प्रेरक हिन्दी लघुकथा । भोजन मुफ्त में नहीं मिलता और धन, वैभव और सफलता

प्रेरक हिन्दी लघुकथा

इस लेख में हम कुछ बहतरीन प्रेरक हिन्दी लघुकथा जैसे कि – भोजन मुफ्त में नहीं मिलता और धन, वैभव और सफलता को पढ़ेंगे।

प्रेरक हिन्दी लघुकथा

भोजन मुफ्त मे नहीं मिलता

एक बार एक राजा ने इतिहास की सारी समझदारी भरी बातों को लिखवाने का निर्णय लिया | ताकि आने वाली पीढ़ियों तक उसे पहुंचाया जा सके |

उन्होने अपने सलाहकारों को बुला कर ये सारी बातें बतायी । सलाहकारों ने काफी मेहनत के बाद इतिहास की सारी समझदारी भरी बातों पर कई किताबें लिखी और राजा के समक्ष पेश किया ।

इतनी सारी किताबों को देखकर राजा को लगा की इतनी सारी किताबें लोग पढ़ नहीं पायेंगे इसीलिए उन्होने अपने सलाहकारों को इसे और छोटा कर लाने को कहा ।

सलाहकारों ने इसपर फिर से काम किया और इस बार उन सारी किताबों को संक्षिप्त करके एक किताब में तब्दील कर फिर से राजा के समक्ष पेश किया गया |

राजा को वो एक किताब भी काफी मुश्किल लगी । सलाहकारों ने फिर से उस पर काम किया और इस बार उस एक किताब को एक चैप्टर (अध्याय) मे तब्दील कर फिर से राजा के समक्ष पेश किया 

पर ये भी राजा को काफी लंबा लगा |

राजा को कुछ ऐसा चाहिए था जिसे आने वाली पीढ़ियाँ समझ सकें । फिर से सलाहकारों ने उस पर काम करके उसे सिर्फ एक पन्ने मे संक्षिप्त करके राजा के समक्ष पेश किया

पर राजा को ये भी काफी लंबा लगा |

आखिरकार वे राजा के पास सिर्फ एक वाक्य ले कर आए और राजा उस वाक्य से पूरी तरह से संतुष्ट हो गया ।

राजा ने निर्णय लिया की आने वाली पीढ़ियों तक अगर समझदारी भरी सिर्फ एक वाक्य पहुंचाना हो तो वह यह वाक्य होगा, ”भोजन मुफ्त मे नहीं मिलता” |

प्रेरक हिन्दी लघुकथा

धन, वैभव और सफलता

एक गाँव में एक लकड़हारा अपनी पत्नी और बेटे के साथ रहता था । वो दिन भर लकड़ी काटता और पास के बाज़ार मे बेच आता था

उससे जो आमदनी होती थी उसी से उसका परिवार चलता था |

एक दिन की बात है वो अपने घर में भोजन कर रहा था तभी दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी । उसने अपने लड़के से दरवाजा खोलकर देखने के लिए कहा कि बाहर कौन है ।

लड़के ने दरवाजा खोला तो बाहर चार साधू खड़े थे । उन्होने लड़के को अपना नाम क्रमशः धन, वैभव, सफलता और श्रम बताते हुए कहा की हमें भूख लगी है ।

लड़का दौड़ कर गया और पिताजी को सारी बातें बतायी|

लकड़हारे ने चारों साधुओं को आदर सहित अंदर लाने को कहा । लड़का दरवाजे पर गया और चारों साधुओं को अंदर आने को कहा; पर साधुओं ने एक शर्त रखते हुए कहा की हम में से कोई एक ही अंदर जाएगा और जो भी अंदर जाएगा वो अपने नाम का प्रभाव ले कर जाएगा ।

लड़का फिर से पिताजी के पास गया और ये बातें बतायी|

अब लकड़हारा सोच में पड़ गया की किसे बुलाया जाए । लकड़हारे की पत्नी सफलता को बुलाना चाहती थी, वो खुद धन को बुलाना चाहता था ।

दोनों विचलित हो गये थे वे सोच नहीं पा रहे थे की किसे बुलाया जाए !

तभी लड़के ने कहा की हमलोग वैसे भी मेहनत करके कमाते है और खाते है तो क्यूँ न श्रम को बुलाया जाए ।

लकड़हारा आखिरकार मान गया । लड़का दरवाजे पर जाकर श्रम को अंदर आने को कहा पर जैसे ही श्रम अंदर आने लगा बाकी के तीन साधू भी पीछे-पीछे अंदर आने लगे

तो लड़के ने उत्सुकतावश पूछा की मैंने तो सिर्फ श्रम को बुलाया है तो फिर आपलोग क्यूँ अंदर आ रहे हैं । बाकियों ने बड़ा खूबसूरत जवाब देते हुए कहा कि – जहां श्रम होगा वहाँ हमलोग तो होंगे ही ।

इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि अगर हम सच्चे मन से मेहनत करें तो हमें धन, वैभव और सफलता तीनों मिलती है |

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