Vice President of india (उप-राष्ट्रपति: भूमिका, शक्तियाँ, आदि)

इस लेख में हम भारत के उप-राष्ट्रपति (Vice President of India) के संबन्धित सभी मुख्य पहलुओं को सरल और सहज भाषा में समझने का प्रयास करेंगे, तो आप अंत तक जरूर बने रहें।
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भारत के उप राष्ट्रपति को समझिये

हम इससे पहले भारत के राष्ट्रपति पर बहुत ही विस्तार से चर्चा कर चुके हैं। भारत के उप-राष्ट्रपति (Vice President of India) की अच्छी समझ के लिए जरूरी है आपके पास राष्ट्रपति की अच्छी समझ हो।

एक क्रम से सभी लिंक नीचे दिया गया है, अगर आपको राष्ट्रपति से संबन्धित कोई भी डाउट हो तो आप उसे क्लियर कर लें।

Vice President of india

भारत के उप-राष्ट्रपति (Vice President of India) के बारे में बात करें तो एक उप-राष्ट्रपति के पद के हैसियत से उसके पास ज्यादा कुछ करने को होता नहीं है।

उप-राष्ट्रपति की प्रासंगिकता तभी सामने आती है जब राष्ट्रपति किसी कारण से अपने पद पर न हो। इसीलिए उप-राष्ट्रपति को His Superfluous Highness कह दिया जाता है। बेसिकली हिन्दी में इसका मतलब होता है ”फालतू का राजा”।

इस तरह से अगर देखें तो संविधान ने उप-राष्ट्रपति को क्षमता के अनुरूप कोई विशेष कार्य नहीं सौंपे हैं पर इसका मतलब ये कतई नहीं है उसकी बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। जरूरत थी तभी तो इस पद का सृजन किया गया है।

सबसे बड़ी जरूरत इसकी इस सेंस में है कि ये राजनीतिक निरंतरता को बनाए रखने में मदद करता है। वो कैसे? इसे आगे समझेंगे।

भारत में उप-राष्ट्रपति सिस्टम अमेरिका के उप-राष्ट्रपति सिस्टम पर आधारित है लेकिन फिर भी अमेरिकी उप-राष्ट्रपति व्यवस्था से ये इस मायने में अलग है कि अगर अमेरिका में राष्ट्रपति का पद रिक्त होता है तो उप-राष्ट्रपति, अपने पूर्व राष्ट्रपति के कार्यकाल की शेष अवधि तक उस पद पर बना रहता है।

दूसरी ओर, भारत का उप-राष्ट्रपति, राष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर, पूर्व राष्ट्रपति के शेष कार्यकाल तक उस पद पर बना नहीं रहता है। वह एक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में तब तक कार्य करता है, जब तक कि नया राष्ट्रपति कार्यभार ग्रहण न कर लें।

जैसे ही नया राष्ट्रपति आ जाता है उप-राष्ट्रपति पुनः अपने पद पर लौट आता है। यहीं बात अनुच्छेद 65 में लिखा हुआ है। इससे आप समझ पा रहे होंगे कि किस तरह उप-राष्ट्रपति निरंतरता को बनाए रखता है।

अनुच्छेद 63 में लिखा है कि भारत में एक उप-राष्ट्रपति होगा पर जाहिर है जैसा कि अभी हमने ऊपर भी पढ़ा है, उप-राष्ट्रपति के पास ज्यादा कुछ करने को रहता नहीं है। हाँ पर एक अनुच्छेद 64 है जो उप-राष्ट्रपति को कुछ ढंग का काम करने की अवसर प्रदान करता है।

दरअसल अनुच्छेद 64 में लिखा है कि उप-राष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होगा। यानी कि उप-राष्ट्रपति राज्यसभा की अध्यक्षता करता है और सच तो ये है कि यही इसका मुख्य कार्य है, यहीं पर रहके उप-राष्ट्रपति को कुछ सृजनात्मक काम करने का मौका बराबर मिलता है।

क्योंकि उप-राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए कुछ ढंग का काम करने के लिए तभी दरवाजे खुलते हैं जब राष्ट्रपति का पद किसी भी कारण से रिक्त हो। उप-राष्ट्रपति का पद बनाए भी तो इसी दिन के लिए गए हैं।

आइये अब उप-राष्ट्रपति के निर्वाचन के बारे में जानते हैं।

🧿भारत के उप राष्ट्रपति का निर्वाचन
Election of the Vice President of India

अनुच्छेद 66 भारत के उप-राष्ट्रपति (Vice President of India) के निर्वाचन की बात करता है।

अगर आपने राष्ट्रपति का निर्वाचन और चुनाव प्रक्रिया पढ़ा हो तो उप-राष्ट्रपति के लिए भी वहीं सब व्यवस्था है बस इसके कुछ प्रावधान अलग है। क्या है?

राष्ट्रपति के लिए निर्वाचन मंडल में जहां सिर्फ निर्वाचित सदस्य ही चुनाव प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं वहीं उप-राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में निर्वाचित और गैर-निर्वाचित यानी कि मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं।

लेकिन याद रखिए कि राज्य सभा के और लोकसभा के ही सदस्य इस चुनाव में भाग लेते हैं, न कि राज्य विधान सभा के। जबकि राष्ट्रपति के चुनाव में तो राज्य विधानसभा के सदस्य भी शामिल होते हैं।

तो बस इसके बारे में इतना ही है बाद बाकी रही उप-राष्ट्रपति के चुनाव प्रक्रिया की बात तो ये भी उसी तरह से होता है जैसा कि राष्ट्रपति का, अंतर बस इतना ही है कि इसमें संसद के प्रत्येक सदस्य का जितना वोट वैल्यू है बस उसी को काउंट किया जाता है।

जबकि राष्ट्रपति चुनाव में हमने देखा था कि राज्य विधानमंडल के सदस्यों का वोट वैल्यू भी काउंट किया जाता है। अगर आपको राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया की समझ नहीं है तो आप ↗️यहाँ क्लिक करके उसे अवश्य पढ़ लें।

🧿भारत के उप-राष्ट्रपति पद की अर्हताएँ
Qualifications for the Vice President of India

✅उप-राष्ट्रपति के चुनाव हेतु किसी व्यक्ति को निम्नलिखित अर्हताएँ पूर्ण करनी चाहिए।

1. वह भारत का नागरिक हो। 2. वह 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका को। 3. वह राज्यसभा सदस्य बनने के लिए अर्हित हो। 4. वह केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण या अन्य किसी सार्वजनिक प्राधिकरण के अंतर्गत किसी लाभ के पद पर न हो।

◼ यहाँ पर एक बात ध्यान रखिए कि एक वर्तमान राष्ट्रपति अथवा उप-राष्ट्रपति, किसी राज्य का राज्यपाल और संघ अथवा राज्य का मंत्री के पद को लाभ का पद नहीं माना जाता है इसीलिए ऐसे व्यक्ति उप-राष्ट्रपति की उम्मीदवारी के योग्य होता है।

◼ इसके अतिरिक्त उप-राष्ट्रपति के चुनाव के नामांकन के लिए उम्मीदवार के कम से कम 20 प्रस्तावक और 20 अनुमोदक होने चाहिए। प्रत्येक उम्मीदवार को भारतीय रिजर्व बैंक में 15000 रुपए जमानत राशि के रूप में जमा करना आवश्यक होता है। इसके अलावा कुछ शर्तें भी है जो उप-राष्ट्रपति पर लागू होता है।

🧿भारत के उप राष्ट्रपति पद की शर्ते
Terms of the Vice President of India

संविधान द्वारा उप राष्ट्रपति पद हेतु निम्नलिखित दो शर्तें निर्धारित की गईं है। 1. वह संसद के किसी भी सदन अथवा राज्य विधायिका के किसी भी सदन का सदस्य न हो। यदि ऐसा कोई व्यक्ति उप राष्ट्रपति निर्वाचित होता है तो वह माना जाएगा कि उप राष्ट्रपति का पद ग्रहण करने के तिथि से उसने अपनी उस सदन की सीट रिक्त कर दिया है। 2. वह कसी लाभ के पद पर न हो।

🧿भारत के उप-राष्ट्रपति के शपथ
Oath of the Vice President of India

अनुच्छेद 69 के तहत भारत के उप-राष्ट्रपति (Vice President of India) अपना पद ग्रहण करने से पहले शपथ या प्रतिज्ञान लेता है और उस पर अपने हस्ताक्षर करता है। अपनी शपथ में उप-राष्ट्रपति शपथ लेता है कि-

1. मैं भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा। 2. मैं अपने पद और कर्तव्यों का निर्वाह श्रद्धापूर्वक करूंगा।

उप-राष्ट्रपति को उसके पद की शपथ राष्ट्रपति अथवा उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा दिलवाई जाती है।

🧿भारत के उप-राष्ट्रपति की पदावधि
Term of Vice-President of India

अनुच्छेद 67 के तहत भारत के उप-राष्ट्रपति (Vice President of India) की पदावधि उसके पद ग्रहण करने से लेकर 5 वर्ष तक होता है। हालांकि वह अपनी पदावधि में किसी भी समय अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को दे सकता है। उसे अपने पद से पदावधि पूर्ण होने से पूर्व भी हटाया जा सकता है। उसे हटाने के लिए औपचारिक महाभियोग की आवश्यकता नहीं है। उसे राज्यसभा द्वारा संकल्त्प पारित कर पूर्ण बहुमत द्वारा हटाया जा सकता है। अर्थात सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और इसे लोकसभा की सहमति आवश्यक है। परंतु ऐसा कोई प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता जब तक 14 दिन का अग्रिम नोटिस न दिया गया हो।

उप-राष्ट्रपति अपने 5 वर्ष की पदावधि के उपरांत भी पद पर बना रह सकता है। जब तक उसका उतराधिकारी पद ग्रहण न कर ले । वह उस पद पर पुनर्निर्वाचन के योग्य भी होता है। वह इस पद पर कितनी ही बात निर्वाचित हो सकता है।

🧿भारत के उप राष्ट्रपति और चुनाव विवाद

अनुच्छेद 71 राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति दोनों के चुनाव विवादों से संबन्धित है। उप राष्ट्रपति के चुनाव से संबन्धित सभी शंकाए व विवाद की जांच और निर्णय उच्चतम न्यायालय द्वारा किए जाते हैं। जिसका निर्णय अंतिम होगा।

◼ उप राष्ट्रपति के चुनाव को निर्वाचक मण्डल के अपूर्ण होने के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती अर्थात जब निर्वाचक मण्डल में किसी सदस्य का पद रिक्त हो।

◼ यदि उच्चतम न्यायालयय द्वारा किसी व्यक्ति के उप राष्ट्रपति के पद पर निर्वाचन को अवैध घोषित किया जाता है तो उच्चतम न्यायालया की इस घोषणा से पूर्व उसके द्वारा किए गए कार्य अवैध घोषित नहीं होंगे – यानी कि वे प्रभावशाली रहेंगे।

उप राष्ट्रपति के कार्य दोहरे होते हैं।

1. वह राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करता है। इस संदर्भ में उसकी शक्तियाँ व कार्य लोकसभा अध्यक्ष की भांति ही होते हैं। अमेरिका के उप राष्ट्रपति भी सीनेट (जो कि अमेरिका का उच्च सदन है) का सभापति होता है।

✅2. जब राष्ट्रपति का पद उसके त्यागपत्र, निष्कासन, मृत्यु तथा अन्य कारणों से रिक्त होता है तो वह कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में भी कार्य करता है। वह कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में अधिकतम छह महीने की अवधि तक कार्य कर सकता है। इस अवधि में नए राष्ट्रपति का चुनाव आवश्यक है।

इसके अतिरिक्त अगर वर्तमान राष्ट्रपति अनुपस्थिति, बीमारी या अन्य किसी कारण से अपने कार्यों को करने में असमर्थ हो तो वह राष्ट्रपति के पुनः कार्य करने तक उसके कर्तव्यों का निर्वाह करता है।

◼ कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने के दौरान उप राष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं करता है। इस अवधि में उसके कार्यों का निर्वाह उप सभापति द्वारा किया जाता है।

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