उपग्रह के प्रकार ॥ उपग्रह के उपयोग ॥ भारत द्वारा छोड़े गये उपग्रह

इस लेख में हम उपग्रह के प्रकार इसके उपयोग और भारत द्वारा छोड़े गए उपग्रहों पर संक्षिप्त चर्चा करेंगे।

उपग्रह के प्रकार तथा भारत द्वारा छोड़ी गयी उपग्रहें

🔷अंतरिक्ष के प्रति लोगों में जिज्ञासा प्राचीन काल से ही रही है और पीढ़ी दर पीढ़ी ये जिज्ञासा बढ़ती ही गयी। ये बढ़ती जिज्ञासा कब जरूरत बन गयी पता ही नहीं चला और अब तो ये ज़िंदगी का एक हिस्सा है। कुछ देशों ने तो अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्रों में वाकई झंडे गाड़ दिये है। खैर भारत भी देर-सवेर इस क्षेत्र में आ ही गया ।

उपग्रहों का इतिहास
(History of satellites
)

भारत में अन्तरिक्ष कार्यक्रम का आरंभ 1962 में प्रसिद्ध अन्तरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की अध्यक्षता में गठित भारतीय राष्ट्रीय अन्तरिक्ष अनुसंधान समिति के गठन के साथ हुआ। 15 अगस्त, 1969 को इस समिति को पुनर्गठित कर भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो की स्थापना की गयी।

अन्तरिक्ष अनुसंधान को स्वतंत्र अस्तित्व प्रदान करने के लिए 1972 में अन्तरिक्ष आयोग तथा अन्तरिक्ष विभाग का गठन किया गया। 

1963 में थुंबा केरल में साउंडींग रॉकेट लौंचिंग फैसिलिटी सेंटर की स्थापना भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 21 नवम्बर, 1963 को भारत ने अपना पहला रॉकेट ‘नाइक एपाश’ प्रक्षेपित किया।

और इसके बाद इसरो ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज इसरो दुनिया के टॉप अंतरिक्ष एजेंसी है। आज इस लेख में जानेंगे की उपग्रह कितने प्रकार के होते हैं और भारत ने किन-किन श्रेणियों में कितने उपग्रह छोड़े है।

उपग्रह के प्रकार 
(Types of Satellite)

कार्य के आधार पर उपग्रहों के प्रकार

संचार उपग्रह
(Communication satellite)

संचार उपग्रह पृथ्वी के साथ-साथ उसका चक्कर 24 घंटे में लगाते हैं। ये पृथ्वी के किसी विशेष भू-भाग का निरंतर परिदृश्य करते रहते है।

संचार उपग्रहों पृथ्वी पर हजारों किमी दूर स्थित विभिन्न केन्द्रों के मध्य रेडियो एवं टेलीविज़न और अन्य सिगनलों के द्वारा संपर्क स्थापित करता है एवं उस भू-भाग विशेष के किसी भी स्थान से किसी स्थान का टेलीविज़न, दूरभाष संपर्क स्थापित कराने में मदद कराता है।

⏫भारत द्वारा छोड़े गए संचार उपग्रह आप ↗️इसरो के वेबसाइट पर देख सकते हैं।

वैज्ञानिक उपग्रह
(Scientific Satellite)

वैज्ञानिक उपग्रहें खोजों और शोध कार्यों में इस्तेमाल में लाये जाते हैं। वैज्ञानिक उपग्रहों द्वारा सूर्य प्रदत ऊर्जा, आयन मण्डल में सूर्य के अस्त होने से होने वाले परिवर्तन, मंगल, शुक्र, बृहस्पति आदि ग्रहों के चारों ओर का वातावरण आदि के विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है।

जैसे कि नासा का पार्कर सोलर प्रोब और इसरो का आदित्य एल 1 जो कि सूर्य के अध्ययन से संबंधित है। 

मौसमी उपग्रह
(Weather Satellite)

मौसम संबंधी सूचनाओं के लिए वायुमंडलीय परिस्थितियों का अध्ययन करने वाले पार्थिव उपग्रहों को मौसमी उपग्रह कहते हैं।

पृथ्वी से काफी ऊंचाई पर स्थित इन मौसमी उपग्रहों में लगे यंत्र बादलों के आर-पार भी मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त करने की क्षमता रखते हैं।

मौसम संबंधी सटीक पूर्वक जानकारी देने के कारण ये उपग्रह प्राकृतिक विपदाओं का सामना करने में सहायक होते हैं। जैसे इंडिया का insat 3D 

दूरसंवेदी उपग्रह
(Remote Sensing Satellite)

इसकी सहायता से पृथ्वी की सतह पर स्थित किसी भी वस्तु से उत्पन्न होने वाले या प्रतिबिम्बित होने वाले विकिरणों को प्रकाश एवं इन्फ्रा-रेड किरणों का उपयोग करने वाले सूक्ष्म कैमरों तथा एलेक्ट्रोनिक उपकरणों द्वारा नीले-लाल, नीले-हरे एवं लगभग इन्फ्रा-रेड कणों के चित्रों के रूप में लिया जा सकता है।

रिमोट सेंसिंग का उपयोग भूगोल, भूमि सर्वेक्षण और अधिकांश पृथ्वी विज्ञान विषयों (उदाहरण के लिए, जल विज्ञान, पारिस्थितिकी , मौसम विज्ञान, समुद्र विज्ञान, ग्लेशियोलॉजी, भूविज्ञान) सहित कई क्षेत्रों में किया जाता है ; सैन्य और खुफिया सेवाओं में भी इससे काफी मदद ली जाती है। जैसे कि Cartosat-1

मैरीसैट उपग्रह
(Marine Satellite)

मैरीसैट उपग्रह समुद्री जलयानों के नाविकों को संकट की प्रत्येक घड़ी में रेडियो संकेतों द्वारा दिशा-ज्ञान और निर्देश देते है। इस प्रकार के उपग्रहो से वे दूसरे जलयानों के नाविकों एवं अपने मुख्यालय से भी संपर्क कर सकते है। 

नौवहन उपग्रह
(Navigation Satellite)

नौवहन उपग्रह (navigation satellite) वे सैटिलाइट है जो रोज जरूरत पड़ने वाली जानकारियां जैसे कि लाइव ट्रैफिक, डिस्टेन्स मेजर,लाइव लोकेशन आदि उपलब्ध करवा कर हमारे जीवन को आसान बनती है। भारत के पास इस प्रकार की कुछ उपग्रहें है

💢जी.पी.एस. समर्थित भू संवर्धित नौवहन (गगन)
GPS Aided Geo Augmented Navigation(GAGAN)

गगन नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में इस्तेमाल में लाया जाता है। ये आवश्‍यक परिशुद्धता एवं विश्‍वसनीयता के साथ उपग्रह आधारित नौवहन सेवाएं मुहैया कराता है। भारतीय वायु क्षेत्र में बेहतर वायु यातायात प्रबंधन मुहैया कराना, गगन के मुख्‍य उद्देश्‍य हैं। 

भारतीय प्रादेशिक नौवहन उपग्रह प्रणाली (आई.आर.एन.एस.एस.): नाविक

IRNSS NaVic

यह भारत का अपना लोकल जीपीएस प्रणाली है जो उच्चस्तरीय नौवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु डिज़ाइन किया गया है और ये सफलता पूर्वक कार्य भी कर रहा है।

⏫इसमें छोड़े गये satellites

उपग्रह
उपग्रह

↗️IRNSS NaVic के बारे में एक स्वतंत्र लेख इस साइट पर मौजूद है, जिसमें इस उपग्रह प्रणाली से संबन्धित लगभग सारी महत्वपूर्ण जानकारी दी हुई है। आप चाहे तो उसे पढ़ सकते हैं। 

स्थिति के आधार पर उपग्रहों के प्रकार

सूर्य तुल्यकालिक उपग्रह
Sun synchronous satellite

सूर्य तुल्यकालिक उपग्रह निम्न भू-कक्षा का एक उपग्रह है, जो पृथ्वी से 1000 किमी की ऊँचाई पर स्थित होती है। इस प्रकार की उपग्रहें जिस समय जहां उपस्थित होता है, अगली बार भी वह ठीक उसी स्थान पर व उसी समय आएगा। यह अंडाकार कक्षा में 200 – 600 किमी की सीमा में कार्य करते हैं। 

भूस्थिर उपग्रह 
geostationary satellite

पृथ्वी की चक्कर लगाने वाली ये उपग्रह लगभग 36000 किलोमीटर ऊपर भूमध्य रेखा के ऊपर पृथ्वी की गति की दिशा में लगभग 24 घंटे में अपना एक चक्कर पूरा करती है।

एक एकल भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी की सतह के लगभग 40 प्रतिशतभाग  पर नजर रख सकता है। ऐसे तीन उपग्रह, जिनमें से प्रत्येक को 120 डिग्री देशांतर से अलग किया जाय तो यह पूरे ग्रह का कवरेज प्रदान कर सकता है।

उपग्रह

भू-समकालिक उपग्रह 
geosynchronous satellite

ये भूस्थिर उपग्रहों के समान ही कार्य करता है बस इसमें कुछ inclination या झुकाव होता है। जैसा कि आप नीचे के तस्वीर में देख भी सकते हैं।  

उपग्रह

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