शोषण के विरुद्ध अधिकार ॥ Right against exploitation

ये लेख ↗️मौलिक अधिकारों वाले लेख का एक कंटिन्यूएशन है। इस लेख में सरल और सहज भाषा में शोषण के विरुद्ध अधिकार (right against exploitation) को जानेंगे।

शोषण के विरुद्ध अधिकार
(अनुच्छेद 23-अनुच्छेद24)

शोषण के विरुद्ध अधिकार

शोषण के विरुद्ध अधिकार
(right against exploitation)

शक्ति प्रयोग के द्वारा या फिर हालात का फायदा उठाते हुए जब किसी से इच्छा के विरुद्ध और उसके क्षमता के अधिक काम लिया जाता है और उसके अनुरूप पारिश्रमिक नहीं दिया जाता है तो उसे शोषण (exploitation) कहते हैं।

इसमें आपके साथ अमानवीय व्यवहार हो सकता है, आपके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य आपके साथ हो सकता है, आदि-आदि।

तभी तो कार्ल मार्क्स ने कहा था कि दुनिया दो वर्गों में बंटा है; एक है शोषित वर्ग (Exploited class) और दूसरा है शोषक वर्ग (Exploiting class)। शोषक वर्ग कभी नहीं चाहते कि शोषित वर्ग उसके समकक्ष आ जाये।

मार्क्स के सम्पूर्ण सिद्धान्त पर तो हमारा देश नहीं चलता है पर किसी का शोषण न हो इसका ध्यान बकायदे रखा गया है।

ये हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है इसका पता तो इसी से चलता है कि इसे मौलिक अधिकार का हिस्सा बना दिया गया है।

और इसका सही से पालन हो इसके लिए कई कानून इसके सपोर्ट में बनाए गए हैं ताकि शोषित वर्ग का उन्मूलन हो सकें। तो आइये देखते हैं मौलिक अधिकारों के इस श्रेणी में क्या खास है।

शोषण के विरुद्ध अधिकार और उसके अनुच्छेद

इसमें कुल 2 अनुच्छेद आते हैं। अनुच्छेद 23 और अनुच्छेद 24। जिसका विवरण निम्न है

🔰अनुच्छेद 23 

मानव दुर्व्यापार एवं बलात श्रम का निषेध
Prohibition of human trafficking and forced labor 

इसमें दो टर्म है, पहला है मानव दुर्व्यापार

जैसे कि इसके नाम से ही स्पष्ट है ये इन्सानों का वस्तु की तरह खरीद -बिक्री तथा महिलाओ से जबरन वेश्यावृति करने को मजबूर करना, दास प्रथा और इसी तरह के अन्य काम जिससे इन्सानों का शोषण होता हो, उसका ये निषेध करता है।

दूसरा टर्म है – बलात श्रम का निषेध,बलात श्रम का अभिप्राय है काम करवा कर पैसे नहीं देना।

इसे मौलिक अधिकारों की श्रेणी में रखने के बाद भी मानव दुर्व्यापार और बलात श्रम कभी खत्म नहीं हुआ, आज भी मानव व्यापार, वेश्यावृति और बंधुआ मजदूरी जैसे कुरीति देखने को मिलते ही रहते हैं।

इस को रोकने के लिए और मौलिक अधिकारों के प्रावधानों को शत-प्रतिशत हासिल करने के उद्देश्य से कई कानून बनाए गए हैं जैसे कि – बंधुआ मजदूरी व्यवस्था (निरसन) अधिनियम 1976 तथा समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 आदि ।

यहाँ पर ये याद रखना जरूरी है कि, राज्य चाहे तो आप से सैन्य काम और इसी तरह के अन्य काम करवा सकता है वो भी बिना पैसो के,हालांकि ये रेयर होता है पर हो सकता है इसीलिए इसे अपवाद की श्रेणी में रखा जाता है।

🔰अनुच्छेद 24

कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का निषेध
Prohibition of employment of children in factories 

ये कहता है कि कारखानों या इसी तरह के किसी भी अन्य जगह में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से ऐसा कोई काम नहीं करवाया जा सकता जो उस बच्चे के लिए उपयुक्त न हो।

पर जैसा कि हम जानते है कि सिर्फ इससे तो काम बनने वाला था नहीं इसीलिए इसको प्रभावपूर्ण बनाने के उद्देश्य से कुछ कानून बनाए गए हैं।

जैसे कि 1986 का बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम जिसे कि 2016 में फिर से संशोधित कर इसे बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 कर दिया गया।

इसमें अधिनियम में साफ-साफ कहा गया है कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी परिसंकटमय कामों में नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए बकायदे दंड की व्यवस्था भी की गयी है।

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