माना जाता है कि समस्या को समझ लेना समस्या को हल करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम होता है। संसदीय मंच (Parliamentary Forum) भी कुछ इसी तरह काम करता है, ये संसद सदस्यों को जागरूक करता है और मुद्दों की सही समझ उनके अंदर पैदा करने की कोशिश करता है।

इस लेख में हम इसी पर सरल और सहज चर्चा करेंगे एवं इसके महत्वपूर्ण पहलुओं को समझेंगे; तो अच्छे से समझने के लिए अंत तक जरूर पढ़ें।

संसदीय मंच
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संसदीय मंच का उद्देश्य

संसद के सदस्य सदन में तथा विभागीय समितियों के समक्ष मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से उठा सके इसके लिए जरूरी है कि सदस्यों को प्रासंगिक विषयों के बारे में जानकारी हो तथा जमीनी वास्तविकताओं से अच्छी तरह से परिचित हो यही पे संसदीय मंच (Parliamentary Forum) काम आता है।

संसदीय मंच, सदस्यों को एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहां वे संबन्धित मंत्रियों, विशेषज्ञों, मंत्रालयों के प्रमुख अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण विषयों पर संकेंद्रित और सार्थक चर्चा कर सकता है।

महत्वपूर्ण मुद्दों पर यह संबन्धित मंत्रालय, गैर-सरकारी संगठनों, समाचार पत्रों, इंटरनेट आदि के माध्यम से आंकड़े एकत्रित कर एक डेटाबेस तैयार करता है और उन्हे सदस्यों के बीच वितरित करता है ताकि सदस्य फोरम की बैठकों में सार्थक ढंग से भाग लें सकें।

संसदीय मंच का गठन

जल संरक्षण एवं प्रबंधन पर 2005 में पहला संसदीय मंच का गठन किया गया था। वर्तमान की बात करें तो 8 संसदीय मंच अस्तित्व में है।
1. जल संरक्षण एवं प्रबंधन पर संसदीय फोरम (2005)

2. युवाओं पर संसदीय फोरम (2006)

3. बच्चों पर संसदीय फोरम (2006)

4. जनसंख्या एवं जन-स्वास्थ्य पर संसदीय फोरम (2008)

5. भूमंडलीय उष्णता एवं जलवायु परिवर्तन पर संसदीय फोरम (2008)

6. आपदा प्रबंधन पर संसदीय फोरम (2011)

7. शिल्पकारों एवं दस्तकारों पर संसदीय फोरम (2013)

8. सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य पर संसदीय फोरम (2013)।

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संसदीय मंच की संरचना

सभी मंचों के पदेन अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष होते है, राज्य सभा के उप-सभापति, लोकसभा उपाध्यक्ष, संबन्धित मंत्री तथा विभागों से संबन्धित स्थायी समितियों के अध्यक्ष विभिन्न मंचों के पदेन उपाध्यक्ष होते है।

अध्यक्ष तथा उपाध्यक्षों को छोड़कर प्रत्येक मंच में 31 से अधिक सदस्य नहीं होते हैं। जिसमें से लोकसभा से अधिकतम 21 तथा राज्य सभा से अधिकतम 10 सदस्य होते है। अध्यक्ष तथा उपाध्यक्षों को छोड़कर इन फोरमों के सदस्य, लोकसभा अध्यक्ष या सभापति द्वारा नामित किए जाते हैं।

कोई भी सदस्य, जब तक सदन का सदस्य रहता है तब तक वो इस मंच का भी सदस्य रह सकता है। अगर कोई सदस्य इससे हटना चाहे तो लोकसभा अध्यक्ष को लिखित रूप में त्यागपत्र दे सकता है। इस संसदीय मंच के अध्यक्ष द्वारा एक को सदस्य-संयोजक नियुक्त किया जाता है जो कि नियमित रूप से स्वीकृत कार्यक्रमों का संचालन आदि को देखता है।

संसदीय मंच के कार्य

जल संरक्षण एवं प्रबंधन पर संसदीय मंच – इस मंच के निम्नलिखित कार्य हैं जैसे कि –

1. जल से संबन्धित समस्याओं की पहचान करना तथा उन पर अपना सुझाव देना ताकि उन पर विचारोपरांत सरकार या संबन्धित संगठन द्वारा उपयुक्त कार्यवाही की जा सके।

2. जल संरक्षण एवं उसके कुशल प्रबंधन के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सेमिनार एवं कार्यशालों का आयोजन करना तथा अन्य संबन्धित कार्य जिसे उचित समझा जाए उस पर भी संज्ञान लेना।

युवाओं के लिए संसदीय मंच – इस मंच के निम्नलिखित कार्य है:

1. युवाओं के मानव पूंजी के उपयोग के रणनीतियों पर सार्थक चर्चा करना ताकि युवाओं के विकासात्मक पहलुओं को आगे बढ़ाया जा सके।

2. युवा की क्षमताओं के बारे में जागरूकता पैदा करना तथा युवा प्रतिनिधियों एवं नेताओं के साथ नियमित अन्तःक्रिया करना, जिससे की उनकी आशाओं, आकांक्षाओं, चिंताओं एवं समस्याओं पर विचार किया जा सके

3. विशेषज्ञों, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं तथा सरकारी एजेंसियों से चर्चा करके युवा सशक्तिकरण से संबन्धित नीतियों की पुनर्रचना पर बल देना।

बच्चों के लिए संसदीय मंच – इस मंच के निम्नलिखित कार्य है:-

1. संसदों में बच्चों के कल्याण पर प्रभाव डालने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाना तथा विकास प्रक्रिया में बच्चों के उचित स्थान को सुनिश्चित करने के लिए प्रयत्न करना

2. सांसदों को एक ऐसा मंच प्रदान करना जहां कि वे बच्चों से संबन्धित अपने विचारों, दृष्टिकोण तथा अनुभवों को कार्यशालाओं, सेमिनारों आदि कार्यक्रमों के माध्यम से आदान-प्रदान कर सकें

3. सांसदों को, संस्थागत विशेषज्ञता प्राप्त एजेंसियों जैसे यूनिसेफ तथा अन्य तुलनीय एजेंसियों के साथ बच्चों बारे में बातचीत करने के अवसर प्रदान करना साथ ही ऐसी अन्य कार्य परियोजना आदि को हाथ में लेना, जैसा कि मंच द्वारा सुझाया जाये।

जनसंख्या एवं जन-स्वास्थ्य पर संसदीय मंच – इस मंच के निम्नलिखित कार्य है :-

1. जनसंख्या नियंत्रण एवं इससे जुड़े मामलों पर रणनीति बनाने के लिय सार्थक और संकेंद्रित चर्चा करना

2. जन स्वास्थ्य से जुड़े मामलों के बारे में समाज के सभी वर्गों में जागरूकता फैलाना

3. राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों के साथ जनसंख्या एवं जन-स्वास्थ्य जैसे मसलों पर चर्चा करना तथा बाहुपार्श्विक (Multilateral) संस्थाओं, जैसे WHO आदि एवं संबंधित सरकारी एजेंसियो के साथ संवाद करना।

भूमंडलीय उष्णता एवं जलवायु परिवर्तन पर संसदीय मंच – इस मंच के निम्नलिखित कार्य है :-

1. भूमंडलीय उष्णता (Global warming) से संबन्धित समस्याओं को चिन्हित करना तथा सरकार के स्तर पर ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के तरीकों पर अपनी राय देना।

2. उन तरीकों को चिन्हित करना जिनके द्वारा सांसदों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उन विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित करने का मौका मिल सके, जो कि ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन पर कार्य कर रहे हैं

3. सांसदों द्वारा ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन के कारणों एवं प्रभाव के बारे में जागरूक बनाने के लिए सेमिनारों का आयोजन करना तथा ऐसे अन्य कार्य जो ये मंच उचित समझे।

आपदा प्रबंधन पर संसदीय मंच – इस मंच के निम्नलिखित कार्य है ;-

1. आपदा प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं की पहचान करना तथा सुझाव देना ताकि सरकार उस पर विचार कर आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए उपयुक्त कार्यवाही कर सके।

2. उन तरीकों की पहचान करना जिससे कि सदस्यों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय निकायों के विशेषज्ञों से बातचीत करने का मौका मिले ताकि वे आपदा से निपटने के प्रासंगिक तौर-तरीकों से अवगत हो सके

3. आपदा के कारणों एवं प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सेमिनारों का आयोजन करवाना और ऐसे अन्य काम करना जिसे कि मंच उचित समझे।

शिल्पकारों एवं दस्तकारों पर संसदीय मंच – इस मंच के निम्नलिखित कार्य है :-

1. संसद सदस्यों का ध्यान दस्तकारों एवं शिल्पकारों के मुद्दे पर दिलाना और उनमें उनकी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना जिससे कि पारंपरिक कला और शिल्प का संरक्षण एवं संवर्धन किया जा सकें

2. सदस्यों के लिए दस्तकारों एवं शिल्पियों से संबन्धित मामलों पर विचार के लिए एक ऐसा मंच प्रदान करना जहां संकेंद्रित सार्थक चर्चा किया जा सके।

3. संसद सदस्यों को इस मुद्दे पर विभिन्न संघीय मंत्रालयों, सरकारी संगठनों जैसे खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग एवं अन्य संबन्धित संगठनों एवं निकायों के प्रतिनिधियों के साथ एक सांस्थानिक तरीके से संवाद करने में समर्थ बनाना तथा ऐसे अन्य कार्य, परियोजना एवं जिम्मेदारियों को हाथ में लेना जिन्हे मंच उचित समझे।

सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य पर संसदीय मंच – इस मंच के निम्नलिखित कार्य है :-

1. संसद सदस्यों को सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य के कार्यान्वयन से जुड़े विचारों, दृष्टिकोणों, अनुभवों एवं सर्वोत्तम प्रचलनों पर कार्यशालाओं, सेमिनारों आदि कार्यक्रमों के माध्यम से सार्थक एवं संकेंद्रित चर्चा के लिए मंच प्रदान करना।

2. संसद सदस्यों को सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्यों से जुड़े मूल्यों जैसे कि गरीबी एवं भुखमरी उन्मूलन, सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा की उपलब्धि, यौन समानता एवं स्त्री सशक्तिकरण, शिशु मृत्यु में कमी, मातृ स्वास्थ्य में सुधार, पर्यावरणीय धारणीयता एवं विकास के लिए वैश्विक साझेदारी के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करना तथा अन्य कार्य परियोजना आदि को हाथ में लेना जैसा कि मंच उचित समझें।

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संसदीय मंच: उद्देश्य, गठन, कार्य अभ्यास प्रश्न

  1. Number of Questions - 4 
  2. Passing Marks - 75  %
  3. Time - 3 Minutes
  4. एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।

1 / 4

भूमंडलीय उष्णता एवं जलवायु परिवर्तन पर संसदीय मंच इनमें से कौन सा कार्य नहीं करता है?

  1. भूमंडलीय उष्णता (Global warming) से संबन्धित समस्याओं को चिन्हित करना।
  2. सरकार के स्तर पर ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के तरीकों पर अपनी राय देना।
  3. ग्लोबल वार्मिंग के संबंध में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सेमिनार आयोजित करना।
  4. संयुक्त राष्ट्र में अपने प्रयासों की सराहना करना।

2 / 4

संसदीय मंच के संबंध में दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

  1. इसके तहत सदस्य संबन्धित मंत्रियों, विशेषज्ञों, मंत्रालयों के प्रमुख अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण विषयों पर संकेंद्रित और सार्थक चर्चा कर सकता है।
  2. 2005 में पहला संसदीय मंच का गठन किया गया था।
  3. इस तरह के मंचों की अध्यक्षता गृहमंत्री करते हैं।
  4. इस तरह के मंच में अधिकतम 30 सदस्य होते हैं।

3 / 4

दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

  1. कोई सदस्य, जब तक सदन का सदस्य रहता है तब तक वो संसदीय मंच का भी सदस्य रह सकता है।
  2. सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य पर संसदीय मंच की शुरुआत 2013 में की गई थी।
  3. अध्यक्ष तथा उपाध्यक्षों को छोड़कर प्रत्येक मंच में 31 से अधिक सदस्य नहीं होते हैं।
  4. जनसंख्या एवं जन-स्वास्थ्य पर संसदीय मंच की शुरुआत 2010 में की गई थी।

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