NRI और भारतीय मूल के विदेशी व्यक्ति में अंतर क्या है?

इस लेख में हम NRI यानी कि अप्रवासी भारतीय और भारतीय मूल के विदेशी व्यक्ति में अंतर जानेंगे और उन दोनों को भारत में क्या अधिकार प्राप्त है, उसके बारे में भी चर्चा करेंगे।

Difference between NRI and person of Indian origin

अगर आपने नागरिकता नहीं पढ़ा है तो पहले आप उसे यहाँ से पढ़ ले, ताकि कान्सैप्ट क्लियर हो सकें और अगर आपने पहले ही पढ़ रखा है तो आगे बढ़ें

एनआरआई और भारतीय मूल के व्यक्ति में अंतर

🌐 NRI (एनआरआई)

🌐 भारतीय नागरिक, जो साधारणत: किसी भी कारण से भारत के बाहर निवास करता हो और जिसके पास भारतीय पासपोर्ट हो एनआरआई कहलाता है।

NRI एनआरआई को सभी लाभ मिलते है जो हर भारतीय नागरिक को उपलब्ध होता है। कुल मिलाकर देखें तो ये एक भारतीय नागरिक ही होता है।

जो भारत में सभी प्रकार की गतिविधियों में सम्मिलित हो सकते है और उन पे वही सारे नियम और कानून लागू होते हैं जो किसी अन्य भारतीय नागरिक पे लागू होते हैं। उनको भी सारे के सारे मूलभूत अधिकार मिलते हैं। 

भारतीय मूल के व्यक्ति
(Person of Indian Origin)

💥 ऐसा व्यक्ति जिसका कोई पूर्वज भारतीय नागरिक था और जो वर्तमान में अन्य देश की नागरिकता या राष्ट्रीयता धारण करता है या करती है।  जिसका वह विदेशी पासपोर्ट धारक है। 

💥 इन लोगों को कोई विशेष लाभ नहीं मिलता । हाँ अगर केंद्र सरकार कोई लाभ देना चाहे तो वो दे सकती है। 

💥 ये लोग उसी प्रकार के गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं जिस प्रकार के वीजा पर ये आए हैं। 

💥 अगर ये लोग भारत में 180 दिनों से अधिक रहते हैं तो ये स्थानीय पुलिस प्राधिकारियों के साथ निबंधित होना आवश्यक होता है। 

💥 और अगर ये लोग भारत में 7 साल या उससे ज्यादा समय से रह रहा हो तो वे नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार नागरिकता के लिए पंजीकरण का आवेदन दे सकता है।

या फिर जैसा की नागरिकता वाले लेख में बताया गया है। OIC कार्ड के लिए आवेदन कर सकता हैं और दोहरी नागरिकता ले सकते हैं। जिससे की कुछ अधिकार मिल जाएँगे। 

यहाँ कुछ अधिकार है जो केवल भारतीयों के लिए है, इसको छोड़कर ये लोग दूसरे अधिकारों का लाभ ले सकने के अधिकारी होते हैं।

💥 अनुच्छेद 15, अनुच्छेद 16, अनुच्छेद 19, अनुच्छेद 29 और 30 तथा लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव में मतदान का अधिकार। 

💥 संसद एवं राज्य विधानमंडल की सदस्यता के लिए चुनाव लड़ने का अधिकार । 

💥 सार्वजनिक पदों, जैसे- राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, राज्यों के राज्यपाल, महान्यायवादी एवं महाधिवक्ता की योग्यता रखने का अधिकार । 

💥 यहाँ पर जो अनुच्छेद 15, 16, 19, 29, और 30 की जो बात कही गयी है वो क्या है, इसको मूल अधिकारों वाले लेख में बड़े ही मनोरंजक अंदाज में बताया गया है।

तो उसे यहाँ दोहराने का कोई फायदा नहीं है। उम्मीद करते हैं आप उसे वहाँ से पढ़ लेंगे ।

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