Types of unemployment in Hindi (बेरोजगारी के प्रकार)

इस लेख में हम बेरोजगारी के प्रकार (Types of unemployment) पर सरल और सहज चर्चा करेंगे, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें। बेरोजगारी से संबन्धित अन्य लेखों का लिंक आपको नीचे मिल जाएगा, उसे भी विजिट करें।

बेरोजगारी
(Unemployment
)

बेरोजगारी किसी देश विशेष की समस्या नहीं है, अपितु ये सभी राष्ट्रों की समस्या है । यह एक सार्वभौम समस्या है । हर समय हर देश में एक बड़ी संख्या में अकुशल श्रमिकों के साथ-साथ कुशल व विशिष्ट प्रशिक्षण प्राप्त श्रमिक भी बेरोजगार होते है।

ऐसे श्रमिक देश में प्रचलित मजदूरी की दरों पर काम करने के लिए तैयार होते है, किन्तु काम न मिलने के कारण बेरोजगार होते है. इस प्रकार की विशेषता वाले तथ्य सभी देशों में, सभी राज्यों में एक ही प्रकार के नहीं होते है, किन्तु एक बड़ी संख्या में बेरोजगारी अशुभ का सूचक है, सामाजिक व्याधि ग्रस्तता का सूचक है।

इस व्याधि-शूल से पहले तो व्यक्ति तड़प उठता है। फिर समाज व राष्ट्र तड़प उठता है। इस व्यवस्था से किसी को तड़पते देख ऐसा आभास होता है और इसके परिणामस्वरूप अनैतिकता, मानसिक विकारों एवं अपराध में वृद्धि होती है।

बेरोजगारी के प्रकार
(Types of unemployment
)

कार्य की प्रकृति एवं अवधि के आधार पर बेरोजगारी के अनेक प्रकार प्रकट होते है।  भारत में बेरोजगारी के प्रकारों को निम्न रूप से समझा जा सकता है ।           

मौसमी बेरोजगारी
Seasonal unemployment

मौसमी बेरोजगारी का मतलब है कुछ खास महीनों में काम का न मिलना। दूसरे शब्दों में कहें तो कुछ काम ऐसे होते हैं जो कुछ खास महीनों में तो खूब रोजगार पैदा करते हैं लेकिन काम खत्म हो जाने के बाद साल के अन्य महीनों में फिर से वहीं स्थिति आ जाती है।

मौसमी बेरोजगारी कृषि क्षेत्र और कुछ विशेष उत्पादक इकाईयों –चीनी एवं बर्फ के कारखानों में देखी जाती है। कृषि क्षेत्र, चीनी व बर्फ के कारखानों में काम की प्रकृति ऐसी है कि श्रमिकों को एक वर्ष में 4 – 6 महीने बेकार रहना पड़ता है ।   

चक्रीय बेरोजगारी
cyclical unemployment

चक्रीय बेरोजगारी व्यापार एवं वाणिज्य के क्षेत्रों में पाई जाती है। जब व्यापार में तेजी-मंदी या उत्तार-चढाव होता है, तब बेरोजगारी का चक्रवात सामने आता है। जब मंदी होती है तब बेरोजगारी बढ़ जाती है ।

जब तेजी आती है तो बेरोजगारी घट जाती है। व्यापार की इन चक्रीय दशाओं की उत्पत्ति से संबंधित अनेक सिद्धांत  है –जलवायु का सिद्धांत, अधिक बचत या कम उपभोग का सिद्धांत, मुद्रा का सिद्धांत, मनोवैज्ञानिक सिद्धांत आदि । इनमें कभी कोई मुख्य हो जाता है ।

संरचनात्मक बेरोजगारी
Structural unemployment

संरचनात्मक बेरोजगारी मूल रूप से आर्थिक ढांचे से संबंधित है। जब आर्थिक ढाँचे में दोष या विकास के कारण परिवर्तन होता है, तब बेरोजगारी देखने को मिलती है।

ऐसा देखा जाता है कि किसी समय में किसी विशेष उद्योग का विशेष रूप से विकास होता है, तो किसी दूसरे उद्योग का ह्रास होता है।

ह्रास होने वाले उद्योग के मजदूर बेकार हो जाते है –जैसे भारत में कपड़े के उद्योग में मशीनों के आ जाने से जुलाहों का सफाया हो गया।

प्रोद्योगिक बेरोजगारी
Technological unemployment

जब यंत्रों, मशीनों व उपकरणों की प्रकृति में परिवर्तन आता है तो तकनीक विशेष की जानकारी रखने वाले मजदूर बेकार हो जाते है।  पूर्व में चमड़े व जूत्ते बनाने का मोची अपने हाथों से करते थे।

आज ये काम मशीनों द्वारा होने लगे, जिसमें ये काम कम समय, कम लागत व अच्छे ढंग से होने लगे। इसके फलस्वरूप मोची वर्ग का कार्यक्षेत्र कम हो गया और उनमें बेरोजगारी बढ़ी ।

अर्द्ध-बेरोजगारी
Semi unemployment

जब कोई व्यक्ति प्रचलित वास्तविक मजदूरी से भी कम मजदूरी पर काम करने लगता है, तो ऐसी अवस्था को ही अर्द्ध-बेरोजगारी कहाँ जाता है।  ‘बैठे से बेगार भली’ के सिद्धांत पर व्यक्ति कार्य स्वीकार कर लेता है।

जैसे स्नातकोत्तर पास व पीएचडी उपाधि प्राप्त व्यक्ति का निजी स्कूलों में दो या तीन हज़ार मासिक पर कार्यशील होते देखा जाना।

शिक्षित बेरोजगारी(educated unemployment) के सम्बन्ध में भारत में श्रम तथा रोजगार मंत्रालय तथा योजना आयोग के अनुमानों में अंतर्विरोध है

फिर भी इन आंकड़ों के आधार पर निश्चित रूप से कहाँ जा सकता है कि भारत में 1961 और 1991 तक 30 वर्षों के दौरान शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 5.90 लाख से बढ़कर 224.34 लाख हो गयी है ।

छिपी बेरोजगारी
Hidden unemployment

छिपी बेरोजगारी के अंतर्गत आवश्यकता से अधिक लोग एक ही तरह के कार्य संपादन में देखे जाते है। इस प्रकार की स्थिति ग्रामीण कृषि-अर्थव्यवस्था में देखी जा सकती है।

गाँव में उतने भूमि के हिस्से पर कई  व्यक्ति काम करते है जिसमें केवल एक व्यक्ति कर सकता है।  जिससे उनके द्वारा उत्पादन में कोई वृद्धि नहीं होती है।

यदि उसमें एक के अलावा अन्य को हटा दिया जाए तो कृषि-उत्पादन में कोई कमी नहीं आएगी ।

घर्षणात्मक बेरोजगारी
Frictional unemployment
 

उत्पादन की तकनीकी में तेजी के साथ परिवर्तन घर्षणात्मक बेरोजगारी को जन्म देती है। जब किसी भी उद्योग में उत्पादन की स्थिति और मशीने बदलती है तो पुराने श्रमिक कुछ समय के लिए बेकार हो जाते है ।  

किन्तु शीघ्र ही उत्पादन की नयी तकनीकों में प्रशिक्षण प्राप्त कर वे अपने लिए नया रोजगार खोज लेते है ।

उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट होता है कि बेरोजगारी के विविध रूप पाए जाते है। इसके अतिरिक्त ऐच्छिक बेरोजगारी, अनैच्छिक बेरोजगारी आदि की चर्चा की जाती है।

शिक्षित बेरोजगारी
Educated unemployment

 शिक्षित बेरोजगारी भारत की आर्थिक समस्याओं की प्रमुख समस्या है | यह स्थिति हमारे आर्थिक विकास में बाधक है | शिक्षित वर्ग में बेरोजगारी अलग किस्म की बेरोजगारी है |

जैसे कोई भी व्यक्ति वह स्नातक, स्नातकोत्तर पढ़ाई  कर लेते है और वह बेरोजगार हो जाते है तो इसी स्थिति को शिक्षित बेरोजगारी कहाँ जाता है।

शिक्षित बेरोजगारी पर अलग से एक लेख है । आप ⬆️ यहाँ क्लिक करके उसे पढ़ सकते हैं।

◼◼◼◼◼◼◼

Types of unemployment PDF

🔔 Follow me –

Types of unemployment

educated unemployment

शिक्षित बेरोजगारी भारत सहित विकासशील देशों की एक प्रमुख समस्या है। शिक्षित वर्ग में बेरोजगारी अलग किस्म की बेरोजगारी है। जैसे कोई भी व्यक्ति वह स्नातक (graduate), स्नातकोत्तर (Postgraduate) पढ़ाई कर लेते है और वह बेरोजगार हो जाते है,भारत में शिक्षित बेरोजगारी की समस्या गंभीर रूप में उपस्थित है। वो कैसे आइये समझते हैं।
Read More

key solution of unemployment

बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है। इसके परिणाम बड़े ही घातक है। ये कितनी घातक है इसे आप अपने आस-पास भी महसूस कर सकते हैं। इसका दूर होना व्यक्ति और समाज दोनों के हित में है पर इसे संगठित एवं योजनाबद्ध रूप में ही दूर किया जा सकता है सिर्फ सरकारी प्रयास से ही यह संभव नहीं है। वो कैसे? आइये इसे समझते हैं। Read More

Types of unemployment

जनसंख्या समस्या

आज जब जनसंख्या समस्या की बात कर रहे है तो वो समय याद आता है। हाँ ! वही समय – जब भूत प्रेत हुआ करता था, लोगों को अंधेरे से डर लगता था, जंगलों से डर लगता था। पर अब ऐसा समय आ गया है कि अगर भुतिया जंगलों में भी जाओगे तो भूत मिले न मिले लोग जरूर मिलेंगे वो भी अगर फोन से चिपके मिले तो उसमें कोई बड़ी बात नहीं! जिधर देखो लोग ही लोग नजर आते है
पढ़िये पूरा लेख ……

bad effect of unemployment

इस लेख में बेरोजगारी के दुष्परिणाम पर सरल और सहज चर्चा की गई है तो अगर आपने बेरोजगारी को समझ लिया है, उसके प्रकारों को समझ लिया है तो आप इस लेख को पढ़ कर इसके दुष्परिणाम को जरूर समझें। बेरोजगारी के दुष्परिणाम को यहाँ निम्नलिखित बिन्दुओं में प्रस्तुत किया गया है।

पढ़िये पूरा लेख ……

Types of unemployment

हनीमून पर जाने की शुरुआत कब हुई
लिपस्टिक लगाने की शुरुआत कब से हुई

One thought on “Types of unemployment in Hindi (बेरोजगारी के प्रकार)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *