private limited vs public limited in hindi

इस लेख में हम प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक लिमिटेड (private limited vs public limited) कंपनी में अंतर पर सरल और सहज चर्चा करेंगे, तो लेख को अंत तक जरूर पढ़ें। शेयर मार्केट ज़ीरो लेवल से समझने के लिए ↗️यहाँ क्लिक करें।
private limited vs public limited

difference between private limited and public limited

प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक लिमिटेड कंपनी में अंतर जानने की शुरुआत दो टर्म प्रोपराइटरशिप (Proprietorship) और पार्टनरशिप (partnership) से करते हैं-

प्रोपराइटरशिप (Proprietorship) – प्रोपराइटरशिप का मतलब होता है जब किसी कंपनी का कोई अकेला मालिक होता है। सारी पूंजी उसने खुद लगाई होती है और सारे मुनाफे को एंजॉय भी वो अकेले ही करते हैं।

पार्टनरशिप (partnership) – अब वही आदमी अगर अपना आधा शेयर बेच दे तो जाहिर है आधा मालिकाना हक उसके पास रहेगा और आधा उसके पास जिसको वो बेचा है। ये हुआ पार्टनरशिप।

अगर इन दोनों को अपना बिज़नस बढ़ाना है तो इनके पास सबसे अच्छा विकल्प है बैंक से लोन लेना। मान लीजिये कि इन्होने बैंक से लोन लिया और संयोग से इनका बिज़नस चला नहीं और ये बैंक का कर्ज चुकाने में असमर्थ हो गए। ऐसी स्थिति में बैंक वाले क्या करेंगे? बैंक वाले अपने पैसों की भरपाई के लिए पहले इनके कंपनी की परिसंपत्तियों को बेच देंगे और उससे भी भरपाई नहीं हुई तो इनके निजी संपत्तियों जैसे कि घर, जमीन, फर्नीचर आदि को बेचकर जितना हो सके उगाही करने की कोशिश करेंगे। इसे कहते हैं असीमित देयता (Unlimited liability)। इसे याद रखिए आगे काम आएगा।

प्राइवेट लिमिटेड
(private_limited)

कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुसार न्यूनतम 2 और अधिकतम 200 सदस्यों के साथ एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी शुरू किया जा सकता है। वही व्यक्ति जो अब तक अकेले या पार्टनरशिप में बिज़नस कर रहा था, अब अगर वो उसी बिज़नस को प्राइवेट लिमिटेड बना लेते हैं तो देखिये उसे क्या-क्या फायदा होगा।

सीमित देयता (Limited liability) : प्राइवेट लिमिटेड बनाने के बाद सबसे बड़ा फायदा ये है कि अब अगर वो बैंक से लोन लेते हैं और उसकी कंपनी डूब जाती है तो बैंक वाले उसके कंपनी के परिसंपत्तियों को बेचकर जितना चाहे जुटा लें पर उसके निजी संपत्तियों को वो हाथ नहीं लगा सकते हैं। प्राइवेट लिमिटेड में जो लिमिटेड शब्द लगा हुआ है इसका यही मतलब होता है।

स्थायी उत्तराधिकार (Perpetual succession) : अगर कोई साधारण कंपनी है यानी कि अगर वो प्राइवेट लिमिटेड नहीं है तो उस स्थिति में अगर उस कंपनी के मालिक की मृत्यु हो जाती है या फिर वो बिज़नस छोड़कर चला जाता है तो बहुत हद तक चांस यही होता है वो कंपनी भी खत्म हो जाएगी। लेकिन कंपनी कानून के अनुसार, अगर किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मालिक या सदस्य की मृत्यु हो जाये या वो कंपनी छोड़कर चला जाये तो भी कंपनी अपना अस्तित्व बनाए रखती है।

प्राइवेट लिमिटेड बनने के बाद कोई कंपनी अपना शेयर जारी कर सकती है और उसे प्राइवेट इन्वेस्टर को बेच सकती है। यानी कि अब उस कंपनी की निर्भरता बैंक से खत्म हो जाती है। क्योंकि जब प्राइवेट इन्वेस्टर को वे अपना शेयर बेचेंगे तो कम से कम उसे ईएमआई भरने से मुक्ति मिल जाएगी और उस इन्वेस्टर से कंपनी को आगे बढ़ाने में सहयोग भी मिलेगा।

पब्लिक लिमिटेड
(public limited)

पब्लिक लिमिटेड कंपनी की बात करें तो ये प्राइवेट लिमिटेड वाली सुविधा तो देता ही है साथ ही साथ अन्य कई सुविधाएं भी देता है। जैसे कि –

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी सिर्फ प्राइवेट इन्वेस्टर को ही अपना शेयर बेच सकता है लेकिन पब्लिक लिमिटेड की बात करें तो ये प्राइवेट इन्वेस्टर के साथ-साथ रीटेल इन्वेस्टर (यानी कि आम लोगों) को भी अपना शेयर बेच सकते है। यानी कि एक तरह से कहें तो ये स्टॉक मार्केट को जन्म देता है, क्योंकि ये स्टॉक मार्केट में लिस्ट हो सकता है और IPO यानी कि Initial Public Offering लेकर आ सकता है। (IPO के बारे में हम ↗️शेयर मार्केट वाले लेख में पढ़ चुके हैं)

प्राइवेट लिमिटेड में जहां कंपनी की अधिकतम 200 सदस्य ही हो सकता है वहीं पब्लिक लिमिटेड में कंपनी के जितने चाहे उतने सदस्य हो सकते हैं।

अब आइये दोनों को सम्मिलित रूप में देख लेते हैं कि दोनों में मुख्य अंतर क्या है।

private limited vs public limited

कम से कम 7 प्राइवेट लिमिटेड कंपनीपब्लिक लिमिटेड कंपनी
न्यूनतम सदस्य –कम से कम 2 कम से कम 7
अधिकतम सदस्य – ज्यादा से ज्यादा 200 जितना चाहे उतना
न्यूनतम डाइरेक्टर्स –कम से कम 2 कम से कम 3
न्यूनतम पूंजी –कम से कम 1 लाख कम से कम 5 लाख
शेयर –सिर्फ प्राइवेट इन्वेस्टर को रीटेल इन्वेस्टर को भी
वार्षिक आम बैठक –कम से कम 2 सदस्य होने चाहिए कम से कम 5 सदस्य होने चाहिए
कंपनी के नाम –प्राइवेट लिमिटेड लगाना अनिवार्य सिर्फ लिमिटेड लगाना ही काफी

🔘🔷⚫🔷🔘

private limited vs public limited
⏬Download pdf

⬇️संबन्धित लेख (Related articles)

Mutual Fund in Hindi
Insurance in hindi

Follow me on….⬇️

⬇️अन्य बेहतरीन लेख

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *