Parliamentary committees Part 2 (संसदीय समितियां)

इस लेख में संसदीय समितियों की दूसरे भाग (Parliamentary committees Part 2) की चर्चा करेंगे, पहले भाग को अगर आपने नहीं पढ़ा है तो पहले उसे जरूर पढ़ लें। ↗️Parliamentary committees Part 1

Parliamentary committees Part 2
Parliamentary committees Part 2

इसके पहले भाग में हमने संसदीय समितियों को दो भागों में बांटा था। तदर्थ समितियां और स्थायी समितियां

तदर्थ समितियों को हमने पूरी तरह से समझ लिया था। और स्थायी समितियों को हमने 6 भागों में बांटा था, जिसमें से इसके पहले भाग (वित्तीय समितियां) को हमने समझ लिया था। इस लेख में इसके दूसरे भाग से शुरू करेंगे और उसे समझेंगे।

2. विभागीय स्थायी समितियां
(Departmental standing committees)

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ये समितियां मंत्रालय के किसी विभाग से जुड़े हुए होते हैं। लोकसभा की नियम समिति की अनुशंसाओं पर संसद में 1993 में 17 विभाग संबंधी स्थायी समितियां गठित की गई, जिसे कि 2004 में बढ़ाकर 24 कर दिया गया।

इन स्थायी समितियों का मुख्य उद्देश्य संसद के प्रति कार्यपालिका को अधिक उत्तरदायी बनाना है, खासकर के इसके वित्तीय दायित्व को। ये समितियां संसद की बजट पर अधिक सार्थक चर्चा में सहायक होती है।

इसके अलावा यह संबन्धित मंत्रालय या विभाग के विधेयकों की जांच करता है और उसके वार्षिक प्रतिवेदनों पर विचार भी करती है।

इन 24 स्थायी समितियों के कार्यक्षेत्र में केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय और विभाग आते है। प्रत्येक स्थायी समिति में 31 सदस्य होते हैं (21 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से)। लोकसभा के सदस्यों का चुनाव लोकसभा अध्यक्ष करते है जबकि राज्य सभा के सदस्य का चुनाव सभापति द्वारा होता है।

इस समिति का कार्यकाल 1 वर्ष का होता है और इस समिति का भी हिस्सा कोई मंत्री नहीं हो सकता है।

इन समितियों की सिफ़ारिशे भी परामर्श की तरह होती है यानी कि संसद पर बाध्यकारी नहीं होती।

इन 24 स्थायी समितियों में से 8 समितियां राज्य सभा तथा 16 समितियां लोकसभा के अंतर्गत कार्य करती है। इन चौबीसों समितियों को 👉 विकिपीडिया से देख सकते हैं।

3. जांच समितियां
(Inquiry committees)

याचिका या आवेदन समिति (Petition or application committee)

जब भी कोई विधेयक लाया जाता है तो कई लोगों को उससे कुछ शिकायते होती है, कुछ लोग सुझाव देना चाहते है, कुछ लोग कुछ प्रावधानों को बदलवाना चाहते हैं, आम सार्वजनिक महत्व के मामलों पर दायर इसी प्रकार के याचिकाओं एवं आवेदनों पर जांच समिति विचार करती है। दोनों सदनों के अपने अलग-अलग समिति होते हैं जिसमें से लोकसभा समिति में 15 सदस्य जबकि राज्यसभा समिति में 10 सदस्य होते है।

विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee)

संसद के सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से और सामूहिक रूप से कुछ विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, जब इन विशेषाधिकारों के भंग होने का प्रश्न उत्पन्न होता है, उसे जांच करने के लिए और उस पर रिपोर्ट देने के लिए विशेषाधिकार समिति को निर्दिष्ट किया जाता है। दोनों सदनों के अपने-अपने विशेषाधिकार समिति होता है जो पीठासीन अधिकारी द्वारा प्रत्येक वर्ष गठित किया जाता है। समिति का कार्य अर्ध-न्यायिक प्रकृति का होता है फिर भी अगर ये कभी शिकायते करती है तो आमतौर पर इसे नजरंदाज नहीं किया जाता है।

आचार समिति (ethics Committee)

राज्यसभा में इस समिति का गठन 1997 तथा लोकसभा में सन 2000 में हुआ था। यह समिति संसद सदस्यों के लिए आचार संहिता लागू करवाती है। यह सांसदों के दुराचरण के मामलों की जांच करती है तथा समुचित कार्यवाही की सिफ़ारिश करती है।

4. परीक्षण एवं नियंत्रण के लिए समतियाँ
(Parliamentary
Committees for testing and control)

सरकारी आश्वासन समिति (Government assurance committee)

यह समिति मंत्रियों द्वारा सदन में समय-समय पर दिये गए आश्वासन, वचनों एवं प्रतिज्ञाओं की जांच करती है और किस सीमा तक उसका कार्यान्वयन हुआ है, इस पर रिपोर्ट देती है।

अधीनस्थ विधायन समिति (Subordinate legislative committee)

1953 में लागू इस समिति का का मुख्य कार्य इस बारे में छानबीन करना और रिपोर्ट सौंपना है कि क्या विनियम, नियम, उपनियम तथा नियमावली बनाने के लिए संसद द्वारा कार्यपालिका को संविधान द्वारा प्रदत शक्तियों का उपयोग भली-भांति हो रहा है या नहीं। दोनों सदनों में अलग-अलग समिति होती है जिसकी सदस्य संख्या 15 होती है।

सदन के पटल पुरः स्थापित दस्तावेजों की समिति (Committee of documents)

इस समिति का मुख्य काम सदन के पटल पर रखे गए सभी दस्तावेजों का अध्ययन करके यह देखना होता है कि वे संविधान के प्रावधान, अधिनियम अथवा नियम के अनुरूप है या नहीं। यह समिति 1975 में गठित की गई थी।दोनों सदनों की अपनी-अपनी समिति है जिसमें से लोकसभा समिति में 15 सदस्य होते है जबकि राज्यसभा समिति में 10 सदस्य।

अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति (Scheduled Castes and Scheduled Tribes Welfare Committee)

इस समिति का मुख्य काम है अनुसूचित जाति राष्ट्रीय आयोग तथा अनुसूचित जनजाति राष्ट्रीय आयोग के रिपोर्टों पर विचार करना और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के कल्याण से संबन्धित सभी मामलों की जांच करना, इस समिति के 30 सदस्य होते हैं – 20 लोकसभा तथा 10 राज्य सभा से।

महिला सशक्तिकरण समिति (Women Empowerment Committee)

इस समिति का मुख्य कार्य यह राष्ट्रीय महिला आओग के रिपोर्टों पर विचार करना तथा केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं की स्थिति, गरिमा तथा सभी क्षेत्रों में समानता के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी जांच करती है।यह समिति 1997 में गठित हुई थी। इसके 30 सदस्य होते हैं – 20 लोकसभा तथा 10 राज्यसभा से।

लाभ के पदों पर संयुक्त समिति (Joint Committee on Profit Posts)

यह समिति, केंद्र, राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा गठित विभिन्न समितियों तथा निकायों के गठन तथा चरित्र की जांच करती है इस समिति में 15 सदस्य होते है। 10 लोकसभा तथा 5 राज्यसभा से।

5. सदन के दैनंदिन के कामकाज से संबन्धित समितियां
(Parliamentary
Committees related to the day-to-day functioning of the House)

कार्य सलाहकार समिति (Work advisory committee)

इस समिति का मुख्य काम सदन के कार्यक्रमों तथा समय सारिणी को नियमित रखना है। यह सदन के समक्ष सरकार द्वारा लाये गए विधायी तथा अन्य कार्यों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित करती है। दोनों सदनों के अपने-अपने कार्य सलाहकार समिति होते हैं जिसमें से लोकसभा समिति के 15 सदस्य होते है तथा लोकसभा अध्यक्ष इसके अध्यक्ष होते है। राज्यसभा समिति में 10 सदस्य होते है तथा सभापति इसके अध्यक्ष होते हैं।

निजी सदस्यों के विधेयक तथा संकल्पों के लिए समिति (Committee for Private Members’ Bills and Resolutions)

इस समिति का मुख्य काम विधेयकों का वर्गीकरण करती है तथा निजी या व्यक्तिगत स्तर पर सदस्यों द्वारा प्रस्तुत विधेयकों और संकल्पों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित करना है। 15 सदस्यों वाला यह समिति लोकसभा की विशेष समिति है और जिसके अध्यक्ष उप लोकसभाध्यक्ष होते है। राज्यसभा में ऐसी कोई समिति नहीं होती।

नियम समिति (Rules committee)

यह समिति सदन में कार्य पद्धति तथा संचालन से संबन्धित मामलों पर विचार करती है और साथ ही सदन के नियमों में आवश्यक संशोधन भी सुझाती है। लोकसभा की बात करें तो उसमें 15 सदस्य होते हैं तथा लोकसभाध्यक्ष इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। इसी प्रकार राज्यसभा समिति में 16 सदस्य होते है और सभापति इसके पदेन अध्यक्ष होते है।

सदस्यों की अनुपस्थिति संबंधी समिति (Committee on Absence of Members)

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह समिति सदन की बैठकों से सदस्यों की अनुपस्थिति के अवकाश संबंधी सभी आवेदनों पर विचार करती है और ऐसे सदस्यों के मामलों की जांच करती है जो बिना अनुमति 60 या अधिक दिन तक सदन से अनुपस्थित रहे हों। यह समिति लोकसभा की एक विशेष समिति होती है जिसके 15 सदस्य होते हैं। राज्यसभा में ऐसी कोई समिति नहीं होती।

6. गृह-व्यवस्था समितियां
(Housekeeping Committees)

सामान्य प्रयोजन समिति (General purpose committee)

यह समिति सदन से संबन्धित ऐसे तदर्थ मामलों को देखती है जो अन्य संसदीय समितियों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। प्रत्येक सदन का एक सामान्य प्रयोजन समिति होता है और इसके पीठासीन अधिकारी इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। इस समिति के सदस्यों में उपाध्यक्ष या उप सभापति, उस सदन के सभी स्थायी समितियों के सभापति, मान्यता प्राप्त दलों या ग्रुपों के नेता और ऐसे अन्य सदस्य होते हैं जो पीठासीन अधिकारी द्वारा मनोनीत किए जाये।

आवास समिति (Housing committee)

इस समिति का काम है संसद सदस्यों को आवासीय तथा अन्य सुविदाएं देना, जैसे – भोजन, चिकित्सकीय सहायता, इत्यादि जो की उन्हे उनके आवासों अथवा हॉस्टलों में प्रदान की जाती है। लोकसभा में इसके 12 सदस्य होते है।

पुस्तकालय समिति (Library committee)

यह समिति संसद के पुस्तकालय से संबन्धित मामलों को देखती है तथा सांसदों को पुस्तकालय सेवा का लाभ उठाने में सहायता करती है। इस समिति में 9 सदस्य होते है। 6 लोकसभा तथा 3 राज्यसभा

सदस्यों के वेतन-भत्ते से संबन्धित संयुक्त समिति (Joint Committee on Salaries and Allowances of Members)

यह समिति, संसद सदस्यों का वेतन, भत्ता तथा पेंशन अधिनियम 1954 के अंतर्गत काम करता है। इसके 15 सदस्य होते हैं (10 लोकसभा से तथा 5 राज्यसभा से) । यह सदस्यों के वेतन, भत्ते तथा पेंशन नियमित करने के संबंध में नियमावली बनाती है।

सलाहकार समिति
(Advisory Committee)

इन समितियों का गठन संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा की जाती है। इन समितियों के गठन, कार्य तथा कार्यपद्धति के बारे में दिशा निर्देश संबन्धित मंत्रालय द्वारा दिये जाते है।

ये एक अनौपचारिक चर्चा का मंच है जहां मंत्रियों और संसद सदस्यों के बीच सरकार की नियियों एवं कार्यकर्मों तथा उनके कार्यान्वयन के तौर-तरीकों पर चर्चा होती है।

में दोनों सदनों के सदस्य होते हैं और ये केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से जुड़ी रहती है। एक मंत्रालय की सलाहकार समिति का अध्यक्ष उसी मंत्रालय का मंत्री अथवा प्रभारी राज्य मंत्री होता है।

इन समितियों की सदस्यता स्वैच्छिक होती है और इसे संसद सदस्यो तथा नेताओं की रुचि पर छोड़ दिया जाता है। समिति की अधिकतम सदस्य संख्या 30 हो सकती है और न्यूनतम 10।

ये समितियां लोकसभा भंग होने के साथ ही स्वतः भंग हो जाती है और पुनः नई लोकसभा के गठन के पश्चात इनकाभी गठन किया जाता है।

तो ये रही पूरी संसदीय समितियों (Parliamentary committees) की सरल और सहज चर्चा, उम्मीद है समझ में आया होगा।

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