संघवाद यानी कि कम से कम दो स्तरों पर सरकार + शक्तियों का बंटवारा + संविधान + सरकारों के बीच विवाद सुलझाने के लिए स्वतंत्र न्यायालय। अगर दो स्तरों पर सरकार है तो दोनों के बीच किसी तरह का संबंध तो होगा ही; यदि दोनों मिल-जुल कर काम करेंगे तो स्थिति सहकारी संघवाद के होंगे, यदि एक-दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ में काम करेंगे तो स्थिति स्पर्धात्मक संघवाद के होंगे, यदि दोनों के बीच कटुता या अविश्वास ज्यादा बढ़ जाएगी तो स्थिति संघर्षात्मक संघवाद के होंगे और यदि दोनों एक दूसरे पर हमले पर उतर आए तो स्थिति आक्रामक संघवाद के होंगे।

इस लेख में हम सहकारी संघवाद (Cooperative federalism) पर सरल एवं सहज चर्चा करेंगे एवं इसके विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का प्रयास करेंगे, तो लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

सहकारी संघवाद
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संघवाद क्या है?

भारतीय संघवाद (Federalism) - [Polity Podcast] [भारतीय राजव्यवस्था] WonderHindi

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संविधान निर्माताओं ने भारत के संविधान में ही इसकी नींव रख दी थी कि भारत एक संघीय व्यवस्था वाला देश होगा। तभी तो दोहरी सरकार व्यवस्था को अपनाया गया, केंद्र और राज्य के मध्य शक्तियों का बंटवारा कर दिया गया और बकायदे इसके लिए तीन सूचियाँ बनायी गई (संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची), स्वतंत्र न्यायपालिका बनाया गया, द्विसदनीय विधायिका को अपनाया गया तथा अंतर्राज्यीय परिषद जैसी व्यवस्थाएं लायी गयी। यही तो संघीय व्यवस्था का आधार है और हमारे संविधान का अनुच्छेद 1 भी तो यही कहता है कि ‘भारत राज्यों का एक संघ है।’

कुल मिलाकर कहें तो, एकल राजनैतिक व्यवस्था के अंतर्गत एक ऐसा मिश्रित शासन व्यवस्था जहां एक केंद्रीय सरकार होती है और कई प्रांतीय सरकार और दोनों की शक्तियों का विभाजन इस तरह से किया जाता है जिससे कि दोनों स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकने और उसे क्रियान्वित कर सकने में सक्षम हो सके, संघवाद (Federalism) कहलाता है।

सहकारी संघवाद (Cooperative federalism)

सहकारी संघवाद एक ऐसी अवधारणा है जिसमें केंद्र और राज्य एक संबंध स्थापित करते हुए एक दूसरे के सहयोग से अपनी समस्याओं का समाधान करते है। इसी तरह से राज्य और पंचायत या नगरपालिका भी एक दूसरे के साथ सहयोगात्मक संबंध को स्थापित करते है और अपनी समस्याओं का समाधान करते हैं। इस प्रकार की स्थिति संघवाद के ऊर्ध्व संबंध को दर्शाते है, जिसके मूल में ये निहित होता है कि केंद्र और राज्यों में से कोई किसी से श्रेष्ठ नहीं है। 

इसी प्रकार संघवाद के क्षैतिज संबंधों की भी कल्पना की जाती है, जब राज्य और राज्य या पंचायत और पंचायत या फिर नगरपालिका और नगरपालिका एक दूसरे के साथ सहयोगात्मक संबंध स्थापित करते हुए अपने समस्याओं का समाधान तलाशता है।

◼ आमतौर पर एक ही समय में संघवाद के सभी आयामों को देखा जा सकता है। जैसे कि केंद्र में भाजपा की सरकार है और कई राज्यों में भी भाजपा की सरकार है। ऐसे में भाजपा शासित राज्यों और भाजपा शासित केंद्र के साथ स्वाभाविक रूप से सहयोग का भाग दिखता है। केंद्र की योजनाओं, विधियों या आदेश आदि को इन राज्यों में अच्छे से पालन किया जाता है। इसी तरह केंद्र भी इन राज्यों की सुनती है और बहुत सारी चीजों में इन राज्यों को प्राथमिकता भी मिलती है। कुल मिलाकर ये सहकारी संघवाद का ये एक बढ़िया उदाहरण पेश करता है।

◼ वहीं अगर उन राज्यों को देखें जिसमें भाजपा की सरकार नहीं है तो वहाँ पर एक प्रतियोगिता का भाव दिख सकता है। किसी चीज़ में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ दिख सकती है। यानी कि प्रतियोगी संघवाद (Competitive federalism) का रूप दिखा सकता है। उदाहरण के लिए जीएसटी आने से पहले की स्थिति को देखा जा सकता है। जहां राज्यों को अपने हिसाब से चीजों पर कर लगाने का अधिकार था और उसे पूरी छूट थी कि वो अपने राज्य में किसी खास वस्तु पर जितना चाहे उतना कर लगा सकती थी। पर NDA सरकार आने के बाद जीएसटी लाया गया। इस व्यवस्था को लाने के पीछे सहकारी संघवाद भी एक कारण था जिसमें सभी राज्यों के सहभागिता पर ज़ोर दिया गया तथा कर उगाही में एकरूपता लाने का प्रयास किया गया। 

◼ अगर उन राज्यों को देखें जिसमें भाजपा की सरकार नहीं है तो वहाँ पर एक कई मुद्दों पर केंद्र के साथ एक संघर्ष या विवाद की स्थिति दिख सकती है। जैसे कि केंद्र ने CAA पारित किया किया लेकिन कई राज्यों ने उसे मानने से इंकार कर दिया और बकायदे उसके लिए अपने विधानसभा में प्रस्ताव भी पारित किया। हालांकि राज्यों के ऐसे रवैये से कुछ होना नहीं है फिर भी दोनों के संबंध में एक अजीब प्रकार की कड़वाहट दिखती दिखती है, कम से कम सहयोग की भावना तो बिलकुल नहीं दिखती है। इस तरह की स्थिति को संघर्षात्मक संघवाद कहा जाता है।

◼ कई बार स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि केंद्र और राज्य मारा-मारी में उतर आती है। राज्य केन्द्र सरकार के कार्यकर्ताओं को मारने लग जाती है या फिर एक दूसरे के प्रति हिंसा पर उतारू हो जाती है। इस तरह की स्थिति को आक्रामक संघवाद कहा जाता है।

कुल मिलाकर सहकारी संघवाद एक अच्छी स्थिति है जिसमें केंद्र और राज्य एक साथ मिलकर, अपनी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, नीति और प्रशासनिक संबंधी व्यवस्थाओं में एकरूपता स्थापित करने का प्रयास करती है और केंद्र और राज्य एवं राज्य और राज्य के मध्य जो खाई होती है, उसे पाटने का काम करती है। इस नजरिए से देखें तो सहकारी संघवाद की अवधारणा भारत में एकता, अखंडता और बंधुत्व बढ़ाने के लिहाज़ से बहुत ही उपयुक्त प्रतीत होती है। 

भारतीय संघीय व्यवस्था एक सहकारी संघ व्यवस्था है।

ग्रेनविल ऑस्टिन

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