National Legal Services Authority in Hindi: NALSA

इस लेख में हम राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (National Legal Services Authority) यानी कि नालसा (NALSA) पर सरल और सहज चर्चा करेंगे, और इसके विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का प्रयास करेंगे। अगर भारतीय ↗️न्याय व्यवस्था (judicial system) को ज़ीरो लेवल से समझना चाहते है तो दिये गए लिंक का इस्तेमाल करें।
National Legal Services Authority

NALSA: introduction

सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय सुनिश्चित हो ऐसा प्रस्तावना में लिखा हुआ है। इसके अलावा राज्य के नीति निदेशक तत्व वाले भाग के अनुच्छेद 39A में लिखा हुआ है कि समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता देना राज्यों एक दायित्व है। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 14 और 22 (1) भी राज्य के लिए कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य बनाते हैं।

इन सभी को सुनिश्चित करने और प्रस्तावना के वादे को पूरा करने के लिए 1987 में, संसद द्वारा कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम (Legal Services Authority Act) बनाया गया, जो 9 नवंबर, 1995 को लागू हुआ, इसे समाज के कमजोर वर्गों को मुफ्त और सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी समान नेटवर्क स्थापित करने के लिए लागू किया गया था।

मुफ्त मतलब क्या?

मुफ्त या नि:शुल्क कानूनी सेवाओं में शामिल है-
1. अदालती फीस, प्रोसेस फीस तथा अन्य सभी शुल्कों आदि का भुगतान जो कानूनी कार्यवाहियों में खर्च होता है,
2. कानूनी कार्यवाहियों में अधिवक्ताओं (Advocates) की सेवाएँ उपलब्ध कराना,
3. कानूनी कार्यवाहियों से संबन्धित आदेशों को प्रभावित प्रतियाँ तथा अन्य दस्तावेज़ प्राप्त करना एवं वितरित करना।
4. अपील, पेपर बुक आदि की तैयारी, जिसमें दस्तावेजों का मुद्रण एवं अनुवाद खर्च भी शामिल है।

कौन से लोग इसका लाभ उठा सकते हैं?

निम्नलिखित प्रकार के लोग इस मुफ्त कानूनी सेवाओं का लाभ लेने के लिए योग्य माने गए है –

  • महिलाएं और बच्चे
  • अनुसूचित जाति के सदस्य या अनुसूचित जनजाति
  • औद्योगिक कामगार (Industrial worker)
  • विकलांगता वाले व्यक्ति
  • कस्टडी में व्यक्ति
  • मानव तस्करी के शिकार
  • प्राकृतिक आपदाओं के शिकार,
  • जातीय / जातिगत हिंसा, औद्योगिक विकास
  • 1,00,000 / – से कम वार्षिक आय वाले व्यक्तियों को या केंद्र / राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित व्यक्तियों को

इस सुविधा का लाभ कहाँ उठाया जा सकता है?

निम्नलिखित में किसी भी संस्थान में इसका लाभ उठाया जा सकता है –

  • सिविल, क्रिमिनल और रेवेन्यू कोर्ट, ट्रिब्यूनल, न्यायिक या अर्ध-न्यायिक कार्यों का उपयोग करने वाला कोई भी प्राधिकरण
  • वे संस्थाएँ जो मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रदान करती हैं
  • राष्ट्रीय / राज्य / जिला स्तर पर कानूनी सेवा प्राधिकरण
  • तालुका / उप-मंडल कानूनी सेवा समिति
  • उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय कानूनी सेवा समितियाँ

Mission of National Legal Services Authority

कानूनी साक्षरता और जागरूकता प्रदान करके समाज के हाशिए पर मौजूद लोगों को और बहिष्कृत समूहों को कानूनी रूप से सशक्त बनाना ताकि उपलब्ध लाभों और हकदार लाभार्थियों के बीच अंतर को कम किया जा सके।

विवादों का अनौपचारिक, त्वरित, सस्ता और प्रभावी समाधान प्रदान करने के लिए लोक अदालतों की स्थापना करना ताकि नियमित न्यायालयों पर से बोझ को कम किया जा सकें। ↗️लोक अदालत (Lok Adalat) क्या होता है उसपर अलग से लेख उपलब्ध है।

राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (National Legal Services Authority)

राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण जिसे कि शॉर्ट में नालसा (NALSA) भी कहा जाता है; कानूनी सेवा प्राधिकरण में सबसे ऊपर होता है। इसमें मुख्य संरक्षक (Patron in Chief) का एक पद होता है, जो कि सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश होता है। इसके अलावा एक कार्यकारी अध्यक्ष (Executive Chairman) का पद होता है जो सुप्रीम कोर्ट का कोई भी जज हो सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय वैधानिक सेवा समिति (Supreme Court Legal Services Committee) जिसे कि शॉर्ट में SCLSC कहा जाता है। इसका गठन सुप्रीम कोर्ट में कानूनी सहायता कार्यक्रमों के प्रशासन एवं कार्यान्वयन के लिए किया गया है।

इसके नीचे प्रत्येक राज्य के उच्च न्यायालय के लिए एक राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (State Legal Services Authority) (जिसे कि शॉर्ट में SLSA कहा जाता है) होता है। और प्रत्येक उच्च न्यायालय में एक उच्च न्यायालय कानूनी सेवा समिति का गठन (High Court Legal Services Committee) किया गया है। जिसे कि शॉर्ट में HCLSC कहा जाता है। इसका काम भी वहीं है जो काम सुप्रीम कोर्ट के लिए SCLSC करता है।

इस सब के नीचे जिलों एवं ताल्लुकों में जिला कानूनी सेवा प्राधिकारण (District Legal Services Authority) यानी कि DLSA तथा ताल्लुका कानूनी सेवा प्राधिकरण (Taluka Legal Services Authority) यानी कि TLSA का गठन किया गया है।

इतना इसीलिए किया गया है ताकि नालसा की नीतियाँ एवं निर्देशों को प्रभावी बनाया जा सके साथ ही लोगो को नि:शुल्क कानूनी सहायता तथा राज्यों में लोक अदालतों का संचालन अच्छी तरह से हो सकें।

अभी जितना ऊपर पढ़ा है उसको आप इस सांगठनिक चार्ट (Organizational chart) में देख सकते हैं। अभी देशभर में 36 SLSA, 36 HCLSC, 664 DLSA और 2254 TLSA काम कर रही है।

National Legal Services Authority

◼️ राज्य वैधानिक सेवा प्राधिकरणों (SLSA), जिला वैधानिक सेवा प्राधिकरणों (DLSA), ताल्लुक वैधानिक सेवा प्राधिकरणों (TLSA) आदि को निम्नलिखित कार्य सौंपे गए है-

1. योग्य व्यक्तियों को मुफ्त एवं सक्षम कानूनी सेवाएँ उपलब्ध कराना,
2. विवादों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा हो सके इसके लिए लोक अदालतें आयोजित करना,
3. ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता शिविरों का आयोजन करना अथवा अन्य कोई काम जो नालसा द्वारा सौंपे जाये।

नालसा (NLSA) देशभर में कानूनी सेवा प्राधिकरणों के लिए नीतियाँ, सिद्धांत, दिशा-निर्देश निर्धारित करता है तथा प्रभावी एवं सस्ती योजनाएँ भी बनाता है।

नालसा ने देश के विविध आबादी से हाशिए और बहिष्कृत समूहों की विशिष्ट श्रेणियों की पहचान की और निवारक के कार्यान्वयन के लिए विभिन्न योजनाएं बनाईं।

इसके अलावा विभिन्न स्तरों पर कानूनी सेवा प्राधिकरणों द्वारा किए जाने वाले और लागू किए जाने वाले रणनीतिक कानूनी सेवा कार्यक्रम बनाया।  

इन सभी जिम्मेदारियों को पूरा करने में, NALSA विभिन्न राज्य विधिक सेवा प्राधिकारियों, जिला विधिक सेवा प्राधिकारियों और अन्य एजेंसियों के साथ प्रासंगिक जानकारी के नियमित आदान-प्रदान के लिए समन्वय में काम करता है।

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