Federal System of India (भारत की संघीय व्यवस्था)

इस लेख में हम भारत की संघीय व्यवस्था (Federal System of India) पर सरल और सहज चर्चा करेंगे।

Difference between federal system and unitary system

Federal System of India
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Federal System of India : Introduction
(भारत की संघीय व्यवस्था का परिचय)

▶ पिछले लेख में हमने ↗️संसदीय व्यवस्था (Parliamentary system) पर चर्चा किया था। जहां हमने समझा कि किस तरह सारी चीज़ें संसद के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है।

हमने देखा था कि राज्यों के पास भी अपना विधानमंडल (Legislature) होता है जो कि एक प्रकार से वहाँ का संसद होता है। और राज्य का अपना सरकार होता है और वो भी केंद्र से स्वतंत्र।

ये जो विशेषताएँ है ये दरअसल संघीय व्यवस्था (Federal System) से ही आती हैं और इस लेख में हम इसी पर तो बात करेंगे।

अगर आपने अनुच्छेद 1 पढ़ा हो तो उसमें साफ-साफ लिखा है कि इंडिया यानी कि भारत राज्यों का संघ होगा (India, that is Bharat, shall be a Union of States) ।

अब यहाँ अगर आप एक चीज़ पर गौर करें तो आपको एक विरोधाभास नजर आएगा। विरोधाभास ये है कि टाइटल में संघ के लिए इंग्लिश में फेडरल शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

वहीं अगर आप अनुच्छेद 1 के इंग्लिश वर्जन को पढ़ें तो आपको कहीं भी फेडरल शब्द नहीं मिलेगा बल्कि उसकी जगह पर यूनियन शब्द मिलेगा।

तो आखिर इसका क्या मतलब है? इसको समझने से पहले आइये पहले संघीय व्यवस्था (federal system) को समझते हैं।

Unitary System
(एकात्मक व्यवस्था)

🔹 एक होता है एकात्मक व्यवस्था (Unitary System), इसका सीधा सा मतलब ये होता है कि एक केंद्र होगा और सारी की सारी शक्तियाँ उसी में निहित होगी। जैसे कि ब्रिटेन को ले लीजिये।

ऐसा नहीं है कि इस तरह के सिस्टम में क्षेत्रीय सरकार नहीं हो सकता है। बिलकुल हो सकता है और होता भी है पर वो स्वतंत्र सरकार नहीं होता हैं, वो केंद्र के अधीन ही काम करता है।

जैसे कि भारत में केंद्रशासित प्रदेश को ले लीजिये, वहाँ का अपना प्रशासक तो होता है पर वो केंद्र सरकार के अधीन काम करता है।

🔹 इस पूरे तथ्य को अगर एक लाइन में समझना हो तो ये समझिये कि इस व्यवस्था में शक्तियों का बंटवारा नहीं होता है।

सारी शक्तियों का उपभोग केंद्र ही करता है। इसीलिए इसे एकात्मक व्यवस्था कहा जाता है। ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, चीन, इटली, बेल्जियम, नोर्वे, स्वीडन, स्पेन आदि में सरकार का एकात्मक स्वरूप है।

इस व्यवस्था से छोटे देशों को तो आसानी से चलाया जा सकता है पर जब बात बड़े देशों जैसे इंडिया और अमेरिका की आती है तो ये व्यवस्था उतनी उपयुक्त साबित नहीं होती है।

संघीय व्यवस्था
(Federal System)

वहीं अगर संघीय व्यवस्था की बात करें तो यहाँ पर शक्तियों का विभाजन होता है। यानी कि आमतौर पर इसमें दो प्रकार की सरकार होती है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार। और शक्तियाँ दोनों में बाँट दी जाती है।

🔹 भारत की बात करें तो यहाँ शक्तियों को बांटने के लिए तीन सूचियाँ बनायी गयी है। संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची।

संघ सूची के विषयों पर केंद्र कानून बनाती है, जैसे कि रक्षा, विदेश, संचार आदि।
राज्य सूची के विषयों पर राज्य कानून बनाती है जैसे कि स्थानीय प्रशासन, सार्वजनिक कानून आदि।

और समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बनाती है। इसलिए इसे द्वैध सरकार व्यवस्था (Duel Government system) भी कहते हैं।

🔹 अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, रूस, ब्राज़ील, अर्जेन्टीना आदि में सरकार का संघीय मॉडल (Federal Model) है।

Features of Federal System of India
(भारत की संघीय व्यवस्था की विशेषताएं)

संघीय व्यवस्था के जो आधारभूत तत्व हैं वे सभी देश के लगभग समान ही होते हैं, हाँ अलग-अलग देशों में इसे अलग-अलग तरह से प्रयोग में लाये जाते हैं ।

अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड और ऑस्ट्रेलिया को परंपरागत संघीय व्यवस्था वाला देश कहा जाता है।

कुछ देशों के फेडरल सिस्टम कुछ अलग रूप लिए हुए भी हो सकते हैं। चूंकि हम भारत का संघीय व्यवस्था (Federal System of India) पढ़ रहें है तो हम भारत पर फोकस करेंगे और देखेंगे कि,

भारत की संघीय व्यवस्था (Federal System of India) में उसके संघीय विशेषताओं के अलावा और कौन-कौन सी विशेषताएं हैं। ➡➡

Written constitution and its supremacy
(लिखित संविधान और उसकी सर्वोच्चता)

संघीय व्यवस्था के सही संचालन के लिए जरूरी होता है कि एक लिखित संविधान हो और उस संविधान में ये बात साफ-साफ लिखा हो कि शक्तियों का बंटवारा कैसे किया गया है तथा किसको कितनी शक्ति दी गयी है।

ताकि केंद्र और राज्य के मध्य इस बात को लेकर कभी विवाद न हो कि कितनी शक्तियाँ किसके पास है। और संविधान की सर्वोच्चता इसलिए जरूरी है ताकि एक निश्चित कानूनी व्यवस्था कायम रह सकें।

संविधान की सर्वोच्चता इसलिए जरूरी है ताकि एक ठोस, स्पष्ट और टिकाऊ कानून व्यवस्था बनी रह सकें और संसद निरंकुश न हो सकें।

भारत की बात करें तो यहाँ लिखित संविधान भी है, और संविधान की सर्वोच्चता भी।

Independent Court and Power of judicial review
(स्वतंत्र न्यायालय और न्यायिक पुनर्निरीक्षण की शक्ति)

जाहिर है जब केंद्र और राज्य के मध्य किसी प्रकार का कोई विवाद होगा तो उसे सुलझाने के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका का होना बहुत जरूरी है।

संविधान द्वारा प्रदत शक्तियों के विभाजन का प्रावधान और संविधान की सर्वोच्चता तभी बनाये रखा जा सकता है जब संविधान संशोधन कठोर हो।

🔹 अगर भारत के संविधान के संशोधन की प्रक्रिया के बारे में आपने पढ़ रखा हो तो आपको पता होगा कि भारत में संविधान संशोधन करना न तो कठोर है और न ही लचीला।

दूसरे शब्दों में इसे कहें तो ये कठोर भी है और लचीला भी। यानी कि अगर गठबंधन की सरकार है तो उसे संविधान संशोधन करने में कुछ कठिनाइयाँ आ सकती है लेकिन अगर अगर सरकार पूर्ण बहुमत में हो तो उसके लिए तो ये बाएँ हाथ का काम हो जाता है।

🔹 ऐसी स्थिति में कहीं केंद्र सरकार संविधान में संशोधन करके संघीय व्यवस्था को हानि न पहुंचा सकें, न्यायालय अपनी न्यायिक पुनर्निरीक्षण (judicial review) की शक्ति का इस्तेमाल करता है।

और अगर किसी कानून के द्वारा संविधान के मूल संरचना को ठेस पहुँच रहा हो तो न्यायालय उस कानून को खारिज कर सकता है। इससे होता ये है कि संविधान की सर्वोच्चता बरकरार रहती है।

Elements of Federal system
(संघीय व्यवस्था के तत्व)

कुल मिलाकर देखें तो संघीय व्यवस्था को बनाये रखने में जो चीज़ें महत्वपूर्ण है वे हैं –

▶ द्वैध राजपद्धति,
▶ लिखित एवं कठोर संविधान,
▶ शक्तियों का विभाजन,
▶ संविधान की सर्वोच्चता,
▶ स्वतंत्र न्यायपालिका और न्यायिक समीक्षा की शक्ति ।
चूंकि ये सारी विशेषताएँ भारतीय संविधान में निहित है इसलिए इस आधार पर भारत को संघीय व्यवस्था (Federal System) वाला देश कहा जाता है।

उपर्युक्त सारे टर्म्स की व्याख्या पिछले लेख में की गयी है।
आप उसे ↗️यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

अब समझ गए होंगे कि क्यों भारत एक संघीय व्यवस्था (Federal System) वाला देश है। पर बात सिर्फ इतनी नहीं है।

भारतीय संविधान में बहुत सारे ऐसे प्रावधान है और कभी-कभी ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होती है जो भारत को एकात्मक व्यवस्था वाला देश बनाता है। वो कैसे?

एक उदाहरण तो हम ऊपर ही देख चुके हैं कि जितने भी केंद्रशासित प्रदेश हैं। वो भारत को एकात्मक स्वरूप ही तो प्रदान करता है।

क्योंकि वहाँ पर सीधे केंद्र का शासन होता है। इसके अलावा आगे देखते हैं कि ऐसी कौन-कौन सी चीज़ें है जो भारत को एकात्मक व्यवस्था वाला देश बनाता है। कुछ और अन्य व्यवस्थाओं को आइये देखते हैं।

Unitary elements in Federal System of India
(भारत की संघीय व्यवस्था में एकात्मक तत्व)

आपातकाल का प्रावधान और सशक्त केंद्र
(Emergency provision and strong center)

🔹 जब भी आपातकाल लगाया जाता है पूरे देश या उस अमुक राज्य पर सीधे केंद्र का नियंत्रण स्थापित हो जाता है। उस स्थिति में राज्य की सारी शक्तियाँ भी केंद्र के पास आ जाती है।

और केंद्र ताकतवर हो जाता है। ऐसी स्थिति में संघीय व्यवस्था (Federal System) खत्म हो जाता है और एकात्मक व्यवस्था (Unitary System) लागू हो जाता है।

🔹 दूसरी बात ये कि केंद्र के पास वैसे भी राज्यों से अधिक शक्तियाँ होती है। केंद्र सूची को देखेंगे तो केंद्र सूची में लगभग 100 विषय है,

जबकि राज्य सूची में मात्र 60 – 61 विषय हैं। ऊपर से समवर्ती सूची का कानून भी केंद्र बना सकता है। और जो इन तीनों सूचियों में नहीं लिखा हुआ है। उसपर भी केंद्र कानून बना सकता है।

और बहुत सारी चीज़ें तो ऐसी है कि केंद्र बिना राज्य को पूछे कर सकता है जैसे कि किसी राज्य की सीमा बदलना हो, किसी राज्य को अन्य राज्य में मिलना हो। इत्यादि।

केंद्र के पास की शक्तियों को देखकर ऐसा लगता है मानो ये एक एकात्मक व्यवस्था ही है जिसमें संघीय व्यवस्था के कुछ गुण है।

एकल संविधान और एकल नागरिकता
(Single constitution and single citizenship)

पूरे देश के लिए चूंकि एक ही संविधान है राज्य को हमेशा केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता है। और दूसरी बात कि भारत में चूंकि एकल नागरिकता का प्रावधान है इसीलिए हम सिर्फ भारत के नागरिक होते है न कि किसी राज्य का। ये भी केंद्र सरकार में एकात्मक गुण को दर्शाता है।

अखिल भारतीय सेवाएँ और राज्यपाल
(All India Services and Governor)

जितने भी आईएएस और आईपीएस ऑफिसर होते हैं वो केंद्र सरकार नियुक्त करता है। और केंद्र सरकार इसके द्वारा राज्य प्रशासन पर एक प्रकार से नियंत्रण रखता है। क्योंकि राज्य सरकार उसे चाह कर भी हटा नहीं सकते बस उसे स्थानांतरित कर सकते हैं।

उसी प्रकार राज्यपाल की नियुक्त भी केंद्र करता है। और उसका काम भी केंद्र के पक्ष में ज्यादा झुका होता है। ये जब हम राज्यपाल पढ़ेंगे तो और भी स्पष्ट हो जाएगा।

इस तरह से देखें तो केंद्र ज्यादा ताकतवर नजर आता है और राज्य उसके सामने कुछ भी नहीं। और इससे ऐसा लगता है कि केंद्र की ही दादागिरी है। पर इसे आइये दूसरे नजरिए से समझने की कोशिश करते हैं।

Understanding of Federal System of India
(भारत की संघीय व्यवस्था की समझ)

🔹 जब आमेरका ब्रिटेन से आजाद हुआ तो वहाँ के 13 राज्यों ने एक समझौता किया कि अलग-अलग रहने से अच्छा है कि हम सब मिलकर एक केंद्र बनाये और उसको कुछ शक्तियाँ दे दें।

ऐसा ही हुआ उन 13 राज्यों ने मिलकर एक संघ या देश बनाया जिसे ‘यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका‘ नाम दिया।

धीरे-धीरे और राज्य बनते गए और इसमें जुड़ते गए अभी 50 राज्य है। पर वह भारत जैसा नहीं है चूंकि वहाँ पर राज्यों या फिर कह लें कि छोटे-छोटे स्वतंत्र क्षेत्रों ने मिलकर देश बनाया है, इसीलिए वहाँ राज्य को ज्यादा शक्तियाँ दी गयी है।

🔹 वहाँ पहले लोग उस राज्य के नागरिक होते हैं फिर अमेरिका के। और सबसे बड़ी बात ये है कि कोई भी राज्य जब भी चाहे वो इस संघ को छोड़कर जा सकता है। कानून बनाने के लिए भी केंद्र से ज्यादा विषय राज्यों के पास है।

जबकि भारत के साथ ऐसा नहीं था यहाँ राज्यों ने मिलकर केंद्र नहीं बनाया बल्कि केंद्र पहले से था बाद में राज्य को इसमें एक संधि पत्र पर हस्ताक्षर करके जोड़ा गया।

इसीलिए तो इसे ‘यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ इंडिया‘ नहीं कहा जाता है बल्कि ‘रिपब्लिक ऑफ इंडिया’ कहा जाता है।

🔹 अगर सारे राज्यों ने मिलकर इंडिया बनाया होता तो आज भारत में कम से कम 550 राज्य होते । क्योंकि लगभग इतने ही राज-राजवारे थे।

इसीलिए अनुच्छेद 1 में फेडरल की जगह यूनियन शब्द का इस्तेमाल किया गया है। डॉ. अंबेडकर ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा था कि ‘भारतीय संघ अमेरिका की तरह राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है।’

इसीलिए किसी भी राज्य को इस संघ से बाहर जाने का कोई अधिकार नहीं है। दूसरे शब्दों में कहें तो ये एक प्रकार से भारत का एकात्मक स्वरूप है इसीलिए यूनियन शब्द का इस्तेमाल किया गया है। अब आपको पहले पैराग्राफ का आन्सर मिल गया।

इसीलिए केंद्र को इतनी ज्यादा शक्ति दी गयी है ताकि वे एक अविभावक की भूमिका निभाये और सभी को एक साथ लेकर चलें।

अगर राज्यों को ज्यादा शक्ति दी जाती और अपना संविधान और अपना नागरिकता चुनने की आजादी दी जाती तो राज्य तो छोटी से विवाद पर भी उससे अलग हो जाते और अपना देश बना लेते।

🔹 आप इसका उदाहरण जम्मू कश्मीर से ले सकते हैं कुछ समय पहले तक जहां का अपना संविधान होता था और वहाँ का अपना नागरिक।

इसीलिए वहाँ के कुछ लोग तो खुद को इंडियन मानते ही नहीं थे। इसीलिए ऐसी स्थिति न आए इसके लिए जरूरी है कि केंद्र थोड़ा ताकतवर रहें। यानि कि उसमें एकात्मकता का भाव हो।

भारत संघीय चरित्र वाला केन्द्रीय राज्य है न कि केन्द्रीय चरित्र वाला संघीय राज्य

के सी वाघमारे

🔷 अब एक लास्ट सवाल आता है कि चूंकि भारत में 1993 से पंचायती राज व्यवस्था भी काम कर रहा है। उसे भी कुछ शक्तियाँ दी गयी है।

🔹 तभी तो उसे लोकल गवर्नमेंट कहते हैं। तो पहले जहां सिर्फ केंद्र और राज्य था जिसे कि द्वैध सरकार व्यवस्था (Duel government system) भी कहा जाता था।

🔹 अब तो तीन स्तरीय सरकार हो गया है। इसीलिए याद रखिए कि भारत को अब बहुसंघीय व्यवस्था (Poly-federal system) भी कहा जाता है। ये व्यवस्था भारत के अलावा ब्राज़ील, अर्जेन्टीना और नाइजीरिया में भी है।

🔹 कुछ लोग भारत को अर्द्ध-संघात्मक व्यवस्था (Quasi-Federal System) वाला देश भी कहते हैं। क्योंकि भारत संघ तो है ही लेकिन केंद्र शक्तिशाली है।

🔹 वही ज़्यादातर लोग सिर्फ संघात्मक व्यवस्था (Federal System) कहते हैं क्योंकि उन लोगों का मानना है कि एक संघ बनने के लिए जितने भी चीज़ें होनी चाहिए सब यहाँ मौजूद है।

Criticism of Federal system of India
(भारत की संघीय व्यवस्था की आलोचना)

भारत की संघीय व्यवस्था इतना मिश्रित गुणों वाला हैं कि आलोचना तो तो होना ही था।

हालांकि उच्चतम न्यायालय ने भी 1994 में बोम्मई मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि भारतीय संविधान संघीय है और ये इसकी मूल विशेषता है।

पॉल एप्पलबी का भी मानना है कि यह पूरी तरह से संघीय है।

वहीं के. संथानम का कहना है कि भारतीय संविधान एकात्मक हैं क्योंकि वित्तीय मामलों में केंद्र का प्रभुत्व है तथा राज्य हमेशा केन्द्रीय अनुदान पर निर्भर रहता है। इसके साथ ही केंद्र नीति आयोग द्वारा राज्यों के विकास कार्य में भी हस्तक्षेप करता है।

भारतीय संघीय व्यवस्था एक सहकारी संघ व्यवस्था है।

ग्रेनविल ऑस्टिन

यह मजबूत केंद्र वाला संघ है।

आइवर जेनिंग्स

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Center-State Legislative Relations in Hindi
केंद्र-राज्य विधायी संबंध

center-state legislative relations

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