स्वतंत्रता का अधिकार ॥ Right to Freedom

इस लेख में हम ‘स्वतंत्रता का अधिकार (Right to freedom)’ पर सरल और सहज चर्चा करेंगे।

ये लेख मौलिक अधिकार पर लिखे गए ↗️पिछले लेखों का कंटिन्यूएशन है। आप उसे भी जरूर पढ़ें और इस लेख को पूरा पढ़ें।

स्वतंत्रता का अधिकार 
(अनुच्छेद 19 – अनुच्छेद 22)

स्वतंत्रता का अधिकार
स्वतंत्रता का अधिकार

नाम से ही स्पष्ट है कि ‘स्वतंत्रता का अधिकार’ के अंतर्गत आने वाले अनुच्छेद स्वतंत्रता से संबन्धित है।

और हम सब इस अनुच्छेद से संबन्धित हैं। मैं ये अभी लिख रहा हूँ इसका मतलब इसी में से किसी एक अनुच्छेद का इस्तेमाल कर रहा हूँ।

स्वतंत्रता किसे अच्छी नहीं लगती! इतिहास पलट के देखों तो पता चलता है कि आधे से ज्यादा इतिहास तो लोगों के स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते ही बीती है। पर क्यों ?

क्योंकि स्वतंत्रता सीधे मानवजाति के विकास से जुड़ा है। हम एक विवेकशील प्राणी है और आज हम इतनी तरक्की इसलिए कर पाएँ है क्योंकि हमें इच्छा अनुरूप स्वतंत्रता मिला।

पर बेशुमार स्वतंत्रता हमेशा अराजकता (Anarchy) और विनाश (Destruction) ही लाता है, इसीलिए स्वतंत्रता को नियमों और क़ानूनों के दायरे में लाया गया ताकि एक लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना की जा सकें।

हम मौलिक अधिकारों के अंतर्गत जितने भी प्रकार के स्वतंत्रता का अध्ययन करेंगे वो सभी आवश्यकतानुसार (As required) है न कि इच्छानुसार (At will); ऐसा क्यों है ये आप पढ़ते-पढ़ते समझ जाएँगे।

स्वतंत्रता का अधिकार और उसके प्रकार
(Right to freedom and its types)

🔰अनुच्छेद 19

अनुच्छेद 19 छह प्रकार की स्वतंत्रता का अधिकार देता है।        

🔷 1. अभिव्यक्ति की आजादी; मतलब की कुछ भी बोलने की आजादी 
🔷 2. शांतिपूर्वक और बिना हथियार के सम्मेलन का अधिकार 
🔷 3. संघ या गुट बनाने का अधिकार 

🔷 4. भारत में निर्बाध कहीं भी घूमने का अधिकार 
🔷 5. भारत में कहीं भी बस जाने का अधिकार 
🔷 6. भारत में कहीं भी व्यापार करने का अधिकार 

याद रखने का तरीका
(Way to remember)

इसे याद रखना आसान है। आप बस स्टोरी के इस पैटर्न को याद कर लीजिये।

आपको बोलने की आजादी मिली, आपने खूब बोला, जो मन में आया वो बोला पर आपको इससे शांति नहीं मिली तो आपने शांति पूर्वक सम्मेलन करने का सोचा।

इससे आपको थोड़ी शांति तो मिली पर पर लोगों ने ज्यादा भाव नहीं दिया। इससे आपके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा और आपने अपने जैसे लोगों का एक संघ या गुट बना ली। ताकि अच्छे से प्रदर्शन कर सकें।

इसमें और लोगों को जोड़ने के लिए आपने देश भर में निर्बाध संचरण किया पर तभी आपकी पोल खुल गयी और पुलिस आपके पीछे पड़ गयी

तो बसने के अधिकार का फायदा उठाते हुए आप देश के किसी कोने में जाकर बस गये ताकि पुलिस आपको खोज न सकें,

चूंकि आपके पास अब कोई चारा नहीं बचा था इसीलिए आपने वहीं अपना व्यापार शुरू कर दिया और शांति पूर्ण जीवन बिताने लगे।

ये कहानी अगर आपको समझ में आ गयी हो तो समझो आपको ये भी याद हो गया। 

स्वतंत्रता का अधिकार और कुछ तथ्य

इसमें एक और अधिकार भी था – संपत्ति खरीदने और बेचने का अधिकार। इसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम 1978 के द्वारा हटा दिया गया।

अब आपके मन में ये सवाल आ सकता है कि इसे हटा क्यों दिया गया। क्योंकि संपत्ति तो अभी भी सबके पास होती है। 

बात कुछ ऐसी थी पहले बड़े-बड़े जमींदार हुआ करते थे। और जमीन का मालिकाना हक़ उसी के पास होता था।

अगर स्थिति ऐसी ही रहती तो सोचो कि गरोबों का अपना जमीन कभी नहीं होता। वो हमेशा जमींदार के पास बंधुआ मजदूर की तरह काम करते।

तो कुल मिलाकर देखें तो एक गुलामी से तो आजाद हुए ही थे और दूसरे प्रकार के गुलामी में जकड़ रहे थे।

इसीलिए इसे मूल अधिकार से हटाकर संवैधानिक अधिकार बना दिया गया ताकि जमींदारी प्रथा खत्म हो जाये, गरीबों को भी अपनी जमीन मिल सकें और जनहित में किसी काम के लिए सरकार को जमीन की उपलब्धता बनी रहें।

अब तो समझ गए न कि क्यों इसे मूल अधिकार में से हटा दिया गया। इसके रहने से अन्य दूसरे मूल अधिकारों का उल्लंघन होता जो कि लोकतांत्रिक देश के लिए अच्छी बात तो बिलकुल भी नहीं है।

इसी से संबन्धित एक और अधिकार था अनुच्छेद 31, इसको क्यों हटाया गया। इस दिलचस्प कहानी को ↗️दूसरे लेख में अलग से समझेंगे। अभी बात करते हैं स्वतंत्रता के अधिकार की ।

स्वतंत्रता का अधिकार और अपवाद

इसमें भी अपवाद है जैसे कि आपको संघ बनाने की आजादी है पर अगर आपने आतंकवादी संघ बना लिया तो फिर तो इस अधिकार को भूल जाइए ।

आपको बोलने की आजादी मिली है पर अगर आपने राष्ट्र विरोध में कुछ बोला तो फिर आप उस अधिकार को भूल जाइए

आपको शांति पूर्वक सम्मेलन करने का अधिकार मिला है पर अगर आपने दंगा फैलाने की कोशिश की तो फिर उस आजादी को भूल जाइए और धारा 144 के लिए तैयार रहिए।

अगर आपको निर्बाध घूमने की आजादी मिली है पर अगर आप किसी और के घर जबर्दस्ती घूमने चले गए तो फिर वो अधिकार भूल जाइए।  

इसीलिए तो कहा जाता है न कि स्वतंत्रता आवश्यकतानुसार है न कि ईच्छानुसार।

🔰अनुच्छेद 20

अपराध के लिए दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण
Protection in relation to conviction for crime 

अगर आप जिंदा हैं तो मुमकिन है कि आप से कोई अपराध हो जाये या फिर आप जानबूझकर ही कर दें पर फिर भी आपको अपराध से ये तीन संरक्षण मिलेगा।

🔹 1. यदि आपने कोई ऐसा काम किया है जो कानून के नजर में अपराध नहीं है तो आपने भले ही कितना ही बुरा काम क्यों न किया हो लेकिन वह अपराध नहीं कहलाएगा।

और अगर आप अपराधी सिद्ध हो चुके है तो आपको उससे ज्यादा सजा नहीं मिल सकता जो उस अपराध के लिए पहले से निर्धारित सजा है। 

जैसे कि – अगर चोरी के लिए 1 वर्ष की जेल की सजा है तो आपको इससे ज्यादा सजा नहीं मिल सकता।

🔹 2. एक अपराध के लिए एक से अधिक बार सजा नहीं दी जा सकती। जैसे कि आपने चोरी की और एक साल की सजा भुगत कर आ गए है तो उसी चोरी के लिए आपको फिर से सजा नहीं दी जा सकती है।  

🔹 3. आपको आपके ही विरुद्ध गवाह के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। यानी कि आपने चोरी की है पर गवाह के रूप में आपको खुद के ही विरुद्ध गवाही के लिए पेश नहीं किया जा सकता।

अब तो समझ रहें हैं न कि किस प्रकार वकील इन सब चीजों का फायदा उठाता होगा।

🔰अनुच्छेद 21 

प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता या जीने की आजादी
Soul and personal freedom or freedom to live 

पूरे संविधान के सबसे महत्वपूर्ण अनुच्छेद में से एक है- प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता या जीने की आजादी।

ये तो एक मानवाधिकार है – जीने का हक़ सब को है। और जीने के हक़ से मेरा मतलब समझ रहें हैं न ।

जिंदा तो तभी रहेगा न जब उसे खाना मिलेगा, कपड़े मिलेंगे, रहने के लिए एक स्थान मिलेगा। तो ये सब उपलब्ध कराना राज्य का काम होता है।

और राज्य करती भी है, रहने के लिए घर देती है, खाने के लिए अनाज उपलब्ध करवाती है, कई प्रकार के भत्ते देती है। 

🔷 मतलब कि किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता को ‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया‘ द्वारा वंचित किया जाएगा अन्यथा नहीं 

ये जो टर्म है विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया इसका मीनिंग बहुत ही डीप है। आप इसे यहाँ क्लिक करके जरूर पढ़ें, इससे आपकी स्वतंत्रता के प्रति समझ व्यापक हो जाएगी।

ये एक बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण अधिकार है जो अक्सर चर्चा में रहता है सुप्रीम कोर्ट को बार- बार ये स्थापित करना पड़ता है कि क्या-क्या जीने का अधिकार है।

इसकी तो बहुत बड़ी लिस्ट सुप्रीम कोर्ट ने बना रखी है पर समझने के लिए कुछ चीज़ें महत्वपूर्ण है।

जैसे कि –
🔹 निजता का अधिकार (Right to privacy),
🔹 स्वास्थ्य का अधिकार (Right to health)
🔹 14 वर्ष की उम्र तक निशुल्क शिक्षा का अधिकार 

🔹 निशुल्क कानूनी सहायता का अधिकार 
🔹 सूचना का अधिकार जिसे कि 2005 में इसमें जोड़ा गया 
🔹 सोने का अधिकार (Right to sleep)

🔹 खाने का अधिकार (Right to eat)
🔹 बिजली का अधिकार (Right to electricity)
🔹 प्रदूषण से मुक्ति का अधिकार (Right to freedom from pollution)
🔹 प्रतिष्ठा का अधिकार (Right of reputation)
🔹 सुनवाई का अधिकार (Right of hearing)
🔹 सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा का अधिकार आदि

मतलब ये समझ लीजिये की पहले जीने के लिए सिर्फ रोटी, कपड़ा और मकान हुआ करता था पर अब सिर्फ उतने से काम नहीं बनता इसीलिए समय के साथ जीने के लिए जो भी चीज़ जरूरी हो जाती है, उस सबको इस में शामिल कर लिया जाता है।

इसी का एक उप-भाग है
‘शिक्षा का अधिकार’
 

अनुच्छेद 21 ‘क’ – 6 से 14 वर्ष तक के बच्चे को निशुल्क शिक्षा का अधिकार 

इसे 2002 में 86 वां संविधान संसोधन द्वारा जोड़ा गया था। उसके बाद ही सर्वशिक्षा अभियान जैसे कार्यक्रम लाया गया था। 

🔰अनुच्छेद 22

निरोध एवं गिरफ्तारी से संरक्षण
Prevention and Protection from arrest

अगर आप अपराध कर देते हैं और आपको अगर किसी साधारण कानून के तहत हिरासत में लिया जाता है तो आपको कुछ अधिकारें मिलती है जिसका चाहें तो आप इस्तेमाल कर सकते है। 

🔷 1. गिरफ्तार क्यों किया जा रहा है इसके लिए सूचना मांगने का अधिकार 
🔷 2. अपनी तरफ से बात करने के लिए वकील हायर करने का अधिकार 

🔷 3. 24 घंटे के अंदर मैजिस्ट्रेट के सामने पेश करने का अधिकार 
🔷 4. दंडाधिकारी द्वारा बिना अतिरिक्त निरोध (detention) दिये 24 घंटे में रिहा करने का अधिकार 

लेकिन अगर आप किसी विशेष कानून के तहत हिरासत में लिए जाते हो तो आपको ये अधिकार नहीं मिलता है,

जैसे अगर आपको ‘राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम‘ के तहत दोषी पाया जाता है तो बिना किसी वारंट के भी गिरफ्तार किया जा सकता है,

और आपको बकायदे रिमांड पर भी भेजा जा सकता है। उस समय ये अधिकार आपके किसी काम नहीं आएंगी।

इसीलिए ये काफी विवादित रहा है, ये क्यों विवादित रहा है, इसे जब हिबियस कॉर्पस केस पढ़ेंगे तो आप समझ जाएँगे।

स्वतंत्रता का अधिकार; याद ऐसे रखें

‘स्वतंत्रता का अधिकार’ को आप इस स्टोरी से याद रख सकते हैं – अनुच्छेद-19 के तहत आपको इतनी आजादी दी जाती है कि उसका गलत फायदा उठाकर आप कोई अपराध कर बैठते है,

पर कोर्ट में आप अनुच्छेद 20 का फायदा उठा कर बच जाते हैं। तब जज आपको अनुच्छेद 21 के तहत जीने का अधिकार दे देता है।

पर आप फिर भी नहीं मानते है और फिर गलती कर बैठते है, इस बार आपको गिरफ्तार कर लिया जाता है। अब आप अनुच्छेद 22 के तहत अपना वकील ढूंढ रहें है।  

अगर ये स्टोरी आपको याद हो गयी तो आप को ये भी याद हो गया होगा।

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आगे हम शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24) को जानेंगे। उसे अभी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
शोषण के विरुद्ध अधिकार

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