What is DNA and How it works

DNA क्या होता है?

अगर ज़िंदगी का कोई एक केंद्र है तो वह न्यूक्लियस में है। जिसमें हमारे डीएनए (DNA) होते है।

          DNA यानी कि Deoxyribonucleic acid (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) असल में एक मॉलिक्यूल (अनु) है, जो किसी मुड़ी हुई लंबी सीढ़ी या दोहरी कुंडली (Double Helix) की तरह होता है ।

सीढ़ी के डंडे चार अलग-अलग तरह के छोटे मॉलिक्यूल्स से बने होते है।
इन्हे न्यूक्लियोटाइड कहते है ।

इन चारों न्यूक्लियोटाइडोन को एडेनिन, ग्वानिन, थाइमिन और साइटोसिन कहा जाता है और यही हमारे जेनेटिक अल्फाबेट के अक्षर है।

इस अक्षर की खास तरह की जमावट से सारे जिंदा चीज़ को निर्देश मिलते है। जैसे कि – कैसे बढ़ना, चलना, खाना, पचाना, माहौल को देखना या प्रजनन करना।

डीएनए की दोहरी कुंडली एक मशीन की तरह है। जो अरबों हिस्सों से मिलकर बनी है, जिन्हे कहते है परमाणु (Atoms)। हमारे डीएनए के एक मॉलिक्यूल में उतने ही Atoms है।

जीतने किसी गैलेक्सी में तारे होते है। इस प्रकार हम ये कह सकते है कि हर जिंदा जीव दरअसल एक छोटा ब्रह्मांड है।

DNA क्या करता है?

                       डीएनए आनुवांशिक जानकारियों के संरक्षक और आनुवांशिक निर्देशों के वाहक होते है।

ये मैसेज बहुत ही हिफाजत के साथ कॉपी करके एक सेल से दूसरे सेल और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाते जाते है।

DNA कैसे बनता है?

नया डीएनए मॉलिक्यूल तब बनता है जब आजाद होने वाला कोई प्रोटीन कुंडली के धागों को अलग कर देता है। जिससे सीढ़ीनुमा डंडे भी अलग हो जाते है।

कुंडली का हर धागा अपने पिछले साथी का नकल होता है । इस तरह दो एक जैसे डीएनए मॉलिक्यूल बन जाते है।

जीन्स का Reproduction इसी तरह होता है और वो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचते है।

डीएनए में बदलाव कैसे होता है?

जब जिंदा cells का बंटवारा होता है तो दोनों हिस्सों को डीएनए की एक कॉपी मिलता है।

एक खास तरह की प्रोटीन Proof Reading करता है ताकि सही letters का चुनाव हो ।

जिससे की डीएनए की कॉपी में कोई गड़बड़ न हो, मगर perfect तो कोई नहीं होता है ।

कभी-कभार proof reading में कोई गलती हो जाती है और जेनेटिक instruction में बदलाव आ जाता है।

इस मामूली सी घटना का परिणाम बड़े पैमाने पर सामने आता है। जैसे कि – त्वचा के रंग मे भिन्नता, शारीरिक बनावट में भिन्नता आदि ।

डीएनए टेस्ट क्या होता है?

वैसे तो 1000 से ज्यादा किस्म के डीएनए टेस्ट उपलब्ध है । जिसका प्रयोग जरूरत के हिसाब से अलग-अलग लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये किया जाता है।

लेकिन समान्यतः जो डीएनए टेस्ट होता है, उसमें माता-पिता, परिवार, खानदान, वंश या फिर जातीय समूह का पता लगाया जाता है।

दूसरे शब्दों में कहें तो डीएनए टेस्ट का मतलब होता है – आनुवांशिक सम्बन्धों का पता लगाना।

डीएनए जांच के लिये व्यक्ति के खून, बाल, त्वचा और एमनियोटिक फ्लुइड आदि का सैंपल लिया जाता है ।
(गर्भावस्था में भ्रूण के चारों ओर जो तरल पदार्थ होता है उसे एमनियोटिक फ्लुइड कहा जाता है।)

डीएनए टेस्ट ज़्यादातर इलाज़ और आपराधिक मामलों में खास जानकारी जुटाने के उद्देश्य से किया जाता है।

इसके अलावा उतराधिकार और संपत्ति के विवादों को या दूसरी तरह की भावनात्मक गुत्थियों को सुलझाने के लिये भी किया जाता है।

इसकी जांच करने वाली कई मान्यताप्राप्त प्रयोगशालाएँ हैं, जो 10 हज़ार से 50 हज़ार तक की फीस लेती है और समान्यतः 10 से 15 दिन में जांच की रिपोर्ट देती है।

अगर आप वक़्त में पीछे जा सकते तो क्या करते ?

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