Prime minister of india (प्रधानमंत्री: भूमिका, कार्य एवं शक्तियाँ)

इस लेख में हम भारत के प्रधानमंत्री (Prime minister of India) के बारे में सरल और सहज चर्चा करेंगे। ये लेख संघीय कार्यपालिका वाले लेख का एक हिस्सा है।
prime minister of india

भारत के प्रधानमंत्री को समझिये

हमने देखा था कि मुख्यतः 5 संघीय कार्यपालिका होते हैं। जिसमें से हम राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति की चर्चा बड़े ही विस्तार से कर चुके हैं। अगर आपने नहीं पढ़ा है तो नीचे सबका लिंक एक क्रम में आपको मिल जाएगा। आइये अब प्रधानमंत्री की बात करते हैं।

Prime minister of india

🔰 हम जानते हैं कि भारत एक संसदीय व्यवस्था वाला देश है जहां सारी की सारी वास्तविक शक्तियाँ प्रधानमंत्री के पास होता है। प्रधानमंत्री सरकार का भी प्रमुख होता है और ये चुन के भी आते है, इसीलिए प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका होता है। इसे De Facto Executive भी कहा जाता है।

जबकि राष्ट्रपति के पास जिसके बारे में हम पहले भी पढ़ चुके है केवल नाममात्र की कार्यकारी शक्तियाँ होती है इसीलिए इसे De Jure Executive कहा जाता है।

राष्ट्रपति के बारे में हमने देखा था कि सबसे ज्यादा अनुच्छेदों में उसकी ही चर्चा की गयी है। जबकि प्रधानमंत्री को बस कुछ ही अनुच्छेदों में समेट दिया गया है।

दरअसल व्यावहारिक तौर पर देखें तो जनता सीधे प्रधानमंत्री को तो चुनते नहीं है वो तो बस सांसदों को चुनते हैं। उसमें से जो बहुमत प्राप्त दल के सांसद होते है वो अपना एक नेता चुनते है जो कि प्रधानमंत्री बनता है और प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का चुनाव करता है, शायद ये एक कारण है जिससे कि प्रधानमंत्री को ज्यादा अनुच्छेद नहीं मिला है।

भारत के प्रधानमंत्री (prime minister of India) से संबन्धित जो मुख्य अनुच्छेद है वो है अनुच्छेद 74 और अनुच्छेद 75।

अनुच्छेद 74 में लिखा गया है कि राष्ट्रपति को सलाह और सहायता प्रदान करने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगा जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करेंगे। आप देख सकते हैं कि प्रधानमंत्री पद के जिक्र के साथ-साथ इस अनुच्छेद में मंत्रिपरिषद का भी जिक्र है।

प्रधानमंत्री की नियुक्ति
Appointment of Prime Minister

प्रधानमंत्री की नियुक्ति कैसे होगी इसकी कोई विशेष व्यवस्था संविधान में नहीं दी गई है बस अनुच्छेद 75 में इसके बारे में बताया गया है कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा और प्रधानमंत्री के सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति करेगा। अब सवाल ये है कि राष्ट्रपति किसे प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है?

चूंकि हम संसदीय व्यवस्था (Parliamentary system) के अनुसार चलते हैं और इसमें पूर्ण बहुमत प्राप्त दल के नेता ही प्रधानमंत्री बनते है इसीलिए राष्ट्रपति के पास ये समस्या नहीं होता है कि वो किसे प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त करें।

अगर किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं भी मिलता है तो गठबंधन की जो व्यवस्था होती है उससे मामला सुलझ जाता है। वैसे आमतौर पर यदि लोकसभा में कोई भी दल स्पष्ट बहुमत में न हो तो राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की नियुक्ति में अपने विवेक का प्रयोग करने को स्वतंत्र होता है। इस स्थिति में राष्ट्रपति समान्यतः: सबसे बड़े दल अथवा गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है और उससे 1 माह के भीतर सदन में विश्वास मत हासिल करने के लिए कहता है। राजनैतिक दल कोई न कोई जुगाड़ करके विश्वास मत हासिल कर ही लेता है।

राष्ट्रपति द्वारा इस विवेक का प्रयोग प्रथम बार 1979 में किया गया, जब तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीवन रेड्डी ने मोरार जी देशाई वाली जनता पार्टी के सरकार के पतन के बाद चरण सिंह (जो कि एक गठबंधन के नेता थे) को प्रधानमंत्री नियुक्त किया। और उसे 1 माह का समय बहुमत सिद्ध करने के लिए दिया गया था, हालांकि उससे पहले ये व्यवस्था स्पष्ट नहीं था। 1980 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस व्यवस्था को स्पष्ट किया।

पहले व्यवस्था ये था कि जब तक बहुमत सिद्ध न हो जाये तब तक प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति नहीं कर सकता था लेकिन सन 1980 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि यह आवश्यक नहीं है कि एक व्यक्ति प्रधानमंत्री नियुक्त होने से पूर्व लोकसभा में अपना बहुमत सिद्ध करें। राष्ट्रपति को पहले प्रधानमंत्री की नियुक्ति करनी चाहिए और तब एक तथोचित समय सीमा के भीतर उसे लोकसभा में अपना बहुमत सिद्ध करने के लिए कहना चाहिए।

उदाहरण के लिए चरण सिंह 1979, वी.पी. सिंह 1989, चन्द्रशेखर 1990, पी. वी. नरसिम्हाराव 1991, अटल बिहारी वाजपेयी 1996, एच.डी. देवगौड़ा 1996 आइ. के. गुजराल 1997 और पुनः अटल बिहारी वाजपेयी 1998; इसी प्रकार प्रधानमंत्री नियुक्त हुए।

प्रधानमंत्री के जुड़े कुछ तथ्य
Some facts related to the Prime Minister

◼ एक और दिलचस्प निर्णय 1997 में उच्चतम न्यायालय दिया कि एक व्यक्ति को जो किसी भी सदन का सदस्य न हो, 6 माह के लिए प्रधानमंत्री नियुक्त किया जा सकता है। इस समायावधि में उसे संसद के किसी भी सदन का सदस्य बनना पड़ेगा, अन्यथा वह प्रधानमंत्री के पद पर नहीं बना रहेगा। इसका सीधा सा मतलब ये है कि अगर कोई व्यक्ति किसी सदन का सदस्य नहीं भी है तब भी वो कम से कम 6 महीने के लिए प्रधानमंत्री बन सकता है।

◼ संविधान के अनुसार, प्रधानमंत्री संसद के दोनों सदनों में से किसी का भी सदस्य हो सकता है। उदाहरण के लिए इन्दिरा गांधी 1966, देवगौड़ा 1996 तथा मनमोहन सिंह 2004 और 2009 में राज्यसभा के सदस्य थे।

प्रधानमंत्री की शपथ
Oath of Prime Minister of India

प्रधानमंत्री का पद ग्रहण करने से पूर्व राष्ट्रपति उसे पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलवाता है। पद एवं गोपनियता की शपथ लेते हुए प्रधानमंत्री कहता है कि –

1. मैं भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा 2. मैं भारत की प्रभुता एवं अखंडता अक्षुण्ण रखूँगा 3. मैं श्रद्धापूर्वक एवं शुद्ध अंतरण से अपने पद के दायित्यों का निर्वहन करूंगा 4. मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करूंगा।

प्रधानमंत्री गोपनियता की शपथ के रूप में कहता है – मैं ईश्वर की शपथ लेता हूं कि जो विषय मेरे विचार के लिए लाया जाएगा अथवा मुझे ज्ञात होगा, उसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को तब तक के सिवाय जबकि ऐसे मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों के सम्यक निर्वहन के लिए अपेक्षित हो, मैं प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से संसूचित या प्रकट नहीं करूंगा।

प्रधानमंत्री का कार्यकाल
Term of Prime Minister of India

वैसे तो प्रधानमंत्री का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है, अगर किसी एक दल का पूर्ण बहुमत है तो 5 वर्ष चल भी जाता है। अगर पूर्ण बहुमत नहीं है तो उसका कार्यकाल निश्चित नहीं होता है तथा वह राष्ट्रपति के प्रसाद्पर्यंत अपने पद पर बना रहता है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्रपति किसी भी समय प्रधानमंत्री को उसके पद से हटा सकता है। प्रधानमंत्री को जब तक लोकसभा में बहुमत हासिल है, राष्ट्रपति उसे बर्खास्त नहीं कर सकता है। लेकिन लोकसभा में अपना विश्वास मत खो देने पर उसे अपने पद से त्यागपत्र देना होगा अगर वो त्यागपत्र न दे तो तब राष्ट्रपति उसे बर्खास्त कर सकता है।

प्रधानमंत्री के कार्य व शक्तियाँ
Work and powers of the Prime Minister

मंत्रिपरिषद के प्रमुख के रूप में भारत के प्रधानमंत्री (Prime minister of India) की शक्तियाँ –

✅1. वह मंत्री नियुक्त करने हेतु अपने दल के व्यक्तियों की राष्ट्रपति को सिफ़ारिश करता है। राष्ट्रपति उन्ही व्यक्तियों को मंत्री नियुक्त कर सकता है जिनकी सिफ़ारिश प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है।

✅2. वह मंत्रियों को विभिन्न मंत्रालय आवंटित करता है और उनमें फेरबदल भी कर सकता है। इसके साथ ही वह किसी मंत्री को त्यागपत्र देने अथवा राष्ट्रपति को उसे बर्खास्त करने की सलाह दे सकता है।

✅3. वह मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करता है तथा उसके निर्णयों को प्रभावित करता है। इसके साथ ही वह सभी मंत्रियों की गतिविधियों को नियंत्रित, निर्देशित करता है और उनमें समन्वय रखता है।

✅4. वह अपने पद से त्यागपत्र देकर पूरे मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर सकता है। चूंकि प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख होता है, अत: जब प्रधानमंत्री त्यागपत्र देता है अथवा उसकी मृत्यु हो जाती है तो मंत्रिपरिषद विघटित हो जाता है यानी कि सरकार गिर जाता है।

वहीं दूसरी ओर किसी अन्य मंत्री की मृत्यु या त्यागपत्र पर सरकार नहीं गिरता है बल्कि बस एक मंत्री का सीट खाली होता है, प्रधानमंत्री जिसे चाहे वहाँ बैठा सकता है।

राष्ट्रपति के संबंध में प्रधानमंत्री के कार्य

हमने राष्ट्रपति वाले लेख में देखा था कि प्रधानमंत्री सारे काम राष्ट्रपति के नाम पर ही करते हैं। चूंकि प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति एवं मंत्रिपरिषद से बीच संवाद की मुख्य कड़ी है। अतः अनुच्छेद 78 के अनुसार उसका दायित्व है कि वह:-

✅1. संघ के कार्यपालक के प्रशासन संबंधी और विधान विषयक प्रस्थापनाओं संबंधी मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करें। इसका सीधा सा मतलब ये है कि मंत्रिपरिषद प्रशासन और विधि से संबन्धित जितने भी निर्णय लेते है उसे राष्ट्रपति को भी बताएं।

✅2. संघ के कार्यपालक के प्रशासन संबंधी और विधान विषयक प्रस्थापनों संबंधी जो जानकारी राष्ट्रपति मांगे, प्रधानमंत्री वह दे, और

✅3. किसी विषय को जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय (Decision) कर दिया है किन्तु उस विषय मंत्रीपरिषद ने विचार नहीं किया है, ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति द्वारा अपेक्षा किए जाने पर प्रधानमंत्री, मंत्रीपरिषद के समक्ष उसे विचार के लिए रखे।

◼ इसके अलावा प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को विभिन्न अधिकारियों जैसे – भारत का महान्यायवादी (Attorney General of India), भारत का महानियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG), संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष एवं उसके सदस्यों एवं अन्य की नियुक्त के संबंध में परामर्श देता है।

संसद के संबंध में प्रधानमंत्री की शक्तियाँ

प्रधानमंत्री निचले सदन का नेता होता है। इस संबंध में वह निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग करता है।

✅1. वह राष्ट्रपति को संसद का सत्र आहूत करने एवं सत्रावसान करने संबंधी परामर्श देता है।

✅2. वह किसी भी समय लोकसभा विघटित करने की सिफ़ारिश राष्ट्रपति से कर सकता है।

✅3. वह सभा पटल पर सरकार की नीतियों की घोषणा करता है।

भारत के प्रधानमंत्री की अन्य भूमिकाएँ

उपरोक्त तीन मुख्य भूमिकाओं के अतिरिक्त प्रधानमंत्री की अन्य विभिन्न भूमिकाएँ भी है:-

✅1. वह नीति आयोग, राष्ट्रीय विकास परिषद, राष्ट्रीय एकता परिषद, अंतर्राज्यीय परिषद और राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद का अध्यक्ष होता है।

✅2. वह राष्ट्र की विदेश नीति को मूर्त रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ✅3. वह केंद्र सरकार का मुख्य प्रवक्ता है। ✅4. वह आपातकाल के दौरान राजनीतिक स्तर पर आपदा प्रबंधन का प्रमुख है। ✅5. देश का नेता होने के नाते वह विभिन्न राज्यों के विभिन्न वर्गों के लोगों से मिलता है और उनकी समस्याओं के संबंध में ज्ञापन प्राप्त करता है ✅6. वह सत्ताधारी दल का नेता होता है ✅7. वह सेनाओं का राजनैतिक प्रमुख होता है इत्यादि।

◼ इस प्रकार प्रधानमंत्री देश की राजनीतिक -प्रशासनिक व्यवस्था में अति महत्वपूर्ण एवं अहम भूमिका निभाता है।

हमारे संविधान के अंतर्गत किसी कार्यकारी की यदि अमेरिका के राष्ट्रपति से तुलना की जाये तो वह प्रधानमंत्री है, न कि राष्ट्रपति

डॉ. बी आर अंबेडकर

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