गिरगिट अपना रंग कैसे बदलता है? (How lizards change its color)

इस छोटे से लेख में हम बहुत ही संक्षिप्त में समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर गिरगिट अपना रंग बदलता कैसे है? तो इस जानकारी भरे लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
गिरगिट

गिरगिट अपना रंग क्यूँ बदलता है? 

गिरगिट अपना रंग कैसे बदलता है इससे पहले ये जानना जरूरी है कि गिरगिट अपना रंग क्यूँ बदलता है।

ये केवल गिरगिटों की बात ही नहीं है, कई अन्य तरह के प्राणियों जैसे स्क्विड, ऑक्टोपस और कुछ प्रकार के तितलियों को भी प्रकृति ने आत्म रक्षा में अपने रंग – रूप  को बदलने की सामर्थ दी है।

दूसरे शब्दों में ये गिरगिट का सेल्फ डिफेंस का एक तरीका है दरअसल गिरगिट जिस परिवेश में रहता है उसका रंग उसी से मिलता-जुलता हो जाता है, ताकि वे दूर से नजर न आयें। 

साथ ही रंग बदलना उसकी प्रणय शैली भी है, यानी कि अपने साथी को आकर्षित करने के लिए भी ये रंग बदलता है।

गिरगिट अपना रंग कैसे बदलता है?

अब ये रंग बदलता कैसे है – तो गिरगिटों की त्वचा दो परतदार या अध्यारोपित परतें होती हैं जो उनके रंग और तापमान को नियंत्रित करती हैं।

उनकी ऊपरी त्वचा पारदर्शी होती है, जिसके नीचे विशेष कोशिकाओं की परतें होती है, जिन्हे क्रोमैटोफोर (Chromatophore) कहा जाता है।

परिपक्व (developed) क्रोमैटोफोर को उनके रंग के आधार पर उपवर्गों में वर्गीकृत किया जाता है- जैसे की,

ज़ैंथोफ़ोर्स (पीला रंग के लिए),
एरिथ्रोफ़ोर्स (लाल रंग के लिए),
इरिडोफ़ोर्स (ये छोटे दर्पणों की तरह काम करते हैं जो चुनिंदा रंगों को प्रतिबिंबित और अवशोषित करते हैं),
साइनोफोरेस (नीला रंग के लिए) और
मेलनोफोर, इसमें मेलनिन नामक तत्व होता है।

जब मेलनोफोर सेल सक्रिय होता है, तब गिरगिट नीले और पीले रंग के मिश्रण से हरा दिखाई देता है या फिर नीले और लाल रंग का मिश्रण दिखाई देता है।

लेकिन जब गिरगिट गुस्से में होता है तो काले कण उभर आते है गिरगिट गहरा भूरा दिखाई देता है। 

इनके मस्तिष्क को जैसे ही खतरे का संदेश जाता है, इनका दिमाग उन कोशिकाओं को संकेत भेजता है और यह कोशिकाएँ इसी के अनुरूप फैलने व सीकुड़ने लगती है और गिरगिट का रंग बदलने लग जाता है। 

आप नीचे विडियो में देख सकते हैं कि किस तरह गिरगिट अपना रंग बदलता है।

गिरगिट से जुड़े कुछ तथ्य

🔴 गिरगिट के वैसे तो पैर होते हैं लेकिन ये एक सरीसृप (Reptiles) हैं। यानी कि गिरगिट रेंगने वाले जीवों के श्रेणी में आता है।

🔴 शिकारियों द्वारा पकड़े जाने पर कुछ छिपकलियां अपनी पूंछ को अलग कर सकती हैं। वैसे भी अगर गिरगिट की पूंछ कट जाती है तो फिर से उग आती है।

🔴 गिरगिटों की ऊपरी और निचली पलकें जुड़ जाती हैं, जिससे उन्हें देखने के लिए बस एक छोटा सा छेद रह जाता है। हालांकि, वे अपनी आंखों को स्वतंत्र रूप से स्थानांतरित कर सकते हैं, जिससे उन्हें एक ही समय में दो अलग-अलग दिशाओं में देखने की सहूलियत मिलती है।

🔴 गिरगिटों की जीभ लंबी होती है और ये उसे अपने मुंह से इतनी तेजी से निकालता है कि इन्सानों के पलक झपकने से पहले ही अपने शिकार को चट कर जाता है।

🔴 कुछ गिरगिट ऐसे भी होते हैं जिसके पास रंग बदलने की क्षमता नहीं होती है।

🔴 गेको छिपकली की कोई पलकें नहीं होती हैं और उसके पैर की उँगलियाँ इतनी जबर्दस्त होती है कि छोटे-मोटे पहाड़ पर भी चढ़ सकता है।

🔴 कोमोडो ड्रैगन छिपकली का सबसे बड़ा प्रकार है, जिसकी लंबाई 3 मीटर (10 फीट) तक हो सकती है। ये कई अलग-अलग इंडोनेशियाई द्वीपों पर पाए जाते हैं। कोमोडो ड्रेगन मांसाहारी (मांस खाने वाले) हैं और बहुत आक्रामक हो सकते हैं।

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