एक दिन का प्रधानमंत्री और ढेरों सपने

एक दिन का प्रधानमंत्री और ढेरों सपने नामक इस लेख में हम रियलिटी चेक करने की कोशिश करेंगे कि अगर एक दिन के लिए कोई प्रधानमंत्री बनता है तो क्या सब कर सकता है।

प्रधानमंत्री हमारे देश में सबसे महत्वपूर्ण राजनैतिक पद है पर वहाँ तक पहुँचना बहुत ही मुश्किल है। ऐसे में हम प्रधानमंत्री बने या न बने पर हमारे कल्पित दुनिया में ये जरूर सोच कर रखते हैं कि,

अगर हम प्रधानमंत्री बन गए तो ये करेंगे, वो करेंगे, इसे सुधार देंगे, उसे खतम कर देंगे आदि। अगर ऐसा आपने भी कभी सोचा है तो आइये इसे लेख को पढ़ते हैं।

एक दिन का प्रधानमंत्री

क्या सब करेंगे अगर आप एक दिन के लिए प्रधानमंत्री बन जायें!

अक्सर जब भी इस तरह के सवाल लोगों से पुछे जाते हैं तो लोग एक सुखद कल्पनाओं की दुनिया में गोते लगाने लगते हैं और फिर क्या वे अच्छे कामों की झड़ी लगा देते हैं।

किसी-किसी के जवाब को सुनकर को ऐसा लगने लगता है मानो वो धरती से सारी बुराइयाँ एक ही दिन में मिटा देंगे। इस तरह के सवाल होते ही ऐसे है सभी सोचते हैं कि कुछ ऐसे काम लोगों के सामने रखूँ कि लोग सोचने पर मजबूर हो जाये कि ये व्यक्ति कितना भला सोचता है देश के बारे में।

ख़ैर ये अच्छी ही बात है कि लोग देश के बारे में अच्छा विचार रखते हैं, पर वास्तविकता कल्पनाओं दुनिया से काफी अलग होता है।

ये हमें तब पता चलता है जब हमें ये समझ में आ जाती है कि चीज़ें व्यावहारिक रूप में कैसे काम करती है।

आइये फिर इसकी पड़ताल करते हैं कि अगर एक दिन के लिए प्रधानमंत्री बनने का मौका मिलता है तो क्या-क्या किया जा सकता है?

एक दिन का प्रधानमंत्री

पहले प्रधानमंत्री बनेंगे तभी तो कुछ करेंगे। तो सवाल ये आता है कि एक दिन के लिए प्रधानमंत्री कैसे बना जा सकता है?

इसके कई तरीके हो सकते हैं पर मान लेते हैं कि अभी कोई और प्रधानमंत्री था और आप उसकी जगह पर एक दिन के लिए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।

जाहिर है इसके लिए वे अपने पद से इस्तीफा देंगे या हो सकता है उसकी मृत्यु हो जाये। अभी जो हमारी वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था है उसके हिसाब से प्रधानमंत्री के अपने पद से हटते ही पूरा सरकार ही गिर जाता है। या यूं कहें कि लोकसभा भंग हो जाता है, मंत्रिमंडल भंग हो जाता है।

भारत में एक व्यवस्था ये है कि अगर आप लोकसभा या राज्यसभा के सांसद नहीं भी है लेकिन अगर उसकी योग्यता रखते हैं तो भी आप प्रधानमंत्री बन सकते हैं वो भी 6 महीने तक। तो ये तो है कि एक दिन के लिए अगर बहुमत प्राप्त दल आपको समर्थन दे दें तो आप प्रधानमंत्री बन जाएँगे।

अब मान लेते हैं कि आपको किसी बहुमत प्राप्त दल ने समर्थन दे दिया और आपने अपना मंत्रिमंडल भी चुन लिया। किसी दिन 10 बजे राष्ट्रपति ने आपको और आपके मंत्रिमंडल को शपथ भी दिलवा दिया।

अब शपथ लेने के साथ ही आपको प्रधानमंत्री पद की सारी शक्तियाँ मिल गयी और आप अगले दिन 10 बजे तक प्रधानमंत्री पद पर रहेंगे। यानी कि अब आपका एक दिन का काउंटडाउन शुरू हो गया है।

शपथ लेने के बाद के कुछ औपचारिकताओं को पूरा करने में आपका कुछ समय चला जाएगा। ये समय कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटों तक हो सकता है। मान लेते हैं आपका 1 घंटा इसमें चला गया

आप एक आम नागरिक है; प्रधानमंत्री पद किस तरह से काम करता है वो आपको कुछ भी नहीं पता है। पर चलिये ये मान लेते हैं कि कैबिनेट सचिव या अन्य सचिव आपको इस काम में मदद कर देगा। फिर भी आपको चीजों को समझने में कुछ वक़्त तो लग ही जाएगा।

अब आप चूंकि नया प्रधानमंत्री बने हैं वो भी किसी की जगह पर; राष्ट्रपति आपको सदन में बहुमत सिद्ध करने के लिए कह सकता है।

चूंकि आपके पास एक ही दिन है; राष्ट्रपति आपको उसी दिन बहुमत सिद्ध करने के लिए कह सकता है। क्योंकि रात में संसद चलेगा नहीं और दूसरे दिन 10 बजे तक ही आप प्रधानमंत्री रहेंगे।

आपको बहुमत सिद्ध करने में कुछ घंटे तक लग सकता है। अगर ऐसा हुआ तो आपके कई घंटे तो ऐसे ही चले जाएँगे। अगर आपने कभी इसे लोकसभा टीवी पर देखा हो तो आप समझ जाएंगे कि कितना समय लगता है।

इसके अलावा राष्ट्रपति अगर चाहे तो संसद का संयुक्त अधिवेशन को संबोधित कर सकता है। क्योंकि नया प्रधानमंत्री बनने पर राष्ट्रपति ऐसा करता है। अगर ऐसा होता है तो एक-दो घंटे आपके और चले जाएँगे।

अगर आप इस सब से निवृत हो गए तो अब आपके लिए ऐसे काम करना तो बहुत ही मुश्किल होगा जिसके लिए अलग से अधिनियम या कानून बनाने की आवश्यकता हो या फिर वर्तमान कानून में संशोधन की आवश्यकता हो।

जैसे कि मान लीजिये कि आप जनसंख्या नियंत्रण करना चाहते है अब आपके एक आदेश से जनसंख्या नियंत्रण तो हो नहीं जाएगा। उसके लिए आपको एक कानून लाना पड़ेगा या फिर मौजूदा कानून जो है उसमें भी कुछ संशोधन करना पड़ सकता है।

कोई भी कानून संसद में विधेयक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। और उसे संसद से पास करवाकर राष्ट्रपति से साइन-मोहर करवाना पड़ता है, तभी वो अधिनियम बन पाता है।

अब अगर आपके पास एक दिन मिला हो तो पहली बात कि आप उस विधेयक का ड्राफ्ट कैसे तैयार करेंगे, क्योंकि ड्राफ्ट तैयार करना कोई बायें हाथ का खेल तो है नहीं।

अगर मान भी लें कि आपके पास बहुत ही ज्यादा काबिल ऑफिसर्स हैं जो मात्र कुछ घंटों में विधेयक का ड्राफ्ट तैयार कर भी देता है तो भी कुछ घंटे तो ड्राफ़्ट तैयार करने में ही चला जाएगा

अगर 3 – 4 घंटे इसमें चले गए तो समझ लीजिये कि तब तक तो सदन का टाइम ओवर होने को आ जाएगा। लेकिन चलिये मान लेते हैं कि आप ने सदन के टाइम को बढ़ा दिया है। फ़िर भी संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया इतना जटिल है कि दोनों सभाओं से उसी दिन पास करवाना आसान नहीं होता।

अगर आपको नहीं पता है कि संसद में कानून कैसे बनते हैं या फिर ये कितना जटिल है, तो आप ↗️यहाँ क्लिक करके इस लेख को जरूर पढ़ें।

अगर मान भी ले कि आप अमित शाह हैं और एक ही दिन में कानून दोनों सदनों से पारित करवा लेंगे तो भी उसे राष्ट्रपति के पास भेजना पड़ेगा।

अब इसकी क्या गारंटी है कि राष्ट्रपति उसको उसी दिन स्वीकृति दे ही देगा। नहीं भी दे सकता है और आप उसका कुछ कर भी नहीं सकते हैं।

और अगर मान लीजिये कि उस कानून को राज्य विधानमंडल से भी पास करवाना हो तो फ़िर तो भूल ही जाइये कि वो कानून पास हो पाएगा।

यहाँ तक कि अगर आप अध्यादेश भी लाना चाहते है तो महज कुछ घंटों में इसे बनाना और राष्ट्रपति से स्वीकृति लेना बहुत ही मुश्किल है। वैसे भी आप अध्यादेश ला ही नहीं सकते हैं अगर संसद सत्र चल रहा हो।

इसीलिए कहा न कि नया अधिनियम ला कर कोई सामाजिक बदलाव करना बहुत ही मुश्किल होने वाला है। हालांकि ये नामुमकिन नहीं हैं लेकिन जाहिर है आप संवैधानिक दायरे में रहकर ही कोई काम करना चाहेंगे।

अगर किसी तरह से आपने कोई अधिनियम ला भी लिया तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि उसपे प्रोटेस्ट न शुरू हो जाये। या फिर कोई दवाब समूह सुप्रीम कोर्ट में उस कानून को चुनौती न दे दें। और सुप्रीम कोर्ट उसे संविधान की मूल संरचना पर हमला बताते हुए खारिज न कर दें। कुछ भी हो सकता है।

तो उन लोगों के लिए काफी मुश्किल होने वाला है जो बस एक ही दिन में ढेरों क्रांतिकारी काम करना चाहते हैं।

जाहिर है फिर रात भी तो होगी। आप भले ही रात में कोई फैसला ले लें लेकिन जो उसे लागू करने में मदद करेगा। इसकी क्या गारंटी है कि वो रात में जागकर आपके लिए काम करेगा।

क्योंकि वो ये भी तो जानता है कि आप मात्र एक दिन के लिए प्रधानमंत्री है, वो आप के लिए सब कुछ कर भी देगा तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि नया प्रधानमंत्री उस फैसले को बदल न दें।

और आप नायक मूवी के हीरो तो है नहीं कि नियमों को ताख पर रख पर जल्दी-जल्दी से सब काम आप खुद ही कर लेंगे।

आप कुछ काम तो जरूर कर लेंगे पर बहुत सारे क्रांतिकारी काम अपवाद स्वरूप ही संभव हो सकता है।

फिर सवाल ये आता है कि हम कर क्या सकते हैं?

आइये देखते हैं क्या किया जा सकता है।

बहुत से क़ानूनों में ये उपबंध होता है कि कार्यपालिका अगर चाहे तो परिस्थिति और जरूरत को देखते हुए उस कानून के अंतर्गत कुछ नियम और परिनियम बना सकते हैं । इसके सहारे कुछ कामों को किया जा सकता है।

जैसे कि आप ये कह सकते हैं कि हर व्यक्ति का ये एक सामाजिक दायित्व होगा कि वो 2 पेड़ लगाएं। ये एक तरह से ऑर्डर भी है और लोगों को उसके सामाजिक दायित्व भाव का बोध कराना भी। इसीलिए आपके प्रधानमंत्री पद को छोड़ने के बाद भी लोग आपके बात को मानेंगे; इसकी ज्यादा संभावना है।

राष्ट्रपति के आदेश से कुछ-कुछ किया जा सकता है। जैसे कि अनुच्छेद 35A राष्ट्रपति के आदेश से ही आया था। पर जाहिर है ये इतना भी आसान नहीं होता है।

आप वर्तमान क़ानूनों की खामियों को उजागर करके जनता के सामने उसका विकल्प रख सकते हैं। ताकि आपके प्रधानमंत्री पद से जाने के बाद भी जनता उसके लिए नए सरकार से अनुरोध करें या फ़िर प्रोटेस्ट करें।

आप एक अच्छा सा भाषण तैयार करके पूरे वैश्विक समाज के समक्ष रख सकते हैं। ताकि आपके जाने के बाद भी लोग उसपे सोचे और उसे अमल में लाने का प्रयास करें। आप देश हित में 10 सूत्री या बीस सूत्री कार्यक्रम पेश कर सकते हैं। जिसे करना बहुत ही आवश्यक हो।

आप किस तरह के इंसान हैं, आपका नजरिया क्या है, आपकी क्षमताएं क्या हैं, आपकी योग्यताएं क्या है; ये आप लोगों के समक्ष रख सकते हैं ताकि आप में लोगों को एक पोटेन्सियल प्राइम मिनिस्टर दिखायी दें।

कुल मिलाकर कहूँ तो संभावना तो है कुछ नया करने की, कुछ रचनात्मक करने की पर ये निर्भर करता है कि आपको राजव्यवस्था (Polity) और संविधान की समझ कितनी है। राजव्यवस्था की सही समझ आपको तभी आ पाएगी जब संविधान की बेसिक्स आपको पता हो।

अगर आपको संविधान की बेसिक्स समझना हो तो मेरे इस साइट से आप बिल्कुल शुरू से शुरुआत कर सकते हैं। इससे आपकी राजव्यवस्था की समझ स्पष्ट हो जाएंगी। और अगली बार आप हवा में बात करने से खुद को रोक लेंगे।

नोट – शब्दों के मर्यादा के कारण मैंने इसके बस कुछ ही पहलुओं को स्पर्श किया है। इसके इतर भी अन्य कई संभावनाएं हो सकती है।

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