हंसी और दिल्लगी में अंतर क्या है?॥

इस लेख में हम हंसी और दिल्लगी के मध्य के कुछ अंतरों पर प्रकाश डालेंगे।
हंसी और दिल्लगी

😃 हंसी और दिल्लगी में अंतर

🔲 हंसी और दिल्लगी का अलग-अलग भी इस्तेमाल किया जाता है और एक साथ भी। जब दोनों का अलग-अलग इस्तेमाल किया जाता है तब भी ज़्यादातर इसका इस्तेमाल एक ही प्रकार के सेंस में कर दिया जाता है।

और जब दोनों का एक साथ इस्तेमाल किया जाता है तब भी कमोबेश एक ही सेंस में इसका इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि अलग-अलग मतलब निकाले जा सकते हैं। पर चूंकि दोनों के मूल में हंसी ही है। इसीलिए कई बार अलग-अलग मतलब निकालना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

पर इसका ये कतई अर्थ नहीं है कि दोनों में अंतर नहीं है। जाहिर है अंतर है तभी तो दोनों अलग-अलग शब्द है।

🔲 याद रखिए हंसी और खुशी में अंतर है। खुशी आंतरिक अनुभूति है जबकि हंसी बाहरी प्रकटीकरण (manifestation) है। आप खुश है तो जरूरी नहीं है कि आप हंस भी रहे होंगे। उसी तरह से आप हंस रहे हैं इसका मतलब ये नहीं है कि आप खुश है।

इसीलिए तो हंसी-खुशी शब्द का इस्तेमाल एक साथ भी किया जाता है। ताकि दोनों ही चीज़ें स्पष्ट हो जाये यानी कि आप हंस रहे है इसका मतलब आप खुश है या फिर आप खुश है शायद इसीलिए हंस रहे हैं।

🔲 दूसरे शब्दों में कहें तो इसका मतलब आनंद और प्रसन्नता है। जैसे कि – उसका यहाँ पर इतना मान-दान हुआ कि वे यहाँ से हंसी-खुशी अपने घर गये।

🔲 हंसना एक क्रिया (verb) है जबकि हंसी एक संज्ञा (Noun) है वो भी भाववाचक संज्ञा (Abstract noun)। किसी के मुंह से कोई विनोदपूर्ण (Humorous) बात सुनकर हंस पड़ना हंसी है।

🔲 उपहास करना भी एक प्रकार की हंसी है। इसमें किसी को नीचा दिखलाने के लिए ऐसी बात कही जाती है, जिसे सुन कर लोग उपेक्षा भाव से हंस पड़ें; जैसे लोग उसकी लाचारी की हंसी उड़ा रहे थे।

🔲 लोक या समाज में होने वाली उपहासपूर्ण निंदा या बदनामी भी हंसी है; जैसे- किसी को भी कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे चार लोगों के बीच उसकी हंसी हो।

🔲 किसी बात को साधारण समझ कर हँसते हुए टाल देना हंसी में उड़ाना है। इस पर आधारित एक मुहावरा भी है- ”हंसी-खेल न होना” जैसे अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ना कोई हंसी-खेल नहीं था।

इसी प्रकार एक और मुहावरा है ”हंसी खेल सूझना”। जैसे – मेरे जान पर संकट मंडरा रहा है और तुम्हें हंसी-खेल सूझ रहा है।

🔲🔲दिल्लगी का शाब्दिक अर्थ देखें तो ये फारसी के दिल शब्द में हिन्दी की लगी शब्द जुड़ने से बनी है। इस तरह से इसका अर्थ दिल लगाने की क्रिया या भाव है। लेकिन व्यावहारिक रूप में दिल्लगी का इस्तेमाल भी हंसी, मज़ाक, उपहास, परिहास आदि में ही होता है।

इसीलिए काफी मायनों में हंसी और दिल्लगी दोनों शब्द एक ही अर्थ देते नजर आते हैं। पर वाक्य प्रयोग के दौरान काफी कुछ पृथक हो जाता है।

🔲 हंसी एक आउटपुट होता है, जब हम कोई विनोदपूर्ण बात करते हैं। या फिर दूसरे शब्दों में कहें तो कभी-कभी हमारा हाव-भाव, आचार-व्यवहार या जेस्चर कुछ इस प्रकार का हो जाता है कि हंसी छूट जाती है।

ये जो हाव-भाव, आचार-व्यवहार या जेस्चर है उसे हम दिल्लगी कह सकते है। यानी कि किसी खास प्रकार के क्रिया करने के बाद हंसी आती है, वो जो क्रिया है उसे हम दिल्लगी कह देते हैं।

🔲 कुल मिलाकार कहें तो हंसी एक सामान्य, सर्व-स्वीकृत और शिष्ट शब्द है जबकि दिल्लगी में प्रायः ओछापन, फूहड़पन, रोमांस या शारीरिक संलग्नता का भाव होता है।

🔲 इसी कारण हंसी अपने विशुद्ध रूप में छोटों या बड़ों या बराबर किसी के सामने की जा सकती है, लेकिन दिल्लगी का क्षेत्र बराबर वालों तक ही सीमित रहता है। क्योंकि इसमें शिष्टता का अभाव होता है।

मजा आ रहा है दिलबर से दिल्लगी में,
नजरे भी हमी पे है और पर्दा भी हमी से है।

उदाहरण के लिए इस शेर को देखिये। इसमें दिल्लगी का जिस तरह से इस्तेमाल हुआ है उसमें आपको एक प्रकार का छिछोरापन नजर आएगा। जाहिर है इस तरह का शेर हमउम्र वाले को ही कहा जा सकता है न कि अपने से बड़ों को या फिर अपने से छोटे को।

हमने भी बहुत दिल लगा कर देख लिया है,
चलो थोड़ी दिल्लगी भी कर ले,

इस शेर में देखिये इसमें हंसी-मज़ाक का पुट तो नजर आएगा ही साथ ही साथ आपको रोमांस या शारीरिक संलग्नता का भाव भी नजर आयेगा।

एक सवाल छोड़ गए आज भी वो मेरे जहन में…
कि ये रिश्ता मोहब्बत का था या सिर्फ़ दिल्लगी…!!!

इस शेर में दिल्लगी के इस्तेमाल को आप देखें तो आपको एक प्रकार का ज़िंदगी के साथ किया गया एक मज़ाक या धोखे का भाव नजर आएगा।

जाते-जाते राहत फतेह अली साहब का एक गाना छोड़ कर जा रहा हूँ। इसका मतलब आप खुद ही लगा लीजिये।

तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी…
तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी
कभी दिल किसी से लगाकर तो देखो

यहाँ क्लिक करके आप गाना सुन सकते हैं।

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