Stock Exchange in Hindi (स्टॉक एक्स्चेंज: कार्य, सूचकांक आदि)

Basics of Share Market Part 5

इस लेख में हम सरल और सहज हिन्दी में स्टॉक एक्स्चेंज (Stock Exchange in hindi) पर चर्चा करेंगे, तो लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
Stock Exchange in hindi

ये लेख बेसिक्स ऑफ शेयर मार्केट सिरीज़ का पांचवा पार्ट है। शेयर मार्केट के कॉन्सेप्ट को पूरी तरह से समझने के लिए जरूरी है कि आप पार्ट 1 से पढ़ें। पार्ट 1 पढ़ने के लिए ↗️यहाँ क्लिक करें। अगर आप पढ़ चुके है या फिर सिर्फ इसी को समझना चाहते है तो इसे मैसेज को नजरंदाज करें।

Stock Exchange in Hindi

अगर किसी कंपनी को अपना शेयर बेचना है तो वे लोगो के घर-घर जाकर तो नहीं बेचेंगे इसीलिए एक ऐसी जगह तो होनी ही चाहिए जहां से कंपनी अपना शेयर बेच सके और निवेशक उसे वहाँ से खरीद सके। वहीं जगह है – स्टॉक एक्स्चेंज (Stock exchange)।

यानी कि कंपनी जो शेयर बेचना चाहते है और निवेशक जो उस शेयर को खरीदना चाहते है; के बीच एक पुल का काम करती है स्टॉक एक्स्चेंज (Stock exchange)। ये निवेशकों, ट्रेडर्स और कंपनी, सभी के लिए एक सुलभ और पारदर्शी प्लैटफ़ार्म मुहैया कराते है।

दूसरे शब्दों में, स्टॉक एक्स्चेंज (Stock exchange) एक वित्तीय संगठन है जहां पर प्रतिभूति बाज़ार के संघटकों जैसे कि शेयर, बॉन्ड, डिबेंचर, आदि की खरीद-बिक्री की जाती है। इसके अलावे भी इसके कई अन्य कार्य है –

स्टॉक एक्स्चेंज के प्रमुख कार्य
(Major functions of stock exchange
in hindi)

1. स्टॉक एक्स्चेंज, प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री के द्वारा प्रतिभूति बाज़ार में तरलता (Liquidity) उपलब्ध कराता है। यानी कि लोग अपने-अपने को घरों से पैसे बाहर निकालकर बाज़ार में लाते है, जो कि इसका सही स्थान भी है।

2. स्टॉक एक्स्चेंज, द्वितीयक प्रतिभूति बाज़ार (Secondary securities market) का अकेला सबसे महत्वपूर्ण संस्थान है जो शेयरों का मूल्य निर्धारण करके निवेशकों को अति महत्वपूर्ण सूचना उपलब्ध कराता है।

3. ये अपने सूचकांकों (Indices) द्वारा प्रतिभूति बाज़ार की वर्तमान स्थिति, रुझान आदि सूचनाएँ उपलब्ध करता है।

4. ये सूचीबद्ध (Listed) कंपनियों को उनके वर्तमान स्टॉकधारकों की सूचना प्रदान करता है जिससे कि कंपनियों को कई सुविधाएं मिलती है। जैसे कि लाभांश (Dividend) का वितरण।

भारत में प्रथम स्टॉक एक्स्चेंज ‘The Native share and stock brokers Association’ के नाम से 1870 में खुला था। इसे ही आगे चलकर बंबई स्टॉक एक्स्चेंज (BSE) कहा जाने लगा।

भारत में मुख्य दो स्टॉक एक्स्चेंज है एक है Bombay Stock Exchange (BSE) और दूसरा है National Stock Exchange (NSE) जिसकी चर्चा हम अभी करेंगे। इसके अलावा भी स्टॉक एक्स्चेंज है जिसकी चर्चा हम आगे जरूरत के हिसाब से करेंगे।

Bombay Stock Exchange (BSE)

BSE भारत का प्रथम एक्स्चेंज है पहले ये एक प्रादेशिक स्टॉक एक्स्चेंज था जिसे कि 2002 में राष्ट्रीय स्टॉक एक्स्चेंज में परिवर्तित कर दिया गया। भारत के कुल स्टॉक के 75 प्रतिशत का कारोबार इसी के माध्यम से होता है।

वर्तमान में BSE से सम्बद्ध चार शेयर सूचकांक है। 1. सेंसेक्स (Sensex) 2. BSE 200 3. BSE 500 4. राष्ट्रीय सूचकांक (National Index) ।

इसमें से जो सबसे फेमस सूचकांक (Index) है वो है सेंसेक्स (Sensex)। हम सेंसेक्स के बारे में तो समझेंगे ही पर उससे पहले आइये जानते है कि सूचकांक क्या होता है।

सूचकांक क्या है?
(What is an index?
)

सूचकांक या इंडेक्स किसी चीज़ के प्रदर्शन को मानकीकृत तरीके से ट्रैक करने का एक तरीका है। दूसरे शब्दों में कहें तो किसी सामग्री के क्रमिक व्यवस्था (विशेष रूप से वर्णमाला या संख्यात्मक क्रम में) को सूचकांक (Index) कहते हैं। जैसे कि स्टॉक मार्केट को मानकीकृत तरीके से ट्रैक करने को स्टॉक इंडेक्स (Stock index) कहते हैं।

BSE के लिए ये जो सूचकांक है उसे सेंसेक्स कहते हैं। सेंसेक्स (SENSEX) का मतलब होता है – Sensitive Index

सेंसेक्स दरअसल 30 सबसे बड़ी कंपनियों का इंडेक्स है। शेयर मार्केट की वर्तमान स्थिति को बताने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। शेयर मार्केट अच्छा प्रदर्शन कर रहा है या बुरा, ये इससे पता चलता है।

देश की सबसे बड़ी 30 कंपनियां अगर अच्छा प्रदर्शन कर रही है तो ये मान लिया जाता है कि शेयर मार्केट अच्छा कर रही है और अगर वो 30 कंपनियाँ घाटे में जा रही है तो इसका मतलब शेयर मार्केट गिर रहा है।

अब आपके मन में सवाल आ सकता है कि 30 कंपनियाँ ही क्यों जबकि यहाँ तो लाखों कंपनियाँ है। दरअसल बात ये है कि ये जो सबसे बड़ी 30 कंपनियाँ है उसका मार्केट वैल्यू इतना ज्यादा होता है कि इसी से पूरे मार्केट का मोटा-मोटा अंदाजा लग जाता है कि मार्केट किस दिशा की ओर जाएगी।

इसे आप इस तरह से समझ सकते है – मान लीजिये कि किसी टीम में 3-4 अच्छे बल्लेबाज हैं तो क्या सिर्फ उसके खेल देखकर ये अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है कि पूरा खेल किस दिशा में जाएगा। बिलकुल लगाया जा सकता है और लगाया भी जाता है। यही काम यहाँ भी होता है सबसे बड़ी 30 कंपनियों का प्रदर्शन देखकर अंदाजा लगा लिया जाता है कि मार्केट किस दिशा में जा रहा है या जाने वाला है।

1979 में जब सेंसेक्स को लॉंच किया गया था तब 30 कंपनियों का वैल्यू 100 रखा गया था। यानी कि उस समय का सेंसेक्स 100 था। जबकि आज के सेंसेक्स की बात करें तो आज ये 40,000 है। इसका मतलब ये हुआ उस दिन अगर किसी ने 100 रुपया का स्टॉक खरीदा होगा तो आज के हिसाब से उसका मूल्य 40,000 रुपया हो गया होगा। अब आप समझ रहे होंगे कि क्यों सेंसेक्स का ऊपर जाना निवेशकों के लिए अच्छा होता है

इसी प्रकार से BSE और भी 3 प्रकार के इंडेक्स जारी करता है, जैसे कि BSE 200 – जिस प्रकार सेंसेक्स 30 कंपनियों के परफ़ोर्मेंस को दिखाता है उसी प्रकार BSE 200, 200 कंपनियों का सूचकांक है जिसमें कि सेंसेक्स के 30 कंपनियाँ भी शामिल होती है।

विदेशी निवेशकों के लिए इसका डॉलर वर्जन भी बनाया गया है जिसे Dollex कहा कहा जाता है।

इसी प्रकार BSE 500, सबसे बड़े 500 कंपनियों का सूचकांक है और राष्ट्रीय सूचकांक (National index)- कुल 100 कंपनियों का इंडेक्स है, जिसमें कि सेंसेक्स की कंपनियाँ भी शामिल होती है।

कुल मिलाकर यही सेंसेक्स और इंडेक्स का बेसिक्स है। इसी हिसाब से सब स्टॉक एक्स्चेंज का अपना इंडेक्स होता है। जैसे कि National Stock Exchange (NSE) की बात करें तो वे निफ्टी (Nifty) के नाम से इंडेक्स जारी करती है। जो कि देश कि सबसे बड़ी 50 कंपनियों का इंडेक्स होता है। सेंसेक्स से ये इस मायने में अलग है कि जहां सेंसेक्स का Base Value 100 है, वहीं निफ्टी का Base Value 1000 है।

अब हम बात करेंगे स्टॉक एक्स्चेंज के घटकों के बारे में, जो कि स्टॉक एक्स्चेंज का ही एक भाग है और इसे अच्छे से चलते रहने में ये मदद करते हैं।

स्टॉक एक्स्चेंज के घटक
(Component Stock of exchange in hindi
)

ब्रोकर या दलाल

ये एक मिडिलमैन का काम करता है जो कि स्टॉक एक्स्चेंज का एक पंजीकृत सदस्य होता है। ये अपने ग्राहक की तरफ से प्रतिभूतियों की खरीद या बिक्री करता है और कुल सौदा पर अपना कमीशन लेता है। इसीलिए इसे कमीशन ब्रोकर भी कहा जाता है।

जॉब्बर या आढ़ती

एक जॉब्बर ब्रोकर का भी ब्रोकर होता है। जिस तरह एक आम निवेशक ब्रोकर के संपर्क में रहता है उसी तरह एक ब्रोकर जॉब्बर के संपर्क में रहता है। दूसरे शब्दों में कहें तो जॉब्बर का आम निवेशकों से कोई संपर्क नहीं होता है।

ये स्टॉक एक्स्चेंज में ही ट्रेडिंग पोस्ट पर नियुक्त होता है और वहीं से कम मूल्य अंतरों पर प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री का काम करता हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्स्चेंज में इसे तारवानी वाला कहा जाता है। वहीं लंदन स्टॉक एक्स्चेंज में इसे मार्केट मेकर कहा जाता है। बॉम्बे स्टॉक में अगर किसी कंपनी की 3 करोड़ से ऊपर की शेयर पूंजी है तो वह जॉब्बर को नियुक्त कर सकता है।

सेबी (SEBI)

भारतीय प्रतिभूति बाज़ार का उचित और जरूरी रेग्युलेशन के उद्देश्य से भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Security and Exchange Board of India/SEBI) का वर्ष 1988 में एक गैर-संवैधानिक निकाय के रूप में स्थापना किया गया था। हालांकि सेबी अधिनियम, 1992 द्वारा इसे संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। इसका मुख्यालय मुंबई में है। सेबी के बोर्ड में चेयरमैन के अतिरिक्त 9 अन्य सदस्य होते हैं।

सेबी अधिनियम 1992 के अनुसार सेबी के कुछ महत्वपूर्ण कार्य इस प्रकार है –

1. ये स्टॉक एक्स्चेंज, मर्चेन्ट बैंक, म्यूचुअल फ़ंड, ब्रोकरों, रजिस्ट्रार, हस्तांतरण एजेंट आदि का पंजीकरण करता है।
2. ये इन्वेस्टिंग से जुड़े शिक्षा को प्रोत्साहन देता है। इसके अलावा ये समय-समय पर जरूरी गाइडलाइंस जारी करता है और भारतीय प्रतिभूति बाज़ार पर अपनी नजर बनाए रखता है।
3. ये स्टॉक एक्स्चेंज तथा संबन्धित अन्य मध्यस्थों की जांच तथा उनकी ऑडिट करता है ताकि सबकुछ व्यवस्थित और कानूनसम्मत तरीके से चलता रहे।

ये लेख यहीं पे समाप्त करते हैं अगले पार्ट में हम कुछ दिलचस्प उदाहरणों के माध्यम से शेयर मार्केट को समझेंगे। नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करें।

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