भारतीय संसदीय समूह । Indian Parliamentary Group

भारतीय संसदीय समूह एक स्वायत्त (Autonomous) संस्थान है जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय संसद के सदस्यों के साथ-साथ विदेशी संसद के सदस्यों के बीच वैयक्तिक संपर्क को बढ़ावा देना है।

इस लेख में हम भारतीय संसदीय समूह (Indian Parliamentary Group – IPG) पर सरल और सहज चर्चा करेंगे, एवं इसके विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का प्रयास करेंगे, तो लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

भारतीय संसदीय समूह

संसदीय समूह की जरूरत

पूरी दुनिया हमेशा किसी न किसी समस्याओं से जूझती ही रहती है, आज कोई देश जिस समस्या को फेस कर रही है कल वो हमे भी फेस करना पड़ सकता है क्योंकि वैश्वीकरण के इस दौर में राष्ट्रों की एक-दूसरे पर परस्पर निर्भरता काफी बढ़ गई है, ऐसे में अगर विभिन्न देशों के सांसदों के बीच एक जुड़ाव बना रहे तो एक दूसरे के अनुभवों से सीखकर शासन व्यवस्था को काफी सुदृढ़ किया जा सकता है। इसीलिए संसदीय समूह का गठन किया गया। ये समूह अपने समस्याओं पर चर्चा करता है और समाधान खोजता है साथ ही साथ यह अंतर-संसदीय संघ (Inter parliamentary union) और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (Commonwealth Parliamentary Association) की एक भारतीय शाखा के रूप में काम करता है।

[यहाँ अंतर-संसदीय संघ (IPU) और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) क्या है इसकी चर्चा आगे की गई है]

भारतीय संसदीय समूह का गठन

1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ तो अंतर-संसदीय संघ (IPU) और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) ने भारत को अनुरोध किया कि वे इसका सदस्य बने और भारतीय शाखाएँ खोले। इसी अनुरोध को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से ‘भारतीय संसदीय समूह (Indian Parliamentary Group)’ नामक एक स्वायत्त निकाय की स्थापना की गई। इसकी स्थापना 1949 में हुई थी।

संसद के सारे सदस्य इस समूह के सदस्य हो सकते हैं यहाँ तक कि भूतपूर्व सांसद भी इसके सहयोगी सदस्य हो सकते है। हालांकि सहयोगी सदस्यों के अधिकार सीमित होते हैं जैसे कि उन्हे अंतर-संसदीय संघ (IPU) और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) के सम्मेलनों एवं बैठकों में भाग लेने की अनुमति नहीं होती है।

लोकसभा अध्यक्ष इसके पदेन अध्यक्ष होते है और लोकसभा के उपाध्यक्ष तथा राज्यसभा के उप सभापति इस समूह के पदेन उपाध्यक्ष होते है। लोकसभा के महासचिव इस समूह के पदेन महासचिव होते है।

भारतीय संसदीय समूह के उद्देश्य

भारतीय संसदीय समूह के निम्नलिखित उद्देश्य होते हैं-

1. संसद सदस्यों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाना तथा सांसदों एवं गणमान्य व्यक्तियों द्वारा राजनीतिक, सुरक्षा संबंधी, आर्थिक, सामाजिक एवं शिक्षा संबंधी समस्याओं पर व्याख्यान आयोजित करना
2. सार्वजनिक महत्व के प्रश्नों का अध्ययन करना जो कि संसद में उठने वाला है साथ ही समूह के सदस्यों के बीच सूचना प्रेषित करने के लिए दस्तावेजों का प्रकाशन करना।
3. विदेशी दौरे का आयोजन करना ताकि अन्य देशों की संसदों के सदस्यों से संपर्क विकसित हो सके।

संसदीय समूह के कार्य

इस समूह द्वारा निम्नलिखित कार्य एवं गतिविधियां सम्पन्न किए जाते हैं:-

1. भारतीय संसदीय समूह, भारत के संसद तथा विश्व के अन्य संसदों के बीच एक कड़ी का काम करता है। इस कड़ी को बनाए रखने के लिए शुभेच्छा मिशनों, पत्राचार एवं दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया जाता है।

2. यह समूह अंतर-संसदीय संघ (IPU) तथा राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) की मुख्य शाखा के रूप में कार्य करता है।
3. विदेशी संसद सदस्यों के राज्याध्यक्षों का सम्बोधन एवं प्रमुख व्यक्तियों द्वारा वार्ताओं का आयोजन इस समूह द्वारा किया जाता है।
4. सामाजिक महत्व के संसदीय विषयों पर संगोष्ठियों (Seminars) का समय-समय पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन किया जाता है।

5. विदेशी दौरों पर जाने वाले समूह के सदस्यों का परिचय अंतर-संसदीय समूह (IPU) और राष्ट्रमंडल संसदीय समूह (CPA) के शाखाओं के सचिवों को भेजा जाता है।
6. विदेश जाने वाले भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल में उन्ही सांसदों को सम्मिलित किया जाता है जो प्रतिनिधिमंडल के गठन के छह माह पूर्व समूह के सदस्य बन चुके होते है।
7. सदस्यों तक अनवरत सूचना पहुंचता रहे इसके लिए हर तिमाही एक अंतर-संसदीय समूह न्यूज़लेटर का प्रकाशन किया जाता है और इसे हर सदस्य को नियमित रूप से भेजा जाता है
8. 1995 से सर्वोत्कृष्ट सांसद को पुरस्कार दिया जाता है इसके लिए पाँच सदस्यों की एक समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष करते है जो पुरस्कार के लिए नाम आमंत्रित एवं तय करती है
9. राजनैतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक सम्यकों को बनाए रखने के लिए अन्य देशों के सांसदों के साथ मिलकर मित्रता समूह का गठन किया जाता है।

अंतर-संसदीय संघ (IPU) क्या है?

अंतर-संसदीय संघ (Inter parliamentary union), संप्रभु राज्यों के सांसदों का एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। जिसमें वर्तमान में 153 देशों की संसद शामिल है। इसका लक्ष्य दुनिया भर के लोगों के बीच शांति व सहयोग के लिए काम करना है। यह विभिन्न संसदों एवं सांसदों के बीच संपर्क, समन्वय को बढ़ावा देता है। यह सभी अंतर्राष्ट्रीय महत्व के ज्वलंत मुद्दों पर अपना विचार अभिव्यक्त करता है तथा अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के कामकाजी मानकों एवं क्षमताओं में सुधार के उपाय भी सुझाता है।

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) क्या है?

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (Commonwealth Parliamentary Association), 175 राष्ट्रस्तरीय, राज्यस्तरीय तथा प्रांतस्तरीय संसदों के लगभग 17,000 राष्ट्रमंडल सांसदों का संघ है। राष्ट्रमंडल देशों तथा उन देशों के बीच जिनके साथ इनका नजदीकी संसदीय एवं ऐतिहासिक संबंध रहा है; संवैधानिक, विधायी, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था के बारे में ज्ञान एवं समझ को बढ़ाना इसका लक्ष्य रहा है।

राष्ट्रमंडल देश (Commonwealth Countries) उन देशों को कहते हैं जो एक समय ब्रिटिश शासन के अधीन थे। इन्ही देशों के मध्य जो खेल का आयोजन किया जाता है उसे राष्ट्रमंडल खेल के नाम से जाना जाता है। जिसका आयोजन दिल्ली में 2010 में हुआ था।

इस समूह की सदस्यता के निम्नलिखित लाभ है :-
1. इसकी सदस्यता से क्षेत्रीय सम्मेलनों, संगोष्ठियों, भ्रमण तथा प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान में सहभागिता का अवसर मिलता है
2. इसके सभी सदस्यों को ‘The Parliamentarian’ त्रैमासिक तथा न्यूज़लेटर First reading’ प्रत्येक दूसरे माह प्राप्त होता है
3. राष्ट्रमंडल संसदीय समूह शाखाएँ देशों या क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान परिचयों का आयोजन करती है
4. अन्य राष्ट्रमंडल देशों के भ्रमण के दौरान सदस्यों के प्रति संसदीय शिष्टाचार बरता जाता है।

भारतीय संसदीय समूह की सदस्यता के लाभ

जैसा कि हमने ऊपर पढ़ा है कि भारतीय संसदीय समूह (IPG), राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) की मुख्य शाखा के रूप में कार्य करता है। इस रूप में भारतीय संसदीय समूह की सदस्यता के निम्नलिखित लाभ हैं;

(क) यात्रा सुविधाएं तथा रियायतें: राष्ट्रमंडल (Commonwealth) के कुछ देशों में, दौरे पर आए हुए संघ के सदस्यों को कम दरों पर रेल किराये की सुविधा उपलब्ध होती है और कुछ मामलों में यह सुविधा उनके परिवार के सदस्यों को भी उपलब्ध होती है ।

(ख) परिचय तथा अतिथि-सत्कारः राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) की प्रत्येक शाखा यह सुनिश्चित करता करता है कि उनके यहाँ दौरे पर आने वाले सदस्यों का गर्मजोशी से स्वागत किया जाए तथा उनके दौरे के दौरान उन्हें संसदीय विशेषाधिकार और अन्य सुविधाएं प्राप्त कराया जाए।

(ग) अधिमान्य व्यवहारः राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) ने यह व्यवस्था की है कि किसी राष्ट्रमंडल देश का दौरा करते समय उनके सदस्यों के साथ संसद सदस्यों की तरह व्यवहार किया जाए। इसके लिए दौरे पर आने वाले सदस्यों को मेज़बान (host) देश की संसद की दीर्घा, लॉबी तथा भोजन कक्षों में प्रवेश की अनुमति दी जाती है ताकि वह वाद-विवाद सुन सकें तथा संघ के साथी सदस्यों से बातचीत कर सकें।

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