यह लेख Article 182 (अनुच्छेद 182) का यथारूप संकलन है। आप इस मूल अनुच्छेद का हिन्दी और इंग्लिश दोनों संस्करण पढ़ सकते हैं। आप इसे अच्छी तरह से समझ सके इसीलिए इसकी व्याख्या भी नीचे दी गई है आप उसे जरूर पढ़ें, और MCQs भी सॉल्व करें।

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📜 अनुच्छेद 182 (Article 182) – Original

भाग 6 “राज्य” [अध्याय 3 — राज्य का विधान मंडल] [राज्य के विधान मण्डल के अधिकारी]
182. विधान परिषद्‌ का सभापति और उपसभापति — विधान परिषद्‌ वाले प्रत्येक राज्य की विधान परिषद्‌, यथाशीघ्र, अपने दो सदस्यों को अपना सभापति और उपसभापति चुनेगी और जब-जब सभापति या उपसभापति का पद रिक्त होता है तब-तब परिषद्‌ किसी अन्य सदस्य को, यथास्थिति, सभापति या उपसभापति चुनेगी।
अनुच्छेद 182 हिन्दी संस्करण

Part VI “State” [CHAPTER III — The State Legislature] [Officers of the State Legislature]
182. The Chairman and Deputy Chairman of the Legislative Council—The Legislative Council of every State having such Council shall, as soon as may be, choose two members of the Council to be respectively Chairman and Deputy Chairman thereof and, so often as the office of Chairman or Deputy Chairman becomes vacant, the Council shall choose another member to be Chairman or Deputy Chairman, as the case may be.
Article 182 English Version

🔍 Article 182 Explanation in Hindi

भारतीय संविधान का भाग 6, अनुच्छेद 152 से लेकर अनुच्छेद 237 तक कुल 6 अध्यायों (Chapters) में विस्तारित है (जिसे कि आप नीचे टेबल में देख सकते हैं)।

ChaptersTitleArticles
Iसाधारण (General)Article 152
IIकार्यपालिका (The Executive)Article 153 – 167
IIIराज्य का विधान मंडल (The State Legislature)Article 168 – 212
IVराज्यपाल की विधायी शक्ति (Legislative Power of the Governor)Article 213
Vराज्यों के उच्च न्यायालय (The High Courts in the States)Article 214 – 232
VIअधीनस्थ न्यायालय (Subordinate Courts)Article 233 – 237
[Part 6 of the Constitution]

जैसा कि आप ऊपर देख सकते हैं, इस भाग के अध्याय 3 का नाम है “राज्य का विधान मंडल (The State Legislature)” और इसका विस्तार अनुच्छेद 158 से लेकर अनुच्छेद 212 तक है।

इस अध्याय को आठ उप-अध्यायों (sub-chapters) में बांटा गया है, जिसे कि आप नीचे चार्ट में देख सकते हैं;

Chapter 3 [Sub-Chapters]Articles
साधारण (General)Article 168 – 177
राज्य के विधान मण्डल के अधिकारी (Officers of the State Legislature) Article 178 – 187
कार्य संचालन (Conduct of Business)Article 188 – 189
सदस्यों की निरर्हताएं (Disqualifications of Members)Article 190 – 193
राज्यों के विधान-मंडलों और उनके सदस्यों की शक्तियां, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां (Powers, privileges and immunities of State Legislatures and their members)Article 194 – 195
विधायी प्रक्रिया (Legislative Procedure)Article 196 – 201
वित्तीय विषयों के संबंध में प्रक्रिया (Procedure in respect of financial matters)Article 202 – 207
साधारण प्रक्रिया (Procedure Generally)Article 208 – 212
[Part 6 of the Constitution]

इस लेख में हम राज्य के विधान मण्डल के अधिकारी (Officers of the State Legislature) के तहत आने वाले अनुच्छेद 182 को समझने वाले हैं।

अनुच्छेद 89 – भारतीय संविधान
Closely Related to Article 182

| अनुच्छेद 182 – विधान परिषद्‌ का सभापति और उपसभापति (The Chairman and Deputy Chairman of the Legislative Council)

भारत एक संघीय व्यवस्था वाला देश है यानी कि यहाँ केंद्र सरकार की तरह राज्य सरकार भी होता है और जिस तरह से केंद्र में विधायिका (Legislature) होता है उसी तरह से राज्य का भी अपना एक विधायिका होता है।

केन्द्रीय विधायिका (Central Legislature) को भारत की संसद (Parliament of India) कहा जाता है। यह एक द्विसदनीय विधायिका है, जिसका अर्थ है कि इसमें दो सदन हैं: लोकसभा (लोगों का सदन) और राज्यसभा (राज्यों की परिषद)। इसी तरह से राज्यों के लिए भी व्यवस्था की गई है।

अनुच्छेद 168(1) के तहत प्रत्येक राज्य के लिए एक विधानमंडल (Legislature) की व्यवस्था की गई है और यह विधानमंडल एकसदनीय (unicameral) या द्विसदनीय (bicameral) हो सकती है।

जिस तरह से अनुच्छेद 89 के तहत केंद्र में राज्यसभा के लिए सभापति एवं उपसभापति का वर्णन है उसी तरह से अनुच्छेद 182 के तहत राज्यों के लिए विधान परिषद्‌ के लिए सभापति और उपसभापति का वर्णन है;

अनुच्छेद 182 के तहत कहा गया है कि विधान परिषद्‌ वाले प्रत्येक राज्य की विधान परिषद्‌, यथाशीघ्र, अपने दो सदस्यों को अपना सभापति और उपसभापति चुनेगी और जब-जब सभापति या उपसभापति का पद रिक्त होता है तब-तब परिषद्‌ किसी अन्य सदस्य को, यथास्थिति, सभापति या उपसभापति चुनेगी।

कहने का अर्थ है कि विधान परिषद अपने सदस्यों के बीच से ही अपना सभापति एवं उपसभापति चुनती है। लेकिन जब किसी कारण से सभापति एवं उपसभापति का स्थान रिक्त (vacant) हो जाता है तब परिषद अपने बीच से नया सभापति व उप सभापति चुन लेते हैं।

यहां कुछ बातें याद रखिए;

केंद्र में उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा का सभापति होता है, बस उपसभापति का चुनाव किया जाता है। जबकि राज्य में उपराज्यपाल जैसा कोई पद नहीं होता है। इसीलिए राज्य विधान परिषद में सभापति एवं उपसभापति दोनों को सदन से ही चुना जाता है।

◼ सभापति की तरह ही उपसभापति भी सदन की कार्यवाही के दौरान पहले मत नहीं दे सकता लेकिन दोनों ओर से बराबर वोट पड़ने की स्थिति में वह अपना मत दे सकता है।

◼ सभापति की ही तरह जब उपसभापति को उसके पद से हटाने का प्रस्ताव विचारधीन हो या वोटिंग चल रहा हो तो वह सदन की कार्यवाही में पीठासीन नहीं होता, हालांकि वह सदन में उपस्थित हो सकता है, बोल भी सकता है।

◼ जब सभापति विधान परिषद की अध्यक्षता कर रहा होता है तब उपसभापति एक साधारण सदस्य की तरह होता है। वह बोल सकता है, कार्यवाही में भाग ले सकता है तथा मतदान कि स्थिति में मत भी दे सकता है।

तो यही है अनुच्छेद 182, उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। दूसरे अनुच्छेदों को समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

राज्य विधानमंडल (State Legislature): गठन, कार्य, आदि
भारतीय संसद (Indian Parliament): Overview
Must Read

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Chapter Wise Polity Quiz

विधानसभा और विधानपरिषद : अभ्यास प्रश्न

  1. Number of Questions – 8 
  2. Passing Marks – 75  %
  3. Time – 6 Minutes
  4. एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।

1 / 8

विधान सभा के अध्यक्ष को ध्यान में रखते हुए दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

  1. विधानसभा के सदस्य अपने सदस्यों के बीच से ही अध्यक्ष का निर्वाचन करते है।
  2. विधानसभा अध्यक्ष वोटिंग प्रक्रिया में कभी भाग नहीं ले सकता है।
  3. अध्यक्ष कोरम की अनुपस्थिति में वह विधानसभा की बैठक को स्थगित या निलंबित कर सकता है।
  4. अध्यक्ष दसवीं अनुसूची के उपबंधों आधार पर किसी सदस्य की निरर्हता को लेकर उठे किसी विवाद पर फैसला देता है।

2 / 8

विधान परिषद के अध्यक्ष के संबंध में दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

3 / 8

विधान सभा अध्यक्ष निम्न में से किसका अध्यक्ष होता है?

4 / 8

इनमें से कौन सा कथन राज्य विधान परिषद को राज्यसभा से अलग करता है?

5 / 8

दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

  1. विधान परिषद कभी विघटित नहीं होता है।
  2. विधान परिषद प्रसिद्ध व्यक्तियों और विशेषज्ञों को प्रतिनिधित्व प्रदान करती है जो प्रत्यक्ष चुनाव का सामना नहीं कर पाते।
  3. विधानपरिषद वित्त विधेयक में न संशोधन और न ही इसे अस्वीकार कर सकती है।
  4. कोई विधेयक वित्त विधेयक है या नहीं, यह तय करने का अधिकार विधानसभा के अध्यक्ष को है।

6 / 8

निम्न में से किन मामलों में विधान परिषद विधान सभा के बराबर होता है?

7 / 8

राज्य विधानसभा के उपाध्यक्ष एवं विधान परिषद के उप-सभापति को ध्यान में रखकर दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

  1. उपाध्यक्ष अपना इस्तीफ़ा अध्यक्ष को सौंपता है।
  2. उपाध्यक्ष, अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अध्यक्ष की शक्तियों का उपभोग करता है।
  3. विधानसभा अध्यक्ष सदस्यों के बीच से एक पैनल का गठन करता है, उनमें से कोई एक अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सभा की कार्यवाही सम्पन्न कराता है।
  4. विधान सभा चाहे तो बहुमत के आधार पर अध्यक्ष को हटाने का संकल्प पारित कर सकता है।

8 / 8

विधानसभा के गठन के संबंध में दिए गए कथनों में से कौन सा कथन सही है?

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अस्वीकरण – यहाँ प्रस्तुत अनुच्छेद और उसकी व्याख्या, मूल संविधान (उपलब्ध संस्करण), संविधान पर डी डी बसु की व्याख्या (मुख्य रूप से), प्रमुख पुस्तकें (एम. लक्ष्मीकान्त, सुभाष कश्यप, विद्युत चक्रवर्ती, प्रमोद अग्रवाल इत्यादि) एनसाइक्लोपीडिया, संबंधित मूल अधिनियम और संविधान के विभिन्न ज्ञाताओं (जिनके लेख समाचार पत्रों, पत्रिकाओं एवं इंटरनेट पर ऑडियो-विजुअल्स के रूप में उपलब्ध है) पर आधारित है। हमने बस इसे रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने का प्रयास किया है।