क्षमता और योग्यता में अंतर (Difference in capacity and ability)

इस लेख में हम क्षमता और योग्यता के मध्य कुछ दिलचस्प अंतरों की खोज करेंगे। तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें।

क्षमता और योग्यता में अंतर

क्षमता और योग्यता में अंतर क्या है?(Difference in capacity and ability)

आमतौर पर हम क्षमता और योग्यता को एक समान ही इस्तेमाल करते हैं, पर योग्य होना और सक्षम होना दोनों अलग-अलग चीज़ें हैं। आइये जानते हैं कैसे!

🔳 इसे एक उदाहरण से शुरू करते हैं। मान लीजिये आपके पास एक बाइक है जिसकी अधिकतम रफ़्तार 300 किलोमीटर प्रति घंटा है।

जाहिर है आप कम से कम इससे फास्ट उस बाइक को नहीं चला सकते हैं। तो ये जो 300 किलोमीटर प्रतिघंटा है वो उस बाइक की क्षमता (Capacity) है।

आप जानते भी हैं कि उस बाइक को 300 किलोमीटर प्रतिघंटा तक ले जाया जा सकता है। पर सवाल ये है कि क्या आपके पास उस बाइक को उस गति तक ले जाने की योग्यता (Ability) है।

🔳 चलिये एक और उदाहरण से समझते हैं। एक कम्प्युटर को ही ले लीजिये, उसमें असीम क्षमताएं हैं पर क्या आप उसकी पूरी क्षमता तक उपयोग कर पाते हैं।

मान लीजिये आपको ग्राफिक डिज़ाइनिंग आती है, तो ये आपकी योग्यता है कि आप उतना ही कर पाते हैं जबकि कम्प्युटर की क्षमता उससे कई गुना अधिक है।

तो अब आप इतना पढ़ने के बाद कह सकते हैं कि जो जहां तक किया जा सकता है वो क्षमता है और जितना हम कर पाते हैं वो हमारी योग्यता है।

🔳 दूसरे शब्दों में कहें तो हम क्या कर सकते हैं वो हमारी क्षमता है और हम क्या करते हैं वो हमारी योग्यता।

भौतिक जगत में क्षमता को आकड़ों के माध्यम से बताया जा सकता है। जैसे कि उस ट्रक की क्षमता है कि वो 30 टन भार वहन (carry) कर सकती हैं।

पर मानवीय जीवन में ऐसा नहीं किया जा सकता। बस हम अपनी बुद्धि, विवेक, चेतना आदि के आधार पर संभावना बता सकते हैं कि अमुक व्यक्ति की इतनी क्षमता है कि वो अरबपति बन सकता है, इत्यादि-इत्यादि।

🔳 कई बार हम किसी को ये कहते हुए सुनते हैं कि वो अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहा है। ये अपने आप में विरोधाभाषी है। मान लीजिये कि एक गिलास है।

अब उसकी क्षमता तो उतनी ही है जितनी की उसमें पानी आ सकती है। और पानी डालेंगे तो वो फिर बाहर गिरने लगेगा। इससे स्पष्ट है कि वो अपने क्षमता से अधिक जल धारण नहीं कर सकता है।

🔳 इससे ये तो पता चलता है कि कोई अपने क्षमता से अधिक कुछ नहीं कर सकता। अगर कर रहा है इसका मतलब ये है कि उसने अपनी क्षमता को कम करके आँका था।

और ये होता भी है, कई लोग ये कहते हैं कि हमारे पास बस 8 घंटे काम करने की क्षमता है। और अगर किसी दिन उसे 10 घंटे काम करना पड़ जाये तो वो ये कहते हैं कि मैंने अपनी क्षमता से अधिक काम किया है।

पर सच तो ये है कि या तो उसने अपनी क्षमता को कमतर आँका है या फिर उसने अपनी क्षमता बढ़ायी है।

क्योंकि क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश तो होती ही है। जैसे अगर ऊपर वाले बाइक की क्षमता को अगर बढ़ाना चाहें तो उसके डिज़ाइन और प्रद्यौगिकी (Technology) में परिवर्तन लाकर ऐसा किया जा सकता है।

🔳 इसी प्रकार योग्यता को भी बढ़ाया जा सकता है। वो कैसे? शिक्षा की मदद से, प्रशिक्षण की मदद से, प्रैक्टिस की मदद से।

इसीलिए कहा जाता है – अहं ब्रह्मष्मि ! यानी कि हममें ब्रम्ह की तरह असीम क्षमताएं हैं। और अगर हम भी खुद को इस योग्य बना लें कि अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर लें तो हम भी ब्रम्हा की तरह दिव्य मनुष्यों की श्रेणी में आ जाएँगे।

इसी को आधार बनाकर बहुत से मोटीवेशनल स्पीकर कहते रहते हैं कि ‘आप कुछ भी कर सकते हैं।’

इसी कान्सैप्ट का प्रयोग Lucy मूवी में भी किया गया है। जहां ये बताया गया है कि हम अपनी क्षमता का बहुत ही कम प्रतिशत इस्तेमाल कर पाते हैं। क्योंकि हम अपनी योग्यता को उस क्षमता तक नहीं पहुंचा पाते हैं।

और अभी हमारी योग्यता कितनी है ये हमारे द्वारा किए गए कामों के परिणाम से पता चल जाता है। जो हम कर पाते हैं वहीं हमारी योग्यता है।

🔳 योग्यता तुलनात्मक होती है। वो कैसे? मान लीजिये एक पाँच साल का बच्चा कम्प्युटर चलाने में सहज है। तो हम ये कहेंगे की ये बच्चा बहुत ज्यादा योग्य है।

अब यहीं बच्चा अगर 15 साल का हो जाये और अब भी उसको उतना ही आता है जितना कि उसको 5 साल में आता था।

तो क्या हम तब भी उसे कहेंगे कि ये बहुत ज्यादा योग्य है। शायद नहीं! क्योंकि उसकी क्षमता तो तब से काफी बढ़ गयी है पर योग्यता उतनी की उतनी है।

🔳 इसीलिए कहा जाता है कि हमें हमेशा अपनी क्षमताओं को खंगालते रहना चाहिए और उसी के अनुरूप अपने योग्यता को बढ़ाते रहना चाहिए।

🔳 अब आप समझ रहे होंगे कि क्यों जब आप किसी नौकरी के लिए आवेदन करते हैं तो आपसे आपका योग्यता पूछा जाता है न कि आपकी क्षमता।

क्षमता और योग्यता में कुल मिलाकर अंतर

क्षमता और योग्यता में अंतर
क्षमता किसी भी चीज़ की वो उच्चतम स्थिति है जहां तक पहुंचा जा सकता है।
और योग्यता हमारी वो स्थिति है जहां तक हम पहुँचते हैं।
क्षमता का इस्तेमाल आमतौर पर भौतिक वस्तुओं के लिए किया जाता है।
वहीं योग्यता का इस्तेमाल इन्सानों के लिए किया जाता है।
आप कितने क्षमतावान है, ये आपके योग्यता से पता चल सकता है।
पर आप कितने योग्य है, ये आपके द्वारा किए गए काम और उसके परिणामों से पता चलता है।

🌀सक्षम और योग्य होने में अंतर

आप सक्षम है इसका मतलब ये नहीं कि आप योग्य है

🌀 हो सकता है आपने ऊपर वाला यह लाइन सुना हो। वास्तविक जीवन में हमें एक ही चीज़ के इतने सारे पहलू देखने को मिलते रहते हैं कि कभी-कभी किसी चीज़ की परफेक्ट परिभाषा ढूंढना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है।

🌀 इसे उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिये आपके पास बहुत पैसे है, आपकी पहुँच बहुत ऊपर तक है। आपने एक यूनिवर्सिटी से अपने रसूख के दम पर बिना पढे डिग्री ले ली।

तो आप बेशक ये कह सकते हैं कि मैं इतना सक्षम हूँ कि बिना पढ़े ही डिग्री ले लिया। पर व्यावहारिक तौर पर क्या आप उस डिग्री के योग्य हैं। नहीं। बेशक नहीं।

🌀 ठीक इसका उल्टा भी हो सकता है। कि आप योग्य है इसका मतलब ये नहीं है कि आप सक्षम भी हैं। इसको आप इस उदाहरण से समझिये।

मान लीजिये कि आपको एक लड़की पसंद है, और आप उससे शादी करना चाहते हैं, क्योंकि आपको लगता है कि आप उसके योग्य है। जो कि आप है भी।

पर एक और भी लड़का है जो आप जितना योग्य नहीं है पर वो आपसे ज्यादा सक्षम है। वो उसे ले कर चला जाता है, और आप योग्य होते हुए भी कुछ नहीं कर पाते क्योंकि सक्षम नहीं थे। ये एक प्रकार की स्थिति हो सकती है।

🌀 इस तरह से आप समझ रहे होंगे कि सैद्धांतिक तौर पर चीज़ें बिलकुल अलग तरह से काम करती है।

लेकिन वहीं चीज़ जब पूर्ण रूप से व्यवहार में शामिल हो जाता है, तो उसके अनेक पहलुएं हमारे सामने आने लगती है।

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क्षमता और योग्यता में अंतर
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