भारत का राष्ट्रपति जो कि भारत का प्रथम नागरिक भी है, भारत का औपचारिक राष्ट्र प्रमुख होता है। संविधान में राष्ट्रपति के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। यहाँ तक कि इस संबंध में कई अधिनियम संसद से अधिनियमित किए गए है।

इस लेख में हम राष्ट्रपति (President) के बारे में संबन्धित अनुच्छेदों की मदद से सरल और सहज चर्चा करेंगे, एवं इसके विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने की कोशिश करेंगे। तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें:

राष्ट्रपति

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भारत की कार्यपालिका

भारत की कार्यपालिका सामूहिक नेतृत्व के सिद्धांत पर आधारित है, उसमें भी हमने संसदीय व्यवस्था को अपनाया है जहां प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका होता है।

इसके साथ ही भारत एक गणतंत्र भी है, यानी कि सर्वोच्च नागरिक पद पर चुना हुआ व्यक्ति होता है न कि किसी विशेष वंश का कोई व्यक्ति। (नीचे चार्ट की मदद से इसे समझ सकते हैं)। इस लेख में हम भारत के राष्ट्रपति यानी कि संवैधानिक कार्यपालिका को समझेंगे।

कार्यपालिका और न्यायपालिका

◾ संविधान के भाग 5 में अनुच्छेद 52 से लेकर 78 तक राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिमंडल और महान्यायवादी (Attorney General) की चर्चा की गयी है।

संघ के स्तर पर ये पाँच मुख्य कार्यपालिका है। जो कि प्रत्यक्षतः देश के कार्यपालक गतिविधियों को हैंडल करते हैं। (विशेष जानकारी के लिए कार्यपालिका वाला लेख पढ़ें)

◾ राष्ट्रपति (President) के पास भले ही उतनी कार्यपालक शक्तियाँ नहीं होती है। लेकिन संविधान में सबसे ज्यादा अनुच्छेदों में चर्चा उसी के बारे में की गयी है।

खुद ही सोचिए कि प्रधानमंत्री जो कि वास्तविक कार्यपालक (Real executive) है, उसे संविधान में 3 से 4 अनुच्छेदों में ही निपटा दिया गया है। अन्य कार्यपालक की भी कमोबेश यही स्थिति है। लेकिन राष्ट्रपति (President) को बहुत ज्यादा विस्तार में वर्णित किया गया है। ऐसा क्यों है?

◾ इसका एक कारण ये है कि भारत का संवैधानिक प्रमुख (Constitutional head) राष्ट्रपति ही होता है। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के नाम पर ही सभी कार्यपालक काम करते हैं।

◾ दूसरा कारण ये है कि हमने संसदीय व्यवस्था (Parliamentary system) संघीय चरित्र (Federal character) के साथ अपनायी है।

ऐसे में राष्ट्रपति का पद का प्रतिकात्मक (Symbolic) होना ज्यादा अचरज में नहीं डालता है। क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्यक्षतः जनता की कोई भागीदारी नहीं होती है लेकिन प्रधानमंत्री चुनाव में होती है।

भारत में राष्ट्रपति की पृष्ठभूमि

◾ 15 अगस्त 1947 को आंशिक रूप से ही सही भारत के पास सत्ता या स्वतंत्रता आ गई थी। लेकिन उस समय कोई राष्ट्रपति नामक पद नहीं था। उस समय ब्रिटिश ताज जॉर्ज VI के हाथों में था और उसी को राजा मानकर या उसके प्रभुत्व के अंदर भारत में गवर्नर-जनरल पद बनाया गया था।

इससे पहले भारत में राष्ट्रपति के समकक्ष वायसराय का पद हुआ करता था और भारत में अंतिम वायसराय लॉर्ड माउण्टबेटन थे। गवर्नर-जनरल पद का सृजन होने के बाद, लॉर्ड माउण्टबेटन को भारत का पहला गवर्नर-जनरल बनाया गया।

वे 15 अगस्त 1947 से 21 जून 1948 तक इस पद पर रहे और उसके बाद चक्रवर्ती राजगोपालाचारी प्रथम और आखिरी भारतीय व्यक्ति थे जिन्होने 21 जून 1948 से 26 जनवरी 1950 तक गवर्नर-जनरल का पद संभाला।

◾ भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को अधिनियमित किया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। और इसी नए संविधान में अनुच्छेद 52 के तहत राष्ट्रपति पद का सृजन किया गया।

सम्राट और गवर्नर-जनरल के कार्यालयों को भारत के राष्ट्रपति के नए कार्यालय द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया। और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को पहला राष्ट्रपति बनाया गया।

जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद पहले राष्ट्रपति बने तब भारत में पहला आम चुनाव भी नहीं हुआ था इसीलिए लोक सभा और राज्य सभा उस समय नहीं था।
साल 1951-52 में हुए आम चुनाव के बाद धीरे-धीरे लोक सभा और राज्य सभा में सदस्य आने लगे। आम चुनाव होने से पहले अन्तरिम सरकार काम कर रही थी। जो कि संविधान सभा द्वारा ही बनाया गया था।

◾ भारत के संविधान के अनुच्छेद 52 के तहत देश में राष्ट्रपति की व्यवस्था की गयी है। यानी कि ये एक संवैधानिक पद है।

जैसा कि हमने ऊपर भी चर्चा किया है कि राष्ट्रपति, भारत के इस संसदीय व्यवस्था में प्रतीक मात्र है। क्योंकि करने का सारा काम तो प्रधानमंत्री ही करते हैं। यें बातें अनुच्छेद 53, अनुच्छेद 74 और अनुच्छेद 75 से स्पष्ट भी हो जाती है। वो कैसे?

अनुच्छेद 53 कहता है कि संघ की कार्यपालक शक्तियाँ राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इस शक्ति का प्रयोग या तो स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा।

बेशक उनके पास कुछ कार्यपालक शक्तियाँ होती भी है जिसका इस्तेमाल वे स्वयं करते हैं और अपने अधीनस्थ (यानि कि मंत्रियों आदि) के माध्यम से करते हैं। इसके बारे में आगे जानेंगे। पर असली बात अनुच्छेद 74 और 75 से पता चलता है।

अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) होगा, जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री (Prime minister) होगा।

अनुच्छेद 74 के लाइन को पढ़ें तो उसमें सलाह और सहायता लिखा गया है, लेकिन होता ये है कि प्रधानमंत्री जो कहते हैं आमतौर पर राष्ट्रपति उसे मना भी नहीं कर पाते हैं।

ऐसा लगता है मानो राष्ट्रपति ही, प्रधानमंत्री के लिए काम करता है। और ऐसा होने के पीछे का कारण आप अनुच्छेद 75 में देख सकते हैं।

अनुच्छेद 75 कहता है कि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी (Responsible) होगी। यानी कि मंत्रिपरिषद सीधे जनता के प्रति उत्तरदायी होगा। क्योंकि लोकसभा में सभी जनता के प्रतिनिधि ही तो बैठे हैं।

मंत्रिपरिषद का अध्यक्ष चूंकि प्रधानमंत्री होता है इसिलिए कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री जनता के प्रति उत्तरदायी होता है। अब अगर प्रधानमंत्री को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाया गया है तो राष्ट्रपति प्रतीक मात्र ही होगा न।

इसीलिए तो राष्ट्रपति को सीधे जनता द्वारा नहीं चुना जाता है। बल्कि अप्रत्यक्ष विधि द्वारा चुना जाता है। ताकि राष्ट्रपति को वास्तविक कार्यपालिका बनने से रोका जा सके।

अगर राष्ट्रपति को भी जनता द्वारा सीधे चुना जाता तो सत्ता संघर्ष में ही आधा कार्यकाल बीत जाता। पर जो भी हो, हमारे संविधान निर्माताओं ने इसे समझा और राष्ट्रपति को एक मूर्ति बनाकर बैठा दिया। एक ऐसा मूर्ति जो कि कभी-कभी हिलता-डुलता और बोलता भी है।

अनुच्छेद 52 – भारतीय संविधान [कार्यपालिका]
अनुच्छेद 53 – भारतीय संविधान [कार्यपालिका]
📚 Constitution Article Wise

राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election)

भारत में राष्ट्रपति का चुनाव बड़ा ही दिलचस्प होता है, अच्छे-अच्छों को जल्दी समझ में नहीं आता है। मुख्य रूप से देखें तो अनुच्छेद 54, अनुच्छेद 55, अनुच्छेद 57, अनुच्छेद 58, अनुच्छेद 62 और अनुच्छेद 71 राष्ट्रपति चुनाव को अच्छे से व्याख्यायित (Explained) कर देता है।

अनुच्छेद 54 में ये बताया गया है कि राष्ट्रपति का चुनाव होगा और राष्ट्रपति चुनने का काम निर्वाचक मंडल (Electoral College) करेंगे।

निर्वाचक मंडल (Electoral College) क्या है? इसके बारे में भी उसी में बता दिया गया है कि निर्वाचक मंडल तीन प्रकार के लोगों का एक समूह होगा। ये तीन प्रकार के लोग निम्न है।

1. संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य
2. राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्य
3. केंद्रशासित प्रदेशों दिल्ली व पुडुचेरी विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य। अब जम्मू-कश्मीर भी इसमें जुड़ जाएगा।

यहाँ दो बातें ध्यान रखिए कि सिर्फ निर्वाचित सदस्य (Elected members) ही इसमें भाग ले सकते हैं। मनोनीत सदस्य (Nominated member) नहीं। यानी कि जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चुन के आया है वही इसमें भाग ले सकता है, वो नहीं जिसको की राष्ट्रपति ने मनोनीत किया है।

दूसरी बात ये कि अब चूंकि जम्मू-कश्मीर भी एक विधानमंडल के साथ केन्द्रशासित प्रदेश बन चुका है इसीलिए उसके निर्वाचित सदस्य अब भी राष्ट्रपति चुनाव में भाग ले सकेंगे।

अनुच्छेद 55 के तहत यह बताया गया है कि राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होगा?↗️ राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional representation) पर आधारित एकल हस्तांतरणीय मत पद्धत्ति (Single transferable vote method) के द्वारा होता है।

चूंकि राष्ट्रपति चुनाव थोड़ा काम्प्लिकेटेड और दिलचस्प है इसीलिए उसे एक अलग लेख में कवर किया गया है। दिये गए लिंक की मदद से उसे पढ़ और समझ सकते हैं – राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया

अनुच्छेद 54 – भारतीय संविधान [कार्यपालिका]
अनुच्छेद 55 – भारतीय संविधान [कार्यपालिका]

राष्ट्रपति की पदावधि (Presidential term of office)

अनुच्छेद 56, राष्ट्रपति की पदावधि (term of office) के बारे में है। इस अनुच्छेद में यह लिखा हुआ है कि,

राष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा; परंतु –

(क) वह उप-राष्ट्रपति को अपनी पदावधि में किसी भी समय अपना त्यागपत्र दे सकता है।

(ख) संविधान का अतिक्रमण करने पर राष्ट्रपति को, अनुच्छेद 61 में बताए गए रीति से चलाये गए महाभियोग (Impeachment) द्वारा पद से हटाया जा सकता है।

(ग) राष्ट्रपति, अपने पद अवधि समाप्त हो जाने पर भी, तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है।

अनुच्छेद 56 – भारतीय संविधान [कार्यपालिका]

पुनर्निर्वाचन के लिए राष्ट्रपति की पात्रता (President’s eligibility for re-election)

◾ अनुच्छेद 57 के तहत कोई व्यक्ति, जो राष्ट्रपति के रूप में पद धारण करता है या कर चुका है, इस संविधान के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए उस पद के लिए पुनः निर्वाचन का पात्र होगा।

हालांकि आमतौर पर ऐसा होता नहीं है, इसके बारे में एक प्रसंग है कि जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद दो बार राष्ट्रपति चुने गए थे, तो बहुत से लोगों के आँखों में वे खटकने लगे थे। जिनमें से एक थे पंडित नेहरू।
पंडित नेहरू का डॉ. प्रसाद के साथ बनता नहीं था। इसीलिए वे नहीं चाहते थे कि वे फिर से तीसरी बार भी राष्ट्रपति बन जाये।
इसलिए उन्होने संविधान संशोधन करके राष्ट्रपति पद के टर्म को निश्चित कर देने की कोशिश की। (जैसे कि अमेरिका में होता है वहाँ एक व्यक्ति दो बार से अधिक राष्ट्रपति नहीं बन सकता।)
ये बात जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद को पता चली तो उन्होने खुद ही तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने से मना कर दिया।
और ये कहा कि इसके लिए कोई संविधान संशोधन करने की आवश्यकता नहीं है, बस एक परंपरा बननी चाहिए कि कोई भी व्यक्ति एक बार या दो बार राष्ट्रपति बनने के बाद खुद ही अगली बार चुनाव में खड़ा नहीं होगा।
तब से लेकर आज तक एक परंपरा बन गयी है। डॉ. प्रसाद के बाद कोई भी व्यक्ति दो टर्म के लिए राष्ट्रपति नहीं बना है।
अनुच्छेद 57 – भारतीय संविधान [कार्यपालिका]

निर्वाचित होने के लिए अर्हताएं (Qualifications to be elected)

अनुच्छेद 58 राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अर्हताओं (Qualifications) के बारे में है।

(1) कोई व्यक्ति राष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र तभी होगा जब वह –

(क) वह भारत का नागरिक हो,
(ख) वह 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो, और
(ग) वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए योग्य हो।

(2) कोई व्यक्ति, जो भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन अथवा उक्त सरकारों में किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है, राष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र नहीं होता।

◾ यहाँ ये बात याद रखिए कि एक वर्तमान राष्ट्रपति अथवा उप-राष्ट्रपति, किसी राज्य का राज्यपाल और संघ अथवा राज्य का मंत्री लाभ का पद नहीं माना जाता। इस प्रकार वह राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार होता है।

राष्ट्रपति के चुनाव के नामांकन के लिए उम्मीदवार के पास कम से कम 50 प्रस्तावक (Proposer) व 50 अनुमोदक (Seconder) होने चाहिए।
प्रत्येक उम्मीदवार भारतीय रिजर्व बैंक में 15000 रुपया जमानत राशि के रूप में जमा करता है। यदि उम्मीदवार कुल डाले गए मतो का 1/6 भाग प्राप्त करने में असमर्थ रहता है तो यह राशि जब्त हो जाती है।
◾ हालांकि 1997 से पूर्व प्रस्तावकों व अनुमोदकों की संख्या दस-दस थी तथा जमानत राशि 2500 थी। 1997 में इसे बढ़ा दिया गया ताकि उन उम्मीदवारों को हतोत्साहित किया जा सकें, जो गंभीरता से चुनाव नही लड़ते है।
अनुच्छेद 58 – भारतीय संविधान [कार्यपालिका]

राष्ट्रपति पद की शर्ते (President post’s Conditions)

अनुच्छेद 59, राष्ट्रपति पद की शर्तों (President post’s Conditions) के बारे में है

संविधान द्वारा राष्ट्रपति के पद के लिए निम्नलिखित शर्ते निर्धारित की गयी हैं।

(1.) राष्ट्रपति संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा लेकिन अगर ऐसा होता है तो पद ग्रहण करने से पूर्व उस सदन से त्यागपत्र देना होगा।

(2) वह कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं करेगा।

(3) उसे बिना कोई किराया चुकाए आधिकारिक निवास राष्ट्रपति भवन आवंटित होगा। इसके अलावा उसे संसद द्वारा निर्धारित उपलब्धियां, भत्ते व विशेषाधिकार प्राप्त होंगे।

(4) उसकी उपलब्धियां और भत्ते उसकी पदावधि के दौरान कम नहीं किए जाएँगे।

राष्ट्रपति को अनेक विशेषाधिकार प्राप्त हैं। उसे अपने आधिकारिक कार्यों में किसी भी विधिक जिम्मेदारियों से उन्मुक्ति (Immunity) होती है।
अपने कार्यकाल के दौरान उसे किसी भी आपराधिक कार्यवाही से उन्मुक्ति होती है, यहाँ तक कि व्यक्तिगत कृत्य से भी। वह गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, न ही जेल भेजा जा सकता हैं,
हालांकि दो महीने के नोटिस देने के बाद उसके कार्यकाल में उस पर उसके निजी कृत्यों के लिए अभियोग (Prosecution) चलाया जा सकता है।
अनुच्छेद 59 – भारतीय संविधान [कार्यपालिका]

शपथ (Oath)

अनुच्छेद 60 – राष्ट्रपति द्वारा ली जाने वाली शपथ (Oath-taking by the President) के बारे में है।

राष्ट्रपति पद ग्रहण करने से पूर्व शपथ या प्रतिज्ञान लेता है। अपनी शपथ में राष्ट्रपति कहता है,

मैं, अमुक ईश्वर की शपथ लेता हूं कि श्रद्धापूर्वक राष्ट्रपति पद का कार्यपालन करूंगा; तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षन (Preservation), संरक्षण (Protection) और प्रतिरक्षण (defend) करूंगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूँगा।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति को शपथ दिलाते हैं। अगर वे न हो तो उसकी अनुपस्थिति में वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा राष्ट्रपति को पद की शपथ दिलाई जाती है।

अनुच्छेद 60 – भारतीय संविधान [कार्यपालिका]

महाभियोग (Impeachment)

अनुच्छेद 61 – राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment of the President) के बारे में है।

राष्ट्रपति के द्वारा संविधान का उल्लंघन करने पर महाभियोग चलाकर उसे पद से हटाया जा सकता है।

◾ महाभियोग के आरोप संसद के किसी भी सदन में प्रारम्भ किए जा सकते है। इन आरोपों पर सदन के एक चौथाई सदस्यों (जिस सदन में आरोप लगाए गए है) के हस्ताक्षर होने चाहिए और राष्ट्रपति को 14 दिन का नोटिस देना चाहिए।

महाभियोग का प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत से पारित होने के पश्चात यह दूसरे सदन में भेजा जाता है, जिसे इन आरोपों की जांच करनी होती है। राष्ट्रपति को इसमें उपस्थित होने तथा अपना प्रतिनिधित्व कराने का अधिकार होता है।

यदि दूसरा सदन इन आरोपण को सही पाता है और महाभियोग प्रस्ताव को दो तिहाई बहुमत से पारित करता है तो राष्ट्रपति को प्रस्ताव पारित होने की तिथि से उसके पद से हटना होगा।

◾ इस प्रकार महाभियोग संसद की अर्ध-न्यायिक (Quasi-judicial) प्रक्रिया है। इस संदर्भ में दो बातें ध्यान देने योग्य है।
1. संसद के दोनों सदनों के नामांकित सदस्य जिन्होने राष्ट्रपति के चुनाव में भाग नहीं लिया था, इस महाभियोग में भाग ले सकते हैं।
2. राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य तथा दिल्ली व पुडुचेरी केंद्रशासित राज्य विधानसभाओं के सदस्य इस महाभियोग प्रस्ताव में भाग नहीं लेते हैं, जबकि वे राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं।
? दिलचस्प बात ये है कि अभी तक किसी भी राष्ट्रपति_(President) को महाभियोग के द्वारा हटाया नहीं गया है।

राष्ट्रपति के पद की रिक्ति को भरने के लिए चुनाव कराने का समय

राष्ट्रपति का पद निम्न प्रकार से रिक्त हो सकता है:

1. पाँच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने पर,

2. उसके त्यागपत्र देने पर,

3. महाभियोग प्रक्रिया द्वारा उसे पद से हटाने पर,

4. उसकी मृत्यु पर,

5. किसी अन्य कारणों से, जैसे वह पद ग्रहण करने के लिए अर्हक न हो अथवा निर्वाचन अवैध घोषित हो।

अनुच्छेद 62 के अनुसार, यदि पद रिक्त होने के कारण उसके कार्यकाल का समाप्त होना हो तो उस पद को भरने हेतु उसके कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व नया चुनाव करना चाहिए।

▶ यदि नए राष्ट्रपति के चुनाव में किसी कारण कोई देरी हो तो वर्तमान राष्ट्रपति पाँच वर्ष के उपरांत भी अपने पद पर बना रहेगा जब तक कि उसका उत्तराधिकारी कार्यभार ग्रहण न कर ले।

संविधान ने यह उपबंध राष्ट्रपति के न होने पर पद रिक्त होने से शासनांतरण (Demigration) से बचने के लिए किया है।

इस स्थिति में उप-राष्ट्रपति को यह अवसर नहीं मिलता है कि व कार्यवाहक राष्ट्रपति की तरह कार्य करे और उसके कर्तव्यों का निर्वहन करें।

▶ यदि उसका पद, उसकी मृत्यु, त्यागपत्र, निष्कासन अथवा अन्यथा किसी कारण से रिक्त होता है तो नए राष्ट्रपति का चुनाव पद रिक्त होने की तिथि से छह महीने के भीतर कराना चाहिए।

जब तक चुनाव नहीं हो जाता उपराष्ट्रपति, कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा। नया राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद पद ग्रहण करने से पाँच वर्ष तक अपने पद पर बना रहेगा।

▶ इसके अतिरिक्त यदि वर्तमान राष्ट्रपति, अनुपस्थिति, बीमारी या अन्य कारणों से अपने पद पर कार्य करने में असमर्थ हो तो उप-राष्ट्रपति उसके पुनः पद ग्रहण करने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा।

▶ यदि उपराष्ट्रपति का पद रिक्त हो, तो भारत का मुख्य न्यायाधीश अथवा उसका भी पद रिक्त होने पर उच्चतम न्यायालय का वरिष्ठतम न्यायाधीश कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा तथा उसके कर्तव्यों का निर्वाह करेगा।

▶ जब कोई व्यक्ति, जैसे उप-राष्ट्रपति, भारत का मुख्य न्यायाधीश अथवा उच्चतम न्यायालय का वरिष्ठतम न्यायाधीश, कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप मे कार्य करता है तो उसे राष्ट्रपति की समस्त शक्तियाँ व उन्मुक्तियाँ प्राप्त होती है तथा वह संसद द्वारा निर्धारित सभी उपलब्धियाँ, भते व विशेषाधिकार भी प्राप्त करता है।

राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबन्धित विषय

अनुच्छेद 71 का संबंध राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति से संबंधित विवाद से है। कि अगर किसी तरह का कोई विवाद होता है तो क्या किया जाएगा?

जैसे कि एक विवाद है – मार्च 1974 का जब गुजरात की सरकार गिर गयी थी। लेकिन इसके बावजूद भी राष्ट्रपति का चुनाव कराया गया था। तो सवाल यही उठा कि जब एक राज्य के विधानमंडल का सदस्य है ही नहीं तो फिर राष्ट्रपति का चुनाव कैसे हो सकता है।

हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही किसी राज्य का विधानमंडल भंग हो या फिर किसी सांसद की मृत्यु हो जाये चुनाव हो के रहेगा।

क्योंकि अनुच्छेद 62 में भी ये लिखा है कि पुराने राष्ट्रपति का पद छोड़ने से पहले नए राष्ट्रपति का चुनाव हो जाना चाहिए।

यही बात अनुच्छेद 71 में लिख दिया गया है कि कुछ भी हो जाए राष्ट्रपति का चुनाव हो के ही रहेगा। तो इस तरह से जितने भी विवाद है, उसका हल इसी में मिल जाएगा।

(1) इसमें पहला प्रावधान यही है कि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से उत्पन्न सभी शंकाओं और विवादों की जांच और विनिश्चय उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा।

(2) यदि उच्चतम न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति के राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया जाता तो उसके द्वारा पहले किए गए कार्य उस घोषणा के कारण अविधिमान्य नहीं होगा।

उम्मीद है आपको इस लेख से राष्ट्रपति के बारे में बेसिक बातों का पता चला होगा। राष्ट्रपति से संबन्धित सभी अनुच्छेदों और अन्य सभी टॉपिक पर अलग से लेख उपलब्ध है, गहराई से समझने के लिए सभी को पढ़ें;

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Chapter Wise Polity Quiz

भारत का राष्ट्रपति अभ्यास प्रश्न

  1. Number of Questions - 8
  2. Passing Marks - 75 %
  3. Time - 6 Minutes
  4. एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।

Choose the correct statement from the given statements.

  1. The President takes an oath to protect the Constitution and the law.
  2. The President enjoys immunity from criminal proceedings during his tenure.
  3. Impeachment has to be passed by two-thirds majority of both houses.
  4. So far only one President has been removed by impeachment in India.

1 / 8

दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें।

  1. राष्ट्रपति संविधान और विधि के रक्षा की शपथ लेता है।
  2. राष्ट्रपति को उसके कार्यकाल के दौरान आपराधिक कार्यवाही से छूट प्राप्त होती है।
  3. महाभियोग को दोनों सदनों से दो-तिहाई बहुमत से पारित करवाना होता है।
  4. भारत में अब तक सिर्फ एक राष्ट्रपति को महाभियोग द्वारा हटाया गया है।

2 / 8

राष्ट्रपति के संदर्भ में दिए गए कथनों  में से सही कथन का चुनाव करें।

Select the correct option from the given options;

  1. Impeachment is a quasi-judicial process of Parliament.
  2. Article 60 is about the oath of the President.
  3. Article 61 is about impeachment.
  4. Elected members of Parliament take part in impeachment.

3 / 8

दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन करें;

  1. महाभियोग संसद की अर्ध-न्यायिक (Quasi-judicial) प्रक्रिया है।
  2. अनुच्छेद 60 राष्ट्रपति के शपथ के बारे में है।
  3. अनुच्छेद 61 महाभियोग के बारे में है।
  4. महाभियोग में संसद के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं।

Select the correct option from the given options.

  1. According to Article 74, there shall be a Council of Ministers with the Prime Minister as its Chairman to aid and advise the President.
  2. The Council of Ministers is collectively responsible to the Rajya Sabha.
  3. The President is elected by an electoral college.
  4. Prior to the 42nd Constitutional Amendment, the President was elected by direct vote.

4 / 8

दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चुनाव करें।

  1. अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए मंत्रिपरिषद होगा, जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होगा।
  2. मंत्रिपरिषद राज्यसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
  3. राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मण्डल करता है।
  4. 42वें संविधान संशोधन से पहले राष्ट्रपति प्रत्यक्ष मतदान द्वारा चुना जाता था।

Who among the following can enjoy the office of the President in any particular situation?

5 / 8

इनमें से कौन, किसी विशेष परिस्थिति में राष्ट्रपति के पद का उपभोग कर सकता है?

Which of the following statements is correct regarding the vacancy in the office of the President?

  1. When the office of the President becomes vacant due to death, it is necessary to hold elections within six months.
  2. When the President is not available due to illness, the Vice-President acts as the Acting President.
  3. The term of the President is of 5 years.
  4. According to the constitution, a person can become the President only twice.

6 / 8

राष्ट्रपति के पद रिक्ति के संबंध में निम्न में से कौन सा कथन सही है?

  1. जब मृत्यु के कारण राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाता है तो छह महीने के भीतर चुनाव करवाना आवश्यक होता है।
  2. जब बीमारी के कारण राष्ट्रपति उपलब्ध नहीं हो पाता है तो उप-राष्ट्रपति तब तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।
  3. राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है।
  4. संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति सिर्फ दो ही बार राष्ट्रपति बन सकता है।

Choose the correct statement from the given statements regarding electoral college;

  1. Article 54 talks about an electoral college.
  2. The Electoral College consists all of the members of both the Houses of the Parliament.
  3. Only nominated members of the State Legislative Council can be included in the electoral college.
  4. The administrative officers of Delhi and Puducherry are also part of the electoral college.

7 / 8

निर्वाचक मंडल के संदर्भ में दिए गए कथनों में से सही कथन का चुनाव करें;

  1. अनुच्छेद 54 एक निर्वाचक मंडल की बात करता है।
  2. निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्य होते है।
  3. निर्वाचक मंडल में राज्य विधान परिषद के सिर्फ मनोनीत सदस्य शामिल हो सकते हैं।
  4. दिल्ली एवं पुडुचेरी के प्रशासनिक अधिकारी भी निर्वाचक मंडल का हिस्सा होते हैं।

Select the correct option from the given options.

  1. In a parliamentary system, the President is always the formal head of state.
  2. Parliamentary system is based on the principle of minority leadership.
  3. In presidential form of government, the President is the de facto head and the constitutional head.
  4. In a semi-presidential system, both the prime minister and the president are elected by direct vote.

8 / 8

दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन करें।

  1. संसदीय व्यवस्था में हमेशा राष्ट्रपति ही औपचारिक राष्ट्र प्रमुख होता है।
  2. संसदीय व्यवस्था अल्प नेतृत्व के सिद्धांत पर आधारित होता है।
  3. अध्यक्षात्मक शासन व्यवस्था में राष्ट्रपति ही वास्तविक प्रमुख और संवैधानिक प्रमुख होता है।
  4. अर्ध-अध्यक्षात्मक व्यवस्था में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों को प्रत्यक्ष मतदान द्वारा चुना जाता है।

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मूल संविधान भाग 5↗️
https://ceoharyana.gov.in/Website/ELECTIONCOMMISSION/Images/cc770de3-95f3-45a0-a55c-713e54f18134.pdf
https://eci.gov.in/faqs/elections/presidential-election/faqs-presidential-election-r9/