नाम और उपनाम में अंतर क्या है?

नाम और उपनाम में अंतर
Name and surname difference

इस लेख में नाम और उपनाम (Name and surname) में अंतर को जानेंगे

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By Sacca – Flickr,

नाम (Name)

किसी व्यक्ति को बार-बार किसी एक ही शब्द से संबोधित करने से यह शब्द उस व्यक्ति का नाम बन जाता है। इस प्रकार नाम वह शब्द है, जिससे किसी व्यक्ति या वस्तु का बोध हो।  

नाम एक माध्यम है, जो नाम धारण करने वाले व्यक्ति और उस नाम का प्रयोग करनेवाले व्यक्ति के बीच सीधा संपर्क स्थापित करता है।

इसीलिए हर वस्तु की पहचान तथा उससे दूसरों को अवगत करने के लिए उसका कोई-न-कोई नाम रख लिया जाता है। 

उपनाम (Surname)

नाम में ‘उप’ उपसर्ग लगने से उप नाम बनता है। ये और कुछ नहीं बस एक संक्षिप्त, कल्पित और छोटा नाम ही है, जिसका प्रयोग नाम के बदले में किया जाता है। 

👱🏻‍♀️ नाम और उपनाम में कुल मिलाकर अंतर

👱🏻‍♀️ कुल मिलाकर देखें तो इन दोनों में फर्क बस इतना है कि नाम तो जन्म के समय ही रख दिया जाता है, लेकिन उपनाम जन्म के बाद कभी भी रखा जा सकता है । 

नाम माता, पिता, अभिभावक आदि रखते हैं, जबकि उपनाम व्यक्ति स्वयं रखता है। 

👱🏻‍♀️ इस प्रकार नाम में जहां अभिभावकों की आशा-आकांक्षाओं का प्रतिबिंब दिखाई पड़ता है वहीं  उपनाम में व्यक्ति विशेष की इच्छाओं और अभिलाषाओं का। 

नाम दूसरे व्यक्तियों पर आधारित होता है। इसमें नामधारी व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं होती, जबकि उपनाम का आधार नामधारी व्यक्ति स्वयं होता है।

जैसे- सूर्यकांत त्रिपाठी का उपनाम ‘निराला’ था।

👱🏻‍♀️ जब कोई साहित्यकार साहित्य लेखन में अपने मूल नाम के अतिरिक्त किसी अन्य नाम का प्रयोग करता है, तो यह अन्य नाम उसका उपनाम कहलाता है। 

उदाहरण के लिए प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय तो लुप्त ही हो गया और ‘प्रेमचंद’ उपनाम होते हुए भी वास्तविक नाम का स्थान ग्रहण कर लिया। 

फिल्मी दुनिया में ऐसे दर्जनों उदाहरण है।

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