Money bill and Finance bill (धन विधेयक और वित्त विधेयक)

इस लेख में हम धन विधेयक और वित्त विधेयक (Money bill and Finance bill) पर सरल और सहज चर्चा करेंगे, तो लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
Money bill and Finance bill

संसद के विधायी प्रक्रिया को समझने के लिए धन विधेयक और वित्त विधेयक में अंतर (Money bill and Finance bill difference) और समानताएं जानना बहुत ही जरूरी है।

मोटे तौर पर चार प्रकार के विधेयक होते हैं –
↗️संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill),
↗️साधारण विधेयक (Ordinary bill),
धन विधेयक (Money Bill) और वित्त विधेयक (Finance bill)।

संविधान संशोधन विधेयक – संविधान के वर्तमान प्रावधान को बदलने या उसमें संशोधन से संबन्धित होता है। साधारण विधेयक की बात करें तो ये ऐसे विधेयक होते हैं जो नाही संविधान संशोधन विधेयक होते है और न ही धन और वित्त विधेयक। हालांकि वित्त विधेयक साधारण विधेयक के गुण भी प्रदर्शित करते हैं कैसे करते हैं इसे हम आगे देखने वाले हैं।

Money bill and Finance bill in hindi

धन विधेयक की बात करें या वित्त विधेयक की दोनों किसी न किसी प्रकार से पैसों से ही संबन्धित है। फिर भी कुछ प्रावधानों की वजह से इन दोनों में अंतरे आ जाती है। संविधान में भी इन दोनों को अलग-अलग अनुच्छेदों में वर्णित किया गया है। धन विधेयक को अनुच्छेद 110 में वर्णित किया गया है और वित्त विधेयक को अनुच्छेद 117 में। जितने भी धन विधेयक होते हैं वे सभी वित्त विधेयक होते हैं पर सभी वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होते हैं। ऐसे कैसे होता है इसे अनुच्छेद 117 में समझाया गया है जिसकी चर्चा आगे करने वाले है।

(धन विधेयक और वित्त विधेयक)

💸धन विधेयक(Money Bill)

किस प्रकार के विधेयक को धन विधेयक माना जाएगा ये संविधान के अनुच्छेद 110 में परिभाषित की गई है। इस अनुच्छेद के अनुसार कोई विधेयक तभी धन विधेयक माना जाएगा, जब उसमें निम्न वर्णित प्रावधानों में से एक या अधिक प्रावधान परिलक्षित होंगे।

1. उस अमुक विधेयक में, किसी कर का अधिरोपन (Imposition), उत्सादन (Cancellation), परिहार (Avoidance), परिवर्तन या विनियमन (Regulation) होता हो। इसका सीधा सा मतलब ये है कि जब किसी में विधेयक में टैक्स लगाने, बढ़ाने, कम करने या उस टैक्स को खत्म करने से संबन्धित प्रावधान हो तो उसे धन विधेयक कहा जाएगा।

2. अगर किसी विधेयक में, केंद्र सरकार द्वारा उधार लिए गए धन के विनियमन (Regulation) से संबन्धित कोई प्रावधान हो तो उसे धन विधेयक कहा जाएगा।

3. अगर किसी विधेयक में, भारत की संचित निधि या आकस्मिकता निधि में से धन जमा करने या उसमें से धन निकालने से संबन्धित प्रावधान हो तो…………..

4. ऐसा विधेयक जो, भारत की संचित निधि से धन के विनियोग से संबन्धित हो। संचित निधि यानी कि भारत सरकार के कमाई का पैसा जहां पर जमा होता है और विनियोग का मतलब होता है किसी विशेष उपयोग के लिए आधिकारिक रूप से आवंटित धन की राशि।

5. ऐसा विधेयक जो, भारत की संचित निधि पर भारित किसी व्यय की उद्घोषणा या इस प्रकार के किसी व्यय की राशि में वृद्धि से संबन्धित हो।

6. ऐसा विधेयक जो, भारत की संचित निधि या लोक लेखा में किसी प्रकार के धन की प्राप्ति या अभिरक्षा या इनसे व्यय या इनका केंद्र या राज्य की निधियों का लेखा परीक्षण से संबन्धित हो।

लोक लेखा भी संचित निधि की तरह एक निधि है, पर इसमें कुछ भिन्नताएँ है, निधियों को जानने के लिए आप इस लेख को जरूर पढ़ें। ↗️विभिन्न प्रकार की निधियाँ

7. उपरोक्त विनिर्दिष्ट (Specified) किसी विषय का आनुषंगिक (ancillary) कोई विषय। यानी कि अभी जो ऊपर 6 प्रावधानों को पढ़ें है उसका अगर कोई आनुषंगिक विषय भी होगा तब भी वे धन विधेयक माने जाएंगे।

क्या-क्या धन विधेयक नही है?

निम्न कारणों के आधार पर किसी विधेयक को धन विधेयक नहीं माना जाता है :- 1. जुर्मानों या अन्य धनीय शास्तियों (Monetary penalties) का अधिरूपन (Imposition) 2. अनुज्ञप्तियों (Licenses) के लिए फ़ीसों या की गई सेवाओं के लिए फ़ीसों की मांग 3. किसी स्थानीय प्राधिकारी या निकाय द्वारा स्थानीय प्रयोजनों के लिए किसी कर के अधिरोपन, उत्सादन (Cancellation), परिहार (Avoidance), परिवर्तन या विनियमन का उपबंध।

धन विधेयक से संबन्धित प्रावधान

◼ किस विधेयक को धन विधेयक कहना है और किस विधेयक को नहीं ये फैसला लोकसभा अध्यक्ष लेता है इस मामले में लोकसभा के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम निर्णय होता है। उसके निर्णय को किसी न्यायालय, संसद या राष्ट्रपति द्वारा चुनौती नहीं दी जा सकती है।

◼ धन विधेयक केवल लोकसभा में केवल राष्ट्रपति की सिफ़ारिश से ही प्रस्तुत किया जा सकता है। इस प्रकार के प्रत्येक विधेयक को सरकारी विधेयक माना जाता है तथा इसे केवल मंत्री ही प्रस्तुत कर सकता है।

◼ लोकसभा में पारित होने के उपरांत इसे राज्यसभा के विचारार्थ भेजा जाता है। राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकृत या संशोधित नहीं कर सकती है। यह केवल सिफ़ारिश कर सकती है। वो भी लोकसभा के लिए यह आवश्यक नहीं होता है कि वह राज्यसभा की सिफ़ारिशों को स्वीकार ही करें। इसके साथ ही 14 दिन के भीतर उसे इस पर स्वीकृति देनी होती है अन्यथा वह राज्यसभा द्वारा पारित समझा जाता है।

◼ इस प्रकार आप देख सकते हैं कि धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा की शक्ति काफी सीमित है। दूसरी ओर साधारण विधेयकों के मामलेन में दोनों सदनों को समान शक्ति प्रदान की गई है।

अंततः जब धन विधेयक को राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया जाता है तो वह या तो इस पर अपनी स्वीकृति दे सकता है या फिर इसे रोककर रख सकता है लेकिन वह किसी भी दशा में इसे पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेज सकता है। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि लोकसभा में प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति की सहमति ली जाती है यदि वे सहमति दे देते हैं इसका मतलब है कि राष्ट्रपति इससे सहमत है।

💸वित्त विधेयक(Finance bill)

वित्त विधेयक भी एक प्रकार का धन विधेयक ही है लेकिन जहां धन विधेयक मोटे तौरे पर आय या राजस्व से संबन्धित होता है वहीं वित्त विधेयक राजस्व के साथ व्यय से भी संबन्धित होता है। वित्त विधेयक की चर्चा अनुच्छेद 117 में की गई है।

धन विधेयक होने पर लोकसभा अध्यक्ष उसे प्रमाणित करता है जबकि वित्त विधेयक के साथ ऐसा कुछ नहीं होता है।

वित्त विधेयक मोटे तौर पर दो प्रकार के होते हैं। इसे आमतौर पर वित्त विधेयक(।) और वित्त विधेयक(॥) कहा जाता है।

वित्त विधेयक(।)

वित्त विधेयक(।) की चर्चा अनुच्छेद 117 (1) में की गई है। वित्त विधेयक(।) में अनुच्छेद 110 (यानी कि धन विधेयक) के तहत हमने जो मुख्य 6 प्रावधान पढ़ें है वो सब तो आता ही है साथ ही साथ कोई अन्य विषय जो अनुच्छेद 110 में नहीं लिखा हुआ है वो भी आता है। जैसे कि विशिष्ट ऋण से संबन्धित कोई प्रावधान हो।

चूंकि वित्त विधेयक(।) में अनुच्छेद 110 के सारे प्रावधान आते हैं इसीलिए इसे पहले राष्ट्रपति से स्वीकृति लेने की जरूरत पड़ती है। और उसके बाद इसे लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है। इतना होने के बाद ये एक साधारण विधेयक की तरह हो जाता है यानी कि अब जब ये राज्यसभा में जाएगा तो राज्यसभा इसमें संशोधित कर सकती है, इसे रोक के रख सकती है या फिर चाहे तो पारित कर सकती है।

यदि इस प्रकार के विधेयक में दोनों सदनों के बीच कोई गतिरोध होता है तो राष्ट्रपति दोनों सदनों के गतिरोध को समाप्त करने के लिए संयुक्त बैठक बुला सकता है। जबकि आपको याद होगा कि धन विधेयक में संयुक्त बैठक बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है।

दोनों सदनों से पास होने के बाद जब विधेयक राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया जाता है, तो वह या तो विधेयक को अपनी स्वीकृति दे सकता है या उसे रोक सकता है या फिर पुनर्विचार के लिए सदन को वापस कर सकता है। जबकि आपको याद होगा कि धन विधेयक में राष्ट्रपति पुनर्विचार के लिए नहीं भेज सकता है।

इतना पढ़ने के बाद आप समझ रहे होंगे कि क्यों सभी धन विधेयक, वित्त विधेयकों की श्रेणी में आते हैं। (क्योंकि इसमें अनुच्छेद 110 का पूरा प्रावधान समाहित होता है) जबकि सभी वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होते हैं। केवल वे वित्त विधेयक ही धन विधेयक होते हैं, जिनका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 110 में किया गया है।

वित्त विधेयक(॥)

वित्त विधेयक(॥) इस मायने में खास है कि इसमें अनुच्छेद 110 का कोई भी प्रावधान सम्मिलित नहीं होता है। तो फिर इसमें क्या सम्मिलित होता है? वित्त विधेयक(॥) में भारत की संचित निधि पर भारित व्यय संबंधी उपबंध होते हैं लेकिन फिर से याद रखिए कि ऐसा कोई मामला नहीं होता, जिसका उल्लेख अनुच्छेद 110 में होता है।

इसे साधारण विधेयक की तरह प्रयोग किया जाता है तथा इसके लिए भी वही प्रक्रिया अपनायी जाती है, जो साधारण विधेयक के लिए अपनायी जाती है। यानी कि इस विधेयक को पहले लोकसभा में पारित करने की भी बाध्यता नहीं होती है इसे जिस सदन में चाहे पेश किया जा सकता है। और राज्यसभा इसे संशोधित भी कर सकती है, रोककर भी रख सकती है या फिर पारित कर सकती है।

इसकी सबसे खास बात ये है कि वित्त विधेयक(॥) को सदन में प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति की जरूरत नहीं पड़ती है लेकिन संसद के किसी भी सदन द्वारा इसे तब तक पारित नहीं किया जा सकता,जब तक कि राष्ट्रपति सदन को ऐसा करने की अनुशंसा (Recommendation) न दे दे।

यदि इस प्रकार के विधेयक में दोनों सदनों के बीच कोई गतिरोध होता है तो राष्ट्रपति दोनों सदनों के गतिरोध को समाप्त करने के लिए संयुक्त बैठक बुला सकता है।

जब दोनों सदनों से पास होकर जब विधेयक राष्ट्रपति को प्रस्तुत किया जाता है, तो वह या तो विधेयक को अपनी स्वीकृति दे सकता है या उसे रोक सकता है या फिर पुनर्विचार के लिए सदन को वापस कर सकता है।

तो यही था धन विधेयक और वित्त विधेयक (Money bill and Finance bill), उम्मीद है आपको समझ में आया होगा। संसद से संबन्धित अन्य लेखों को नीचे से पढ़ें।

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Money bill and Finance bill
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