इस लेख में हम उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता (Supreme Court Advocates) पर सरल और सहज चर्चा करेंगे।

अधिवक्ता (Advocate) न्यायालय का एक अभिन्न अंग है। ये न्याय के इच्छुक व्यक्ति या संस्था और न्यायाधीश के बीच एक माध्यम का काम करता है।

कितने प्रकार के अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय में होते हैं और वे करते क्या है? हम ये भी समझेंगे, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता

अधिवक्ता (Advocate) होता क्या है?

अधिवक्ता (एडवोकेट), कानून के क्षेत्र में एक पेशेवर व्यक्ति होता है जो किसी पक्ष की ओर से मुकदमे में उपस्थित होने के लिए अधिकृत होता है। इनके पास कानून की डिग्री होती है और ये बार काउंसिल से नामांकित होता है। अब आपके मन में ये सवाल आ सकता है कि ये बार (Bar Council) काउंसिल क्या होता है? तो आइये उसे भी समझ लेते हैं।

बार काउंसिल (Bar Council)

बार काउंसिल एक सांविधिक संस्था (Statutory body) है जिसे कि अधिवक्ता अधिनियम 1961 के तहत गठित किया गया था। ये करता क्या है? ये एक नियामक एजेंसी है जो पूरे भारत के कानूनी शिक्षा और कानूनी अभ्यास (Legal practice) को विनियमित करता है। भारत में जो भी वकालत करता है उसके ऊपर बार काउंसिल का नियंत्रण होता है। बार काउंसिल द्वारा तय दिशा-निर्देशों, नियम, परिनियम आदि के अंतर्गत रहकर ही सभी वकीलों को काम करना होता है। सभी राज्यों में अपना-अपना बार काउंसिल होता है और बार काउंसिल ऑफ इंडिया उस सब को हेड करता है।

इसके अलावा भी इसके कई काम जो अधिवक्ता अधिनियम 1961 के सेक्शन 7 वर्णित किया गया है। जैसे कि (1) अधिवक्ताओं के अधिकारों, विशेषाधिकारों और हितों की रक्षा करना, (2) कानूनी शिक्षा को बढ़ावा देना और कानूनी शिक्षा के मानकों को पूरा करना, (3) अनुशासनात्मक कार्रवाई करना इत्यादि।

तो कुल मिलाकर अधिवक्ता कानून का अभ्यास करने वाले वे लोग है जो अदालत में अपने क्लाइंट का पक्ष रखते है और उसे कानूनी सलाह प्रदान करते हैं। अब आइये बात करते है कि उच्चतम न्यायालय में किस प्रकार का अधिवक्ता काम करता है।

उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता

उच्चतम न्यायालय में कार्य करने वाले अधिवक्ताओं की निम्न तीन श्रेणियों में निर्धारित की गई है।

1. उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) –

ये वे अधिवक्ता होते है, जिन्हे उच्चतम न्यायालय वरिष्ठ अधिवक्ता की मान्यता देता है। न्यायालय ऐसे किसी भी अधिवक्ता को जो उसकी नजर में ख्यात विधिवेत्ता हो, कानूनी मामलों में पारंगत हो, संविधान का विशेष ज्ञान रखता हो तथा बार की सदस्यता प्राप्त हो, उसकी सहमति से वरिष्ठ अधिवक्ता नियुक्त कर सकता है।

यहाँ याद रखने वाली बात ये है कि वरिष्ठ अधिवक्ता, (1) अधिवक्ता ऑन रिकॉर्ड (Advocate on record) के बिना बहस में उपस्थित नहीं हो सकता है, (2) किसी अधीनस्थ न्यायालय या न्यायाधिकरण में बिना किसी कनिष्ठ (Junior) के पेश नहीं हो सकता है, (3) वकालतनामा दायर नहीं कर सकता है, (4) सीधे किसी मामले या मसौदा याचिका में पेश होना स्वीकार नहीं कर सकता। परंतु यह निषेध किसी कनिष्ठ के साथ परामर्श में ऐसे किसी मामले के निपटान से संबन्धित नहीं है।

2. एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (Advocate on record) –

केवल इस प्रकार के अधिवक्ता ही उच्चतम न्यायालय के समक्ष किसी प्रकार का रिकॉर्ड पेश कर सकते है एवं अपील फाइल कर सकते है। ये किसी पार्टी की ओर से उच्चतम न्यायालय के समक्ष पेश भी हो सकते हैं। इस प्रकार के वकीलों को न्यूनतम 5 वर्ष का अनुभव होता है और इन्हे सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित विशेष परीक्षा को पास करना होता है। इसके बाद उन्हे एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड का एक विशेष नंबर मिलता है।

इस तरह के एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट में अपने क्लाइंट के लिए एक उपस्थिति या अधिनियम दायर कर सकते हैं। उनके पास वकालतनामा और अन्य महत्वपूर्ण मामलों को भरने की शक्ति है। साथ ही, उनके पास सुप्रीम कोर्ट में अपने क्लाइंट का प्रतिनिधित्व करने की शक्ति है। किसी अन्य प्रकार के अधिवक्ताओं के पास ऐसे विशेषाधिकार नहीं हैं।

3. उच्चतम न्यायालय के अन्य अधिवक्ता (Other advocate) –

ये वे अधिवक्ता होते हैं, जिनका नाम अधिवक्ता अधिनियम 1961 के अंतर्गत किसी राज्य बार काउंसिल में दर्ज होता है। ये किसी पार्टी की ओर से उच्चतम न्यायालय के समक्ष पेश हो सकते हैं तथा बहस कर सकते हैं। लेकिन इन्हे उच्चतम न्यायालय में कोई दस्तावेज़ या मामला दायर करने का अधिकार नहीं होता है।

ये थे वे अधिवक्ता जो सुप्रीम कोर्ट में काम करते हैं। काम करते-करते बहुत सारे वकील किसी एक क्षेत्र में विशेषज्ञ हो जाते हैं और उसी मामले से संबन्धित केस को लड़ते है। इस आधार पर अगर देखें तो निम्नलिखित प्रमुख वकीलों की चर्चा की जा सकती है –

बौद्धिक संपदा वकील (Intellectual Property Advocate) – इस तरह के वकील बौद्धिक कानूनों में विशेषज्ञता रखते हैं, ये कॉपीराइट मुद्दे, ट्रेडमार्क और पेटेंट जैसे मामलों को हैंडल करते है।

व्यक्तिगत दुर्घटना वकील (Personal injury lawyer) – इस तरह के वकील दुर्घटना और उसके मुआवजा (बीमा कंपनियों से मिलने वाले मुआवजा, सरकार द्वारा मिलने वाला मुआवजा या फिर जो इस दुर्घटना के जिम्मेदार है उससे मुआवजा) जैसे मामलों में विशेषज्ञता रखते है।

परिवार का वकील (Family lawyer) – ये तलाक, हिरासत आदि सहित परिवार आधारित मामलों में विशेषज्ञता रखते हैं। कुछ वकील केवल तलाक के मामलों पर ध्यान केंद्रित करते हैं उसे तलाक विशेषज्ञ कहते है। अधिकांश परिवार के वकील परिवार से जुड़े सभी मुद्दों से निपटते हैं। वे परिवार आधारित संपत्ति के मुद्दे को हल करने में मदद करते हैं। वे विभाजन के मुद्दों में मध्यस्थ के रूप में कार्य करते हैं, ग्राहकों को सलाह देते हैं, संपत्ति के दस्तावेज़ीकरण आदि करते हैं।

रोजगार वकील (Employment lawyer) – इस तरह के वकील रोजगार और श्रम जैसे मुद्दों से निपटते हैं।

आव्रजन वकील (Immigration lawyer) – इस तरह के वकील वीजा, पासपोर्ट, और अन्य आव्रजन मुद्दों से संबंधित मुद्दों से निपटने में एक्सपर्ट होते हैं। जो व्यक्ति विदेश में बसना चाहता है, उसे परामर्श के लिए इसी प्रकार के वकील की जरूरत पड़ती है।

आपराधिक वकील (criminal lawyer) – ये वकील आपराधिक मामलों जैसे चोरी, गुंडों के मुद्दों, हत्या की ओर बढ़ाए जाने, मादक पदार्थों की तस्करी आदि से जुड़े हैं। ये वकील अपराधियों के लिए या कोर्ट में अपराधियों के खिलाफ लड़ते है।

डिजिटल मीडिया और इंटरनेट वकील (Digital Media and Internet Lawyer) – ये वकील डिजिटल मीडिया और इंटरनेट से जुड़े मामले जैसे कि वेबसाइट के नियमों और शर्तों से संबंधित कानूनी मुद्दों को, फिल्मों से संबंधित पाइरेसी मुद्दों को संभालते हैं।

चिकित्सा कदाचार वकील (Medical malpractice lawyer) – इस प्रकार के वकील डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट आदि की ओर से चिकित्सा क्षेत्र में हुई गलतियों से निपटने में मदद करता है।

उम्मीद है आप उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता (Supreme Court Advocates) को समझे होंगे। न्यायिक व्यवस्था से संबन्धित अन्य लेखों को जरूर पढ़ें। उसका लिंक नीचे दिया जा रहा है।

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भारत की राजव्यवस्था↗️
supreme court of india Handbook
https://main.sci.gov.in/
बार काउंसिल ऑफ इंडिया आदि।

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