इस लेख में हम शोषण के विरुद्ध अधिकार (right against exploitation) पर सरल और सहज चर्चा करेंगे एवं इसके विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को समझेंगे।

तो अच्छी तरह से समझने के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें और साथ ही इस टॉपिक से संबंधित अन्य लेखों को भी पढ़ें- मौलिक अधिकार +

अगर स्वतंत्रता मिल जाये, समता मिल जाये लेकिन फिर भी शोषण होता रहे तो फिर स्वतंत्रता और समता भी अर्थहीन ही होगा।

शोषण के विरुद्ध अधिकार
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ये लेख मौलिक अधिकारों वाले लेख का एक कंटिन्यूएशन है। अब तक हम समता का अधिकार (Right to Equality) एवं स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom) समझ चुके हैं। अगर आपने उसे नहीं पढ़ा है तो एक बार उसे अवश्य पढ़ लें।

शोषण क्या है? (what is exploitation?)

शक्ति प्रयोग के द्वारा या फिर हालात का फायदा उठाते हुए जब किसी से इच्छा के विरुद्ध और उसके क्षमता के अधिक काम लिया जाता है और उसके अनुरूप पारिश्रमिक नहीं दिया जाता है तो उसे शोषण (exploitation) कहते हैं।

चूंकि शोषण, स्वार्थ से किसी का या किसी समूह का लाभ उठाने के लिए किया जाता है इसीलिए इसमें व्यक्ति के साथ अमानवीय व्यवहार हो सकता है, उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य हो सकता है, आदि।

तभी तो कार्ल मार्क्स ने कहा था कि समाज में दो तरह के वर्ग होते है; एक होते है शोषित वर्ग (Exploited class) और दूसरा शोषक वर्ग (Exploiting class)

शोषक वर्ग के पास उत्पादन और वितरण के सभी साधनों पर स्वामित्व होता है जबकि शोषित संपत्तिविहीन एवं लाचार होते हैं। ऐसे में शोषक वर्ग कभी नहीं चाहता कि शोषित वर्ग उसके समकक्ष आ जाये।

हमारा देश मार्क्स के सम्पूर्ण सिद्धान्त पर तो नहीं चलता है पर किसी का शोषण न हो इसका ध्यान बकायदे रखता है। शोषण एक स्वस्थ समाज के बिल्कुल भी अच्छा नहीं है, इसीलिए हमारे संविधान निर्माता ने इसके उन्मूलन को प्राथमिकता देते हुए इसे मौलिक अधिकार का हिस्सा बनाया।

इसका सही से पालन हो इसके लिए समय के साथ कई कानून भी इसके सपोर्ट में बनाए गए ताकि शोषित वर्ग का उन्मूलन हो सकें। तो आइये देखते हैं मौलिक अधिकारों के इस श्रेणी में क्या खास है;

शोषण के विरुद्ध अधिकार और उसके अनुच्छेद

शोषण के विरुद्ध अधिकार (right against exploitation) के तहत कुल 2 अनुच्छेद आते हैं- अनुच्छेद 23 और अनुच्छेद 24। जिसका विवरण निम्न है

शोषण के विरुद्ध अधिकार
अनुच्छेद 23 – मानव दुर्व्यापार एवं बलात श्रम का प्रतिषेध (Prohibition of Human trafficking and forced labor)
अनुच्छेद 24 – कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध
(Prohibition of employment of children in factories etc.)

अनुच्छेद 23 – मानव दुर्व्यापार एवं बलात श्रम का निषेध

मानव का दुर्व्यापार और बेगार तथा इसी प्रकार का अन्य बलात श्रम प्रतिसिद्ध (Prohibited) किया जाता है और इस उपबंध का कोई भी उल्लंघन अपराध होगा और विधि के अनुसार दंडनीय होगा।

यहाँ याद रखने वाली बात है कि यह अधिकार नागरिक एवं गैर-नागरिक दोनों के लिए उपलब्ध है और यह किसी व्यक्ति को न केवल राज्य के खिलाफ बल्कि व्यक्तियों के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान करता है।

इसमें दो मुख्य टर्म है, पहला है मानव दुर्व्यापार (human trafficking)

जैसे कि इसके नाम से ही स्पष्ट है ये इन्सानों का वस्तु की तरह खरीद -बिक्री तथा महिलाओ से जबरन वेश्यावृति करने को मजबूर करना, दास प्रथा और इसी तरह के अन्य काम जिससे इन्सानों का शोषण होता हो, से संबन्धित है। इस तरह के चीजों को रोकने के लिए 1956 में अनैतिक दुर्व्यापार (निवारण) अधिनियम बनाया गया था।

दूसरा टर्म है – बलात श्रम का निषेध, बलात श्रम का अभिप्राय है किसी व्यक्ति से उसके इच्छा के विरुद्ध काम करवाना। हालांकि यह अनुच्छेद बलात श्रम के अन्य प्रकारों जैसे कि बंधुआ मजदूरी पर भी रोक लगाता है।

बंधुआ मजदूरी
पूर्वजों या स्वयं द्वारा किए गए किसी समझौते जैसे उधार लेने, जाति विशेष में जन्म लेने अथवा अन्य कारणों से बिना पारिश्रमिक या सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दर से कम पार कार्य करने के लिए विवश होना या विवश करना बंधुआ मजदूरी की परिधि में आता है।

इसे मौलिक अधिकारों की श्रेणी में रखने के बाद भी मानव दुर्व्यापार और बलात श्रम कभी खत्म नहीं हुआ, आज भी मानव व्यापार, वेश्यावृति और बंधुआ मजदूरी जैसे कुरीति देखने को मिलते ही रहते हैं।

इस को रोकने के लिए और मौलिक अधिकारों के प्रावधानों को शत-प्रतिशत हासिल करने के उद्देश्य से कई कानून बनाए गए हैं जैसे कि – बंधुआ मजदूरी व्यवस्था (निरसन) अधिनियम 1976 तथा समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 आदि ।

यहाँ पर ये याद रखना जरूरी है कि, राज्य चाहे तो आप से सैन्य काम और इसी तरह के अन्य काम करवा सकता है वो भी बिना पैसों के, इसीलिए इसे अपवाद की श्रेणी में रखा जाता है।

Read in Details – अनुच्छेद 23 – भारतीय संविधान [व्याख्या सहित]

अनुच्छेद 24कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का निषेध

ये कहता है कि कारखानों या इसी तरह के किसी भी अन्य जगह में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से ऐसा कोई काम नहीं करवाया जा सकता जो उस बच्चे के लिए उपयुक्त न हो।

◾ इस दिशा में 1986 का बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम (Child Labor (Prohibition and Regulation) Act) काफी महत्वपूर्ण कानून है जिसे कि 2016 में फिर से संशोधित कर इसे बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 कर दिया गया।

इसमें अधिनियम में साफ-साफ कहा गया है कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी परिसंकटमय कामों में नहीं लगाया जा सकता।

इसके अलावा 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक व्यवसायों एवं प्रक्रियाओं में रोजगार निषिद्ध (prohibited) करता है।

इसके लिए बकायदे दंड की व्यवस्था भी की गयी है जो कि 6 माह से 2 वर्ष तक की कैद या 20 हज़ार से 50 हज़ार तक का जुर्माना हो सकता है।

◾ 2005 में बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम के तहत बालकों के अधिकारों के संरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय आयोग और राज्य आयोगों की स्थापना किया गया ताकि बालकों के विरुद्ध अपराधों या बालक अधिकारों के उल्लंघन पर शीघ्र विचारण किया जा सके।

Read in Details – अनुच्छेद 24 – भारतीय संविधान [व्याख्या सहित]

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भारत में बंधुआ मजदूर

एक बार को ऐसा लगता है कि क्या आज के समय में बंधुआ मजदूर का होना मुश्किल होगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीते 4 वर्षों में 13,500 से अधिक बंधुआ मज़दूरों को रिहा करवाया गया और उनके पुनर्वास (Rehabilitation) की व्यवस्था की गई। इससे ये स्पष्ट हो जाता है बंधुआ मजदूरी का अभी भी पूर्णरुपेन सफाया नहीं हुआ है।

बंधुआ मजदूरों की स्थिति

एक अनुमान के मुताबिक भारत में, साल 2018 में लगभग 32 लाख बंधुआ मज़दूर थे और इनमें से अधिकांश ऋणग्रस्तता (Indebtedness) के शिकार थे।

वर्ष 2016 में जारी ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स (Global Slavery Index) के अनुसार, भारत में तकरीबन 8 मिलियन लोग (यानी कि 80 लाख लोग) आधुनिक गुलामी में जी रहे हैं।

बंधुआ मज़दूरी मुख्य रूप से कृषि तथा अनौपचारिक क्षेत्र, जैसे कि- सूती कपड़ा हथकरघा, ईंट भट्टे, पत्थर खदान, घर का काम आदि में प्रचलित है।

झारखंड, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे अत्यधिक गरीब जनसंख्या वाले राज्यों में बंधुआ मज़दूरी अभी भी चल रही है।

हालांकि भारत में बंधुआ मज़दूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के माध्यम से बंधुआ मज़दूरी को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया फिर भी ये व्यवहार में बना ही रहा।

बंधुआ मज़दूरी के प्रसार के कारण

गरीबी एवं सामाजिक-आर्थिक असमानता बंधुआ श्रम के प्रसार के पीछे प्रमुख कारण है।

इसके अलावा भूमिहीनता भी बंधुआ मज़दूरी को प्रसारित करता है क्योंकि भूमि न होने के कारण लोगों को इस तरह के मज़दूरी के विकल्प का चुनाव करना पड़ता है।

अशिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण ग्रामीण गरीब महाजनों, साहूकारों आदि से धन ऋण के रूप में लेने के लिये मजबूर हो जाते हैं। जिसकी कीमत कई बार बंधुआ मजदूरी के रूप में चुकाना पड़ता है।

बंधुआ मज़दूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976

इस एक्ट के तहत बंधुआ मज़दूरी को पूरी तरह से समाप्त कर मज़दूरों को रिहा कर दिया गया और उनके कर्ज़ भी समाप्त कर दिये गए।

इसके साथ ही कोई भी प्रथा, समझौता या अन्य साधन जिसके आधार पर किसी व्यक्ति को बंधुआ मज़दूरी जैसी कोई सेवा देने की बाध्यता थी, को निरस्त कर दिया गया।

बंधुआ मज़दूरी व्यवस्था को एक दंडनीय संज्ञेय अपराध घोषित किया गया।

श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय द्वारा बंधुआ मज़दूरी को पूर्णतः समाप्त करने के उद्देश्य से बंधुआ मज़दूरों के पुनर्वास से संबंधित भी कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं।

बंधुआ मज़दूर पुनर्वास योजना 2016

इस योजना के तहत बंधुआ मज़दूरी से मुक्त हुए वयस्क पुरुषों को 1 लाख रुपए तथा बाल बंधुआ मज़दूरों एवं महिला बंधुआ मज़दूरों को 2 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई है।

इसके साथ ही प्रत्येक राज्य को इस संबंध में सर्वेक्षण के लिये प्रति ज़िला 4.50 लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई।

शोषण के विरुद्ध अधिकार प्रैक्टिस क्विज


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Chapter Wise Polity Quiz

शोषण के विरुद्ध अधिकार (Art. 23 – 24) अभ्यास प्रश्न

  1. Number of Questions - 5
  2. Passing Marks - 80 %
  3. Time - 4 Minutes
  4. एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।

Identify the correct statements from the given statements;

  1. Children below the age of 14 cannot be made to do any work in factories which is not suitable for that child.
  2. The Child Rights Protection Commission Act was brought in 2005.
  3. Punishment has been provided for child labour.
  4. The Child Labor (Prohibition and Regulation) Act 1986 deals with exploitation only.

1 / 5

दिए गए कथनों में से सही कथनों की पहचान करें;

  1. कारखानों में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से ऐसा कोई काम नहीं करवाया जा सकता जो उस बच्चे के लिए उपयुक्त न हो।
  2. 2005 में बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम लाया गया था।
  3. बाल मजदूरी के लिए दंड की व्यवस्था की गई है।
  4. बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 शोषण से ही संबंधित है।

Which of the following statements regarding bonded labor is correct?

  1. According to the Global Slavery Index released in 2016, about 8 million people in India are living in modern slavery.
  2. Poverty and socio-economic inequality are the main reasons behind the spread of bonded labour.
  3. The Bonded Labor System (Abolition) Act, 1976 completely abolished bonded labor in India.
  4. Financial assistance was arranged under the Bonded Labor Rehabilitation Scheme 2016.

2 / 5

बंधुआ मज़दूरी से संबंधित निम्न में से कौन सा कथन सही है?

  1. 2016 में जारी ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स के अनुसार, भारत में तकरीबन 8 मिलियन लोग आधुनिक गुलामी में जी रहे हैं।
  2. गरीबी एवं सामाजिक-आर्थिक असमानता बंधुआ श्रम के प्रसार के पीछे प्रमुख कारण है।
  3. बंधुआ मज़दूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 से भारत में बंधुआ मज़दूरी पूरी तरह से ख़त्म हो गई।
  4. बंधुआ मज़दूर पुनर्वास योजना 2016 के तहत वित्तीय सहायता की व्यवस्था की गई।

Which of the following statements is true with respect to Article 23?

  1. Human trafficking and forced labor are prohibited.
  2. Buying and selling of human beings like commodities comes under the category of human trafficking.
  3. Forced labor means making someone work against their will.
  4. He talks about ending bonded labor as well.

3 / 5

अनुच्छेद 23 के संबंध में निम्न में से कौन सा कथन सत्य है?

  1. मानव का दुर्व्यापार और बलात श्रम निषिद्ध है।
  2. इंसानों का वस्तुओं की तरह खरीद-बिक्री दुर्व्यापार की श्रेणी में आता है।
  3. बलात श्रम का मतलब किसी से उसकी इच्छा के विरुद्ध काम करवाना है।
  4. बंधुआ मजदूरी को भी ये ख़त्म करने की बात करता है।

Which of the following is not true about exploitation?

  1. To make someone work against his will and beyond his capacity is exploitation.
  2. According to Karl Marx, one class of the society is the exploiter and the other is the exploited.
  3. Article 22 and 23 deal with exploitation.
  4. There is no tradition of exploitation in India.

4 / 5

शोषण के बारे में इनमें से क्या सही नहीं है?

  1. किसी से उसके इच्छा के विरुद्ध और उसके क्षमता से अधिक काम लेना शोषण है।
  2. कार्ल मार्क्स के अनुसार समाज का एक वर्ग शोषक होता है और दूसरा शोषित।
  3. अनुच्छेद 22 और 23 शोषण से संबंधित है।
  4. भारत में शोषण की परंपरा नहीं है।

Which of the following statements regarding bonded labor is not correct?

  1. According to the Global Slavery Index released in 2016, about 8 million people in India are living in modern slavery.
  2. Poverty and socio-economic inequality are the main reasons behind the spread of bonded labour.
  3. After the Bonded Labor System (Abolition) Act, 1976, bonded labor was completely abolished in India.
  4. Financial assistance was arranged under the Bonded Labor Rehabilitation Scheme 2016.

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बंधुआ मज़दूरी से संबंधित निम्न में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. 2016 में जारी ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स के अनुसार, भारत में तकरीबन 8 मिलियन लोग आधुनिक गुलामी में जी रहे हैं।
  2. गरीबी एवं सामाजिक-आर्थिक असमानता बंधुआ श्रम के प्रसार के पीछे प्रमुख कारण है।
  3. बंधुआ मज़दूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के बाद से भारत में बंधुआ मज़दूरी पूरी तरह से ख़त्म हो गई।
  4. बंधुआ मज़दूर पुनर्वास योजना 2016 के तहत वित्तीय सहायता की व्यवस्था की गई।

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अगला – धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार । Right to religious freedom

संस्कृति औरशिक्षा संबंधी अधिकार

संवैधानिक उपचारों का अधिकार ।Right to constitutional remedies

रिट के प्रकार और उसके कार्य क्षेत्र

मूल अधिकार के अन्य उपबंध अनुच्छेद 33, अनुच्छेद 34 और अनुच्छेद 35

मूल अधिकारों एवं निदेशक तत्वों में टकराव का विश्लेषण

विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया और विधि की सम्यक प्रक्रिया क्या है?

संविधान की मूल संरचना और केशवानन्द भारती केस

संविधान संशोधन की पूरी प्रक्रिया

राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP)

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मूल संविधान भाग 3↗️
भारत में बंधुआ मजदूरी↗️