Securities in Hindi (प्रतिभूतियाँ:भूमिका, प्रकार इत्यादि)

Basics of Share Market Part 4

इस लेख में हम प्रतिभूतियों (Securities) पर सरल और सहज चर्चा करेंगे, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
Securities

अगर आप सीधे ये वाला लेख पढ़ रहे हैं तो आपको बता दूँ कि ये लेख बेसिक्स ऑफ शेयर मार्केट का चौथा पार्ट है। शेयर मार्केट के कॉन्सेप्ट को पूरी तरह से समझने के लिए आप पार्ट 1 से जरूर पढ़ें। पार्ट 1 पढ़ने के लिए ↗️यहाँ क्लिक करें। अगर आप पढ़ चुके है या फिर सिर्फ प्रतिभूतियों (Securities) को समझना चाहते है तो इसे नजरंदाज करें।

Securities in Hindi

अब तक हम मुद्रा बाज़ार और पूंजी बाज़ार को समझ चुके हैं और इसकी भी चर्चा कर चुके है कि शेयर, बॉन्ड आदि एक प्रतिभूति (Security) है। इस लेख में हम इसी प्रतिभूति को समझेंगे और जानेंगे कि क्यों ये समझना जरूरी है।

प्रतिभूति क्या है?
(What is a security?)

प्रतिभूति एक प्रकार का वित्तीय उपकरण (Financial instruments) है जिसका कि कुछ मौद्रिक मूल्य होता है। उदाहरण के लिए मान लीजिये आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते है तो आपको उसके बदले क्या मिलता है बस एक सर्टिफिकेट, जो कि एक कागज के रूप मे हो सकता है या फिर इलेक्ट्रोनिक फॉर्म में।

तो क्या हम एक सर्टिफिकेट के लिए इतना पैसा लगाए है? बिलकुल नहीं, वो सर्टिफिकेट बस ये सुनिश्चित करता है कि आपके पास किसी कंपनी का शेयर है जिसका कि एक अपना मौद्रिक मूल्य है।

मौद्रिक मूल्य का मतलब ये है कि अगर आप उसे बेचेंगे तो उसके बदले आपको उतने पैसे मिल जाएँगे जितना कि उस समय उसका बाज़ार में प्राइस होगा। इसे उदाहरण से समझते हैं।

जैसे कि आप और आपके दोस्त ने मिलकर एक दुकान शुरू किया। आपके दोस्त ने 900 रुपए दिया जबकि आपने 100 रुपए। यानी कि आपके पास उस दुकान का 10 परसेंट शेयर है।

एक साल बाद उस दुकान की कीमत 2000 रुपए हो जाती है। 10 प्रतिशत के हिसाब से आपका शेयर भी 100 रुपए से 200 रुपए हो जाता है। अब आप किसी कारण से इस दुकान में पार्टनर नहीं बने रहना चाहते है तो आप क्या करेंगे? जाहिर है आप अपने 10 परसेंट शेयर को बेच देंगे और उसके बदले आपको 200 रुपए मिल जाएगा।

यानी कि आप इस बात को लेकर सुरक्षित है कि अगर कभी भी उस शेयर को बेचेंगे तो उस समय के बाज़ार मूल्य के हिसाब से उतना पैसा आपको मिल जाएगा। इसीलिए इसे Security या प्रतिभूति कहा जाता है।

प्रतिभूति बाज़ार (Securities Market)

शेयर, बॉन्ड, डिबेंचर, म्यूचुअल फ़ंड इत्यादि ये सब प्रतिभूति है। इसकी खरीद-बिक्री जिस पूंजी बाज़ार में होती है उसे प्रतिभूति बाज़ार (Securities Market) कहते हैं। यानी कि प्रतिभूति बाज़ार, पूंजी बाज़ार (Capital Market) का ही एक हिस्सा है जहां पर प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री से दीर्घावधि (Long term) के लिए पूंजी जुटाये जाते हैं।

प्रतिभूति बाज़ार (Securities Market) में पूंजी उगाही (Capital raising) करने के दो प्रकार के होते हैं 1. प्राथमिक बाज़ार (Primary market) 2. द्वितीयक बाज़ार (Secondary Market)।

◾ अगर पूंजी उगाही करने वाले द्वारा शेयर, बॉन्ड इत्यादि की बिक्री सीधे निवेशक (Investors) को की जाती है तो इसे प्राथमिक बाज़ार का कारोबार कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो अगर किसी व्यक्ति या निवेशक द्वारा किसी कंपनी का शेयर सीधे कंपनी से खरीदा जाये तो उसे प्राथमिक बाज़ार कहते हैं और शेयर खरीददार को ‘प्राथमिक शेयर धारक’ कहते हैं।

◾ वहीं अगर कोई व्यक्ति या निवेशक किसी कंपनी के शेयर को सीधे कंपनी से न खरीदकर मार्केट के अन्य व्यक्ति या निवेशक से खरीदे तो उसे द्वितीयक बाज़ार कहते हैं। इस कॉन्सेप्ट की चर्चा आगे भी करने वाले है इसीलिए यहाँ न भी समझ में आए तो चिंता की बात नहीं है।

भारतीय प्रतिभूति बाज़ार की बात करें तो इसके कई संघटक है; जैसे कि सेबी (SEBI) जो कि इसका नियामक एजेंसी (Regulatory agency) है।

◾ इसके अलावा स्टॉक एक्सचेंज (Stock exchange), शेयर सूचकांक (Stock index), ब्रोकर, FII (Foreign institutional investors), जॉब्बर्स (Jobbers), इत्यादि सभी प्रतिभूति बाज़ार का ही हिस्सा है, इन सभी की चर्चा हम आगे करने वाले है। आप बस इत्मीनान से पढ़ते रहिए।

प्रतिभूतियों के प्रकार
(Types of Securities
)

प्रतिभूतियों (Securities) को आमतौर पर तीन भागों में बांटा जाता है। 1. इक्विटि प्रतिभूतियाँ (Equity Securities) 2. डेट प्रतिभूतियाँ (Debt Securities) 3. डेरिवेटिव्स (Derivatives)

1. इक्विटि प्रतिभूतियाँ (Equity Securities)

ऐसी प्रतिभूतियाँ जो किसी कंपनी के आंशिक स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करता हो। दूसरे शब्दों में कहें तो ऐसा वित्तीय उपकरण जो किसी कंपनी में आंशिक हिस्सेदारी को सुनिश्चित करता हो। जैसे कि शेयर।

आप किसी कंपनी के शेयर को खरीदते हैं तो इसका मतलब है कि आप उस कंपनी की हिस्सेदारी खरीद रहें हैं। ऐसा करके आप भी उस कंपनी का एक सदस्य बन जाते हैं। ये बड़ी काम की चीज़ है क्योंकि शेयर मार्केट में इसी छोटी सी हिस्सेदारी की तो खरीद-बिक्री होती है।

इसीलिए शेयर मार्केट समझने के लिए कम से कम आप इसे जरूर याद रखें क्योंकि ये सीधे शेयर मार्केट से जुड़ा हुआ है। इसी प्रकार नीचे जो आप पढ़ेंगे वो बॉन्ड मार्केट से जुड़ा हुआ है।

2. डेट प्रतिभूतियाँ (Debt securities)

डेट प्रतिभूतियों का मतलब है ऋण या लोन से संबन्धित प्रतिभूतियाँ जैसे कि बॉन्ड, डिबेंचर, बैंक नोट इत्यादि। यानी कि दूसरे शब्दों में कहें तो अगर आप किसी कंपनी के बॉन्ड को खरीदते है तो आपको उस कंपनी की हिस्सेदारी नहीं मिलने वाली है बस आपको एक फ़िक्स्ड रेट पर ब्याज मिलता है।

डेट प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री बॉन्ड मार्केट के अंतर्गत होती है और ये भी शेयर मार्केट की तरह ही काम करता है। इसीलिए बॉन्ड मार्केट (Bond market) को समझने से पहले जरूरी है कि आप पहले शेयर मार्केट को समझ लें।

3. डेरिवेटिव्स (Derivatives)

डेरिवेटिव्स (Derivatives) भी एक प्रकार का प्रतिभूति ही है। इसके चार प्रकार होते हैं फॉरवर्ड (Forward), फ्युचर (futures), ऑप्शन (options) और स्वैप (swaps)। डेरिवेटिव्स (Derivatives) की जहां पर खरीद-बिक्री होती है उसे हम डेरिवेटिव्स मार्केट कहते हैं। डेरिवेटिव्स शेयर मार्केट की एक अलग व्यवस्था है इसीलिए जब आप शेयर मार्केट को अच्छे से समझ लें तब इसे जरूर पढ़ें।

यहाँ पर हमने तीन प्रकार की प्रतिभूतियों के बारे में समझा है। इन तीनों की खरीद-बिक्री स्टॉक एक्स्चेंज (Stock exchange) के माध्यम से होती है।

चूंकि हमें शेयर मार्केट समझना है इसीलिए हम इक्विटि प्रतिभूतियों पर फोकस करेंगे। लेकिन इससे पहले हमारे लिए स्टॉक एक्स्चेंज जानना बहुत जरूरी है क्योंकि इस सब का केंद्र वही है। इसीलिए अगले लेख में हम स्टॉक एक्स्चेंज (Stock exchange) को समझेंगे और उसके बाद के लेख में शेयर मार्केट (Share Market) को।

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स्टॉक एक्स्चेंज (Stock exchange)
Stock Exchange in hindi

Securities (प्रतिभूतियाँ)
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