इस लेख में हम शासन और प्रशासन पर सरल एवं सहज चर्चा करेंगे एवं इसके बीच के अंतर को समझने का प्रयास करेंगे।

अक्सर हम शासन और प्रशासन को एक ही समझ कर इस्तेमाल करते हैं ऐसा शायद इसीलिए क्योंकि आधिपत्य का जो भाव इन दोनों नामों से आता है वो एक ही प्रकार के संस्था की तरफ इशारा कर रहा होता है।

तो आइये समझते हैं इस पूरे कॉन्सेप्ट को। हमारे अन्य लेखों को अभी अवश्य पढ़ें। और हमारे फ़ेसबुक पेज़ को लाइक कर लें ताकि नए अपडेट मिलते रहें।

शासन और प्रशासन
Read in EnglishYT1FBgYT2

| शासन (Governance)

शासन को आप एक मनोभाव मान सकते हैं जो कि हमारी विकास प्रक्रिया के दौरान और सुदृढ़ होता गया। आखिर कौन अपनी बात मनवाना नहीं चाहता है, अपने स्टेटस को और ऊपर उठाना नहीं चाहता है।

तो प्राचीन काल में ये व्यवस्था थी नहीं कि अपने पसंद के लोगों को चुनकर उसके नियंत्रण या आधिपत्य को स्वीकार कर लें। इसीलिए वहाँ “जिसकी लाठी उसकी भैंस” वाली स्थिति कायम हुई, अगर आप, आपका परिवार, या आपका समाज, दूसरों से ताकतवर है तो आप ताकत के बल पर सामने वाले को झुका दीजिये और फिर उस पर अपना आधिपत्य कायम कर लीजिये। शासन करने की व्यवस्था कुछ इसी तरह से शुरू हुई पर याद रखिए इसके कई अन्य पहलू भी है, जैसे कि एक समाज के तौर पर रहने की एक अंतर्निहित शर्त ये है कि हम पर कोई शासन करें या हम किसी के द्वारा शासित हो। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होगा तो सब अपने मन की करेगा और ऐसे में इंसान के लिए एक समाज के रूप में मिल-जुल कर आगे बढ़ना मुश्किल हो जाएगा।

तो जब तक राज-रजवाड़े चले तब तक शासन की ज़िम्मेदारी राजा संभालते थे, फिर धीरे-धीरे लोकतंत्र जैसी संस्था को मजबूती मिली और जनता अपने ऊपर शासन करने वाले को चुनने लगा।

अगर हम सीधा सा प्रश्न करें कि कोई हम पे शासन करता है, मतलब क्या करता है? तो हम कह सकते हैं, शासन करने वाले एक खास भौगोलिक सीमा और उसमें रहने वाले लोगों को सुरक्षा प्रदान करता है। ये सुरक्षा न सिर्फ बाहरी लोगों से होता है बल्कि अपने लोगों से भी होता है। इसके साथ ही ये एक ऐसी व्यवस्था को बनाए रखता है जिसमें लोग एक समाज के तौर पर आगे बढ़ सके, इत्यादि।

शासन शब्द का अर्थ;

इसका अर्थ आज्ञा देना, उपदेश देना या फिर राज करना होता है। दूसरे शब्दों में कहें तो इसका अर्थ किसी को अपने नियंत्रण में रखना है, जिससे वह निर्धारित नियम, व्यवस्था, आदेश आदि के विपरीत कार्य न करें।

शासन के लक्ष्य की बात करें तो वो है; देश, प्रांत, स्थान, संस्थान या संगठन आदि पर इस प्रकार से नियंत्रण रखने की व्यवस्था करना ताकि किसी प्रकार से अराजकता पैदा न हो। किसी भी देश में राजा, सेनापति, राष्ट्रपति या मंत्रियों का समूह वहाँ का शासन चलाता है। 

अरबी में इसके लिए हुक़ूमत का प्रयोग किया जाता है। और अँग्रेजी में इसके लिए बहुत सारे शब्द प्रचलित है जिसका कि अलग-अलग परिपेक्ष्य में इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि rule, regime, governance, Domination, gubernation एवं masterdom इत्यादि।

किसी को वश में रख कर उससे अपने इच्छानुसार कार्य करवाना भी शासन करना है; जैसे- उसकी घरवाली उस पर शासन करती है। 

किसी देश या राज्य पर शासन करने के तरीके को शासन प्रणाली और जिस सिद्धांत के आधार पर शासन की व्यवस्था की जाती है, उसे शासन तंत्र (governance system) कहते है। 

| प्रशासन (Administration)

इतना तो हम समझ गए कि शासन किसे कहते हैं, अब आप ही सोचिए कि किसी शासक ने कोई बात कही, या फैसला सुनाया तो लोग उसे क्यों माने। वे बस कुछ ही लोग तो होते हैं जो नियम तय करते हैं, या फैसला सुनाते हैं, फिर जनता उसकी बात मानती ही क्यों है।

ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि जनता को पता होता है कि अगर हमने तय किए गए नियम की अवहेलना की या उसे मानने से इंकार कर दिया तो उसके परिणाम भुगतने होंगे, हो सकता है कारावास जाना पड़े या हो सकता है जुर्माना लगाया जाये।

जाहिर है ये सब काम मुट्ठी भर लोग जो शासन चलाते हैं वो तो नहीं करेगा। ये सारे काम हमारे ही बीच का कोई व्यक्ति करेगा जिसने कि शासक के बातों को लागू करने की ज़िम्मेदारी ली है या शपथ ली है। यही लोग तो प्रशासक कहलाते हैं और ये जो करते हैं उसे हम प्रशासन कहते हैं।

यानी कि, प्रशासन शासन का ही एक अंग है जिसका मुख्य मकसद कार्यों की व्यवस्था और नियमों का पालन कराना है।

दूसरे शब्दों में कहें तो नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों आदि को कार्य रूप में परिणत करना प्रशासन (Administration) है। 

कुल मिलाकर शासन और प्रशासन

प्रशासन का इतिहास बहुत ही पुराना है, चाणक्य द्वारा लिखित “अर्थशास्त्र” में प्रशासनिक गतिविधियों एवं प्रशासनिक मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की गई है। उसकी झलक को मौर्य शासन के प्रशासन में देखा जा सकता है। तो कहने का अर्थ ये है कि शासन और प्रशासन दोनों एक साथ दिखायी पड़ते हैं या यूं कहें कि प्रशासन शासन का एक मूलभूत तत्व है।

हालांकि यहाँ ये याद रखिये कि आज हम जिस लोक-प्रशासन की बात करते हैं या हम जिस व्यवस्था में रहते हैं उसका जनक वुडरो विल्सन (1856-1924) को माना जाता है। क्योंकि राजा-महाराजा के समय लोग “प्रजा” होती थी लेकिन आज के व्यवस्था में “नागरिक” होते है।

कुल मिलाकर कहा जाए तो प्रशासन शासन की एक ऐसा व्यवस्था है, जिसके माध्यम से शासन अपने विधानों को लागू करता है। शासन का स्थान प्रशासन के ऊपर होता है, क्योंकि प्रशासन उसी के नियमों, निर्देशों आदि को कार्यान्वित करता है।

उम्मीद हैं आपको यह लेख समझ में आया होगा, यहाँ पर ये भी समझनी जरूरी है कि प्रशासन और प्रबंधन में भी अंतर होता है, क्या होता है उसके लिए आप दिये गए लेख को अवश्य पढ़ें, और नीचे दिये गए अन्य लेखों को भी पढ़ें।

| संबंधित अन्य बेहतरीन लेख

आमंत्रण और निमंत्रण में अंतर क्या है?
संस्था और संस्थान में मुख्य अंतर 
शिक्षा और विद्या में अंतर
साधारण और सामान्य में अंतर
सभ्यता और संस्कृति में अंतर
प्रशासन और प्रबंधन में अंतर
चिंतक और दार्शनिक में अंतर
हरण और अपहरण में अंतर क्या है?
समाचार और संवाद में अंतर
संस्था और संस्थान में मुख्य अंतर