मौलिक अधिकार : एक परिचय (Fundamental Rights : Introduction)

इस लेख में मौलिक अधिकार का एक परिचयात्मक अध्ययन करेंगे। और अनुच्छेद 12 और 13 तो खास तौर पर समझने की कोशिश करेंगे।

मौलिक अधिकार की आधारभूत समझ

मौलिक अधिकार

अधिकार से संबंधित कुछ टर्म है जैसे कि – संवैधानिक अधिकार, मानवाधिकार और मौलिक अधिकार। इन सभी अधिकारों को जानना जरूरी है ताकि हम इसमें अंतर स्पष्ट कर सकें। 

अधिकार क्या है?
(What is right?)

अधिकार वो हक़ है जो हमें मिलता है या तो राज्य से, समाज से, परिवार से या फिर खुद से। 

मौलिक अधिकार क्या है?
(What is a Fundamental Right?)

किसी भी इंसान के चतुर्दिक विकास यानी कि बौद्धिक, नैतिक, भौतिक, एवं आध्यात्मिक विकास के लिए मूल रूप से कुछ अधिकारों की जरूरत होती ही है। इसे ही मौलिक अधिकार कहा जाता है।

मौलिक अधिकार वो न्यूनतम अधिकार है जो हर व्यक्ति को मिलना ही चाहिए ताकि उसका चहुमुखी विकास संभव हो पाये।  ये एक प्रकार का राजनैतिक अधिकार होता है क्योंकि ये राज्य द्वारा मिलता है। 

संवैधानिक अधिकार क्या है?
(What is constitutional right?)

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ये वो अधिकार है जो संविधान हमें देता है। अब एक सवाल यहाँ आता है कि मौलिक अधिकार भी तो संविधान द्वारा ही दिया जाता है।

हाँ पर एक बात याद रखने वाली है कि मौलिक अधिकार केवल वो है जिसे मौलिक अधिकारों के अंतर्गत दिया गया है जबकि संवैधानिक अधिकार वे सभी हैं जो पूरे संविधान में उल्लेखित है।

जैसे कि संपत्ति के अधिकार को ही ले लें तो ये एक संवैधानिक अधिकार तो है पर एक मौलिक अधिकार नहीं है। 

मानवाधिकार क्या है?
(What is human rights?)
 

मानवाधिकार वे सभी अधिकार है जो कम से कम एक इंसान होने के नाते हमें मिलनी ही चाहिए। उदाहरण के लिए- खाने का अधिकार, कपड़े पहनने का अधिकार, घर में रहने का अधिकार आदि।

यहाँ एक बात याद रखने वाली है कि मानवाधिकार मौलिक अधिकार भी हो सकता है। लेकिन मौलिक अधिकारों के बहुत सारे प्रावधान मानवाधिकार नहीं होते है, क्योंकि ये अमुक देश पर निर्भर करता है कि वो उस देश के नागरिक को कितना मौलिक अधिकार देता है।

जबकि मानवाधिकार किसी राज्य की सीमाओं से नहीं बंधी होती है बल्कि ये पूरी मानवजाति के लिए होती है। अब जैसे कि जीने का अधिकार; अब ऐसा तो नहीं हो सकता है न कि कोई देश इसे दे और कोई न दे।

उम्मीद है इन अधिकारों के बारे में आपकी समझ स्पष्ट हो गया होगा। आइये अब मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के बारे में जानते है। 

मौलिक अधिकार का परिचय

भारतीय संविधान के भाग 3 के अंतर्गत अनुच्छेद 12 से लेकर 35 तक मौलिक अधिकारों की चर्चा की गयी है।

इसीलिए भाग 3 को भारत का मैग्नाकार्टा कहा जाता है। आपके मन में ये सवाल आ सकता है कि इसे मैग्नाकार्टा क्यों कहा जाता है तो बात ये है कि इंग्लैंड में सर्वप्रथम 1215 में एक दस्तावेज़ बनाया गया जिसमें जनता को कुछ मूलभूत अधिकारों की गारंटी दी गयी। इसे ही मैग्नाकार्टा कहा गया। 

मूल संविधान के 7 मौलिक अधिकार

मूल रूप से संविधान में 7 मूल अधिकार दिये गए थे वे कुछ इस प्रकार है।  

🔰 समता का अधिकार – अनुच्छेद 14-18, इसमें 5 अनुच्छेद है। 
🔰 स्वतंत्रता का अधिकार – अनुच्छेद 19-22 , इसमें 4 अनुच्छेद है। 
🔰 शोषण के विरुद्ध अधिकार – अनुच्छेद 23-24 , इसमें 2 अनुच्छेद है। 
🔰धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार – अनुच्छेद 25-28, इसमें 4 अनुच्छेद है।  

🔰 संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार – अनुच्छेद 29-30, इसमें 2 अनुच्छेद है।  
🔰 संपत्ति का अधिकार – अनुच्छेद 31 ***
🔰 संवैधानिक उपचार का अधिकार अनुच्छेद 32 , इसमें 1 अनुच्छेद है। 

यहाँ एक बात याद रखने योग्य है कि संपत्ति का अधिकार को 44वें संविधान संसोधन 1978 द्वारा हटा दिया गया है। इसीलिए अब सिर्फ 6 मूल अधिकार है। 

याद कैसे रखें◾◾◾◾◾◾

इसे याद रखना आसान है पहली तीन ‘स’ से शुरू होता है बीच में एक ‘ध’ से शुरू होता है फिर अंतिम दोनों ‘स’ से शुरू होता है।

किसमें कितनी अनुच्छेद है उसे याद रखने के लिए आप इस नंबर को याद रख सकते हैं। 542421; जैसे कि समता के अधिकार में कुल पाँच अनुच्छेद है।

स्वतंत्रता के अधिकार में 4 अनुच्छेद हैं, आदि। वैसे एक दो बार पढ़ लेने के बाद आपको खुद ही याद रहने लग जाएगा।

चूंकि भाग 3  अनुच्छेद 12 से शुरू होता है और अनुच्छेद 35 पर खत्म होता है। इसीलिए इसके पहले दो अनुच्छेद 12 और 13 जानना बहुत ही जरूरी है।

तो इस लेख में हम अनुच्छेद 12 और 13 को समझेंगे ताकि आगे आने वाले सभी अनुच्छेदों को आसानी से समझ सकें। 

मौलिक अधिकार और
अनुच्छेद 12 

दरअसल मूल अधिकारों के कुछ उपबंधो को छोड़कर सारे के सारे उपबंध राज्य के मनमाने रवैये के खिलाफ है मतलब ये की अगर राज्य द्वारा आपके मूल अधिकारों का हनन किया जाता है,

तो आप सीधे उच्चतम या उच्च न्यायालय जा सकते हैं क्योंकि मूल अधिकारों की सुरक्षा का ज़िम्मा अंतिम रूप से सुप्रीम कोर्ट पर है। यहीं मूल अधिकारों का रक्षक है। 

अब यहाँ पर एक सवाल आता है कि हम राज्य माने किसे क्योंकि यहाँ तो स्टेट को राज्य कहा जाता है और देश को भी। 

इसी समस्या को सुलझाने के लिए अनुच्छेद 12 में राज्य को परिभाषित किया गया है। तो आइये देखते हैं संविधान के अनुसार राज्य क्या है?

राज्य क्या है?
(What is the state?)

🔷 इसके अनुसार कार्यकारी एवं विधायी अंगों को संघीय सरकार में क्रियान्वित करने वाली सरकार और भारत की संसद, राज्य है। 

🔷 उसी प्रकार कार्यकारी एवं विधायी अंगों को राज्य में क्रियान्वित करने वाली सरकार और राज्य विधान मण्डल, राज्य हैं। 

🔷 सभी स्थानीय निकाय जैसे की नगरपालिका, पंचायत, जिला बोर्ड आदि, राज्य हैं। 

🔷 तथा सभी संवैधानिक या गैर संवैधानिक प्राधिकरण जैसे- एलआईसी, ओएनजीसी आदि भी राज्य हैं। 

इसका मतलब समझ गए न कि इन में से अगर किसी के द्वारा भी मूल अधिकारों का हनन किया जाता है तो कोई भी सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। 

मौलिक अधिकार और
अनुच्छेद 13

ये अनुच्छेद बहुत ही महत्वपूर्ण है संविधान निर्माण के बाद से जितने भी विवाद मूल अधिकारों को लेकर हुआ है उसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अनुच्छेद 13 उसमें रहा ही है ।

ये बात आप तब समझेंगे जब शंकरी प्रसाद मामला, गोलकनाथ मामला, केशवानन्द भारती आदि मामलों के बारे में जानेंगे।

खैर इसकी चर्चा तो आगे करेंगे अभी जान लेते हैं कि अनुच्छेद 13 कहता क्या है? 

🔰 अनुच्छेद 13 कहता है कि – 

🔰 किसी भी विधि के द्वारा मूल अधिकारों को कम या समाप्त नहीं किया जा सकता। अगर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को लगता है की किसी विधि के द्वारा मूल अधिकारों का उल्लंघन हो रह है,

तो सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 32 और हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के द्वारा उस कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकती है। 

🔰 अब यहाँ भी एक कन्फ़्युजन है कि विधि क्या होता है या फिर हम विधि किसको माने। या फिर कौन से विधि को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट असंवैधानिक घोषित कर सकती है।

ये विस्तारपूर्वक अनुच्छेद 13 में लिख दिया गया है ताकि कोई कन्फ़्युजन न रहें। 

विधि क्या है?
(What is the law?)

अनुच्छेद 13 के अनुसार निम्नलिखित बातें विधि मानी जाएंगी। 

🔷 1. संसद या राज्य विधान मण्डल द्वारा पारित विधियाँ 
🔷 2. राज्यपाल और राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश 
🔷 3. प्रत्यायोजित विधान जैसे कि – आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम या अधिसूचना। 
🔷 4. विधि के गैर विधायी श्रोत जैसे कि – किसी विधि का बल रखने वाली रूढ़ि या प्रथा। 

🧿अब तो आप समझ गए होंगे कि विधि किसे कहा जाता है। 

उपर्युक्त तरीके से अगर कोई भी ऐसी विधि बनाई जाती हाई जो मूल अधिकारों को कम या समाप्त कर रही हो तो सुप्रीम कोर्ट को ये अधिकार है कि उस विधि को असंवैधानिक घोषित कर दें। 

तो ये रही अनुच्छेद 12 और 13 , इसे याद रखना आसान है आप बस इस कान्सैप्ट को याद रखिये कि मूल अधिकार चूंकि राज्य की बात करता है तो, राज्य है क्या? इसी को अनुच्छेद 12 में बता दिया गया है।

इसी प्रकार चूंकि कोई भी ऐसी विधि नहीं बनायी जा सकती जो मूल अधिकारों का हनन करें तो हम विधि किसको मानें इसी को अनुच्छेद 13 में बताया गया है। इसमें अनुच्छेद 13 का उल्लेख आगे भी मिलेगा। 

मौलिक अधिकार का महत्व
(Importance of Fundamental Rights)

🧿 मौलिक अधिकार लोकतान्त्रिक व्यवस्था की जड़ है। ये उसे और सुदृढ़ करते हैं।

🧿 ये व्यक्ति की भौतिक एवं नैतिक सुरक्षा के लिए आवश्यक स्थिति उत्पन्न करता है, इसीलिए इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का रक्षक कहा जाता है।  

🧿 वे देश में विधि के शासन की स्थापना करते है और सरकार के पूर्णता पर नियंत्रण करते हैं।

🧿 ये अल्प संख्यकों एवं समाज के कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा करते है। 

🧿 ये सामाजिक समानता एवं सामूहिक न्याय की आधारशीला है तथा ये भारतीय राज्य के धर्मनिरपेक्ष छवि को बल प्रदान करते हैं।  

🧿 ये व्यक्तिगत सम्मान को बनाए रखते हैं तथा ये लोगों को राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रणाली में भाग लेने का अवसर प्रदान करते हैं।

ये लेख बहुत ही लंबा हो जाता इसीलिए अगले लेख में हम समता का अधिकार यानी कि अनुच्छेद 14 से लेकर अनुच्छेद 18 तक की चर्चा करेंगे और उसे याद रखने के तरीके को भी समझेंगे। उसे अभी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
समता का अधिकार

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मौलिक अधिकार – स्वतंत्रता का अधिकार
स्वतंत्रता का अधिकार

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संविधान निर्माण

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