केवल व्यक्ति और व्यवसायों को लाभ पहुंचाता है बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था को कई तरीकों से लाभान्वित करता है। बीमा के कुछ महत्वपूर्ण लाभ निम्नलिखित हैं:-

मानसिक शांति (peace of mind) – चूंकि बीमा विभिन्न अनिश्चितताओं से सुरक्षा प्रदान करता है जो आपको या आपके परिवार को वित्तीय संकट में डाल सकता हैं इसीलिए बीमा होने से मानसिक शांति मिलती है एक प्रकार के सुरक्षा का अहसास होता है।

जोखिम में कमी (Risk reduction) – दुर्घटना या किसी अप्रत्याशित घटना से होने वाले जोखिम को वित्तीय मदद से कम करने की कोशिश करता है।

आसानी से ऋण मिल जाना (Easy loan) – खासतौर पर होम लोन के मामले में, बीमा कवर होने से ऋणदाता से आसानी से ऋण प्राप्त कर सकने की गुंजाइश बढ़ जाती है।

बचत की आदत (Saving habit) – कई जीवन बीमा ऐसे है जो निवेश सह संरक्षण लाभ के साथ आते हैं। जैसे कि एंडोमेंट इंश्योरेंस (Endowment Insurance ) जैसी पॉलिसी लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्य हासिल करने में मदद करती हैं।

कर लाभ प्रदान करना (Providing tax benefits) – कई प्रकार के बीमाओं में भुगतान किए गए प्रीमियम पर कर लाभ मिलता है। उदाहरण के लिए, जीवन बीमा योजनाओं के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम को आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत छूट मिलती है। इसी प्रकार से स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम आयकर अधिनियम की धारा 80 डी के तहत छूट मिलती है।

◼ कुल मिलाकर आपने देखा कि बीमा के कितने फायदे है फिर भारत में कम ही लोग बीमा करवाते हैं। ऐसा क्यों है? इसके कुछ निम्नलिखित कारण है –

(1) बीमा के दावों के निबटारे की जटिल एवं लंबी प्रक्रिया;
(2) बीमा कंपनियों के नीति-नियमों का आसानी से समझ में नहीं आना;
(3) जनसंख्या में शिक्षा एवं जागरूकता का अभाव;
(4) बीमा कंपनियों पर जनता में विश्वास की कमी।

कुल मिलाकर ये है बीमा का बेसिक्स (insurance in hindi), उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। नीचे कुछ और लेख दिया गया है उसे भी जरूर पढ़ें।

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