रुपए पर लिखा ‘मैं अदा करने का वचन देता हूँ’ इसका क्या मतलब होता है।

इस लेख में हम रुपए पर लिखा ‘मैं अदा करने का वचन देता हूँ’ इसका क्या मतलब होता है। इसके बारे में जानेंगे ।

रुपए पर ‘मैं धारक को अदा करने का वचन देता हूँ’ इसका क्या मतलब होता है। 

अक्सर हमारा ध्यान रुपए पर लिखे इस वाक्य पर जाता है पर हम उसके बारे में ज्यादा नहीं सोचते है लेकिन वो बहुत ही महत्वपूर्ण बात होती है । आइये समझते है।

देखिये हम सब जानते है कि कोई भी बैंक नोट का मूल्य उसके उत्पादन में लगे मूल्य का कई गुना होता है।

अगर 2000 रुपए का एक नोट है तो उसे बनाने का खर्चा मुश्किल से 5 रुपए आता है। पर उसका मूल्य  2000 रुपए के बराबर होता है।

लोग उसको 2000 रुपए के मूल्य जितना माने इसीलिए रिजर्व बैंक लोगों को एक वचन(प्रॉमिस) देता है कि ‘मैं धारक को’ यानि कि जिस किसी के पास भी अभी ये नोट है। 2000 रुपए अदा करने का वचन देता हूँ।

दूसरे शब्दों में कहूँ तो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 26, के अनुसार रिजर्व बैंक उस बैंक नोट पर अंकित मूल्य अदा करने के लिए ज़िम्मेवार है।

रिजर्व बैंक का ये संवैधानिक दायित्व बनता है कि उस बैंक नोट के विनिमय में उसके मूल्य के बराबर राशि या तो छोटे मूल्यवर्ग के बैंक नोट अथवा ‘भारतीय सिक्काकरन अधिनियम 2011’ के अंतर्गत उतने ही मूल्य के सिक्के दें।

तो कुल मिलाकर ये एक प्रॉमिस है जो आरबीआई उन लोगों से करता है जो इसका इस्तेमाल करेंगे। ताकि जितना मूल्य उस नोट पर अंकित है उसे वही माना जाये।

उम्मीद है आप इसका मतलब समझ गए होंगे

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