प्लास्टिक की खोज कब और कैसे हुई?

इस लेख में हम प्लास्टिक से संबन्धित कुछ दिलचस्प तथ्यों पर गौर करेंगे, तो आप इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
प्लास्टिक की खोज कब और कैसे हुई?

प्लास्टिक और उसकी खोज

प्लास्टिक शब्द ग्रीक शब्द प्लास्टिकोज और प्लासटोज से बना है तथा इसका अर्थ है – जो लचीला हो या जिसे ढाला, मोड़ा या मनमर्जी का आकार दिया जा सके।

पहली सिंथेटिक पॉलिमर का आविष्कार 1869 में जॉन वेस्ले हयात ने किया था। ऐसा कहा जाता है कि हाथी के दाँत का विकल्प खोजने के लिए न्यूयॉर्क के एक फर्म द्वारा $ 10,000 की पेशकश की गयी थी और इसी को जीतने के लिए, वेस्ले ने कपूर के साथ सूती फाइबर से प्राप्त सेल्युलोज को मिलाकर के एक नया पदार्थ बनाया, जिसे प्लास्टिक कहा गया।

इसे कई प्रकार के आकार में तैयार किया जा सकता था और ये हाथी दांत के लिए विकल्प प्रदान कर सकता था।

दरअसल उस समय बिलियर्ड्स की बढ़ती लोकप्रियता ने जंगली हाथियों के वध के माध्यम से प्राप्त प्राकृतिक हाथी दांत की आपूर्ति पर एक दबाव डाल दिया था। इसीलिए एक ऐसे पदार्थ की जरूरत थी जो इसकी जगह ले सकें। 

यह खोज क्रांतिकारी थी। पहली बार मानव निर्माण प्रकृति की सीमाओं से विवश नहीं था। प्रकृति ने केवल लकड़ी, धातु, पत्थर, हड्डी, टस्क(दाँत) और सींग की आपूर्ति की लेकिन अब इंसान जो चाहे वो बना सकते थे। 

इसमें और सुधार हुआ 1907 में जब लियो बेकलैंड ने पहली बार पूरी तरह से सिंथेटिक प्लास्टिक बेकेलाइट का आविष्कार किया, जिसका अर्थ है कि इसमें प्राकृतिक तौर पर पाए जाने वाले अणु नहीं थे।

बैकेलाइट न केवल एक अच्छा इन्सुलेटर था बल्कि यह टिकाऊ, गर्मी प्रतिरोधी भी था। बेकेलाइट को अनंत संभावनाओं को प्रदान करते हुए लगभग किसी भी चीज़ में या आकार में ढाला जा सकता था। इसिलिए इसे  “the material of a thousand uses” कहा गया। 

द्वितीय विश्व युद्ध में और उसके बाद प्लास्टिक उद्योग के क्षेत्र में बहुत अधिक विस्तार हुआ, क्योंकि दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता ने सिंथेटिक विकल्पों के उत्पादन को बहुत ज्यादा प्राथमिकता दी।

और प्लास्टिक ने उन विकल्पों को प्रदान किया। आज तो जीवन का ये एक अहम हिस्सा बन चुका है।

हालांकि आज प्लास्टिक एक खतरा बनते जा रहा है तो इससे निपटने के तरीकों के बारे में जरूर जानें।

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