Marshall law and National emergency (मार्शल लॉ और राष्ट्रीय आपातकाल)

इस लेख में हम मार्शल लॉ और राष्ट्रीय आपातकाल (Marshall law and National emergency) के मध्य अंतर पर चर्चा करेंगे।  

Marshall law and National emergency

Marshall law and National emergency

युद्ध, आंतरिक अशांति, दंगे या कानून के उल्लंघन जैसी स्थिति में आपातकाल भी लगाया जा सकता है और मार्शल लॉ भी। पर फिर भी दोनों में कुछ मूलभूत अंतर है। तो आइये देखते हैं वो क्या है- 

मार्शल लॉ और राष्ट्रीय आपातकाल 

💥 युद्ध, आंतरिक अशांति या फिर सशस्त्र विद्रोह आदि जैसे किसी भी स्थिति में अगर देश के किसी भाग में कानून व्यवस्था भंग हो जाये या फिर अराजकता फैल जाये तो ऐसी स्थिति में मार्शल लॉ लगाया जाता है। 

🔆 वहीं अगर आपातकाल की बात करें तो कानून व्यवस्था भंग न भी हो तब भी अगर युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह हो तो इसे लगाया जा सकता है। 

💥 मार्शल लॉ संविधान द्वारा प्रदत मूल अधिकारों को पूरी तरह प्रभावित करता है। यहाँ तक कि जहां ये लागू होता है वहाँ पर सरकार और साधारण कानूनी न्यायालय निलंबित हो जाता है।

🧿 तो कुल मिलाकर देखें तो जहां पर मार्शल लॉ लगता है ये केवल उसी क्षेत्र को प्रभावित करता है। 

💥 वहीं अगर आपातकाल की बात करें तो मूल अधिकार तो इससे प्रभावित होता ही है पर इसके साथ ही साथ केंद्र और राज्य के मध्य प्रशासनिक और वित्तीय संबंध भी प्रभावित होता है। राष्ट्रपति और संसद की शक्ति बढ़ जाती है। जबकि मार्शल लॉ में सैन्य शक्ति बढ़ जाती है। 

💥 मार्शल लॉ किसी विशेष क्षेत्रों में ही लागू किया जा सकता है वहीं आपातकाल पूरे देश भर में भी लागू किया जा सकता है और किसी क्षेत्र में भी। 

🧿 मार्शल लॉ के दौरान सैन्य अधिकारियों को इतना अधिकार मिल जाता है कि वे किसी नागरिक को मृत्युदंड भी दे सकता है। वहीं आपातकाल के दौरान ऐसा नहीं किया जा सकता क्योंकि इसमें सामान्य न्याय व्यवस्था निलंबित नहीं होता है। 

🔷 मार्शल लॉ के संबंध में संविधान में किसी विशेष प्रक्रिया या व्यवस्था का उल्लेख नहीं किया गया है। जबकि आपातकाल की स्पष्ट व्याख्या संविधान में वर्णित है। 

Marshall law and National emergency

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नीचे क्लिक करें और राष्ट्रीय आपातकाल को समझें

राष्ट्रीय आपातकाल
National emergency

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