निवेदन और प्रार्थना में मुख्य अंतर । Difference between request and prayer

इस लेख में हम निवेदन और प्रार्थना (request and prayer) के बीच सूक्ष्म अंतर को जानेंगे।
निवेदन और प्रार्थना

निवेदन और प्रार्थना में अंतर
(Difference between request and prayer)

निवेदन(Request)

🙏🏻 किसी बात को नम्रतापूर्वक कहना अथवा शालिन ढंग से बतलाना निवेदन करना है।

🙏🏻 अपने से बड़े या फिर श्रेष्ठ-जनों से के समक्ष जब अपना विचार अथवा सुझाव रखना हो या फिर उनसे कुछ काम करवाना हो तो हम उनसे निवेदन करते हैं।

🙏🏻 इसमें विनम्रता, आग्रह और समर्पण का भाव होता है। इसीलिए निवेदन पत्र को ‘लेटर ऑफ रिक्वेस्ट’ भी कहा जाता है। 

जैसे- इस स्थिति के संबंध में कलेक्टर साहब से निवेदन कर दिये है अब देखिये क्या होता है, वे जैसा उचित समझेंगे, करेंगे !!

🙏🏻 निवेदन से ही नैवेद्य बना है। जिसमें अर्पण करनेवाला भाव प्रधान होता है। दरअसल नैवेद्य उन स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों को कहा जाता है, जो देवी-देवताओं के समक्ष उनके भोग के लिए रखे जाते हैं।

प्रार्थना (Prayer)

👏🏻 प्रार्थना का मुख्य अर्थ होता है अपने लिए कुछ माँगना या याचना करना । अपने हित साधने के उद्देश्य से बड़े ही विनम्रता पूर्वक किसी से कुछ कहना प्रार्थना है।

👏🏻 ईश्वर या देवी- देवताओं से स्वयं के लिए, अपने परिजनों के लिए अथवा सभी के कल्याण के लिए श्रद्धा और भक्ति के साथ की गयी याचना प्रार्थना है।

👏🏻 प्रार्थना उच्च अधिकारियों, देवी-देवताओं अथवा समाज के महान और क्षेष्ट व्यक्तियों से की जाती है।

👏🏻 कोर्ट में मुकदमे को प्रारम्भ करने के लिए न्यायालय से किया जाने वाला लिखित अनुरोध भी प्रार्थना है।

🙏🏻 प्रार्थना समान्यतः दो प्रकार की होती है, जो निम्नलिखित है।

1. 🙏🏻 स्तुति – इसमें प्रार्थना करने वाले, जिससे प्रार्थना कर रहें है उसके सद्गुणों का गुणगान करते है और तारीफ़ों के पूल बांधते है। ताकि वे इससे अभिभूत होकर हम पर कृपा करें।

जैसे कि – कैलाश पर्वत पर विराजमान हे देवों के देव महादेव, नीलकंठ, बागम्बर धारी, पार्वती के प्रिय पति, त्रिशूल धारी, सबके दुखों को पार लगाने वाले हे भोलेनाथ………………..! 

2. 🙏🏻 याचना– इसमें याचक बन कर प्रभु से प्रार्थना की जाती है कि हे प्रभु ! मुझे मेरी अपक्षाओं के अनुरूप फल प्रदान करें । 

निवेदन और प्रार्थना में कुल मिलाकर अंतर

🤴🏻 निवेदन मे समर्पण के भाव की प्रधानता है और प्रार्थना में श्रद्धा, भक्ति और याचना के भाव की।

🤴🏻 भगवान से निवेदन नहीं प्रार्थना की जाती है, जबकि मंच पर किसी नेता को भाषण देने के लिए आमंत्रित करते समय निवेदन किया जाता है, प्रार्थना नहीं की जाती ।

🤴🏻 निवेदन करनेवाला व्यक्ति अपने को छोटा दिखते हुए निवेदन करता है, जबकि प्रार्थना करनेवाले को अपने को और भी छोटा दिखाना पड़ता है।

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निवेदन और प्रार्थना
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