संसद तीन घटकों से मिलकर बना है; राष्ट्रपति (President), लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha)। यानी कि यही तीनों मिलकर संसद का निर्माण करते हैं।

इस लेख में हम राज्यसभा (Rajya Sabha) पर सरल और सहज चर्चा करेंगे एवं इसके विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को समझेंगे, तो अच्छी तरह से समझने के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें, साथ ही संबंधित अन्य लेखों को भी पढ़ें।

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Rajya Sabha
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Rajya Sabha Concept Explained in Hindi

राज्यसभा की भूमिका (Role of Rajya Sabha):

अनुच्छेद 79 के तहत, देश के सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था के रूप में संसद की व्यवस्था की गई है। जो कि अपने तीन घटकों के माध्यम से संचालित होता है- राष्ट्रपति (President) और दो सदन— राज्यसभा (Rajya Sabha) एवं लोकसभा (Lok Sabha)

राष्ट्रपति (President) देश का संवैधानिक प्रमुख है और ये संसद का एक अभिन्न अंग है और इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि संसद द्वारा पारित कोई भी विधेयक तब तक अधिनियम नहीं बनता है जब तक राष्ट्रपति उस पर अपनी स्वीकृति न दे दें।

◾ संसद के निचले सदन को लोकसभा कहा जाता है। इसकी चर्चा अनुच्छेद 81 में की गई है। इसके सदस्यों को जनता प्रत्यक्ष रूप से चुन कर भेजती है। फिलहाल लोकसभा में 543 सीटें हैं। लोकसभा इस मायने में खास है कि सरकार यही बनाती है।

◾ संसद के ऊपरी सदन को राज्यसभा कहा जाता है। इसके सदस्यों का चुनाव जनता सीधे नहीं करती है इसीलिए यहाँ ऐसे लोग सदस्य के रूप में आते हैं जो समान्यतः चुनाव का सामना नहीं कर सकते हैं।

इसका फायदा ये होता है कि अपने-अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञों को या कुछ विशिष्ट लोगों को यहाँ काम करने का मौका मिलता है। इसीलिए इसे बुद्धिजीवियों का सभा भी कहा जाता है।

इसकी भूमिका एक अविभावक की तरह होती है जो लोकसभा को एक तरह से गाइड करता है ताकि उसके विधायी या अन्य कामों में उत्कृष्टता आ सके। ये कभी भंग नहीं होता है और निरंतर चलता रहता है।

राज्यसभा का महत्व (Importance of Rajya Sabha):

राज्यसभा भारतीय संसदीय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके महत्व को निम्न प्रकार से देखा जा सकता है:

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व: राज्यसभा यह सुनिश्चित करती है कि संसद में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हितों का प्रतिनिधित्व हो। यह भारत के संघीय ढांचे को बनाए रखने में मदद करता है।

लोकसभा पर नियंत्रण के रूप में कार्य करता है: राज्य सभा लोकसभा पर नियंत्रण के रूप में कार्य करती है। यह लोकसभा द्वारा पारित विधेयकों को अस्वीकार कर सकता है और अपने स्वयं के विधेयकों को आरंभ कर सकता है।

स्थिरता प्रदान करता है: राज्यसभा एक स्थायी सदन है, और लोकसभा के विपरीत, यह विघटन के अधीन नहीं है। यह विधायी प्रक्रिया को स्थिरता प्रदान करता है और यह सुनिश्चित करता है कि बार-बार होने वाले चुनावों से विधायी एजेंडा बाधित न हो।

राज्यसभा की संरचना (Composition of Rajya Sabha):

राज्यसभा, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है – ये राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है। संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार, राज्यसभा में अधिकतम 250 सीटें हो सकती है। इसमें से 238 सीटें राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधित्व के लिए है वहीं 12 सीटें राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाने के लिए है।

यहाँ यह याद रखने वाली बात है कि राष्ट्रपति, साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के संबंध में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्ति को मनोनीत करता है। इसके पीछे उद्देश्य है कि नामी या प्रसिद्ध व्यक्ति बिना चुनाव के राज्यसभा भेजा जा सके।

वर्तमान की बात करें तो राज्यसभा में 245 सदस्य हैं। जिसमें से 225 सदस्य राज्यों का और 8 केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं इसके अलावा 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत हैं।

◾ राज्यसभा के लिए राज्यों की सीटों का बंटवारा उनकी जनसंख्या के आधार पर होता है। इसीलिए जिस राज्य की जनसंख्या अधिक है उसे सीटें भी अधिक मिली है और कम जनसंख्या वाले राज्य को कम सीटें।

जैसे उत्तर प्रदेश में राज्यसभा के लिए 31 सीटें है जबकि त्रिपुरा में सिर्फ 1, वहीं केंद्रशासित प्रदेश की बात करें तो दिल्ली व पुडुचेरी को ही राज्यसभा में सीटें मिली है।

◾ अब चूंकि जम्मू-कश्मीर भी केंद्रशासित प्रदेश हो गया है जिसके पास राज्यसभा में 4 सीटें पहले से है तो अब उसकी भी गिनती केंद्रशासित प्रदेश में होगा।

इसके अलावे जो अन्य केंद्रशासित प्रदेश है उसे राज्यसभा में इसलिए प्रतिनिधित्व नहीं मिला है क्योंकि इन प्रदेशों की जनसंख्या बहुत कम है।

◾ किस राज्य और केंद्रशासित प्रदेश को राज्यसभा में कितनी सीटें आवंटित की गई है इसका वर्णन संविधान की चौथी अनुसूची में किया गया है। जिसे आप यहाँ से देख सकते हैं – 4th schedule pdf↗️

कार्यकाल (Term of Office):

लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और हरेक 5 साल बाद वह भंग हो जाता है पर राज्यसभा कभी भंग नहीं होता है। अनुच्छेद 83(1) के अनुसार राज्यसभा का विघटन नहीं होगा, यानी कि ये एक निरंतर चलने वाली संस्था है।

◾ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के आधार पर इसके सांसदों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है और व्यवस्था ये है कि प्रत्येक 2 वर्ष में एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत हो जाता है।

इसीलिए हर 2 वर्ष में लगभग एक तिहाई सीटों के लिए चुनाव होता है। सेवानिवृत व्यक्ति जितनी बार चाहे उतनी बार चुनाव लड़ सकता है। राष्ट्रपति द्वारा मनोनयित व्यक्ति अगर सेवानिवृत हुआ है तो उसे हर तीसरे वर्ष के शुरुआत में राष्ट्रपति द्वारा भरा जाता है।

सभापति और उपसभापति (Chairman and Deputy Chairman):

भारत के उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। राज्यसभा के सभापति का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है, जबकि राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है।

राज्य सभा अपने सदस्यों में से एक उपसभापति का भी चयन करती है। सभापति और उपसभापति की अनुपस्थिति में, उपसभाध्यक्षों के पैनल से एक सदस्य सभा की कार्यवाही का सभापतित्व करता है।

लोक सभा के विपरीत राज्यसभा का सभापति अपना इस्तीफ़ा उपसभापति को नहीं बल्कि राष्ट्रपति को देता है।

राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया (Election Process):

अनुच्छेद 80(4) के अनुसार, राज्यसभा में प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधियों का निर्वाचन उस राज्य की विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जाएगा।

दूसरे शब्दों में कहें तो राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्य करते हैं जिसे कि निर्वाचक मंडल (electoral College) कहा जाता है। [इस चुनाव की पूरी प्रक्रिया जानने के लिए राज्यसभा चुनाव↗️ अवश्य पढ़ें]

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राज्यसभा की शक्तियाँ एवं कार्य (Powers and functions of Rajya Sabha):

राज्यसभा के कई महत्वपूर्ण कार्य हैं। इसमे शामिल है:

विधायी कार्य (Legislative Functions): राज्यसभा विधेयकों (Bills) को आरंभ, संशोधित और पारित कर सकती है। हालाँकि, कानून बनने के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा एक विधेयक पारित किया जाना चाहिए।

वित्तीय कार्य (Financial functions): राज्यसभा बजट, कराधान और सरकारी व्यय जैसे वित्तीय मामलों पर सिफारिशें कर सकती है। हालाँकि, लोकसभा को सभी वित्तीय मामलों पर अंतिम फैसला लेना होता है। यानि कि इन मामलों में राज्यसभा की भूमिका सीमित है।

चुनावी कार्य (Electoral Functions): राज्यसभा भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेती है। लोकसभा के सदस्यों के साथ राज्यसभा के सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं।

महाभियोग की कार्यवाही (Impeachment Proceedings): राज्यसभा के पास राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और उच्च न्यायालयों और अन्य अधिकारियों के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही करने की शक्ति है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व (Representing the States and Union Territories): राज्यसभा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है। यह सुनिश्चित करता है कि संसद में राज्यों की आवाज सुनी जाए और राज्यों और केंद्र सरकार के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

विशेष शक्तियाँ (Special Powers):

संघीय चरित्र होने के कारण राज्यसभा को कुछ विशेष शक्तियाँ प्रदान की गई हैं, जो लोकसभा के पास नहीं हैं :-

1. अनुच्छेद 249 के तहत, राज्यसभा संसद को राज्य सूची के विषयों पर भी विधि बनाने हेतु अधिकृत कर सकती हैं।

दूसरे शब्दों में जब राज्यसभा दो तिहाई बहुमत से एक प्रस्ताव पारित करें कि, संसद को किसी राज्य के लिए कानून बनानी चाहिए तो संसद को ये शक्ति मिल जाती है कि वो राज्य के लिए कानून बना सकती है। 

2. अनुच्छेद 312 के तहत, राज्यसभा संसद को केंद्र एवं राज्य दोनों के लिए नयी अखिल भारतीय सेवा के सृजन हेतु अधिकृत कर सकती है। यानी कि अगर IAS, IPS और IFoS के अलावे किसी सेवा को अखिल भारतीय सेवा बनाना हो तो राज्यसभा ऐसा कर सकती है।

3. राष्ट्रपति को देश में आपातकाल की उद्घोषणा करने का अधिकार है लेकिन ऐसी प्रत्येक उद्घोषणा को संसद की दोनों सभाओं द्वारा नियत अवधि के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है।

अगर आपातकाल उस समय लागू हुआ हो जब लोकसभा का विघटन (Dissolution) हो गया हो या फिर लोकसभा तो हो लेकिन 1 महीने के अंदर अनुमोदन से पहले ही विघटित हो गया हो।

ऐसी स्थिति में पुनः जैसे ही लोकसभा का गठन होगा। उसकी पहली बैठक से तीस दिनों के भीतर आपातकाल की उद्घोषणा को पास करवाना जरूरी है। नहीं तो वो खत्म हो जाएगा। लेकिन इसमें एक शर्त ये है कि उससे पहले राज्य सभा से वो पास रहना चाहिए क्योंकि राज्यसभा भंग नहीं होता है।

कौन सी स्थिति में राज्यसभा और लोकसभा की शक्तियाँ बराबर होती है?

निम्नलिखित मामलों में राज्यसभा की शक्तियाँ एवं स्थिति लोकसभा के समान होती हैं :-

1. सामान्य विधेयकों का प्रस्तुत किया जाना और उसको पारित करना।

2. संवैधानिक संशोधन विधेयकों का प्रस्तुत किया जाना और उसको पारित करना।

3. वित्तीय विधेयकों का प्रस्तुत किया जाना, जिसमें भारत की संचित निधि से व्यय शामिल होता है।

4. राष्ट्रपति का निर्वाचन एवं महाभियोग।

5. उपराष्ट्रपति का निर्वाचन और पद से हटाया जाना: राज्यसभा विशेष बहुमत से संकल्प पारित कर और लोकसभा सामान्य बहुमत की स्वीकृति द्वारा उपराष्ट्रपति को पद से हटा सकता है।

6. राज्यसभा, राष्ट्रपति को उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं लेखा महानियंत्रक को हटाने की सिफ़ारिश कर सकता है

7. राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश की स्वीकृति।

8. राष्ट्रपति द्वारा घोषित तीनों प्रकार के आपातकालों कि स्वीकृति।

9. प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्री दोनों में से किसी एक सदन के सदस्य होने चाहिए, हालांकि वे होते केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है।

10. संवैधानिक इकाइयों, जैसे वित्त आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक आदि की रिपोर्ट पर विचार करना

11. उच्चतम न्यायालय एवं संघ लोक सेवा आयोग के न्याय क्षेत्र में विस्तार।

कौन सी स्थिति में राज्यसभा और लोकसभा की शक्तियाँ बराबर नहीं होती है?

निम्नलिखित मामलों में राज्यसभा की शक्तियाँ एवं स्थिति लोकसभा से आसमान हैं :-

1. धन विधेयक को सिर्फ लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं: राज्यसभा, धन विधेयक (Money Bill) को अस्वीकृत या संशोधित नहीं कर सकती।

उसे धन विधेयक को सिफ़ारिश या बिना सिफ़ारिश के 14 दिन के भीतर लोकसभा को लौटना अनिवार्य होता है। लोकसभा, राज्यसभा की सिफ़ारिशों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। यदि अस्वीकार भी करती है तब भी इसे दोनों सदनों द्वारा स्वीकृत माना जाता है,

2. वित्त विधेयक की बात करें तो इसे सिर्फ लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है लेकिन इसे पारित करने के मामलों में लोकसभा और राज्यसभा दोनों की शक्तियाँ समान हैं

3. धन विधेयक (Money bill) की पहचान: कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, ये तय करने की अंतिम शक्ति लोकसभा अध्यक्ष के पास है

4. दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता: दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाता है

5. बजट के मामले में: राज्यसभा सिर्फ बजट पर चर्चा कर सकती है, उसके अनुदान मांगों पर मतदान नहीं करती।

6. राष्ट्रीय आपातकाल की समाप्ति: राष्ट्रीय आपातकाल समाप्त करने का संकल्प लोकसभा द्वारा ही पारित कराया जा सकता है।

7. राज्यसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित कर मंत्रिपरिषद को नहीं हटा सकती: ऐसा इसीलिए क्योंकि मंत्रिपरिषद का सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है, लेकिन राज्यसभा सरकार की नीतियों एवं कार्यों पर चर्चा और आलोचना कर सकती है।

राज्यसभा की जरूरत

हालांकि राज्यसभा को लोकसभा की तुलना में कम शक्तियाँ दी गई हैं लेकिन फिर भी इसकी निम्नलिखित उपयोगिता है जो इसे प्रासंगिक बनाती है।

1. यह लोकसभा दारा जल्दबाज़ी में बनाए गए दोषपूर्ण और अविवेकपूर्ण विधान की समीक्षा करता है उसकी त्रुटियों को दूर करने का काम करता है।

2. यह उन अनुभवी एवं पेशेगत लोगों को प्रतिनिधित्व का मौका देती है जो सीधे चुनाव का सामना नहीं कर सकते

3. यह केंद्र के अनावश्यक हस्तक्षेप के खिलाफ राज्यों के हितों की रक्षा करता है और संघीय संतुलन को बरकरार रखता है।

कुल मिलाकर, राज्यसभा भारतीय संसदीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक है। इसके कार्य, संरचना और महत्व इसे विधायी प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग बनाते हैं।

राज्यसभा यह सुनिश्चित करती है कि संसद में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हितों का प्रतिनिधित्व किया जाए, और यह राज्यों और केंद्र सरकार के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।

लेख बड़ा हो जाने के कारण संसद के सभी पहलुओं को इस लेख में शामिल नहीं किया जा सका है बल्कि उस पर अलग से लेख उपलब्ध करवाया गया है। नीचे दिये गए लिंक की मदद से अन्य लेखों को पढ़ सकते हैं।

राज्यसभा का सभापति: अवधारणा
◾ राज्यसभा चुनाव कैसे होता है?

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Chapter Wise Polity Quiz

राज्यसभा: गठन, संरचना, शक्तियाँ अभ्यास प्रश्न

  1. Number of Questions - 5 
  2. Passing Marks - 80 %
  3. Time - 4  Minutes
  4. एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।

Which of the following statements is correct regarding the powers of Rajya Sabha?

  1. The Rajya Sabha can also authorize the Parliament to make laws on the subjects of the State List.
  2. The Rajya Sabha can authorize the Parliament to create new All India Services for both the Center and the States.
  3. A money bill has to be first introduced in the Rajya Sabha.
  4. In special circumstances, the Rajya Sabha can remove the Council of Ministers by passing a no-confidence motion.

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राज्यसभा के शक्तियों के संबंध में निम्न में से कौन सा कथन सही है?

  1. राज्यसभा संसद को राज्य सूची के विषयों पर भी विधि बनाने हेतु अधिकृत कर सकती हैं।
  2. राज्यसभा संसद को केंद्र एवं राज्य दोनों के लिए नए अखिल भारतीय सेवा के सृजन हेतु अधिकृत कर सकती है।
  3. धन विधेयक को पहले राज्यसभा में पेश करना पड़ता है।
  4. विशेष स्थितियों में राज्यसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित कर मंत्रिपरिषद को हटा सकती है।

Which of the following statement is correct?

  1. The members of the Rajya Sabha are elected by the proportional representation method.
  2. The members of the Rajya Sabha are elected by the members of the state legislature.
  3. The Presiding Officer of the Rajya Sabha is elected from among the members of the House.
  4. The Presiding Officer of the Rajya Sabha is called the Chairman.

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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होता है।
  2. राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्य विधानमंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है।
  3. राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी का चुनाव सदन के सदस्यों में से किया जाता है।
  4. राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी को सभापति कहा जाता है।

Choose the correct statement from the given statements regarding Rajya Sabha;

  1. The upper house of the Parliament is called the Rajya Sabha.
  2. According to Article 80, the Rajya Sabha can have a maximum of 250 seats.
  3. Tripura has only 1 Rajya Sabha seat.
  4. According to Article 83(1), Rajya Sabha is not dissolved.

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राज्यसभा के संबंध में दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

  1. संसद के ऊपरी सदन को राज्यसभा कहा जाता है।
  2. अनुच्छेद 80 के अनुसार, राज्यसभा में अधिकतम 250 सीटें हो सकती है।
  3. त्रिपुरा में सिर्फ 1 राज्यसभा की सीट है।
  4. अनुच्छेद 83(1) के अनुसार राज्यसभा का विघटन नहीं होता है।

Which of the following statements is correct with regard to the power of Rajya Sabha and Lok Sabha?

  1. The final power to decide whether a bill is a money bill or not rests with the Speaker of the Lok Sabha and not the Rajya Sabha.
  2. The joint sitting of both the Houses is presided over by the Speaker of the Lok Sabha and not by the Speaker of the Rajya Sabha.
  3. The Rajya Sabha can only discuss the budget and not vote on its demands for grants.
  4. The resolution to end the National Emergency can be passed by the Rajya Sabha and not by the Lok Sabha.

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राज्यसभा और लोकसभा की शक्ति के संदर्भ में इनमें से कौन सा कथन सही है?

  1. कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, ये तय करने की अंतिम शक्ति लोकसभा अध्यक्ष के पास है, राज्यसभा के पास नहीं।
  2. दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाता है राज्यसभा अध्यक्ष द्वारा नहीं।
  3. राज्यसभा सिर्फ बजट पर चर्चा कर सकती है, उसके अनुदान मांगों पर मतदान नहीं करती।
  4. राष्ट्रीय आपातकाल समाप्त करने का संकल्प राज्यसभा द्वारा पारित कराया जा सकता है लोकसभा द्वारा नहीं।

Which of the following power of Rajya Sabha is similar to the power of Lok Sabha?

  1. Presidential election and impeachment
  2. Introduction of financial bills involving expenditure from the Consolidated Fund of India
  3. Approval of ordinance issued by the President
  4. Extension of jurisdiction of Supreme Court and Union Public Service Commission

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राज्यसभा की इनमें से कौन सी शक्ति लोकसभा के शक्ति के समान है?

  1. राष्ट्रपति का निर्वाचन एवं महाभियोग
  2. वित्तीय विधेयकों का प्रस्तुत किया जाना, जिसमें भारत की संचित निधि से व्यय शामिल होता है
  3. राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश की स्वीकृति
  4. उच्चतम न्यायालय एवं संघ लोक सेवा आयोग के न्याय क्षेत्र में विस्तार

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संसदीय प्रस्ताव : प्रकार, विशेषताएँ
संसदीय संकल्प
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धन विधेयक और वित्त विधेयक
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संचित निधि, लोक लेखा एवं आकस्मिक निधि
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भारत की राजव्यवस्था
मूल संविधान
हमारी संसद – सुभाष कश्यप
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