सहकारी संघवाद क्या है? । what is co-operative federalism

इस लेख में हम सहकारी संघवाद पर चर्चा करेंगे । अक्सर ये टर्म बार-बार न्यूज़ में आता रहता है पर बहुत से लोगों को इसके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं होता है। आइये इसे आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं।

संघवाद 

पहले संघवाद को समझते है इससे सहकारी संघवाद को समझना आसान हो जाएगा। संविधान निर्माताओं ने भारत के संविधान में ही इसकी नींव रख दी थी कि भारत एक संघीय व्यवस्था वाला देश होगा।

तभी तो दोहरी सरकार व्यवस्था को अपनाया गया और केंद्र और राज्य के मध्य शक्तियों का बंटवारा कर दिया गया, स्वतंत्र न्यायपालिका बनाया गया, द्विसदनीय विधायिका को अपनाया गया तथा अंतरराज्यीय परिषद जैसी व्यवस्थाएं लायी गयी। 

यही तो संघीय व्यवस्था का आधार है और हमारे संविधान का अनुच्छेद 1 भी तो यही कहता है कि ‘भारत राज्यों का एक संघ है।’ और यही तो संघवाद है। 

सहकारी संघवाद

 हाल के वर्षों में सहकारी संघवाद पर खूब ज़ोर दिया गया है और ये खूब चर्चा में भी रहा है। तो आइये अब जानते है कि सहकारी संघवाद क्या है? 

सहकारी संघवाद एक ऐसी अवधारणा है जिसमें केंद्र और राज्य एक संबंध स्थापित करते हुए एक दूसरे के सहयोग से अपनी समस्याओं का समाधान करते है।

इस प्रकार के क्षैतिज संबंध यह दर्शाते है कि केंद्र और राज्यों में से कोई किसी से श्रेष्ठ नहीं है। 

इसे इस तरह से समझते है – पहले हमारी पूरी व्यवस्था कमोबेश स्पर्धात्मक या प्रतियोगी संघवाद (competitive federalism) व्यवस्था पर आधारित था।

जहां राज्यों को अपने हिसाब से चीजों पर कर लगाने का अधिकार था और उसे पूरी छूट थी कि वो अपने राज्य में किसी खास वस्तु पर जितना चाहे उतना कर लगा सकती थी।

नीति निर्धारण के संबंध में भी कुछ ऐसा ही था। कई बार एक ही विषय पर केंद्र और राज्यों के नीतियों में कोई समरूपता स्थापित ही नहीं हो पाता था

मतलब हर एक चीज़ के मामले में केंद्र और राज्य के मध्य एवं राज्य और राज्य के मध्य एक प्रतियोगिता का भाव रहता था। 

पर NDA सरकार आने के बाद बड़े पैमाने पर सहकारी संघवाद पर ज़ोर दिया गया । GST व्यवस्था लाने के पीछे ये भी कारण था जिसमें सभी राज्यों के सहभागिता पर ज़ोर दिया गया तथा कर उगाही में एकरूपता लाने का प्रयास किया गया । 

योजना आयोग की जगह नीति आयोग जैसी नयी व्यवस्था लायी गयी ताकि नीति निर्माण में एकरूपता आ सके और एक भारत – श्रेष्ठ भारत जैसी अवधारणा को मजबूती मिल सके। 

यहीं तो सहकारी संघवाद है जिसमें केंद्र और राज्य एक साथ मिलकर, अपनी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, नीति और प्रशासनिक संबंधी व्यवस्थाओं में एकरूपता स्थापित करने का प्रयास करती है।

सहकारी संघवाद केंद्र और राज्य एवं राज्य और राज्य के मध्य जो खाई होती है, उसे पाटने का काम करती है।

इस नजरिए से देखें तो सहकारी संघवाद की अवधारणा भारत में एकता, अखंडता और बंधुत्व बढ़ाने के लिहाज़ से बहुत ही उपयुक्त प्रतीत होती है। 

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