एंटी ऑक्सीडेंट क्या है? ये शरीर के लिए इतना जरूरी क्यों है?

इस लेख में हम बड़े ही आसान और सरल भाषा में जानेंगे कि एंटी ऑक्सीडेंट क्या है? तथा ये शरीर के लिए इतना जरूरी क्यों है?

एंटी ऑक्सीडेंट क्या हैं?
(What is antioxidant?)

हमारे शरीर की कोशिकाओं को सिर्फ पोषण की कमी और बीमारी के संक्रमण का ही खतरा नहीं होता है, बल्कि कुछ और भी है जो कमोबेश उतने ही खतरनाक है; और वो है – फ्री रेडिकल्स।

फ्री रेडिकल्स क्या है?
(What is free radicals?)

इसे पहले समझ लेते हैं। शरीर में जब भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया चल रही होती है तो ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया भी काम करता है और उप-उत्पाद (By-product) के रूप में ये यह फ्री रेडिकल्स निकलते हैं।

दरअसल फ्री रेडिकल्स और कुछ नहीं एक लावारिस इलेक्ट्रॉन है। आगे समझेंगे कि ये करता क्या है।

अब ये ऑक्सीडेशन क्या है?
(What is oxidation?)

ऑक्सीडेशन या ऑक्सीकरण तब होता है जब एक परमाणु, अणु, या आयन रासायनिक प्रतिक्रिया में एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों को खो देता है।

नहीं समझ में आया? कोई बात नहीं इसे दूसरे तरीके से समझते है। ऑक्सीडेशन सिंपली एक रासायनिक अभिक्रिया(केमिकल रिएक्शन) है जो कि फ्री रेडिकल्स बनाता है।

अब ये तो समझ ही गये कि फ्री रेडिकल्स मुक्त कण होते हैं जो अलग-अलग आकार, माप और रासायनिक संगठन के होते हैं। तो सवाल उठता है कि ये करता क्या है?

फ्री रेडिकल्स से खतरा क्यों हैं?
(Why free radicals are harmful?)

जैसा कि हम जानते है इलेक्ट्रॉन हमेशा जोड़े(pair) में रहना पसंद करता है। जैसे ही इसे अपने जोड़े से अलग किया जाता है तो ये एक नया जोड़ा ढूँढने लगया है।

मतलब ये कि जैसे ही ये अपने साथी से बिछड़ते है तो ये एक फ्री रेडिकल बन जाता है। एक बार फ्री रेडिकल बनने के बाद, एक चेन रिएक्शन हो सकता है या होता है। 

पहला मुक्त कण या इलेक्ट्रॉन अपने पास वाले अणु से एक इलेक्ट्रॉन खींचता है और वह एक जोड़ा बना लेता है और स्थिर हो जाता है पर जिस अणु से वह इलेक्ट्रॉन लिया है वो अस्थिर हो जाता है यानी कि वो सिंगल हो जाता है और एक फ्री रेडिकल या मुक्त कण में बदल जाता है।

वो जोड़ा बनाने के लिए किसी और अणु से एक इलेक्ट्रॉन खींच लेता है और आगे वाले अणु को अस्थिर करता है। आगे वाले भी ऐसा ही करता है और यही तो चेन रिएक्शन है। और ये चलता ही रह सकता है। और अगर ये ऐसे ही चलता ही रहे तो-

ये कोशिकाओं को नष्ट करके हृदय रोगों, कैंसर और दूसरी बीमारियों की आशंका बढ़ा सकते हैं या फिर बढ़ा देते हैं। एंटी ऑक्सीडेंट इन्ही फ्री रेडिकल्स के प्रभाव से कोशिकाओं को बचाते हैं।

जैसा कि नाम से स्पष्ट हो जाता है कि एंटी ऑक्सीडेंट यानी कि ऑक्सीडेशन को रोकने वाला। ये एक अनु होते हैं, जो दूसरे अणुओं के ऑक्सीडेशन को रोकते हैं।

कैसे रोकते है ?
(How to work antioxidant?)

ये बिलकुल आसान है अब हम ये तो जान ही गए है कि फ्री रेडिकल एक इलेक्ट्रॉन होते हैं जो स्थिर होने के लिए जोड़े की तलाश में रहता है, एंटि ऑक्सीडेंट यही करता है कि उसे अपने में से एक इलेक्ट्रॉन दे देता है और उसे स्थिर कर देता है।

और इस प्रकार एंटी ऑक्सीडेंट हमें घातक बीमारियों से बचाता है। सीधे-सीधे कहूँ तो ये शरीर की आंतरिक सफाई का काम करता है। इसे इस तस्वीर में देख सकते हैं।

एंटी ऑक्सीडेंट

एंटी ऑक्सीडेंट किससे मिलता है?

सैकड़ों नहीं हजारों पढ़ार्थ एंटी ऑक्सीडेंट की तरह कार्य करते हैं। यह विटामिन, मिनरल्स और दूसरे कई पोषक तत्व होते हैं। बीटा कैरोटीन , ल्यूटिन लाइकोपिन, फ्लैवोनाइड , लीगनान जैसे एंटी ऑक्सीडेंट हमारे लिए बहुत जरूरी और महत्वपूर्ण हैं।

इनके अलावा मिनरल सेलेनियम भी एक एंटी ऑक्सीडेंट की तरह कार्य करता है। विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन ई की एक एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में हमारे शरीर में महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

एंटी ऑक्सीडेंट ताजे फल और सब्जियों में सबसे अधिक मात्र में पाये जाते हैं। इन्हे (Scavenger) स्कावेंजर भी कहते हैं, क्योंकि यह फ्री रेडिकल्स को खा कर शरीर की सफाई करते हैं।

गाजर है शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट

गाजर शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट बीटा-कैरोटीन से भरपूर है। यह शकरकंद , शलजम और पीली एवं नारंगी रंग की सब्जियों में भी होता है।

टमाटर में लाइकोपिन होता है। यह फेफड़े, बड़ी आंत और स्तन कैंसर से बचाता है और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखता है।

चाय हमें कैंसर, हृदय रोगों, स्ट्रोक और दूसरी बीमिरियों से बचाती है। हरी और काली दोनों चाय काफी लाभदायक होता है।

लहसुन एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो कैंसर और हृदय रोगों से लड़ने में मददगार होता है और बढ़ती उम्र के प्रभावों को कम करता है।

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